: समय से पहचान और इलाज से ठीक हो जाता है मलेरिया
Wed, Apr 24, 2024
पाँच वर्षों में 7.3 लाख लोगों की जांच में मिले 184 मलेरिया रोगी हुए स्वस्थ
एकत्रित हुए पानी की साफ सफाई और मच्छरों से बचाव के उपाय में सामुदायिक सहयोग जरूरी
आगरा, 24 अप्रैल 2024 । मलेरिया के लक्षण दिखने पर शीघ्र जांच और इलाज से यह पूरी तरह से ठीक हो जाता है । जिले में वर्ष 2019 से लेकर 23 अप्रैल 2024 तक की अवधि में करीब 7.3 लाख लोगों की मलेरिया की जांच करवायी गयी, जिनमें से 184 लोग मलेरिया की बीमारी से पीड़ित मिले। सभी का इलाज किया गया और सभी ठीक भी हो गये। शीघ्र हस्तक्षेप के कारण इस अवधि में इस बीमारी के कारण कोई मौत रिपोर्ट नहीं हुई । यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने दी। उन्होंने बताया कि घर के बाहर और भीतर एकत्रित हुए पानी की साफ सफाई और मच्छरों से बचाव के उपाय में विभागीय प्रयासों के साथ साथ सामुदायिक सहयोग आवश्यक है। इसे बढ़ाने के उद्देश्य से ही प्रति वर्ष 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वर्ष के दिवस की थीम रखी है-‘‘अधिक न्यायोचित विश्व के लिए मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में तेजी लाना ।’’
वेक्टर बोर्न डिजीज के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि वर्ष 2027 तक प्रदेश में भी मलेरिया का उन्मूलन करना है और इस कार्य के लिए समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर है । लोगों को ‘‘हर रविवार, मच्छर पर वार’’ के नारे को साकार करना होगा और इस दिन घर के आसपास एकत्रित पानी को साफ करना पड़ेगा। कूलर और अन्य पात्रों के पानी की भी साफ सफाई जरूरी है। इस बीमारी का मच्छर साफ पानी में एकत्रित होता है और सुबह शाम काटता है । बारिश का मौसम शुरू होने से पहले पानी के टैंक, गमले, पशु पक्षियों के पीने के पानी के पात्र, नारियल के खोल और बोतल जैसी सामग्री में पानी को इकट्ठा होने से रोकने के लिए उपाय करने हैं या फिर निष्प्रयोज्य सामग्री को नष्ट कर देना है ।
जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि संक्रमित मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से यह बीमारी होती है । मच्छर के काटने के तेरहवें से चौदहवें दिन में इसके लक्षण आते हैं। नियमित अंतराल पर तेज बुखार के साथ ठंड लगना, कमजोरी, पसीना होना, बार बार उल्टी होना, पेशाब में जलन, मूत्र का कम आना, लाल मूत्र आना और खाना खाने में असमर्थता इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। इसके रैपिड डॉयग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) की सुविधा आशा कार्यकर्ता से लेकर उच्च चिकित्सा संस्थानों तक में उपलब्ध है । स्लाइड से जांच की व्यवस्था सभी सरकारी अस्पतालों में मौजूद है और इसकी सभी दवाएं भी वहां उपलब्ध है।
तीन दिन में ठीक हो जाता है जानलेवा मलेरिया
सहायक मलेरिया अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि मलेरिया के दो प्रकार प्लाजमोडियम वाईबैक्स (पीबी) और प्लाजमोडियम फैल्सीफोरम (पीएफ) प्रमुख तौर पर हमारे अंचल में पाए जाते हैं। पीएफ मलेरिया का समय से इलाज न करने पर जटिलताएं अधिक बढ़ सकती हैं और इसके कई मामलों में रक्तस्राव का भी होने लगता है। अगर इसकी समय से पहचान कर इलाज हो तो महज तीन दिन की दवा से ठीक हो जाता है । वर्ष 2024 में अभी तक मलेरिया का एक मरीज मिला है, वह भी उपचार के उपरांत पूरी तरह स्वस्थ है।
किट से पहचान होने पर बनती है स्लाइड
मलेरिया इंस्पेक्टर योगेश चौधरी ने बताया कि जब कोई आशा कार्यकर्ता किसी संभावित मरीज का किट से जांच करती है और उसमें मलेरिया की पुष्टि होती है तो लैब टेक्निशियन की मदद से स्लाइड जांच भी करायी जाती है। समय समय पर एलटी, सीएचओ और आशा का इस संबंध में संवेदीकरण भी किया जाता है ।
: टीबी का मरीज होने पर परिवार के सदस्य व संपर्क में आने वालों की कराएं जांच - मुख्य चिकित्सा अधिकारी
Mon, Apr 22, 2024
आगरा। देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है। उपचार के साथ-साथ टीबी के संक्रमण को रोकने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने टीबी के मरीज के परिवार के सदस्यों से भी टीबी की जांच करने के लिए अपील की है। सीएमओ ने कहा कि टीबी का इलाज संभव है, बस जरूरी है कि इसका जल्द से जल्द पता लगा लिया जाए और तुरंत इसका इलाज शुरू कर दिया जाए। घर में यदि टीबी मरीज है तो निकट सम्पर्की जांच कराएं ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि देश को टीबी मुक्त तभी किया जा सकता है, जब टीबी मरीजों को स्वस्थ होने में मदद की जाए और उसके संक्रमण को फैलने से रोका जाए। उन्होंने बताया कि हमें यह भी समझना बेहद जरूरी है कि टीबी के बैक्टीरिया हवा के जरिये संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स से फैलते हैं। अगर टीबी मरीज मास्क का इस्तेमाल करता है तो उससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। साथ ही तीन सप्ताह तक लगातार दवाई लेने के बाद भी वह दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकता है। यदि आपके घर में कोई टीबी रोगी है तो उसके खाँसने से, छींकने से, थूकने से और यदि रोगी के बहुत नजदीक रहते हैं तो आपको भी टीबी की आशंका है। इसलिए बचाव का बेहद ध्यान रखें ।
टीपीटी से रुक जायेगी टीबी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि अगर निकट सम्पर्की में भी जांच के दौरान टीबी मिलती है तो आपका तुरंत यथावत इलाज शुरू हो जायेगा और यदि नहीं है तो भी आपको टीबी रोकथाम की दवाई दी जायेगी जिससे आपका टीबी से बचाव हो जाएगा। यह बचाव की दवा आपको 6 महीने तक लेना होगा और इसे एक बार शुरू किया तो जैसे टीबी की दवाई नहीं छोड़ सकते उसी प्रकार इसे भी नहीं छोड़ सकते। इस प्रकार के ट्रीटमेंट को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट कहते हैं या फिर टीपीटी या टीबी रोकथाम इलाज। इसी क्रम में जो पांच साल या उससे कम उम्र के बच्चे हैं उनके लिए विशेषतः यह जानना आवश्यक है कि उनका भी टीपीटी यानी टीबी रोकथाम इलाज भी इसी प्रकार से होता लेकिन इस के लिए आपककी एक बार जांच हो जाए तो डॉक्टर से मिलने होगा वे ही बच्चे की आयु और वजन आदि का हिसाब लगाकर बच्चों की दवाई की मात्रा तय करते हैं।
डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि यदि आप में पहले से टीबी के लक्षण मौजूद हैं जैसे कि लगातार आपका वजन घट रहा है, भूख नहीं लग रही है, खांसी ठीक नहीं हो रही, खांसी में खून आ रहा है, सीने में दर्द रहता है, सांस लेने में परेशानी होती है, रात को पसीना आता है, बुखार रहता है, शरीर में दर्द और थकान रहती है, तो फिर आपके बलगम की जाँच होगी यदि जाँच से पता चलता है कि आपको टीबी है तो आपकी टीबी की दवाई शुरू कर दी जाएगी और यदि पता लगता है कि आपको टीबी नहीं है तो आपका टीबी रोकथाम इलाज शुरू हो जायेगा। यदि आपको कोई भी ऐसे लक्षण नहीं है तो फिर आपको चेस्ट यानी छाती का एक्स-रे करना होगा। एक्स-रे की जाँच में यदि पता चलता है कि आपको टीबी है तो फिर आपका टीबी का इलाज होगा। टीबी रोकथाम का इलाज (टीपीटी) जाँच के लिए किसी भी सरकारी अस्पताल में जा सकते या फिर घर के नजदीक हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर में जा सकते हैं। वहां फार्म आदि भरने में आपकी मदद के लिए कोई रहेगा। इलाज संबंधित किसी भी समस्या के निदान के लिए और ज्यादा जानकारी के लिए स्वास्थ्य कर्मियों से आप बात कर सकते हैं। आप प्रण करलें कि स्वयं को और घर में रहने वाले हर व्यक्ति को टीबी से बचाना है और आप को टीबी है तो उसका पूरा इलाज करना है ।
: बदलते मौसम में वायरल फीवर का शिकार हो रहे लोग, ओपीडी में बढ़ी मरीजों की संख्या
Sat, Apr 13, 2024
Agra. बदलते मौसम के चलते लोग जहाँ वायरल फीवर के शिकार हो रहे हैं तो वहीं लोगों में डिहाइड्रेशन और खांसी जुकाम की शिकायत देखने को मिल रही है। वायरल फीवर और डिहाइड्रेशन के साथ-साथ टीवी के मरीज भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जिला चिकित्सालय के डिप्टी सीएमएस सीपी वर्मा ने बताया कि यह बदलता हुआ मौसम सभी के लिए घातक होता है, इसलिए इस मौसम में अधिक से अधिक बचाव करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उतार-चढ़ाव वाले मौसम में सतर्कता बरतने में की आवश्यकता होती है, जिला अस्पताल में फिजिशियन के पास वॉयरल से संबंधित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मौसम में बाहर का खानपान नहीं करना चाहिए। जिला अस्पताल में 15 ऐसे मरीज भर्ती हैं जो बाहर का दूषित खाना खाने के चलते एडमिट हुए हैं।
डिप्टी सीएमएस सीपी वर्मा ने बताया कि वॉयरल के दिनों में छोटे बच्चों की अधिक देखभाल करने की आवश्यकता होती है। छोटी सी लापरवाही भी बच्चों के लिए भारी पड़ जाती है। जिला अस्पताल में वायरल से पीड़ित बच्चे भी पहुँच रहे हैं। इनकी संख्या में भी बदलते मौसम के चलते इज़ाफा देखने को मिल रहा है। जुकाम, खांसी नज़ला के मरीज बड़े हैं। अगर किसी को लगता है कि उनके बच्चे का स्वास्थ्य गड़बड़ है तो उन्हें तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। शुक्रवार और शनिवार को जिला अस्पताल में नए मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिली। जिला अस्पताल में शुक्रवार को ओपीडी के नए मरीजों की संख्या 2100 थी तो वहीं पुराने मरीज भी करीब 1500 से 1800 के आसपास थे। इसी तरह शनिवार को भी साढ़े तीन हजार के करीब मरीज जिला अस्पताल पहुँचे। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम से मरीजों की संख्या में जहाँ इज़ाफा देखने को मिल रहा है और ओपीडी का आंकड़ा साढ़े तीन से चार तक पहुँच रहा है।
डिप्टी सीएमएस ने बताया कि इस समय वायरस का डोमिनेट वाला पार्ट है, इसलिए बचाव की आवश्यकता है। इस समय आगरा में गेहूं की फ़सल भी कट रही है। गेहूं कटने से भी उसका असर वायु गुणवत्ता को ख़राब करता है। गेहूं में जो केमिकल होता है उसका एसेंस वायु में होता है जो कि आम आदमी को बीमार कर सकता है। इसलिए जब भी घर से बाहर निकलें तो मास्क लगाना न भूलें, इस समय वॉयरल से बचने के लिए मास्क आवश्यक है। उन्होंने कहा मास्क लगाने के साथ-साथ लोग अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और जब भी कोई अस्पताल आए तो मास्क लगाकर ही अस्पताल आएं अन्यथा उन्हें और भी बीमारियां घेर सकती हैं।