: श्रीमहालक्ष्मी भक्त मंडल के नेत्र चिकित्सा शिविर का हुआ समापन, वितरित हुए दवा एवं चश्में
Fri, Apr 26, 2024
श्री महालक्ष्मी भक्त मंडल एवं स्व. कालीचरण सर्राफ की स्मृति में संयुक्त तत्वावधान में लगा था शिविर
पूरे वर्ष में 24 निःशुल्क मोतियाबिंद के आपरेशन करवाने का रखा गया है लक्ष्य
पांच जून को पुनः लगाया जाएगा नेत्र चिकित्सा शिविर, रजिस्ट्रेशन हुए आरंभ
आगरा। भक्तिपथ तभी सार्थक है जब उसमें जनसेवा को भी समाहित कर लिया जाए। मां लक्ष्मी की कृपा और प्रेरणा से जरूरतमंद लोगों के जीवन में रोशनी लाने का प्रयास भक्ति के इसी लक्ष्य को पूर्ण कर रहा है। अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने इन पंक्तियों के साथ आरंभ किया निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर का।
विगत सप्ताह श्रीमहालक्ष्मी भक्त मंडल द्वारा स्व. कालीचरण सर्राफ की स्मृति में निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर मोतीलाल नेहरू रोड स्थित श्रीक्षेत्र बजाजा नेत्र अस्पताल में लगाया गया था। शिविर में छह लोगों के मोतियाबिंद के आपरेशन डॉ प्रतिभा बंसल के नेतृत्व में संपन्न हुए। शुक्रवार को सभी लाभार्थियों को चश्में एवं दवा वितरित कर शिविर का समापन किया गया। नेत्र चिकित्सा शिविर में सदस्य कौशल बंसल का विशेष सहयोग रहा।
अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने बताया कि श्रीमहालक्ष्मी भक्त मंडल द्वारा वर्ष 2024 में 24 मोतियाबिंद के निःशुल्क आपरेशन करवाने का लक्ष्य रखा गया है। आपरेशन श्रंखला का पहला चरण समाप्त होने के बाद द्वितीय चरण के रजिस्ट्रेशन आरंभ हो चुके हैं। जिसमें छह मरीजों के आपरेशन होंगे। रजिस्ट्रेशन के लिए विशाल बिंदल 9359058175, अनिल अग्रवाल 7500367252 और राकेश अग्रवाल 9358613753 से संपर्क किया जा सकता है। समापन पर प्रसादी वितरण भी किया गया।
इस अवसर पर मंदिर ट्रस्टी राम मोहन कपूर और सतीश गोपाल कपूर, अध्यक्ष संजय अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, पार्षद हरिओम गोयल, विकास मित्तल, अनिल अग्रवाल, विशाल बिंदल, राकेश अग्रवाल, मनोज जैन, नीरज बांदिल, दिलीप बंसल, अमित गुप्ता, रीतेश गुप्ता, अमित अग्रवाल, हेमंत मोहता आदि उपस्थित रहे।
: एसएन में टीबी उन्मूलन को लेकर हुई कार्यशाला
Fri, Apr 26, 2024
विशेषज्ञों ने उपचार की जानकारी को किया साझा
देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने का लिया संकल्प
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग द्वारा राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत गुरुवार को एक प्रशिक्षण कार्यक्रम मेडिसिन विभाग के एलटी 4 में आयोजित किया गया।
सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि टीबी का इलाज करते वक्त डॉक्टर द्वारा मरीज को नियमित दवा लेने के महत्व के बारे में बताना अत्यधिक आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा 2025 तक टीबी मुक्त भारत करने की बात कही। प्रधानाचार्य ने डॉक्टर को अपनी सुरक्षा जैसे मास्क ग्लव्स इत्यादि पहन कर इलाज करने पर ध्यान देने की भी बात कही।
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के आचार्य एवं विभाग अध्यक्ष डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने ड्रग रेसिस्टेंट टीबी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि टीबी में बार-बार मरीजों द्वारा टीबी की बीच में दवाइयां छोड़ने से बहुत नुकसान होता है तथा ड्रग रेजिस्टेंट टीबी बन जाती है। ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीजों की वजह से आम जनमानस में टीबी ज्यादा फैलने की संभावना रहती है। डॉ. जीवी सिंह आचार्य एवं विभाग अध्यक्ष रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं अध्यक्ष, स्टेट टास्क फोर्स फॉर टीबी एलिमिनेशन ने एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के निदान में माइक्रोबायोलॉजिकल पुष्टी पर जोर देते हुए ऐसी टीबी में मॉलिक्यूलर जाँचो जैसे सीबीनाट की उपयोगिता बताई।
टीबी एवं चेस्ट विभाग के आचार्य डॉ. संतोष आचार्य ने टीबी की डायग्नोसिस एवं इलाज के बारे में बताया। डॉ. मानस शर्मा, डबल्यूएचओ कंसलटेंट, प्रभारी आगरा मथुरा निक्षय पोर्टल के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार टीबी के मरीजों को इनरोल किया जाता है।
डॉ अनुराग मेडिकल ऑफिसर, कंसल्टेंट स्टेट टीबी ट्रेनिंग सेंटर ने एंड टीबी 2025, यस वी कैन का स्लोगन दोहराया। उन्होंने बताया कि टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) भारत सरकार की योजना के तहत टीबी के मरीजों के परिवार के सदस्यों को डॉक्टर के सलाह के उपरांत एक गोली रोज 6 महीने तक दी जाती है। टीपीटी पर डा. गीतू ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की योजना के तहत घोषित टीबी के मरीजों को पोषण के लिए 500 रुपये हर महीना 6 महीने के इलाज तक दिया जाता है।
डॉ. सचिन गुप्ता, सहायक आचार्य टीबी एवं चेस्ट विभाग द्वारा के टीबी की दवाइयां से होने वाले दुष्परिणाम एवं उसके रोकथाम के बारे में पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को विस्तार से बताया। डॉ. मधु नायक सह आचार्य द्वारा टीबी की गांठ के उपचार के बारे में विस्तार से बताया। इस ट्रेनिंग में लगभग 90 रेसिडेंट डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया।
कार्यक्रम में उप प्रधानाचार्य डॉक्टर टीपी सिंह, मेडिसिन विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. मृदुल चतुर्वेदी, सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर मोना वर्मा, मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर योगेश कौशल, मीडिया प्रभारी डॉक्टर प्रीति भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।
टीबी के लक्षण
15 दिन से ज्यादा खांसी (होने पर चिकित्सा की सलाह पर छाती का एक्सरे व बलगम की जांच करवाएं।
शाम को बुखार आना
अचानक वजन कम हो जाना
भूख का काम होना
इन लक्षणों के होने पर चिकित्सक से संपर्क कर टीबी की जांच करवाएं।
बचाव
खांसी होने पर, मुंह पर रुमाल रुमाल अथवा गमछे का इस्तेमाल करें स
जंक फूड एवं कोल्ड ड्रिंक व पैकेट बंद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करेंस इससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती हो जाती हैस
संतुलित आहार का सेवन करें व अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर टीबी की बीमारी से बचा जा सकता हैस
यदि किसी परिवार के सदस्य को टीबी है तो अन्य सदस्य भी चिकित्सक के परामर्श के बाद छाती के एक्स-रे एवं बलगम की जांच (मोंटेक टेस्ट) करवाने की सलाह दी जाती है।
: नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शहर की झुग्गी-झोपड़ी, मलिन बस्तियों, घुमंतू परिवार पर होगा ज़ोर
Thu, Apr 25, 2024
नगर में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को सफल बनाने को लेकर हुई कार्यशाला
जागरूकता के लिए धर्मगुरु व प्रभावशाली व्यक्तियों का लिया जाएगा सहयोग
टीकाकरण के लिए आवश्यक है मातृ एवं शिशु सुरक्षा कार्ड, साथ में जरूर लाएं
आगरा। जनपद आगरा में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के सफलतापूर्वक संचालन के उद्देश्य से नियमित टीकाकरण माइक्रोप्लान को लेकर दो दिवसीय जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन एक निजी होटल में हुआ । अपर निदेशक चिकित्सा एवं परिवार कल्याण आगरा मंडल (एडी) डॉ.चंद्रशेखर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरूण श्रीवास्तव के निर्देशन में कार्यशाला का आयोजन डब्ल्यूएचओ के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में नगर के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, इम्यूनाइजेशन ऑफिसर (आईओ), ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम), स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर संयुक्त निदेशक (जेडी) डॉ. ज्योत्सना ने कार्यशाला के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी अपने कार्य क्षेत्र में छूटे हुए बच्चों व गर्भवती का शत प्रतिशत टीकाकरण कराना सुनिश्चित करें।
कार्यशाला में सीएमओ ने कहा कि गांवों की तुलना में नगरीय इलाके में व्यवस्थित व बेहतर रणनीति बनाने की बेहद आवश्यकता है। नगर की सभी पीएचसी, वार्ड व मोहल्ला के अनुसार एएनएम का क्षेत्र तय किया जाएगा। घर-घर जाकर हेड काउंट सर्वेक्षण होगा। उसके बाद प्रत्येक गांव, मजरा, टोला, शहरी क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड और मोहल्लों का माइक्रोप्लान तैयार किया जाएगा । इसके बाद बच्चों व गर्भवती की ड्यू लिस्ट तैयार की जाएगी। टीकाकरण से छूटे बच्चे व गर्भवती ट्रैक किए जाएंगे। बुधवार व शनिवार को होने वाले नियमित टीकाकरण सत्र व छाया नगरीय स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (यूएचएनडी) और ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस (वीएचएनडी) सत्रों तक बच्चों व गर्भवती को लाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं की ओर से घर-घर भ्रमण कर एवं पारस्परिक संपर्क कर सूचना दी जाएगी। हाई रिस्क वाले क्षेत्र जैसे मलिन बस्तियों, झुग्गी झोपड़ी, घुमंतू परिवार, निर्माण क्षेत्र, प्रवासियों आदि स्थलों पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा। बाल सुधार गृह, बाल मठ, विधवा गृह, मदरसा आदि स्थानों की सोशल मैपिंग कर टीकाकरण किया जाएगा।
शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. धर्मेश्वर श्रीवास्तव ने बताया कि ग्रामीण से नगर में आए क्षेत्रों का घर-घर सर्वेक्षण कर ड्यू लिस्ट तैयार की जाएगी। टीकाकरण के लिए रोटरी इंटरनेशनल , सिविल डिफेंस और डूडा का भी सहयोग लिया जाएगा। साथ ही समुदाय को जागरूक करने के लिए धर्मगुरु, प्रभावशाली व्यक्तियों, जन प्रतिनिधियों, महिला आरोग्य समिति के सदस्यों का भी सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनपद व ब्लॉक स्तर पर स्थापित कोल्ड चेन प्वोइंट की क्रियाशीलता सुनिश्चित कर ली जाए। कोल्ड चैन प्वाइंट वैक्सीन के भंडारण तथा तापमान का प्रभारी चिकित्सा अधिकारी स्वयं निरीक्षण करें और इसकी जानकारी लॉग बुक में पंजीकृत करें।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन (डीआईओ) ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अकोला, पिनाहट, नगरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जीवनी मंडी और नगरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोहामंडी द्वितीय नियमित टीकाकरण में आइडियल की तरह कार्य कर रहे । नगरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जीवनी मंडी में सबसे अच्छा आरआई माइक्रोप्लान, कार्य क्षेत्र से संबंधित मैपिंग बहुत अच्छे से की गई है, पूर्ण प्रतिरक्षित बच्चे की संख्या 94% है। नगरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लोहामंडी द्वितीय 90% से अधिक है । इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खंदौली का आरआई माइक्रोप्लान बहुत अच्छा है । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जगनेर वीपीडी सर्विलांस में बहुत अच्छा कार्य किया जा रहा है। सभी को इनसे से प्रेरणा लेनी चाहिए ।
डब्ल्यूएचओ एसएमओ डॉ. महिमा चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों को राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत ‘पाँच साल सात बार, छूटे न टीका एक भी बार’ पर विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही माइक्रोप्लान किस तरह तैयार करें, किन बिन्दुओं पर विशेष ज़ोर दिया जाए आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आउटब्रेक व प्रतिकूल प्रभाव के प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी। मिजल्स-रूबेला (एमआर), वैक्सीन से रोके जा सकने वाले रोग (वीपीडी) निगरानी, डिप्थीरिया और जीरो डोजर वैक्सीनेशन के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कराई गई । यूनीसेफ के जिला यूनिट कोऑर्डिनेटर राहुल कुलश्रेष्ठ ने सामुदायिक संचार गतिविधियों को बेहतर बनाने के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने टीकाकरण सत्र पर हर एक लाभार्थी को दिये जाने वाले चार प्रमुख संदेश के बारे में चर्चा की। इसमे पहला कौन सा टीका दिया गया और वह किस बीमारी से बचाता है। दूसरा अगले टीकाकरण के लिए कब और कहाँ आना है। तीसरा मामूली प्रतिकूल प्रभाव क्या है और उन्हें कैसे दूर करें। चौथा मातृ एवं शिशु सुरक्षा (एमसीपी) कार्ड को सुरक्षित रखें और अगले टीकाकरण पर जरूर लेकर आयें।
यूएनडीपी के वीसीसीएस शिव तिवारी द्वारा कार्यशाला में वैक्सीन से संबंधित ई-विन और यू-विन ऑनलाइन ऐप के बारे में प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी प्राप्त कराई । इस मौके पर डीपीएम कुलदीप भारद्वाज अपर शोध अधिकारी एस.पी सत्संगी सहित विश्व स्वास्थ्य संगठन के फील्ड मॉनिटर उपस्थित रहे