: श्वास रोगी डॉक्टर की सलाह पर सही से लें इन्हेलर
Thu, Oct 24, 2024
एसएन मेडिकल कॉलेज में रेस्पिरेटरी मेडिसिन के पीजी छात्रों के लिए आयोजित हुई प्रतियोगिता
प्रदेश के सरकारी व प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों को छात्रों ने किया प्रतिभाग
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में नई सर्जीकल बिल्डिग के प्रथम तल पर स्थित एमआरयू ऑडिटोरियम में बुधवार को रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विद्यार्थियों के लिये एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग द्वारा किया गया। इस प्रतियोगिता में प्रदेश के 11 सरकारी एवं प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के कुल 37 पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ एसएन मेडिकज के प्रधानाचार्य डा. प्रशांत गुप्ता द्वारा किय गया। अपने प्रोत्साहन भाषण में प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुये, उन्होंने क्षय एवं श्वास रोगों के मरीजों के उपचार के लिये आधुनिक तरीकों के साथ पारम्परिक चिकित्सा विज्ञान के मूल मंत्रों को उपयोग करने हेतु छात्रों को प्रेरित किया। यह प्रतियोगिता नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिसियन्स (इण्डिया) के द्वारा आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की पल्मोनरी मेडिसिन की प्रतियोगिता है जो इस वर्ष नवम्बर, 2024 में कोयम्बटूर में आयोजित होनी है, की स्क्रीनिंग के लिये थी।
रेस्पिरेटरी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष एवं नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिसियन्स (इण्डिया) के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य डा. गजेन्द्र विक्रम सिंह ने बताया कि इस प्रतियोगिता के बाद प्रथम दो विजेताओं को राष्टीय स्तर की प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने का मौका मिलता है। डा. सिंह ने बताया कि इस वर्ष एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा को यह प्रतियोगिता आयोजित करने का पहली बार मौका मिला है, जिसमें प्रदेश में अब तक आयोजित प्रतियोगितायों में सार्वाधिक 37 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया।
आचार्य डा. सन्तोष कुमार द्वारा इस अवसर पर श्वास रोगियों द्वारा सही से इनहेलर लेने पर प्रकाश डाला गया। सह-आचार्य डा. वीएन सिंह द्वारा अस्थमा के बारे में वैज्ञानिक तथ्य प्रस्तुत किये गये। इस प्रतियोगिता में किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ के छात्र डा. अभिषेक शुक्ला तथा एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा के रेस्पिरेटरी मेडिसिन की डा. दिव्या त्यागी ने क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता के सफल संचालन में विभाग के सीनियर रेजीडेंट डा. अरविन्द एवं डा. अर्पित ने विशेष योगदान दिया।
: आयोडीन नमक, गर्भवती और बच्चों के लिए वरदान
Mon, Oct 21, 2024
विश्व आयोडिन अल्पता विकार दिवस पर सीएचसी फतेहपुर सीकरी में हुई साप्ताहिक समीक्षा बैठक
एएनएम और आशा ने घर-घर जाकर गर्भवती और धात्री महिलाओं को आयोडिन नमक के बारे में दी जानकारी
आगरा। जिले में विश्व आयोडीन अल्पता विकार दिवस के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फतेहपुर सीकरी में ब्लॉक साप्ताहिक समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इसमें आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से संबंधित जागरूकता बढ़ाने की जानकारी दी गई।
21 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व आयोडिन अल्पता विकार दिवस पर आयोडीन के पर्याप्त उपयोग के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने और आयोडीन की कमी के परिणामों पर प्रकाश डालना उद्देश्य है। दिवस पर संडीगुड़ उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले कार्य क्षेत्र में एएनएम वैशाली तिवारी और आशा कार्यकर्ता क्षमारानी ने गृह भ्रमण करके गर्भवती और धात्री माताओं को आयोडीन युक्त नमक और आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों के बारे में जागरूक किया । एएनएम और आशा कार्यकर्ता ने भ्रमण गतिविधि के माध्यम से गर्भवती और धात्री माताओं को आयोडीन के महत्व और इसकी कमी से होने वाली समस्याओं के बारे में बताया। उन्हें आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों के बारे में जानकारी दी। साथ ही आयोडीन की कमी से होने वाले लाभ और हनिया के बारे में भी जानकारी दी के द्वारा गृह भ्रमण करके गर्भवती और धात्री को बताया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि आयोडीन नमक गर्भवती महिला और बच्चों के लिए वरदान है। आयोडीन की कमी से गर्भस्थ शिशु के विकास में समस्याएं हो सकती हैं, जैसे कि मानसिक और शारीरिक विकास में देरी, जन्म के समय कम वजन और गर्भपात का खतरा। आयोडीन युक्त नमक के सेवन से गर्भवती महिला और बच्चों में आयोडीन की कमी को दूर किया जा सकता है।
एसीएमओ आरसीएच/ अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि आयोडीन एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है जो मानव वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे मंदबुद्धि, मानसिक मंदता, बच्चों में संज्ञानात्मक विकास की गड़बड़ी और मस्तिष्क की क्षति, थायरॉयड ग्रंथि का बढ़ना, तंत्रिका-पेशी और स्तैमित्य, गर्भवती महिलाओं में समस्याएं, गर्भपात, नवज़ात शिशुओं का वज़न कम होना, शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होना आदि। उन्होंने बताया कि आयोडीन युक्त नमक का सेवन करने से इन हानियों को रोका जा सकता है। आयोडीन युक्त नमक का सेवन करने से हमारे शरीर में आयोडीन की कमी नहीं होती है और हम स्वस्थ रहते हैं।
इस मौके पर अधीक्षक पीयूष अग्रवाल, विश्व स्वास्थ्य संगठन की एसएमओ डॉ. महिमा चतुर्वेदी, एचईओ पंकज जायसवाल, बीपीएम सतेंद्रपाल सिंह, डब्ल्यूएचओ के फील्ड मॉनिटर नरेश कुमार, एएनएम सहित आशा कार्यकर्ता मौजूद रही ।
आयोडीन युक्त नमक का सेवन न करने से हो सकती कई हानियां :
गर्भवती महिलाओं में:
गर्भपात का खतरा
नवज़ात शिशुओं का वज़न कम होना
शिशु का मृत पैदा होना
जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु
बच्चों में:
मानसिक मंदता
संज्ञानात्मक विकास की गड़बड़ी
मस्तिष्क की क्षति
शारीरिक विकास में देरी
: टीकाकरण गंभीर रोगों से रोकथाम की कुंजी
Thu, Oct 17, 2024
वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज सर्विलांस वर्कशॉप का हुआ आयोजन
सुरक्षा से बेहतर विकल्प है रोकथाम (बचाव)
आगरा। जनपद में गुरुवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिन्हित की जाने वाली सबसे आम और गंभीर वैक्सीन-रोकथाम योग्य बीमारियों से संबंधित जिला स्तरीय वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज सर्विलांस वर्कशॉप का आयोजन संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग आगरा डॉ. ज्योत्सना सिंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आगरा के एक निजी होटल में हुआ।
इस मौके पर संयुक्त निदेशक (जेडी) डॉ. ज्योत्सना ने कार्यशाला के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि हम टीकों की मदद से बच्चों को कई गंभीर बीमारियों बचाव कर सकते हैं। बच्चों के टीकाकरण के समय अभिभावकों को यह जानकारी जरूर देनी चाहिए कि कौन सा टीका लगाया गया है और किस बीमारी से बच्चों का बचाव करेगा । माता-पिता को बच्चों को समय से टीकाकरण करने के लिए अवश्य प्रेरित करें और समझाएं कि अपने बच्चों को स्वस्थ रखने में मदद करे, इसलिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का पालन करना हमारे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम हमारे देश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं और गर्भवती को टीके-रोकथाम योग्य बीमारियों से बचाव करना है, जिससे अंडर-5 मृत्यु दर में कमी आती है। टीकाकरण के महत्व को समझने के लिए, यह जानना जरूरी है कि टीके कैसे काम करते हैं, जिससे वे बीमारी का कारण नहीं बनते हैं। जब हम टीका लगवाते हैं, तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली उस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार हो जाती है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि टीकाकरण के माध्यम से डिप्थीरिया, खसरा, पोलियोमाइलाइटिस, रुबेला, टेटनस जैसी बैक्टीरियल व वायरल बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है। रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर विकल्प है। हम सभी को इसे अपनाना चाहिए। अन्यथा यह रोग होने पर गंभीर परिणामों को भुगतना पड़ता है। इस मौके पर डॉ. अर्बन नेशनल हेल्थ मिशन के नोडल अधिकारी डॉक्टर धर्मेश्वर श्रीवास्तव ने कार्यशाला के प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी अपने कार्य क्षेत्र के बच्चों व गर्भवती का शत प्रतिशत टीकाकरण कराना सुनिश्चित करें।
कार्यशाला की प्रतिभागी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मेघना शर्मा ने बताया कि आयोजित प्रशिक्षण में वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज के बारे में अद्यतन जानकारी मिली और वे अपने क्षेत्र में इन बीमारियों की निगरानी में और भी सुधार कर सकेंगी साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों को भी इन बीमारियों के प्रति जागरूक जागरूक करेगी।
इस कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, चिकित्सकों और इम्यूनाइजेशन ऑफिसर (आई.ओ) सहित 63 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षित के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन की एसएमओ डॉ. महिमा चतुर्वेदी ने वैक्सीन प्रिवेंटेबल डिजीज जैसे डिप्थीरिया, खसरा, काली खांसी, पोलियोमाइलाइटिस, रूबेला और टिटनेस पर चर्चा की। उन्होंने इन बीमारियों के लक्षणों, निदान और उपचार पर जानकारी दी। डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यशाला में डीपीएम कुलदीप भारद्वाज, डॉ. एसके राहुल, अर्बन कोऑर्डिनेटर आकाश गौतम व अन्य मौजूद रहे।
कुछ महत्वपूर्ण टीके:
हैपेटाइटिस बी: जन्म के समय दिया जाने वाला टीका
डिप्थीरिया, टिटनेस, पोलियो: बचपन में दिए जाने वाले टीके
काली खांसी: बचपन में दिया जाने वाला टीका
रूबेला: गर्भवती महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण टीका