: वीएचएसएनडी को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए सीडीओ ने की समीक्षा बैठक
Sat, Dec 14, 2024
छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस पर सभी विभागों का सहयोग महत्वपूर्ण- सीडीओ
वीएचएसएनसी के अनटाइड फण्ड के यूटिलाइजेशन के लिए सीडीओ ने दिए निर्देश
आगरा । राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) के सफल क्रियावन के लिए विकास भवन स्थित सभागार में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने बैठक में कहा कि ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति से समुदाय को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों पर नेतृत्व करने की परिकल्पना करता है। यह तभी संभव होगा जब समुदाय स्वास्थ्य के मामलों में नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त रूप से सशक्त हो। स्पष्ट रूप से इसमें स्वास्थ्य प्रणाली के प्रबंधन में पंचायती राज और संस्थाओं की भागीदारी की आवश्यकता है। ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की मुख्य जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, स्वच्छता और पोषण को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना है।
सीडीओ ने ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हुए कहा कि ग्राम प्रधान,एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा प्रतिमाह वीएचएसएनसी बैठक का आयोजन किया जाए साथ ही एएनएम के द्वारा बैठक के रजिस्टर पर आयोजित बैठक की रूपरेखा और मिनिट्स लिखे जाएं। इसी क्रम में सीडीपीओ के द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि किस-किस ग्राम पंचायत में बैठक का आयोजन हुआ है या नहीं दोनों परिस्थितियों में इसकी सूचना डीपीओ को दी जाए। अगर बैठक आयोजित हुई है तो उसमें अनटाइड फण्ड के यूटिलाइजेशन से संबंधित चर्चा की गई और अनटाइड फण्ड को किन-किन मुद्दों पर खर्च किया जाएगा। इसके पश्चात सीडीपीओ को महीने के अंत में कंपाइल रिपोर्ट बनाकर डीपीओ को प्रेषित करने के संदर्भ में निर्देश दिए।
सीडीओ ने अनटाइड फण्ड के माध्यम से जिस भी आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर उपयोग होने वाली सामग्री नहीं है, ऐसे केंद्रों पर उन्होंने तत्काल अनटाइड फण्ड से उपयोगी वस्तुओं को खरीद कर संदर्भित करने के लिए निर्देश दिए। आयुष्मान आरोग्य मंदिर की देख- रेखा और स्वच्छता में उपयोग होने वाली सामग्री को खरीदने के लिए अनटाइड फण्ड को खर्च किया जाए वीएचएसएनडी के सफल क्रियावन के लिए फण्ड के माध्यम से बच्चों के लिए वजन मशीन, वयस्कों के लिए वजन मशीन, टेबल, चेयर, केंद्र की पुताई, आयुष्मान आरोग्य मंदिर के स्वच्छता और रखरखाव में उपयोग होने वाली वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं जिस समुदाय और स्वास्थ्य केंद्र का समन्वय बना रहे। समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा कर हम आयुष्मान आरोग्य मंदिर को आइडियल बना सकते हैं। वीएचएसएनडी को सफल बनाने सभी विभागों का सहयोग महत्वपूर्ण है, मैं आशा करती हूं सभी विभाग इसके लिए अपनी जिम्मेदारियां का नियम अनुसार पालन करेंगे।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन, जिला पंचायती राज अधिकारी श्री मनीष, जिला कार्यक्रम अधिकारी हरीश मौर्य, डब्ल्यूएचओ से एसएमओ डॉ. महिमा चतुर्वेदी, डीपीएम कुलदीप भारद्वाज, यूनिसेफ से रीजनल कोऑर्डिनेटर अरविंद शर्मा, यूनिसेफ के डीएमसी राहुल कुलश्रेष्ठ, समुदाय स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी व सीडीपीओ मौजूद रहे।
: पीएमएसएमए योजना आई काम, 81488 गर्भवती ने कराई प्रसव से पहले जांच
Sat, Dec 14, 2024
हर महीने की 1, 9, 16, 24 तारीख को आयोजित होता है पीएमएसएमए दिवस
स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरुक करते हुए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है उद्देश्य
आगरा। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना है। योजना के अंतर्गत गर्भवती को उनकी गर्भावस्था के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती है। अप्रैल से नौ दिसंबर तक जिले की 81488 गर्भवती ने पीएमएसएमए दिवस पर प्रसव पूर्व जांच कराई। दिवस का उद्देश्य गर्भवती को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।
प्रत्येक महीने की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को पीएमएसएमए दिवस का आयोजन होता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए पीएमएसएमए दिवस का आयोजन किया जाता है। इसमें गर्भवती की दूसरे व तीसरे त्रैमास में एमबीबीएस डॉक्टर से प्रसव पूर्व जांच कराई जाती है। इसका आयोजन स्वास्थ्य इकाईयों पर किया जाता है और गर्भवतियों की प्रसव पूर्व जांच करके उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान की जाती है साथ ही संदर्भित भी किया जाता है।
एसीएमओ आरसीएच डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि पीएमएसएमए दिवस में गर्भवती की प्रसव पूर्व हीमोग्लोबिन, शुगर, यूरिन जांच, ब्लड ग्रुप, एचआईवी, सिफ़लिस, टीबी, हेपेटाइटिस बी, वजन, ब्लड प्रेशर एवं अन्य जांच की जाती हैं। एचआरपी युक्त गर्भवती की पहचान करके संदर्भित किया जाता है। गर्भवती को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। ई-रुपी वाउचर के जरिये गर्भवती को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच की सुविधा मिल रही।
जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता संगीता भारती बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक पीएमएसएमए दिवस पर जिले की 1.19 लाख गर्भवती ने प्रसव पूर्व जांच कराई। इसमें 13100 उच्च जोखिम वाली गर्भवती को चिह्नित किया गया। इन्हीं चिह्नित उच्च जोखिम वाली गर्भवती को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में जनपद के एफआरयू पर जांच संदर्भित किया गया।
यूपीएचसी हरीपर्वत वेस्ट की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीनम चतुर्वेदी ने बताया कि ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को प्रसव पूर्व चार जांच कराना अति आवश्यक है l आयरन और कैल्शियम की टेबलेट लेने के साथ-साथ गर्भवती को पौष्टिक आहार और मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए l पीएमएसएमए दिवस पर उच्च जोखिम वाली गर्भवती को चिन्हित करके संदर्भित भी किया जाता है और कुछ गर्भवती को एनीमिया से बचाव के लिए आयरन सुक्रोज भी दिया जाता है|
आवास विकास सेक्टर-2 की निवासी 31 वर्षीय कृष्णा बताती है कि मेरा आठवां महीना चल रहा है और यह मेरा दूसरा बच्चा है। जब मैं घर के काम करती थी तो मुझे थकान हो जाती थी और मेरी सांस भी फूलने लगती थी। मेरे क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता ने मुझे सलाह दी कि मैं स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी जांच करा लूं । मैंने यूपीएचसी हरीपर्वत में स्टाफ नर्स संध्या यादव से अपनी जांच कराई। मेरा हीमोग्लोबिन 8 था। उन्होंने बताया कि आप में खून की कमी है,फिर मुझे अच्छे से समझाया और पौष्टिक आहार का सेवन करने और समय-समय पर नियमित अपनी जांच करने की सलाह दी साथ ही उन्होंने परिवार नियोजन से संबंधित भी जानकारी दी। वर्तमान समय में मेरा हीमोग्लोबिन 10 हो चुका है। मैं चिकित्सक की सलाह के अनुसार सभी कार्य नियम से कर रही हूं और सबसे अच्छा यह है कि मेरे घर के नजदीक मुझे सारी स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो रही हैं। पौष्टिक आहार का सेवन करने और समय-समय पर नियमित अपनी जांच करने की सलाह दी। मैं चिकित्सक की सलाह के अनुसार सभी कार्य नियम से कर रही हूं।
बोदला निवासी 24 वर्षीय गर्भवती सुरभि बताती है कि मेरा पहले मिसकैरेज हो चुका है इसलिए मैंने आशा कार्यकर्ता की सलाह से स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सक डॉ. वीनम चतुर्वेदी से संपर्क करके अपने बारे में जानकारी दी। उन्होंने मुझे बताया कि मिसकैरेज के बाद दोबारा गर्भावस्था के दौरान आपको विशेष सावधानियां बरतनी होंगी। आपको अपने चिकित्सक से नियमित रूप से परामर्श करना चाहिए और उनकी सलाह का पालन करना चाहिए। आपको अपने आहार पर ध्यान देना होगा। आपको पौष्टिक आहार लेना चाहिए जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और प्रोटीन शामिल हों। आपको पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। नींद आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आपको नियमित जांच करानी चाहिए। नियमित जांच से आपके गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की निगरानी की जा सकती है।
वित्तीय वर्ष में अप्रैल से नौ दिसंबर 2024 तक प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के जिला स्तरीय आंकड़े-
81488 जांच के लिए आई गर्भवती
81488 गर्भवती की जांच की गई
9150 उच्च जोखिम वाली गर्भवती चिन्हित हुई व उन्हें संदर्भित किया गया
28881 क्यूआर कोड जनरेट किए
11634 वाउचर रिडीम हुए
13634 जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल), (एसएन मेडिकल कॉलेज और 81 निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र) में अल्ट्रासाउंड हुए ।
: युवा ज्ञान और शक्ति से डेंगू मिटेगा बस्ती से
Wed, Dec 11, 2024
युवाओं के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने 200 हाई रिस्क बस्तियों में डेंगू का प्रसार किया नियंत्रित
200 बस्तियों में पहले मिले 16 डेंगू मरीज, अब केवल एक मिला
आगरा, 11 दिसंबर 2024। गढ़ी हुसैनी, सीतानगर, नगला भारती, सराय मलूक चंद, सराय ख्वाजा, मोहनपुरा, जेपी नगर, इस्लामनगर, बापू नगर जैसी 200 हाई रिस्क बस्तियों को स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबेड परियोजना के प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय युवाओं के सहयोग से डेंगू के प्रसार को नियंत्रित किया। वर्ष 2023 में इन 200 हाई रिस्क बस्तियों में 16 डेंगू के मरीज मिले थे, जबकि 2024 में इन बस्तियों में केवल एक ही डेंगू का मरीज मिला है। यह कमाल स्वास्थ्य विभाग के साथ काम कर रहे सीतानगर निवासी ओम गुप्ता और गढ़ी हुसैनी निवासी ज्योति कुमारी जैसे युवा स्वयंसेवकों ने कर दिखाया है। उन्होंने दिखाया कि क्षेत्रीय नागरिकों की जागरुकता से क्षेत्र को सुरक्षित और रोगमुक्त बनाया जा सकता है।
गढ़ी हुसैनी निवासी ज्योति कुमारी बताती हैं कि वह पढ़ाई कर रही हैं। इसके साथ ही वह स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबेड संस्था के साथ अपने क्षेत्र में मच्छर जनित बीमारियों के उन्मूलन के लिए भी युवा स्वयंसेवक के रूप में कार्य करती हैं। उन्होंने बताया कि सबसे पहले हमने अपने घर को मच्छर जनित रोगों से मुक्त किया। इसके लिए अपने घर के आस-पास के 200 मीटर के दायरे में मच्छरों के पनपने के कारणों जैसे- गमलों, टायरों और कूलर में भरे साफ पानी को हटाया। इसके बाद में अपने क्षेत्र में भी यही प्रक्रिया दोहराई। उन्होंने बताया कि पहले उनके क्षेत्र में दो डेंगू के मरीज मिले थे, लेकिन इस साल एक भी डेंगू का मरीज नहीं मिला है।
सीतानगर निवासी ओम गुप्ता ने बताया कि हमने अभियान के तहत लोगों को जागरुक किया। उन्हें बताया कि साफ पानी में डेंगू का मच्छर पनपता है। इससे बचाव के लिए अपने क्षेत्र में पानी का जमाव न होने दें। इसके साथ ही टीम के साथ क्षेत्र में मच्छरों के लार्वा को ढूढ़कर उनका सोर्स रिडक्शन कराया। दो माह से मेरे क्षेत्र में मच्छर जनित रोगों से संबंधित कोई केस नहीं आया है मैं आशा करता हूं कि यह स्थिति लगातार बनी रहे।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जनपद आगरा के शहरी क्षेत्र में डेंगू , मलेरिया, चिकनगुनिया जैसे मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए जनपद आगरा में फैमिली हेल्थ इंडिया गोदरेज और ज़िला स्वास्थ्य समिति के सहयोग से एंबेड संस्था मच्छर जनित बीमारियों के उन्मूलन परियोजना का संचालन 2022 से कर रही है। इस परियोजना में क्षेत्रीय युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उन्हें स्वयंसेवक बनाया गया और उनको प्रशिक्षित कर विभाग की टीम और एंबेड संस्था के सदस्यों ने विभिन्न स्तर पर अभियान चलाकर 200 हाई रिस्क बस्तियों से डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया जैसे रोगों का उन्मूलन किया।
वेक्टर बॉर्न रोगों के नोडल अधिकारी डॉ. एसएम प्रजापति ने बताया कि एंबेड संस्था जनपद में 357 लक्षित मलिन बस्तियों में मच्छर जनित बीमारियों के उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग का सहयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा 200 हाई रिस्क बस्तियों को चिन्हित कर उनमें विशेष अभियान संचालित किया गया। इसमें क्षेत्रीय युवा स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई और हमें मच्छर जनित रोगों की रोकथाम में सफलता प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि जिन हाईरिस्क 200 बस्तियों में साल 2023 में 16 डेंगू के मरीज मिले थे, उनमें साल 2024 में केवल एक ही डेंगू का मरीज मिला।
जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि एंबेड संस्था की बिहेवियर चेंज कम्युनिकेशन फेसिलिटेटर नीरज कुमारी और श्वेता के द्वारा हाई रिस्क बस्तियों में युवाओं का चिन्हांकन करके उन्हें सिविक एक्शन कार्यक्रम के तहत विगत वर्ष जिन बस्ती में डेंगू के मरीज पाए गए उन बस्ती को सिविक एक्शन कार्यक्रम में शामिल किया गया और बस्ती के युवाओं को संचारी रोग की जानकारी बैठकों के माध्यम से युवाओं को दी गई । उन्हें मच्छर पनपने के कारणों, मच्छर जनित रोगों, डेंगू के लार्वा और उसका सोर्स रिडक्शन करने के बारे में प्रशिक्षित किया गया। इसके बाद क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों में युवा स्वयंसेवकों को शामिल करके लोगों को जागरुक किया गया। एफएचआई संस्था ( फैमिली हेल्थ इंडिया), एंबेड परियोजना के प्रतिनिधियों के द्वारा मच्छर जनित रोगों और डेंगू बचाव और जागरूकता गतिविधियों में सहयोग किया जा रहा है। एफएचआई, फैमिली हेल्थ इंडिया संस्था, एंबेड परियोजना के सिटी कोऑर्डिनेटर इरशाद खान, यूथ कोऑर्डिनेटर मोहित शर्मा, बीसीसीएफ कार्यकर्ता और युवा स्वयंसेवक के द्वारा मच्छर जनित रोगों और डेंगू बचाव जागरूकता गतिविधियों में सहयोग किया जा रहा है।
सहायक मलेरिया अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम और एंबेड परियोजना के कार्यकर्ताओं ने हाई रिस्क बस्तियों में सर्वे करके, सामुदायिक बैठकों का आयोजन करके लोगों को मच्छर जनित रोगों और उनसे बचाव के संबंध में लोगों को जागरुक किया। लोगों को बताया कि अपने आसपास पानी को जमा न होने दें, क्योंकि यहीं पर मच्छर पनपते हैं। इसके साथ ही इन बस्तियों में अभियान चलाकर युवा स्वयंसेवकों और टीम के द्वारा कूलर, गमलों, टायरों मं भरे पानी को साफ किया। इसके साथ ही 800 घरों में डेंगू का लार्वा चिन्हित करके उसका सोर्स रिडक्शन किया गया। साथ में नगर निगम के सहयोग से इन बस्तियों में तय रोस्टर के तहत एंटी लार्वा का छिड़काव भी कराया गया। उन्होंने बताया कि अभी आगरा में 32 मलिन बस्तियों में 32 स्वयं सेवक दैनिक तौर पर कार्य कर रहे हैं। जबकि लगभग 1200 युवा स्वयं सेवक इस कार्यक्रम से जुड़े हुए हैं जो समय समय पर सुविधानुसार संचारी रोगों से बचने के लिए मुहिम का हिस्सा हैं।
आप भी अपने क्षेत्र को मच्छर जनित रोगों से बचाएं -
अपने घर के 200 मीटर के आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखें और कहीं भी पानी जमा न होने दें। पानी जमा होने से मच्छर पनपते हैं।
सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, विशेष रूप से उन जगहों पर जहां मच्छर अधिक होते हैं।
मच्छरों से बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े और लंबी पैंट पहनें।
घर में मच्छर भगाने वाले इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग करें, जैसे कि लिक्विड रिपेलेंट मशीनें।
घर के दरवाजों और खिड़कियों पर मच्छरदानी या जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सकें।
पानी के टंकी, बाल्टी और अन्य पानी के बर्तन को ढक कर रखें।
सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं द्वारा समय-समय पर मच्छर जनित रोगों की जांच कराएं और किसी भी असामान्य लक्षणों पर ध्यान दें।