: जिले में क्षय रोग के उन्मूलन के लिए जागरूकता रैली का आयोजन
Mon, Sep 9, 2024
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम: एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान का आगाज
रैली निकालकर एसीएफ अभियान का हुआ शुभारंभ, 20 सितंबर तक चलेगा अभियान
आगरा। जिले में 9 से 20 सितंबर तक राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम तहत एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान का आगाज हो गया है। अभियान के सफल क्रियान्वयन और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से जागरूकता रैली का आयोजन आयोजन किया गया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने रैली को हरी झंडी दिखाकर एसीएफ अभियान का शुभारंभ किया ।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि एक्टिव केस फाइंडिंग का आयोजन 9 से 20 सितंबर तक किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्षय रोग के एक्टिव मामलों की पहचान करना और उन्हें उचित उपचार प्रदान करना है। उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सामुदायिक भागीदारी महत्वपूर्ण है क्योंकि आप जागरूक होंगे तो समाज जागरूक होगा टीबी से बचाव के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है । सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए और लोगों को क्षय रोग के उन्मूलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए। अपने आसपास के लोगों को भी अवश्य जागरूक करें । स्वास्थ्य विभाग की टीम आपके घर आए तो लक्षणों के आधार पर सही जानकारी अवश्य प्राप्त कराए और टीमों का सहयोग करें जिससे कोई भी संभावित टीबी मरीज उपचार से वंचित न रहे ।
बांझपन की समस्या से जूझ रहीं महिलाएं भी कराएं जांच
डीटीओ ने बताया कि वह महिलाएं भी अपनी टीबी की जांच कराएं जो बांझपन की समस्या से जूझ रही हैं, ऐसी महिलाओं को भी टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपको दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी आ रही है या बुखार की समस्या है, बलगम में खून आता है, भूख कम लगती और वजन तेजी से कम हो रहा है, रात में पसीना आता, गले में कोई गांठ (लिम्फनोड) है। ऐसे में एसीएफ अभियान के दौरान घर पर दस्तक देने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम को जानकारी जरूर दें। आपको टीबी हो सकती है। अधिक जानकारी के लिये सम्पर्क करें राष्ट्रीय टोल फ्री नम्बर 1800116666
संभावित क्षय रोगियों को खोजे जाने हेतु क्षय रोग के लक्षण
दो सप्ताह से अधिक खाँसी
दो सप्ताह से अधिक बुखार
बलगम में खून आना
भूख में कमी
वजन का कम होना
रात में पसीना आना
गले में गांठ (लिम्फनोड)
महिलाओं में बांझपन की समस्या इत्यादि
: 2 से 15 सितंबर तक खोजे जाएंगे कुष्ठ रोगी, घर-घर जाएगी स्वास्थ्य विभाग की टीम
Mon, Sep 2, 2024
आगरा, 01 सितंबर 2024। जनपद में सोमवार से राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ रोगी खोजी अभियान का शुभारंभ होगा। अभियान के तहत 15 सितंबर तक स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर कुष्ठ रोगियों की खोज करेंगी और लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरुक करेंगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर चमड़े के रंग से हल्के या गहरे रंग के दाग-धब्बे हो सकते हैं, जो सुन्न होते हैं और इनमें दर्द नहीं होता है। अगर किसी के शरीर पर ऐसे कोई दाग-धब्बे दिखाई दें तो स्वास्थ्य विभाग की टीम को बताएं। इसके बाद मरीजों की स्क्रीनिंग करके जांच की जाएगी और यदि जांच में कुष्ठ की पुष्टि होगी तो मरीजों का उपचार किया जाएगा। सीएमओ ने बताया कि कुष्ठ रोग का इलाज संभव है, लेकिन समय पर इलाज बहुत जरूरी है। अगर इलाज में देरी होती है तो यह रोग गंभीर रूप ले सकता है और त्वचा, नसों और अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. सीएल यादव ने बताया कि अभियान को जनपद के 15 ब्लॉक और शहरी क्षेत्र में अभियान चलाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता और एक पुरुष सदस्य की टीम, जबकि शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक पुरुष सदस्य की टीम लक्षणयुक्त व्यक्तियों की स्क्रीनिंग करेंगी। इसके बाद चयनित किये गये संभावित कुष्ठ रोगियों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संदर्भन पर्ची के साथ रेफर किया जाएगा। यह अभियान 14 दिन चलेगा। इसे पल्स पोलियो अभियान की भांति चलाया जाना है। दो वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की लक्षण के आधार पर उनके घर पर ही स्क्रीनिंग होगी।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव गोपाल ने बताया कि अगर शरीर पर चमड़ी के रंग से हल्का कोई भी सुन्न दाग धब्बा हो तो कुष्ठ की जांच अवश्य करानी चाहिए। हल्के रंग के व्यक्ति की त्वचा में गहरे और लाल रंग के भी धब्बे हो सकते हैं। हाथ या पैरों की अस्थिरता या झुनझुनी, हाथ पैर व पलकों में कमजोरी, नसों में दर्द, चेहरे या कान में सूजन अथवा घाव और हाथ या पैरों में दर्द रहित घाव भी इसके लक्षण हैं । तुरंत जांच और इलाज से मरीज ठीक हो जाता है और सामान्य जीवन जी सकता है। इसके विपरीत देरी पर कुष्ठ दिव्यांगता का रूप ले सकता है। कुष्ठ सुन्न दाग धब्बों की संख्या जब पांच या पांच से कम होती है और कोई नस प्रभावित नहीं होती या केवल एक नस प्रभावित होती है तो मरीज को पासी बेसिलाई (पीबी) कुष्ठ रोगी कहते हैं जो छह माह के इलाज में ठीक हो जाता है। अगर सुन्न दाग धब्बों की संख्या छह या छह से अधिक हो और दो या दो से अधिक नसें प्रभावित हों तो ऐसे रोगी को मल्टी बेसिलाई (एमबी) कुष्ठ रोगी कहते हैं और इनका इलाज होने पर साल भर का समय लगता है। कुष्ठ रोगी को छूने और हाथ मिलाने से इस रोग का प्रसार नहीं होता। रोगी से अधिक समय तक अति निकट संपर्क में रहने पर उसके ड्रॉपलेट्स के जरिये ही बीमारी का संक्रमण हो सकता है ।
प्रस्तावित अभियान पर एक नजर
लक्षित आबादी= 51.15 लाख
कुल टीम= 4057
कुल पर्यवेक्षक= 841
: एसएन में सर्वाइकल कैंसर से बचाव की पहल को मिली सराहना
Tue, Jul 2, 2024
प्रोफेसर डॉ. रुचिका गर्ग का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में हुआ अंकित
आगरा। महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर सर्वाइकल कैंसर है। इससे बचाव के लिए सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज में सराहनीय पहल की जा रही है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के मार्गदर्शन और सहयोग से सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता अभियान और वैक्सीनेशन का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए अभियान की जिम्मेदारी संभाल रहीं एसएन मेडिकल कॉलेज की गायनिक विभाग में प्रोफेसर डॉ. रुचिका गर्ग को इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड्स में नाम अंकित किया गया है, उन्होंने सर्वाइकल कैंसर वैक्सीनेशन कैम्प का आयोजन कर अभी तक सबसे ज्यादा मेडिकल छात्राओं का वैक्सीनशन कराया है।
डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि वैक्सीनेशन के लिए दो विशाल कैंप का आयोजन किया गया l पहला कैम्प 3 मार्च 2024 को लगाया गया। दूसरा कैम्प 9 मई 2024 को लगाया गया। दोनों शिवर में 250 मेडिकल की छात्राओं ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाई l उन्होंने बताया कि डॉ. प्रशांत गुप्ता के द्वारा सर्वाइकल कैंसर की जागरूकता और बचाव के लिए यह पहल की गई है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग सर्वाइकल कैंसर के बारे में जानकारी और उसके बचाव के लिए आगे आए । डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि जिन महिलाओं की इम्यूनिटी कमजोर होती है उनको कैंसर का रिस्क रहता है। इसलिए ऐसा जरूरी नहीं है कि जिस महिला में एचपीवी वायरस है उसको सर्वाइकल कैंसर भी हो जाएगा. लेकिन अगर सही समय पर एचपीवी वैक्सीन लगवा लें तो इस कैंसर से काफी हद तक बचाव मुमकिन है।
प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता ने बताया कि अब नर्सिंग की छात्राओं को भी सर्वाइकल कैंसर ( बच्चेदानी के मुँह का कैंसर) के लिए जागृत किया जाएगा । बच्चेदानी के मुँह के कैंसर का वैक्सीन 9 से 26 साल तक की उम्र में दिया जाता है। लेकिन डॉक्टर से सलाह करके गार्डासिल 45 साल तक भी दिया जा सकता है। जितनी कम उम्र में इसे लिया जाए उतना अच्छा होता है । डॉ. प्रशान्त गुप्ता सभी लोगों से अपील करते हुए कहा है कि भले यह वैक्सीन थोड़ी महंगी है और आपको स्वयं खरीद के लगवानी है लेकिन सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए और आपके स्वास्थ्य के लिए स्वयं विचार करें, जितनी जल्दी हो सके सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाएं ।
सर्वाइकल कैंसर से बचाव की वैक्सीन
9 से 26 वर्ष महिलाओं को भारतीय सर्वावैक वैक्सीन 1400 रुपए पर डोज लगाई जाती है। 26 से 45 वर्ष की महिलाओं को गार्डासिल वैक्सीन 3100 रुपए पर डोज लगाई जाती है।
डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि इससे पहले इस तरह का इनीशिएटिव नहीं लिया गया था। एक साथ 250 मेडिकल छात्राओं ने सर्वाइकल कैंसर से बच्चों के लिए वैक्सीन लगवाई। उन्होंने बताया कि इतनी ज्यादा बच्चों की काउंसलिंग करना कोई आसान काम नहीं था लेकिन सर्वाइकल कैंसर से महिलाओं को बचाने के जज्बे ने मुझे अपने लक्ष्य पर अग्रसर रखा। मेडिकल छात्रों को सर्वाइकल कैंसर के प्रति जागरूक किया। साथ ही काउंसलिंग भी की। क्योंकि सर्वाइकल कैंसर के बारे में लोगों को बहुत कम जानकारी है लोगों को सर्वाइकल कैंसर के लिए जागरूक करना बहुत जरूरी है 9 से 26 वर्ष की महिलाओं को भारतीय सर्वावैक वैक्सीन लगाई जाती है और 26 से 45 वर्ष की महिलाओं को गायनोसिल वैक्सीन लगाई जाती है। नौ से 14 साल तक की किशोरियों को वैक्सीन की दो डोज दी जाती हैं 15 से ऊपर 45 साल तक तीन डोज एचपीवी की तीन डोज लगाई जाती है। यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से 98% बचाव करती है। पाँच जुलाई को एसएन मेडिकल कॉलेज में सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए तीसरे कैम्प का आयोजन किया जाएगा
सर्वाइकल कैंसर के कारण जोखिम को बढ़ाते हैं
• ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (HPV) - यह एक यौन संचारित वायरस है, जिसके 100 से ज्यादा प्रकार में लगभग 14 प्रकार सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं।
• असुरक्षित यौन संबंध - एचपीवी से संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन
• संबंध बनाने से यह फैलता है। साथ ही जो महिलाएं एक से ज्यादा पार्टनर के साथ यौन संबंध बना चुकी हैं या जो कम उम्र में यौन संबंध बना चुकी है, उसमें सर्वाइकाल कैंसर का खतरा ज्यादा होता है।
• गर्भधारण - जो महिलाएं तीन या तीन से ज्यादा बच्चों को जन्म दे चुकी है, उनमें इस कैंसर का जोखिम ज्यादा होता है।
• गर्भनिरोधक गोलियां ज्यादा समय तक गर्भ निरोधक गोलियों का प्रयोग करने से भी कैंसर के जोखिम को बढ़ावा मिलता है।
• यौन संचारित बीमारियां सिफलिस, गोनोरिया या क्लैमाइडिया से संक्रमित हो चुकी महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का जोखिम ज्यादा होता है।
• धूम्रपान करना
• ज्यादा समय तक तनाव ग्रस्त रहना
सर्वाइकल कैंसर के लक्षण
• पैर में सूजन होना ।
• संभोग के दौरान दर्द महसूस होना।
• अनियमित पीरियड्स आना।
• ज्यादा रक्तस्राव होना।
• यूरीन पास करने में परेशानी होना।
• पैल्विक दर्द जो पीरियड्स से जुड़ा नहीं होता है।
• किडनी फेलियर।
• वजन कम हो जाना।