: चलने पर चक्कर या लड़खड़ाहट की समस्या है तो कान की जांच कराइये
Sun, Nov 10, 2024
• तीन दिवसीय 32वीं इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी की वार्षिक राष्ट्रीय कार्यशाला में आज प्रस्तुत किए गए 70 शोध पत्र, कल होगा समापन
आगरा। चलते-चलते लड़खड़ाकर गिर जाना या चक्कर आने की समस्या कान की बीमारी के कारण भी हो सकती है। जिसमें लापरवाही आपकी सुनने की क्षमता को प्रभावित करने के साथ बहरापन का कारण भी बन सकती है। न्यूरोलॉजी डिसऑर्डर, डायबिटीज, हृदय रोग के अलावा इस समम्या का सबसे बड़ा कारण (50-60 फीसदी) कान की समस्या है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी में आयोजित तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में कलकत्ता के डॉ. अनिरबन विस्वास ने बताया कि शरीर को संतुलित रखने और सुनने के यंत्र (नसें) दोनों पास-पास होते हैं। किसी एक में समस्या आने पर दूसरे में भी समस्या होने की सम्भावना बढ़ जाती है। 95 फीसदी मामलों में गलत इलाज किया जाता है। जिससे समस्या ठीक होने के बजाय जीवन भर की परेशानी बन सकती है।
डॉ. विस्वास ने बताया कि 50-60 वर्ष की उम्र के बाद लगभग 60 फीसदी लोगों में शरीर को संतुलित रखने की समस्या हो सकती है। परन्तु आजकल गलत जीवनशैली व स्ट्रेस के कारण 30 वर्ष की उम्र में भी इस तरह की परेशानी देखी जा रही है। शरीर में असंतुलन बढ़ने से व्यक्ति में असुरक्षा की भावना पैदा होने लगती है। सामान्यतः इलाज के नाम पर रोग को दबाने का काम किया जा रहा है। जिससे व्यक्ति में चिड़चिड़ापन, एंजायटी और डिप्रेशन की समस्या भी होने लगती है। जबकि कुछ मामलों में सिर्फ व्यायाम से ही समस्या ठीक हो सकती है। 50 की उम्र के बाद लोगों को फॉल प्रिवेंशन एक्सरसाइज अवश्य करनी चाहिए।
वहीं जयपुर से आए डॉ. ऋषभ जैन ने कहा कि सर्दी जुकाम में लापरवाही (सडन सेंसरी न्यूजल हेयरिंग लॉस) अचानक सुनने की क्षमता को कम कर रही है। कोविड के बाद ऐसे मामले दोगुने हो गए हैं। जिसका कारण वायरल इंफेक्शन या किसी तरह का ब्लड डिसआर्डर हो सकता है। कान में ब्लड सप्लाई की जटिल क्रिया में व्यवधान होने से सुनने की ऑडिटरी नस डेमेज हो जाती है। जिससे सोते-सोते चानक सुनना बंद हो जाता है। यदि सर्दी जिकाम होने पर अचानक सुनने की क्षमता में कमी या, कानों में सिटी जैसा बजना या बिल्कुल सुनाई देना बंद हो जाएं तो तुरन्त कान विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। यह बिल्कुल लकवा जैसी स्थिति है। प्रारम्भिक 24 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं इलाज के लिए। सात दिन के बाद इस समस्या का इलाज करने की सम्भावना कम हो जाती है।
टॉकिंग्स ग्लब्स बनेंगे मूक लोगों की आवाज, भारत ने पैटेंट कराया डिवायज
किसी बीमारी के कारण यदि आप अपनी आवाज खो बैठे हैं (आपके गले स् वॉयज बाॅक्स निकाला जा चुका है) तो अब आपकी आवाज टाकिंग ग्लब्ज बनेंगे। खास बात यह है कि यह मेड इन इंडिया है, जिसे पैटेंट करा लिया गया है। एम्स जोधपुर के डॉ. अमित गोयल द्वारा बनाए गए टॉकिंग ग्लब्स पहनकर कम्प्यूटर पर अंगुलियां चलाने की क्रिया की तरह आप अपनी बात को आवाज के साथ लोगों के सामने रख पाएंगे। डॉ. मित ने बताया कि डिवायज के लिए पैंटेंट ग्रांड हो चुका है। टॉकिंग ग्लब्स हर भाषा में बोलने में सक्षम होंगे, सिर्फ इसके प्रयोग के लिए दो महीने की ट्रेनिंग लेनी होगी। डॉ. अमित ने बताया कि वह सरकार की ओर से सर्जीकल डिवायज बनाने वाले डॉक्टरों व शोधार्थियों को डिवायज को पेटेंट कराने से लेकर मार्केट में लाने तक की भी ट्रेनिंग सरकार की मदद से जगह-जगह दे रहे हैं। बताया कि पिछले 10 वर्षों में बहुत से उपकरण है जिन्हें पहले आयात किया जाता था और अब हम उन्हें एक्सपोर्ट कर रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र में मेड इन इंडिया तेजी से छा रहा है।
10 नवम्बर को होगा समापन
फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी में आयोजित तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में आज 70 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। आयोजन सचिव डॉ. राजीव पचैरी ने बताया कि कार्यशाला में 300 से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। कार्यशाला में कनाडा, यूए, श्रीलंका, दुबई, इटली, बंगला देश) देश विदेश के 1200 से अधिक विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, जिसमें कान बीमारियों व उनके इलाज पर मंथन किया जा रहा है। 10 नवम्बर को दोपहर 12 बजे कार्यशाला का समापन समारोह आयोजित किया जाएगा।
संचालन डॉ. संजय खन्ना व एसएन मेडिकल कालेज ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. रितु गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के अध्यक्ष सतीश जैन, कोषाध्यक्ष डॉ. गौरव खंडेलवाल, मीडिया प्रबारी डॉ. आलोक मित्तल, डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता, डॉ. एलके गुप्ता, डॉ. मनीष सिंघल, डॉ. सलोनी सिंह बघेल आदि उपस्थित थे।
: 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग बनवा सकेंगे आयुष्मान कार्ड
Sat, Nov 9, 2024
जनपद में लगाए जाएंगे विशेष शिविर
ऑनलाइन व प्ले स्टोर से आयुष्मान भारत एप डाउनलोड करके भी बनवा सकते हैं आयुष्मान कार्ड
आगरा। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अब 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। जनपद आगरा के 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों का आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए योजना के अंतर्गत समस्त राजकीय एवं निजी चिकित्सालयों द्वारा विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल फोन में प्ले स्टोर से आयुष्मान भारत एप डाउनलोड कर एप की मदद से आयुष्मान कार्ड बना सकता है। इसके अलावा जन सेवा केंद्र, पंचायत सहायक,कोटेदार,आशा, आंगनबाड़ी एवं अन्य फील्ड लेवल वर्कर के माध्यम से आप अपना आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं।
योजना के नोडल अधिकारी डॉ. नंदन सिंह ने अपील की है कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए एकमात्र पात्रता मापदंड है कि व्यक्ति की आयु 70 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। आयु का निर्धारण आधार कार्ड में दर्ज आयु के आधार पर किया जाएगा।
ऐसे बनवाएं आयुष्मान कार्ड
आयुष्मान भारत योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmjay.gov.in या https://beneficiary.nha.gov.in पर जाना होगा, जहां पर विजिट करना होगा। आधार कार्ड में जन्मतिथि के आधार पर आवेदन हो सकेगा। इस पोर्टल पर स्पेशल कार्ड के लिए अलग से विंडो होगी। इसके साथ ही गूगल प्ले स्टोर से आयुष्मान ऐप डाउनलोड करके उसके जरिए भी आवेदन कर सकते हैं। इस ऐप में अलग से फीचर होगा, जिसके जरिए आवेदन किया जा सकेगा। ई-केवाईसी विकल्प के बाद नया कार्ड जनरेट हो जाएगा। आयुष्मान भारत योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmjay.gov.in या https://beneficiary.nha.gov.in के जरिये भी आवेदन कर सकेंगे।
: तीन दिवसीय 32वीं इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी की वार्षिक राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ
Fri, Nov 8, 2024
देश विदेश (कनाडा, श्रीलंका, बंगलादेश, दुबई यूएस, इटली आदि) से 1200 कान विशेषज्ञों ने कार्यशाला में की शिरकत
दूरबीन विधि से कान की लाइव एडवांस सर्जरी के साथ विशेषज्ञों ने समस्याओं के साथ एडवांस सर्जरी व इलाज पर की चर्चा
आगरा। सर्दी जुकाम में लारवाही आपको बहरा भी बना सकती है। चिकित्सक की सलाह के बिना जुकाम को रोकने के लिए ली गई दवाएं कान के पर्दे पर दबाव को बढ़ा देती हैं, जिससे कान के पर्दे में छेद होने की सम्भावना बढ़ जाती है। होटल जेपी में आयोजित तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में गाजियाबाद के डॉ. ओमवीर सिंह ने बताया कि कान के पर्दे में छेद के बाद स्राव होने पर लोग गंभीरता से नहीं लेते हैं। इससे कान की हड्डी तक गल जाती है। जिससे जान जाने तक का खतरा रहता है। सुनाई देना बंद हो जाता है। इस तरह के केस में कान की रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी की जाती है। गली हुई हड्डी को बदला जाता है, कान से ही हड्डी लेकर लगाई जाती है। इस तरह की सर्जरी अब बढ़ गई हैं।
वहीं गोरखपुर के डा. राजन भार्गव ने बताया कि कान में तीन हड्डी होती हैं, इन हड्डी से ही तरंग बनती हैं और सुनाई देता है। इससे आटोक्लोरोसिस की समस्या हो जाती है। 15 साल की आयु के बाद यह समस्या देखने को मिलती है। इसमें सर्जरी का इम्प्लांट के रूप में पिस्टन डाला जाता है। इसके बाद मरीज को सुनाई देने लग जाता है। उन्होंने बताया कि ज्यादा देर तक मोबाइल और ईयरफोन के इस्तेमाल से सुनने में समस्या होती है लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
सर्जरी से ठीक हो रहा चेहरे का लकवा
सड़क हादसे, चेहरे पर चोट लगने से चेहरे का लकवा हो रहा है। एम्स दिल्ली के ईएनटी विभाग के डॉ. आलोक थक्कर ने बताया कि इस तरह के केस में अब नई दवाएं आ गई हैं, सर्जरी से नर्व को रिपेयर कर दिया जाता है।
केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने किया कार्यशाला शुभारम्भ
आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ आटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारम्भ केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रो. सपी सिंह बघेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि चिकित्सकों के बीमारी व इलाज पर विचार, शोध का वैचारिक मंथन ने निकला अमृत समाज के काम आएगा। लोगों को इलाज व जटिल बीमारियों से निजात दिलाने में मददगार होगा। उन्होंने एसएन मेडिकल कालेज की गौरवमयी गाथा का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय था जब देश के जाने माने राजनेता यहां इलाज कराने आते थे। इस गौरवशाली पन्नों को पलटकर फिर पटल पर लाना है, जो ड़ाक्टरों के सहयोग के बिना सम्भव नहीं है।
अतिथियों का स्वागत करते हुए आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सतीश जैन ने कहा कि नई तकनीकों के इस आदान प्रदान के कुम्भ में डॉक्टरों की भावी पीढ़ी के साथ मरीजों को भी लाभ प्राप्त होगा। धन्यवाद ज्ञापन आयोजन सचिव डॉ. राजीव पचैरी ने किया। संचालन डॉ. संजय खन्ना व एसएन मेडिकल कालेज ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. रितु गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गौरव खंडेलवाल, मीडिया प्रभारी डॉ. आलोक मित्तल, डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता, डॉ. एलके गुप्ता, डॉ. मनीष सिंघल, डॉ. सलोनी सिंह बघेल आदि उपस्थित थे।
डॉ. राममूर्ति ने सम्भाला अध्यक्ष का पदभार
आईएसओ (इंडियन सोसायटी ऑफ आयोलॉजी) के नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ. राममूर्ति ने पदभार सम्भालते हुए सोसायटी के सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद दिया। आईएसओ के संस्थापक डॉ. केके रामलिंगन व निवर्तमान अध्यक्ष डॉ. रवि राम लिंगन ने डॉ. राममूर्ति, सचिव डॉ. इलेम भारती को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. एसपी सिंह बघेल ने महाराष्ट्र के डॉ. गोस्वामी को लाइफ टाइम अचीवमेंट व डॉ. वाईसी यादव, एसएन मेडिकल कालेज ईएनटी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरएस गिल, डॉ. केके रामलिंगन, डॉ. अबरार हसन को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।