: निक्षय वाहन से टीबी रोकथाम का संदेश घर-घर तक
Fri, Jan 10, 2025
जिलाधिकारी ने टीबी जागरूकता के लिए निक्षय वाहन किया रवाना
निक्षय वाहन एक मोबाइल यूनिट के रूप में घर-घर जाकर लोगों को टीबी के प्रति करेगा जागरूक
आगरा। जिलेभर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहचान और उपचार के लिए 100 दिवसीय सघन जागरूकता अभियान की शुरुआत 31 दिसंबर से की जा चुकी है, ये अभियान 24 मार्च 2025 तक चलेगा। इसी क्रम में शुक्रवार को कैंप कार्यालय से जिलाधिकारी अरविन्द मल्लपा बंगारी (आईएएस) ने टीबी जागरूकता के लिए निक्षय वाहन की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य लोगों को टीबी के लक्षणों, बचाव और उपचार के प्रति जागरूक करना है। निक्षय वाहन एक मोबाइल यूनिट के रूप में घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेगा और उन्हें टीबी के बारे में जानकारी प्रदान करेगा ।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव द्वारा अपने संबोधन में टीबी हारेगा देश जीतेगा से शुरुआत करते हुए कहा कि सभी लोग 100 दिवसीय सघन जागरूकता अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी निभाए ताकि आने वाले समय में आपके शहर व गांव सहित ग्राम पंचायत को टीबी जैसी बीमारी से मुक्त किया जा सके। निक्षय वाहन के माध्यम से टीबी की रोकथाम के लिए घर-घर तक जागरूकता के संदेश दिए जाएंगे।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने बताया कि यह वाहन जन जागरूकता के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न हिस्सों में घूमेगा और टीबी के बारे में जानकारी प्रदान करेगा साथ ही निक्षय वाहन में विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं टीबी की जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है, शुगर की जांच की सुविधा उपलब्ध है, एचआईवी की जांच की सुविधा उपलब्ध है, ब्लड प्रेशर की जांच की सुविधा उपलब्ध है। मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए CY-टीबी जांच व 16 चैनल वाले टूनाट मशीन से टीबी के संभावित मरीजों की तुरंत एक्स रे कर जांच एवं उपचार किया जाएगा।
निक्षय वाहन में विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं,
टीबी की जांच और उपचार
शुगर की जांच
एचआईवी जांच
ब्लड प्रेशर की जांच
टूनाट मशीन से टीबी जांच
सभी अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे
: रोटावायरस डायरिया से बचाव, स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम
Wed, Dec 18, 2024
रोटावायरस से बचाव के लिए बच्चों को जरूर लगवाएं टीका
लक्षणों को पहचानकर तुरंत शुरू कर दें उपचार
आगरा। सर्दी की ठंडक के बीच, एक और खतरा हमारे बच्चों को घेर लेता है। रोटावायरस डायरिया, यह वायरस मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है, लेकिन वयस्कों को भी हो सकता है। नवंबर से फरवरी तक रोटावायरस डायरिया का अधिक प्रकोप रहता है अगर रोटावायरस डायरिया के लक्षण जैसे दस्त (पानी जैसे), उल्टी, बुखार, पेट दर्द, डिहाइड्रेशन ( अत्यधिक प्यास, निढाल हो जाना या बेहोश हो जाना, कमजोरी निर्जलीकरण के प्रमुख लक्षण है), थकान, भूख न लगना, पेट में क्रैम्प्स हैं तो सतर्क हो जाए और और अपने नजदीकी स्वास्थ्य इकाई पर संपर्क कर चिकित्सीय सलाह अवश्य लें। साथ ही तुरंत उपचार शुरू कर दें।
टीका जरूर लगवाएं
मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह ने नगर वासियों से अपील करते हुए कहा है बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का समय से टीकाकरण कराना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे उन्हें 11 जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सकता है। जिसमें से रोटावायरस भी है। रोटावायरस टीकाकरण के लिए रोटावायरस टीके की पहली खुराक 6-8 सप्ताह के बच्चे को दी जाता है। उसके बाद एक-एक माह के अंतर पर दो या 3 खुराकें दी जाती हैं। टीका 85-98% प्रभावी होता है। यह टीका एक साल से कम के बच्चे को ही दिया जा सकता है इसलिए बच्चों को नियमित टीकाकरण के तहत समय से टीका अवश्य लगवाएं। यदि आपको या आपके बच्चे को रोटावायरस डायरिया के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि रोटावायरस डायरिया होने का मुख्य कारण रोटावायरस हैं। यह एक प्रकार का वायरल संक्रमण हैं, रोटावायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से, जैसे कि हाथों, डायपर, खिलौने, चेंजिंग टेबल, या दरवाज़े के हैंडल छूने से, खराब स्वच्छता के कारण, जैसे कि हाथों को साबुन से न धोना , दूषित पानी और भोजन आदि से फैलता है। रोटावायरस डायरिया से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और रोटावायरस टीकाकरण अवश्य कराए ।
जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल) की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. खुशबू केसरवानी बताती हैं कि रोटावायरस डायरिया एक संक्रामक बीमारी है जो रोटावायरस नामक वायरस के कारण होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है और छोटे बच्चों में इनफेक्शियस डायरिया का प्रमुख कारण है। रोटावायरस डायरिया 6 महीने से 5 वर्ष तक के बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले वयस्कों को भी हो सकता है। नवंबर से फरवरी तक रोटावायरस डायरिया के मामले अधिक होने के कारणों में मौसम संबंधी कारण, स्वच्छता संबंधी कारण, सामाजिक कारण और स्वास्थ्य संबंधी कारण शामिल हैं। इसके लक्षणों में दस्त, उल्टी, बुखार, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन शामिल हैं। इस वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए टीकाकरण, स्वच्छता और सावधानी बरतना आवश्यक है।
रोटावायरस डायरिया के लक्षण:
दस्त (पानी जैसे)
उल्टी
बुखार
पेट दर्द
डिहाइड्रेशन (अत्यधिक प्यास, निढाल हो जाना या बेहोश हो जाना, कमजोरी निर्जलीकरण के प्रमुख लक्षण है)
थकान
भूख न लगना
पेट में क्रैम्प्स
रोटावायरस डायरिया का बचाव:
रोटावायरस टीकाकरण
स्वच्छ पानी पीना
हाथों की स्वच्छता बनाए रखना
संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाना
नियमित स्वास्थ्य जांच
रोटावायरस डायरिया का इलाज:
तरल पदार्थों का सेवन (ओआरएस)
आराम
डिहाइड्रेशन का इलाज
अगर मरीज को गंभीर निर्जलीकरण हो गया हो तो अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है
रोटावायरस टीकाकरण:
रोटावायरस टीके की पहली खुराक 6-8 सप्ताह के बच्चे को दी जाती है।
उसके बाद एक-एक माह के अंतर पर दो या 3 खुराकें दी जाती हैं।
टीका 85-98% प्रभावी होता है।
यह टीका 1 साल से कम के बच्चे को ही दिया जा सकता है
: वीएचएसएनडी को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए सीडीओ ने की समीक्षा बैठक
Sat, Dec 14, 2024
छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस पर सभी विभागों का सहयोग महत्वपूर्ण- सीडीओ
वीएचएसएनसी के अनटाइड फण्ड के यूटिलाइजेशन के लिए सीडीओ ने दिए निर्देश
आगरा । राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) के सफल क्रियावन के लिए विकास भवन स्थित सभागार में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने बैठक में कहा कि ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति से समुदाय को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों पर नेतृत्व करने की परिकल्पना करता है। यह तभी संभव होगा जब समुदाय स्वास्थ्य के मामलों में नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त रूप से सशक्त हो। स्पष्ट रूप से इसमें स्वास्थ्य प्रणाली के प्रबंधन में पंचायती राज और संस्थाओं की भागीदारी की आवश्यकता है। ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की मुख्य जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, स्वच्छता और पोषण को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना है।
सीडीओ ने ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हुए कहा कि ग्राम प्रधान,एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा प्रतिमाह वीएचएसएनसी बैठक का आयोजन किया जाए साथ ही एएनएम के द्वारा बैठक के रजिस्टर पर आयोजित बैठक की रूपरेखा और मिनिट्स लिखे जाएं। इसी क्रम में सीडीपीओ के द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि किस-किस ग्राम पंचायत में बैठक का आयोजन हुआ है या नहीं दोनों परिस्थितियों में इसकी सूचना डीपीओ को दी जाए। अगर बैठक आयोजित हुई है तो उसमें अनटाइड फण्ड के यूटिलाइजेशन से संबंधित चर्चा की गई और अनटाइड फण्ड को किन-किन मुद्दों पर खर्च किया जाएगा। इसके पश्चात सीडीपीओ को महीने के अंत में कंपाइल रिपोर्ट बनाकर डीपीओ को प्रेषित करने के संदर्भ में निर्देश दिए।
सीडीओ ने अनटाइड फण्ड के माध्यम से जिस भी आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर उपयोग होने वाली सामग्री नहीं है, ऐसे केंद्रों पर उन्होंने तत्काल अनटाइड फण्ड से उपयोगी वस्तुओं को खरीद कर संदर्भित करने के लिए निर्देश दिए। आयुष्मान आरोग्य मंदिर की देख- रेखा और स्वच्छता में उपयोग होने वाली सामग्री को खरीदने के लिए अनटाइड फण्ड को खर्च किया जाए वीएचएसएनडी के सफल क्रियावन के लिए फण्ड के माध्यम से बच्चों के लिए वजन मशीन, वयस्कों के लिए वजन मशीन, टेबल, चेयर, केंद्र की पुताई, आयुष्मान आरोग्य मंदिर के स्वच्छता और रखरखाव में उपयोग होने वाली वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं जिस समुदाय और स्वास्थ्य केंद्र का समन्वय बना रहे। समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा कर हम आयुष्मान आरोग्य मंदिर को आइडियल बना सकते हैं। वीएचएसएनडी को सफल बनाने सभी विभागों का सहयोग महत्वपूर्ण है, मैं आशा करती हूं सभी विभाग इसके लिए अपनी जिम्मेदारियां का नियम अनुसार पालन करेंगे।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन, जिला पंचायती राज अधिकारी श्री मनीष, जिला कार्यक्रम अधिकारी हरीश मौर्य, डब्ल्यूएचओ से एसएमओ डॉ. महिमा चतुर्वेदी, डीपीएम कुलदीप भारद्वाज, यूनिसेफ से रीजनल कोऑर्डिनेटर अरविंद शर्मा, यूनिसेफ के डीएमसी राहुल कुलश्रेष्ठ, समुदाय स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी व सीडीपीओ मौजूद रहे।