: खांसी-जुकाम की तरह मानसिक समस्याओं का भी उपचार
Mon, Sep 9, 2024
मानसिक तनाव होने पर चिकित्सक से करें संपर्क
टेलीमानस हेल्पलाइन नंबर- 14416 पर कर सकते हैं कॉल
10 सितंबर को जनपद में मनाया जाएगा विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस
आगरा। मंगलवार को जनपद में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरुक करने के लिए जनपद में विभिन्न जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाया जाता है। जनपद में 10 से 16 सितंबर तक विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह मनाया जाएगा। इसके तहत जनपद में पूरे सप्ताह विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. पियूष जैन ने बताया कि विश्व आत्महत्या रोकथाम सप्ताह के दौरान स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों एवं कोचिंग संस्थानों में आत्महत्या के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही गत वर्ष शुरू हुए लेट्स टॉक अभियान के अंतर्गत किशोर-किशोरियों एवं बच्चों के मानसिक स्वास्त्य के लिए शैक्षणिक संस्थानों में अभियान भी संचालित किया जाएगा।
जिला अस्पताल की नैदानिक मनोवैज्ञानिक ममता यादव ने बताया कि मानसिक समस्या किसी को भी हो सकती है, इसका भी खांसी, बुखार सहित अन्य बीमारियों की तरह उपचार उपलब्ध है। यदि किसी को मानसिक तनाव हो तो वह टेली मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 पर कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं। टेलीमानस का उद्देश्य पूरे देश में चौबीसों घंटे निःशुल्क टेली मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसमें 24 घंटे काउंसलर उपलब्ध रहते हैं, जो काउंलिंग करते हैं। यहां पर कॉल करने वाले लोगों की पहचान को गोपनीय रखा जाता है।
ममता यादव ने बताया कि यदि किसी को काम में मन न लगना, लगातार तनाव रहना, अकेले रहना, जीवन समाप्त करने के विचार आना जैसी समस्या आएं तो जिला अस्पताल के कमरा नंबर 202 और 203 में परामर्श ले सकते हैं। उन्होंने लोगों को आत्महत्या प्रवृति और मानसिक समस्याओं के प्रति जागरुक होने की आवश्यकता है। यदि आपके आस-पास कोई आम से भिन्न व्यवहार करने लगे, जैसे- सामाजिक जीवन से कटना, सोशल मीडिया से अचानक दूर होना, लगातार अकेले रहना तो सचेत हो जाएं और उससे बात करने का प्रयास करें। उन्हें सुनें और अपने आसपास के नैदानिक मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक को दिखाएं।
तीन महीने तक लगातार दिखें ये लक्षण तो हो जाएं सचेत
घबराहट होना ।
किसी काम में मन न लगना।
अकेले रहना।
किसी से मिलने का मन न करना।
मन उदास रहना।
सब कुछ खत्म हो गया जैसे विचार आना
: जिले में क्षय रोग के उन्मूलन के लिए जागरूकता रैली का आयोजन
Mon, Sep 9, 2024
राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम: एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान का आगाज
रैली निकालकर एसीएफ अभियान का हुआ शुभारंभ, 20 सितंबर तक चलेगा अभियान
आगरा। जिले में 9 से 20 सितंबर तक राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम तहत एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) अभियान का आगाज हो गया है। अभियान के सफल क्रियान्वयन और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय से जागरूकता रैली का आयोजन आयोजन किया गया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने रैली को हरी झंडी दिखाकर एसीएफ अभियान का शुभारंभ किया ।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि एक्टिव केस फाइंडिंग का आयोजन 9 से 20 सितंबर तक किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्षय रोग के एक्टिव मामलों की पहचान करना और उन्हें उचित उपचार प्रदान करना है। उन्होंने आम जनता से अपील करते हुए कहा है कि राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सामुदायिक भागीदारी महत्वपूर्ण है क्योंकि आप जागरूक होंगे तो समाज जागरूक होगा टीबी से बचाव के लिए जागरूकता बहुत जरूरी है । सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जाए और लोगों को क्षय रोग के उन्मूलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए। अपने आसपास के लोगों को भी अवश्य जागरूक करें । स्वास्थ्य विभाग की टीम आपके घर आए तो लक्षणों के आधार पर सही जानकारी अवश्य प्राप्त कराए और टीमों का सहयोग करें जिससे कोई भी संभावित टीबी मरीज उपचार से वंचित न रहे ।
बांझपन की समस्या से जूझ रहीं महिलाएं भी कराएं जांच
डीटीओ ने बताया कि वह महिलाएं भी अपनी टीबी की जांच कराएं जो बांझपन की समस्या से जूझ रही हैं, ऐसी महिलाओं को भी टीबी होने का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपको दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी आ रही है या बुखार की समस्या है, बलगम में खून आता है, भूख कम लगती और वजन तेजी से कम हो रहा है, रात में पसीना आता, गले में कोई गांठ (लिम्फनोड) है। ऐसे में एसीएफ अभियान के दौरान घर पर दस्तक देने वाली स्वास्थ्य विभाग की टीम को जानकारी जरूर दें। आपको टीबी हो सकती है। अधिक जानकारी के लिये सम्पर्क करें राष्ट्रीय टोल फ्री नम्बर 1800116666
संभावित क्षय रोगियों को खोजे जाने हेतु क्षय रोग के लक्षण
दो सप्ताह से अधिक खाँसी
दो सप्ताह से अधिक बुखार
बलगम में खून आना
भूख में कमी
वजन का कम होना
रात में पसीना आना
गले में गांठ (लिम्फनोड)
महिलाओं में बांझपन की समस्या इत्यादि
: 2 से 15 सितंबर तक खोजे जाएंगे कुष्ठ रोगी, घर-घर जाएगी स्वास्थ्य विभाग की टीम
Mon, Sep 2, 2024
आगरा, 01 सितंबर 2024। जनपद में सोमवार से राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ रोगी खोजी अभियान का शुभारंभ होगा। अभियान के तहत 15 सितंबर तक स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर कुष्ठ रोगियों की खोज करेंगी और लोगों को कुष्ठ रोग के प्रति जागरुक करेंगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि कुष्ठ रोग के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर चमड़े के रंग से हल्के या गहरे रंग के दाग-धब्बे हो सकते हैं, जो सुन्न होते हैं और इनमें दर्द नहीं होता है। अगर किसी के शरीर पर ऐसे कोई दाग-धब्बे दिखाई दें तो स्वास्थ्य विभाग की टीम को बताएं। इसके बाद मरीजों की स्क्रीनिंग करके जांच की जाएगी और यदि जांच में कुष्ठ की पुष्टि होगी तो मरीजों का उपचार किया जाएगा। सीएमओ ने बताया कि कुष्ठ रोग का इलाज संभव है, लेकिन समय पर इलाज बहुत जरूरी है। अगर इलाज में देरी होती है तो यह रोग गंभीर रूप ले सकता है और त्वचा, नसों और अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. सीएल यादव ने बताया कि अभियान को जनपद के 15 ब्लॉक और शहरी क्षेत्र में अभियान चलाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्र में आशा कार्यकर्ता और एक पुरुष सदस्य की टीम, जबकि शहरी क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एक पुरुष सदस्य की टीम लक्षणयुक्त व्यक्तियों की स्क्रीनिंग करेंगी। इसके बाद चयनित किये गये संभावित कुष्ठ रोगियों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संदर्भन पर्ची के साथ रेफर किया जाएगा। यह अभियान 14 दिन चलेगा। इसे पल्स पोलियो अभियान की भांति चलाया जाना है। दो वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की लक्षण के आधार पर उनके घर पर ही स्क्रीनिंग होगी।
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ध्रुव गोपाल ने बताया कि अगर शरीर पर चमड़ी के रंग से हल्का कोई भी सुन्न दाग धब्बा हो तो कुष्ठ की जांच अवश्य करानी चाहिए। हल्के रंग के व्यक्ति की त्वचा में गहरे और लाल रंग के भी धब्बे हो सकते हैं। हाथ या पैरों की अस्थिरता या झुनझुनी, हाथ पैर व पलकों में कमजोरी, नसों में दर्द, चेहरे या कान में सूजन अथवा घाव और हाथ या पैरों में दर्द रहित घाव भी इसके लक्षण हैं । तुरंत जांच और इलाज से मरीज ठीक हो जाता है और सामान्य जीवन जी सकता है। इसके विपरीत देरी पर कुष्ठ दिव्यांगता का रूप ले सकता है। कुष्ठ सुन्न दाग धब्बों की संख्या जब पांच या पांच से कम होती है और कोई नस प्रभावित नहीं होती या केवल एक नस प्रभावित होती है तो मरीज को पासी बेसिलाई (पीबी) कुष्ठ रोगी कहते हैं जो छह माह के इलाज में ठीक हो जाता है। अगर सुन्न दाग धब्बों की संख्या छह या छह से अधिक हो और दो या दो से अधिक नसें प्रभावित हों तो ऐसे रोगी को मल्टी बेसिलाई (एमबी) कुष्ठ रोगी कहते हैं और इनका इलाज होने पर साल भर का समय लगता है। कुष्ठ रोगी को छूने और हाथ मिलाने से इस रोग का प्रसार नहीं होता। रोगी से अधिक समय तक अति निकट संपर्क में रहने पर उसके ड्रॉपलेट्स के जरिये ही बीमारी का संक्रमण हो सकता है ।
प्रस्तावित अभियान पर एक नजर
लक्षित आबादी= 51.15 लाख
कुल टीम= 4057
कुल पर्यवेक्षक= 841