: टीबी का मरीज होने पर परिवार के सदस्य व संपर्क में आने वालों की कराएं जांच - मुख्य चिकित्सा अधिकारी
Mon, Apr 22, 2024
आगरा। देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है। उपचार के साथ-साथ टीबी के संक्रमण को रोकने के लिए कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने टीबी के मरीज के परिवार के सदस्यों से भी टीबी की जांच करने के लिए अपील की है। सीएमओ ने कहा कि टीबी का इलाज संभव है, बस जरूरी है कि इसका जल्द से जल्द पता लगा लिया जाए और तुरंत इसका इलाज शुरू कर दिया जाए। घर में यदि टीबी मरीज है तो निकट सम्पर्की जांच कराएं ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि देश को टीबी मुक्त तभी किया जा सकता है, जब टीबी मरीजों को स्वस्थ होने में मदद की जाए और उसके संक्रमण को फैलने से रोका जाए। उन्होंने बताया कि हमें यह भी समझना बेहद जरूरी है कि टीबी के बैक्टीरिया हवा के जरिये संक्रमित व्यक्ति के ड्रॉपलेट्स से फैलते हैं। अगर टीबी मरीज मास्क का इस्तेमाल करता है तो उससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। साथ ही तीन सप्ताह तक लगातार दवाई लेने के बाद भी वह दूसरों को संक्रमित नहीं कर सकता है। यदि आपके घर में कोई टीबी रोगी है तो उसके खाँसने से, छींकने से, थूकने से और यदि रोगी के बहुत नजदीक रहते हैं तो आपको भी टीबी की आशंका है। इसलिए बचाव का बेहद ध्यान रखें ।
टीपीटी से रुक जायेगी टीबी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि अगर निकट सम्पर्की में भी जांच के दौरान टीबी मिलती है तो आपका तुरंत यथावत इलाज शुरू हो जायेगा और यदि नहीं है तो भी आपको टीबी रोकथाम की दवाई दी जायेगी जिससे आपका टीबी से बचाव हो जाएगा। यह बचाव की दवा आपको 6 महीने तक लेना होगा और इसे एक बार शुरू किया तो जैसे टीबी की दवाई नहीं छोड़ सकते उसी प्रकार इसे भी नहीं छोड़ सकते। इस प्रकार के ट्रीटमेंट को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट कहते हैं या फिर टीपीटी या टीबी रोकथाम इलाज। इसी क्रम में जो पांच साल या उससे कम उम्र के बच्चे हैं उनके लिए विशेषतः यह जानना आवश्यक है कि उनका भी टीपीटी यानी टीबी रोकथाम इलाज भी इसी प्रकार से होता लेकिन इस के लिए आपककी एक बार जांच हो जाए तो डॉक्टर से मिलने होगा वे ही बच्चे की आयु और वजन आदि का हिसाब लगाकर बच्चों की दवाई की मात्रा तय करते हैं।
डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि यदि आप में पहले से टीबी के लक्षण मौजूद हैं जैसे कि लगातार आपका वजन घट रहा है, भूख नहीं लग रही है, खांसी ठीक नहीं हो रही, खांसी में खून आ रहा है, सीने में दर्द रहता है, सांस लेने में परेशानी होती है, रात को पसीना आता है, बुखार रहता है, शरीर में दर्द और थकान रहती है, तो फिर आपके बलगम की जाँच होगी यदि जाँच से पता चलता है कि आपको टीबी है तो आपकी टीबी की दवाई शुरू कर दी जाएगी और यदि पता लगता है कि आपको टीबी नहीं है तो आपका टीबी रोकथाम इलाज शुरू हो जायेगा। यदि आपको कोई भी ऐसे लक्षण नहीं है तो फिर आपको चेस्ट यानी छाती का एक्स-रे करना होगा। एक्स-रे की जाँच में यदि पता चलता है कि आपको टीबी है तो फिर आपका टीबी का इलाज होगा। टीबी रोकथाम का इलाज (टीपीटी) जाँच के लिए किसी भी सरकारी अस्पताल में जा सकते या फिर घर के नजदीक हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर में जा सकते हैं। वहां फार्म आदि भरने में आपकी मदद के लिए कोई रहेगा। इलाज संबंधित किसी भी समस्या के निदान के लिए और ज्यादा जानकारी के लिए स्वास्थ्य कर्मियों से आप बात कर सकते हैं। आप प्रण करलें कि स्वयं को और घर में रहने वाले हर व्यक्ति को टीबी से बचाना है और आप को टीबी है तो उसका पूरा इलाज करना है ।
: बदलते मौसम में वायरल फीवर का शिकार हो रहे लोग, ओपीडी में बढ़ी मरीजों की संख्या
Sat, Apr 13, 2024
Agra. बदलते मौसम के चलते लोग जहाँ वायरल फीवर के शिकार हो रहे हैं तो वहीं लोगों में डिहाइड्रेशन और खांसी जुकाम की शिकायत देखने को मिल रही है। वायरल फीवर और डिहाइड्रेशन के साथ-साथ टीवी के मरीज भी बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जिला चिकित्सालय के डिप्टी सीएमएस सीपी वर्मा ने बताया कि यह बदलता हुआ मौसम सभी के लिए घातक होता है, इसलिए इस मौसम में अधिक से अधिक बचाव करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उतार-चढ़ाव वाले मौसम में सतर्कता बरतने में की आवश्यकता होती है, जिला अस्पताल में फिजिशियन के पास वॉयरल से संबंधित मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे मौसम में बाहर का खानपान नहीं करना चाहिए। जिला अस्पताल में 15 ऐसे मरीज भर्ती हैं जो बाहर का दूषित खाना खाने के चलते एडमिट हुए हैं।
डिप्टी सीएमएस सीपी वर्मा ने बताया कि वॉयरल के दिनों में छोटे बच्चों की अधिक देखभाल करने की आवश्यकता होती है। छोटी सी लापरवाही भी बच्चों के लिए भारी पड़ जाती है। जिला अस्पताल में वायरल से पीड़ित बच्चे भी पहुँच रहे हैं। इनकी संख्या में भी बदलते मौसम के चलते इज़ाफा देखने को मिल रहा है। जुकाम, खांसी नज़ला के मरीज बड़े हैं। अगर किसी को लगता है कि उनके बच्चे का स्वास्थ्य गड़बड़ है तो उन्हें तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। शुक्रवार और शनिवार को जिला अस्पताल में नए मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिली। जिला अस्पताल में शुक्रवार को ओपीडी के नए मरीजों की संख्या 2100 थी तो वहीं पुराने मरीज भी करीब 1500 से 1800 के आसपास थे। इसी तरह शनिवार को भी साढ़े तीन हजार के करीब मरीज जिला अस्पताल पहुँचे। उन्होंने बताया कि बदलते मौसम से मरीजों की संख्या में जहाँ इज़ाफा देखने को मिल रहा है और ओपीडी का आंकड़ा साढ़े तीन से चार तक पहुँच रहा है।
डिप्टी सीएमएस ने बताया कि इस समय वायरस का डोमिनेट वाला पार्ट है, इसलिए बचाव की आवश्यकता है। इस समय आगरा में गेहूं की फ़सल भी कट रही है। गेहूं कटने से भी उसका असर वायु गुणवत्ता को ख़राब करता है। गेहूं में जो केमिकल होता है उसका एसेंस वायु में होता है जो कि आम आदमी को बीमार कर सकता है। इसलिए जब भी घर से बाहर निकलें तो मास्क लगाना न भूलें, इस समय वॉयरल से बचने के लिए मास्क आवश्यक है। उन्होंने कहा मास्क लगाने के साथ-साथ लोग अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए और जब भी कोई अस्पताल आए तो मास्क लगाकर ही अस्पताल आएं अन्यथा उन्हें और भी बीमारियां घेर सकती हैं।
: विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का आगाज आज से
Sun, Mar 31, 2024
01 से 30 अप्रैल तक चलेगा विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान, 10 से 30 अप्रैल तक चलेगा दस्तक अभियान
आगरा, 31 मार्च 2024। जनपद में विशेष संचारी रोगों एवं दिमागी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण और कार्रवाई के लिए सूबे में एक से 30 अप्रैल तक विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और इसी बीच 10 से 30 अप्रैल तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा |
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत शासनादेशानुसार तैयारियां पूर्ण की जा चुकी हैं | पिछले सालों में चलाए गए अभियान के समान ही यह अभियान विभिन्न विभागों के परस्पर सहयोग से चलेगा | इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, नगर विकास विभाग, पंचायती राज विकास विभाग, बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग, सिंचाई विभाग, पशुपालन विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, कृषि विभाग, माध्यमिक शिक्षा विभाग, दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग, नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग, वाणिज्य कर एवं मनोरंजन विभाग तथा सूचना जनसम्पर्क विभाग सहयोग करेंगे | जिसमें स्वास्थ्य विभाग नोडल की भूमिका में होगा ।
वेक्टर बोर्न डिजीज के नोडल अधिकारी डॉ.सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि संचारी रोग नियंत्रण अभियान के तहत स्वच्छता पर फोकस किया जाएगा । इससे बीमारियों से बचाव होगा। उन्होनें ने बताया कि 10 से 30 अप्रैल तक चलने वाले दस्तक अभियान में आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बुखार, इंफ़्लुएंजा लाइक इलनेस (आईएलआई), फाइलेरिया, काला जार, कुष्ठ रोग के लक्षण वाले व्यक्तियों और कुपोषित बच्चों का नाम, पता, मोबाइल नंबर सहित सम्पूर्ण विवरण ई-कवच पोर्टल पर अपलोड करेंगी | इसके साथ ही क्षेत्रवार घरों की सूची जहां मच्छरों का प्रजनन पाया गया है, इसका विवरण निर्धारित प्रपत्र पर भरकर संबंधित अधिकारी को उपलब्ध कराएंगी | स्वास्थ्य कार्यकर्ता माइक्रोप्लान के अनुसार कार्यक्षेत्र में आने वाले परिवारों के सभी सदस्यों का आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट (आभा) सृजन भी अवश्य रूप से करेंगे और वह परिवार को आभा नंबर से अवगत कराएंगे |
जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि शासन द्वारा उत्तर प्रदेश सहित देश के कई भागों में सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना व्यक्त की गई है। ऐसी स्थिति मेंवेक्टरजनित और जलजनित रोगों के आउटब्रेक्स अधिक होने की संभावना है | इसी क्रम में शासन से गर्मी के मौसम से संबंधित रोगों के बारे में विभिन्न विभागों के परस्पर समन्वय से प्राथमिकता के आधार पर भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर लोगों के लिए शुद्ध एवं शीतल पेयजल की व्यवस्था किये जाने, गर्मी से बचाव के लिए शेल्टर्स की सुविधा, व्यस्त स्थानों पर मौसम के पूर्वानुमान तथा तापमान का डिस्प्ले करने, हीट वेव से बचाव के लिए उपायों का विद्यालयों एवं जनमानस में व्यापक प्रचार प्रसार करने के निर्देश भी मिले हैं। सहायक मलेरिया अधिकारी नीरज कुमार ने बताया की दस्तक अभियान के दौरान फ्रंटलाइन वर्क्स जनपद के सभी ग्रामों में एवं शहरी क्षेत्र में भ्रमण करेंगे उपरोक्त बीमारियों के लक्षण वाले व्यक्तियों की लाइन लिस्टिंग करेगी तथा जिन स्थानों पर बुखार के केस तीन या तीन से अधिक मिलेंगे उन क्षेत्रों के बारे में तत्काल अपने चिकित्सा अधीक्षक को सूचित करेंगे ताकि किसी भी संभावित एपिडेमिक की स्थिति से ससमय निपटा जा सके एवं किसी भी वेक्टर जनित बीमारी को फैलने से रोका जा सके।