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: जुकाम रोकने से गल सकती हैं कान की हड्डी

Pragya News 24

Sun, Nov 10, 2024
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  • तीन दिवसीय 32वीं इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी की वार्षिक राष्ट्रीय कार्यशाला में प्रस्तुत किए गए 300 शोध पत्र
  • 1200 प्रतिनिधियों ने कान की बीमारियों पर किया नई तकनीक व इलाज पर मंथन

आगरा। जुकाम में बेवजह दवा लेना खतरनाक हो सकता है। सामान्यतः जुकाम को रोकने के बजाय उसे बहने दें। स्वास्थ के लिए यही लाभकारी है। जुकाम रोकने पर कफ कान के रास्ते बाहर आने से कान बहने, बदबू व कान की हड्डी गलने तक की गम्भीर समस्या हो सकती है। कान की नसें खराब होने पर चेहरे पर टेड़ापन और सुनने में समस्या होने लगती है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी में आयोजित तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला में आज इंडियन सोसायटी ऑफ ऑटोलाजी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजेन्द्र (बैंगलुरू) ने बताया की कान की हड्डी गलने पर यदि ऑपरेशन ठीक तरह से न किया जाए तो समस्या दोबारा भी पैदा सकती है।
भटिंडा की डॉ. ग्रेस बुद्धिराजा ने बताया कि कान के ऑपरेशन भी माइक्रोस्कोप के बजाय एंडोस्कोप विधि से अधिक किए जा रहे हैं, जिससे ऑपरेशन के दौरान आने वाली जटिलताओं में कमी आ रही है। डॉ. धर्मेन्द्र गुप्ता ने बताया कि जुकाम सामान्यतः वायरस से होता है, जिसमें दवा नहीं मरीज को आराम करना चाहिए। जब तक कफ में पीलापन न हो जुकाम में दवा लेने की आवश्यकता नहीं है। कफ में पीलापन का मतलब है कि सैकेन्ड्री इनफेक्शन यानि बैक्टीरियल इनफेक्शन है। तभी एंडीबायटिक दवाओं का प्रयोग करना उचित है, वह भी डॉक्टर की सलाह से। बेवजह दवा लेने से कान में समस्या हो सकती है।

बच्चों की आंखों पर चश्मे की तरह कान में नजर आएगी हेयरिंग मशीन
समय रहते अभिभावकों ने ध्यान नहीं दिया तो आजकल के बच्चों की आंखों पर जिस तरह चश्मे नगर आ रहे हैं, कानों में हेयरिंग मशीन नजर आएगी। घंटों तक ईयर फोन लगाकर तेज आवाज में म्यूजिक सुनना, डीजे और बढ़ता ध्वनि प्रदूषण कानों की सुनने की क्षमता पर असर डाल रहा है। कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ. राजीव पचैरी ने जानकारी देते हुए बताया कि कम से कम 10-12 वर्ष की उम्र तक बच्चों को ईयर फोन, हेड फोन जैसे उपकरणों से दूर रखना चाहिए। भविष्य में बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से यह घातक हो सकता है।

ताजनगरी में पहली बार सम्पन्न हुई ऑटोलॉजी की सफल कार्यशाला
उप्र में पहली बार ऑटोलॉजी की कार्यशाला सम्पन्न हुई है। जिसका सौभाग्य ताजनगरी को मिला। तीन दिवसीय आईसोकॉन (इंडियन सोसायटी ऑफ आटोलॉजी) की 32वीं राष्ट्रीय वार्षिक कार्यशाला के सफलता पूर्वक सम्पन्न होने पर आयोजन सचिव डॉ. राजीव पचैरी ने सभी सहयोगियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर धन्यवाद देते हुए यह बात कही। आज कार्यशाला में आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. सतीश जैन द्वारा शांतिवेद हॉस्पीटल से 8 लाइव ऑपरेशन भी किए गए। कार्यशाला में देश विदेश से 1200 से अधिक प्रतिनिधियों ने कान की बीमारी व एडवांस इलाज पर मंथन किया। 300 से अधिक शोधपत्र व पीजी विद्यार्थियों के लिए क्विज का आयोजन किया गया। सभी विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। संचालन डॉ. संजय खन्ना व डॉ. रितु गुप्ता ने किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. गौरव खंडेलवाल, डॉ. आलोक मित्तल, डॉ. राकेश अग्रवाल, डॉ. मनीष सिंघल, डॉ. एलके गुप्ता, डॉ. दीपा पचैरी आदि उपस्थित थे।

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