: सही उम्र में शादी और जागरुकता से महिलाओं की सेहत रहेगी तंदुरूस्त
Tue, May 28, 2024
एएनएम प्रशिक्षण केंद्र में मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस
महिला स्वास्थ्य के मुद्दों पर किया गया जागरुक
आगरा। एएनएम प्रशिक्षण केंद्र में मंगलवार को अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों को समर्पित अन्तर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस प्रत्येक वर्ष 28 मई को मनाया जाता है । इसका उद्देश्य उन सभी मुद्दों पर बात करना और समाज में अनुकूल वातावरण तैयार करना है जो महिलाओं के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य अधिकारों से संबंधित हैं । उन्होंने महिलाओं की सही उम्र में शादी, पार्टनर चुनने की आजादी, गर्भधारण में महिला की सहमति, गर्भसमापन में निर्णय लेने का स्वतंत्र सामाजिक अधिकार, परिवार नियोजन साधनों तक पहुंच और यौन संक्रमण से होने वाली बीमारियों से बचाव के मुद्दे पर चर्चा की।
सीएमओ ने बताया कि समुदाय स्तर पर कम उम्र में शादी को हतोत्साहित करने के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ता प्रयासरत हैं। साथ ही यह संदेश दिया जाता है कि शादी के कम से कम दो वर्ष बाद ही गर्भधारण करना है। इसके पीछे उद्देश्य है कि गर्भधारण सही उम्र में ही हो और तब हो जब दंपति के बीच समझदारी बन जाए। सभी सरकारी अस्पतालों के साथ साथ अग्रिमपंक्ति कार्यकर्ता के माध्यम से भी परिवार नियोजन की सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
एएनएम प्रशिक्षण केंद्र की इंचार्ज डॉ. सलोनी ने बताया कि राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएचएफएस) पांच (2019-21) के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में सिर्फ 64.6 फीसदी ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें यह पता है कि उनके पार्टनर अगर कंडोम का निरंतर उपयोग करते हैं तो वह एचआईवी संक्रमण और एड्स से बच सकती हैं । जागरूकता के अभाव और परिवार नियोजन के साधनों के इस्तेमाल में पुरूष की अरूचि के कारण महिलाएं असुरक्षित संबंध के जरिये आज भी सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीआई) का शिकार हो रही हैं । इसी सर्वे के अनुसार प्रदेश में 72.6 फीसदी 15 से 24 आयु वर्ग की महिलाएं माहवारी के दौरान स्वच्छता के लिए किसी सुरक्षित साधन का इस्तेमाल करती हैं।
एएनएम प्रशिक्षण केंद्र की अध्यापिका संजू ने महिला स्वास्थ्य अधिकारों की जानकारी देते हुए कहा कि माहवारी के दौरान स्वच्छता व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर सैनेट्री पैड का उपयोग करने के लिए स्थान होना चाहिए। इससे महिलाओं का विभिन्न बीमारियों से बचाव होगा । उन्होंने कहा कि कम उम्र में महिलाओं का विवाह होने पर उन्हें जल्दी मां बनने के लिए सामाजिक दवाब का सामना करना पड़ता है, इसके साथ ही कम उम्र में शादी लड़कियों को यौन हिंसा का भी शिकार बनाती है। ऐसे में सही समय पर शादी करने से महिलाओं को होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है।
एएनएम फर्स्ट ईयर की छात्रा आयुषी दीक्षित ने बताया कि मेरा सुझाव है कि ग्रामीण क्षेत्रों में राशन की दुकानों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सेनेटरी पैड आसानी से मिलने चाहिए, महिलाओं को उन्हें उपयोग करने के लिए सामुदायिक स्तर पर जागरुक करना चाहिए। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं सेनेटरी पैड की जगह कपड़े का उपयोग करती हैं, जिससे उन्हें संक्रमण होने का खतरा हमेशा रहता है।
अन्य छात्रा सविता यादव जागरुकता कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें माहवारी स्वच्छता के बारे में जानकारी मिली। छात्रा अंजिता ने बताया कि महिलाओं में सर्विक्स कैंसर और ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में शीघ्र स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है । इसके जरिये इन बीमारियों को गंभीर अवस्था में पहुंचने से रोका जा सकता है। छात्रा निकिता यादव ने बताया कि ऐसा देखा जाता है कि कम उम्र में शादी होने पर महिलाओं को गंभीर रोगों का सामना करना पड़ता है। यदि समुदाय स्तर पर लोगों को जागरुक किया जाए और परिवार नियोजन को अपनाया जाए तो इससे बचा जा सकता है। कार्यक्रम में सुरेंद्र सिंह, सतीश गुर्जर, विजेंद्र और एएनएम की छात्राएं व अन्य मौजूद रहे।
: जिला अस्पताल के भोजन में मिली जली रोटी और दाल में कीड़े, तीमारदारों ने काटा हंगामा
Tue, May 28, 2024
Agra. आगरा के जिला अस्पताल में उस समय हंगामा हो गया जब जिला अस्पताल की ओर से मरीजों और उनके तीमारदारों को दूषित भोजन दिया गया। जली हुई रोटी और दाल में कीड़े मिलने को लेकर मरीज और तीमारदार सीएमएस राजेंद्र अरोड़ा के पास पहुंच गए और सभी ने जमकर हंगामा काटा। दूषित भोजन की सीएमएस राजेंद्र अरोड़ा से शिकायत की। दूषित भोजन को देखकर उनके भी होश उड़ गए और सभी को आश्वासन दिया कि वो इस मामले में उचित कार्यवाही करेंगे।
पूरा मामला आगरा के जिला अस्पताल का है। आगरा के जिला अस्पताल में एक निजी कंपनी मरीजों के लिए भोजन सप्लाई करती है। इस कंपनी के कर्मचारी जिला अस्पताल में ही भोजन बनाते हैं और फिर मरीज को देते हैं लेकिन इस भोजन को देने से पहले जिला अस्पताल की डाइटिशियन और अन्य अधिकारी इस भोजन को चेक करते हैं। जिला अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन पर हमेशा से ही सवाल खड़े होते रहे लेकिन आज इस भोजन में कीड़े निकल आए। मरीजों को कीड़े वाला भजन वितरित कर दिया गया। निजी कंपनी के कर्मचारियों ने एनआरसी, ईडी और वार्ड में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारी को यह भोजन वितरित कर दिया।
एनआरसी में छोटे-छोटे बच्चे भर्ती होते हैं उनके साथ उनकी मां इस वार्ड में रहती हैं। जब उन महिलाओं को यह भोजन मिला तो जली हुई रोटी देखकर वह हैरान थी लेकिन जब उन्होंने दाल देखी तो दाल में कीड़े तैर रहे थे। इस दूषित भोजन को देखकर महिलाओं में आक्रोश फैल गया। उनका कहना था कि अपने बच्चों के इलाज के लिए यहां आये हैं लेकिन यही अस्पताल उन्हें और बीमार करने में लगा हुआ है।
जिला अस्पताल में जो भोजन बनता है उसे चेक करने की जिम्मेदारी डाइटिशियन से लेकर संबंधित अधिकारियों की होती है लेकिन इस भोजन को चेक करने में खानापूर्ति होती है। इसीलिए आज कीड़े वाला भोजन मरीज और तीमारदारी तक पहुंच गया। इस पूरे मामले को लेकर जब सीएमएस राजेंद्र अरोड़ा से वार्ता हुई तो उनका कहना था कि कुछ महिलाएं इस शिकायत को लेकर आई थी। उन्होंने डाइटिशियन के साथ-साथ भोजन वितरित करने वाली कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा है और इस मामले में उचित कार्रवाई होगी। जब उनसे पूछा गया कि वास्तव में भोजन में कीड़े थे तो उनका कहना था कि यह मैं नहीं कह सकता लेकिन महिलाओं की शिकायत यह जरूर थी कि भोजन में कीड़े थे।
: माहवारी स्वच्छता दिवस: सावधानी बरत कर संक्रमण की चपेट में आने से करें बचाव
Tue, May 28, 2024
मिथक और भ्रांतियों पर प्रहार करने का है मौका
"आधी आबादी" को संक्रमण और बीमारियों से बचाती है सही जानकारी
आगरा, 27 मई 2024। माहवारी के समय आधी आबादी मानसिक पीड़ा सहन करने के साथ ही जानकारी का अभाव होने पर संक्रमण की चपेट में आ जाती है। यह कोई बीमारी नहीं है। माहवारी के समय थोड़ी सावधानी बरतकर महिलाएं संक्रामक बीमारियों में चपेट में आने से बच सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग भी लगातार आधी आबादी को जागरुक करता रहता है।
मंगलवार को माहवारी स्वच्छता दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष इसकी थीम ‘‘टूगेदर : फॉर अ पीरियड फ्रैंडली वर्ल्ड’’ रखी गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव द्वारा अपील की गई है कि पीरियड फ्रैंडली वर्ल्ड का हैशटैग अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जरूर लगाएं और इस मुद्दे पर चर्चा करें। ऐसा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सही जानकारी किशोरियों और महिलाओं को संक्रमण और बीमारियों से बचाती हैं। सीएमओ ने बताया कि किशोरियों ओर महिलाओं को माहवारी स्वच्छता के बारे में जागरुक करने के लिए निर्देश प्राप्त हो गए हैं। लोगों तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि मासिक धर्म या माहवारी शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। इसमें साफ सफाई का विशेष महत्व है।
यह भी जानें
मासिक धर्म के दौरान प्रत्येक चार घंटे में सैनेट्री पैड को अवश्य बदल देना चाहिए।
गंदे कपड़ों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना है, क्योंकि इससे संक्रमण हो सकता है।
किशोरी सुरक्षा योजना के तहत सभी राजकीय स्कूलों में दस से 19 वर्ष तक की किशोरियों को सरकारी खर्चे पर स्कूल द्वारा सैनेट्री पैड देने का प्रावधान है। इसे पाना हर किशोरी का हक है।
राज्य की स्थिति
राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण पांच (2019-21) के अनुसार प्रदेश में 15 से 24 आयु वर्ग की 72.6 फीसदी महिलाएं माहवारी के दौरान सुरक्षित साधनों का इस्तेमाल कर रही हैं। इस स्थिति में और भी सुधार लाने की आवश्यकता है ताकि महिलाओं को सर्वाइकर कैंसर और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन आदि बीमारियों से बचाया जा सके।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन बताते हैं मासिक धर्म के दौरान न केवल आराम की आवश्यकता होती है, बल्कि पौष्टिक भोजन का सेवन भी किया जाना चाहिए। मासिक धर्म के दौरान जननांगों को नियमित तौर पर धुलना चाहिए। बहुत सी लड़कियों और महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान पेट में दर्द और कमजोरी की शिकायत होती है। ऐसी अवस्था में ज्यादा दिक्कत होने पर चिकित्सकीय परामर्श लेते हुए दवाओं के साथ-साथ आराम करना चाहिए। सतर्कता का व्यवहार न अपनाने से यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, ल्यूकोरिया, धाध गिरने जैसी बीमारी के साथ-साथ अन्य कई प्रकार के संक्रमण हो सकते हैं। मासिक धर्म के दौरान हरी साग-सब्जी, ताजे फल, दही, दूध और अंडा का सेवन करना चाहिए। स्वच्छता और खानपान का ध्यान न रखने से एनीमिया का शिकार हो सकती हैं।
जिला महिला अस्पताल के साथिया केंद्र की अर्श काउंसलर रूबी बघेल ने बताया कि आमतौर पर महिलाओं में पीरियड 10 से 48 साल की उम्र के बीच में होता है। यह चक्र महीने में एक बार होता है और तीन से पांच दिन तक रहता है। जब यही चक्र सुचारू रूप से न चले तो इसे अनियमित पीरियड की श्रेणी में रखा जा सकता है। हालाँकि 15-20 दिन की देरी सामान्य ही मानी जाती है, लेकिन यदि यह अंतर महीनों का हो, तो डॉक्टर से सलाह जरुर लें। उन्होंने बताया कि मासिक धर्म के दौरान अनियमित या शारीरिक बदलाव आए तो तुरंत चिकित्सीय सलाह ले। किसी के कहने पर भी घरेलू उपाय स्वयं ना करें। साथिया केंद्र पर किशोरियों की काउंसलिंग के दौरान किशोरियों व अभिभावकों को मासिक धर्म के प्रति किया जा रहा है। साथ ही अगर किसी भी किशोरी 15-16 साल की उम्र के बीच में मासिक धर्म नहीं आता है तो तुरंत चिकित्सा परामर्श ले।
जिला अस्पताल के साथिया केंद्र के काउंसलर अरविंद कुमार ने बताया कि साथिया केंद्र में काउंसलिंग के दौरान मासिक धर्म जागरूकता के लिए किशोरियों को भी मासिक धर्म प्रबंधन के बारे में जानकारी दी जा रही है l
शाहगंज निवासी 18 वर्षीय अंजलि बताती है कि जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल) में मुझे मासिक धर्म के बारे में काउंसलर द्वारा जानकारी दी गई थी, इसके बाद से मैं अपने आसपास के लोगों को महामारी के दौरान होने वाली समस्या के लिए डॉक्टर से संपर्क करने के बारे में सलाह देती हूं। अंजलि ने बताया कि ज्यादातर मासिक धर्म के दौरान सैनेट्री पैड चेंज करना हो या अचानक मासिक धर्म आने पर सार्वजनिक स्थल सैनेट्री पैड बॉक्स ना होने से समस्या आती है, सभी सार्वजनिक स्थलों पर सैनेट्री पैड बॉक्स होना बहुत जरूरी है।