: रोटावायरस डायरिया से बचाव, स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम
Wed, Dec 18, 2024
रोटावायरस से बचाव के लिए बच्चों को जरूर लगवाएं टीका
लक्षणों को पहचानकर तुरंत शुरू कर दें उपचार
आगरा। सर्दी की ठंडक के बीच, एक और खतरा हमारे बच्चों को घेर लेता है। रोटावायरस डायरिया, यह वायरस मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता है, लेकिन वयस्कों को भी हो सकता है। नवंबर से फरवरी तक रोटावायरस डायरिया का अधिक प्रकोप रहता है अगर रोटावायरस डायरिया के लक्षण जैसे दस्त (पानी जैसे), उल्टी, बुखार, पेट दर्द, डिहाइड्रेशन ( अत्यधिक प्यास, निढाल हो जाना या बेहोश हो जाना, कमजोरी निर्जलीकरण के प्रमुख लक्षण है), थकान, भूख न लगना, पेट में क्रैम्प्स हैं तो सतर्क हो जाए और और अपने नजदीकी स्वास्थ्य इकाई पर संपर्क कर चिकित्सीय सलाह अवश्य लें। साथ ही तुरंत उपचार शुरू कर दें।
टीका जरूर लगवाएं
मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह ने नगर वासियों से अपील करते हुए कहा है बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का समय से टीकाकरण कराना बहुत जरूरी है, क्योंकि इससे उन्हें 11 जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सकता है। जिसमें से रोटावायरस भी है। रोटावायरस टीकाकरण के लिए रोटावायरस टीके की पहली खुराक 6-8 सप्ताह के बच्चे को दी जाता है। उसके बाद एक-एक माह के अंतर पर दो या 3 खुराकें दी जाती हैं। टीका 85-98% प्रभावी होता है। यह टीका एक साल से कम के बच्चे को ही दिया जा सकता है इसलिए बच्चों को नियमित टीकाकरण के तहत समय से टीका अवश्य लगवाएं। यदि आपको या आपके बच्चे को रोटावायरस डायरिया के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि रोटावायरस डायरिया होने का मुख्य कारण रोटावायरस हैं। यह एक प्रकार का वायरल संक्रमण हैं, रोटावायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से, जैसे कि हाथों, डायपर, खिलौने, चेंजिंग टेबल, या दरवाज़े के हैंडल छूने से, खराब स्वच्छता के कारण, जैसे कि हाथों को साबुन से न धोना , दूषित पानी और भोजन आदि से फैलता है। रोटावायरस डायरिया से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और रोटावायरस टीकाकरण अवश्य कराए ।
जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल) की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. खुशबू केसरवानी बताती हैं कि रोटावायरस डायरिया एक संक्रामक बीमारी है जो रोटावायरस नामक वायरस के कारण होती है। यह बीमारी मुख्य रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करती है और छोटे बच्चों में इनफेक्शियस डायरिया का प्रमुख कारण है। रोटावायरस डायरिया 6 महीने से 5 वर्ष तक के बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले वयस्कों को भी हो सकता है। नवंबर से फरवरी तक रोटावायरस डायरिया के मामले अधिक होने के कारणों में मौसम संबंधी कारण, स्वच्छता संबंधी कारण, सामाजिक कारण और स्वास्थ्य संबंधी कारण शामिल हैं। इसके लक्षणों में दस्त, उल्टी, बुखार, पेट दर्द और डिहाइड्रेशन शामिल हैं। इस वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए टीकाकरण, स्वच्छता और सावधानी बरतना आवश्यक है।
रोटावायरस डायरिया के लक्षण:
दस्त (पानी जैसे)
उल्टी
बुखार
पेट दर्द
डिहाइड्रेशन (अत्यधिक प्यास, निढाल हो जाना या बेहोश हो जाना, कमजोरी निर्जलीकरण के प्रमुख लक्षण है)
थकान
भूख न लगना
पेट में क्रैम्प्स
रोटावायरस डायरिया का बचाव:
रोटावायरस टीकाकरण
स्वच्छ पानी पीना
हाथों की स्वच्छता बनाए रखना
संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाना
नियमित स्वास्थ्य जांच
रोटावायरस डायरिया का इलाज:
तरल पदार्थों का सेवन (ओआरएस)
आराम
डिहाइड्रेशन का इलाज
अगर मरीज को गंभीर निर्जलीकरण हो गया हो तो अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता हो सकती है
रोटावायरस टीकाकरण:
रोटावायरस टीके की पहली खुराक 6-8 सप्ताह के बच्चे को दी जाती है।
उसके बाद एक-एक माह के अंतर पर दो या 3 खुराकें दी जाती हैं।
टीका 85-98% प्रभावी होता है।
यह टीका 1 साल से कम के बच्चे को ही दिया जा सकता है
: वीएचएसएनडी को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करने के लिए सीडीओ ने की समीक्षा बैठक
Sat, Dec 14, 2024
छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस पर सभी विभागों का सहयोग महत्वपूर्ण- सीडीओ
वीएचएसएनसी के अनटाइड फण्ड के यूटिलाइजेशन के लिए सीडीओ ने दिए निर्देश
आगरा । राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) के सफल क्रियावन के लिए विकास भवन स्थित सभागार में मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। इसमें ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने बैठक में कहा कि ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति से समुदाय को स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों पर नेतृत्व करने की परिकल्पना करता है। यह तभी संभव होगा जब समुदाय स्वास्थ्य के मामलों में नेतृत्व करने के लिए पर्याप्त रूप से सशक्त हो। स्पष्ट रूप से इसमें स्वास्थ्य प्रणाली के प्रबंधन में पंचायती राज और संस्थाओं की भागीदारी की आवश्यकता है। ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की मुख्य जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास, स्वच्छता और पोषण को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देना है।
सीडीओ ने ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति की भूमिका और जिम्मेदारियों पर चर्चा करते हुए संबंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश देते हुए कहा कि ग्राम प्रधान,एएनएम, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा प्रतिमाह वीएचएसएनसी बैठक का आयोजन किया जाए साथ ही एएनएम के द्वारा बैठक के रजिस्टर पर आयोजित बैठक की रूपरेखा और मिनिट्स लिखे जाएं। इसी क्रम में सीडीपीओ के द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि किस-किस ग्राम पंचायत में बैठक का आयोजन हुआ है या नहीं दोनों परिस्थितियों में इसकी सूचना डीपीओ को दी जाए। अगर बैठक आयोजित हुई है तो उसमें अनटाइड फण्ड के यूटिलाइजेशन से संबंधित चर्चा की गई और अनटाइड फण्ड को किन-किन मुद्दों पर खर्च किया जाएगा। इसके पश्चात सीडीपीओ को महीने के अंत में कंपाइल रिपोर्ट बनाकर डीपीओ को प्रेषित करने के संदर्भ में निर्देश दिए।
सीडीओ ने अनटाइड फण्ड के माध्यम से जिस भी आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर छाया एकीकृत ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर उपयोग होने वाली सामग्री नहीं है, ऐसे केंद्रों पर उन्होंने तत्काल अनटाइड फण्ड से उपयोगी वस्तुओं को खरीद कर संदर्भित करने के लिए निर्देश दिए। आयुष्मान आरोग्य मंदिर की देख- रेखा और स्वच्छता में उपयोग होने वाली सामग्री को खरीदने के लिए अनटाइड फण्ड को खर्च किया जाए वीएचएसएनडी के सफल क्रियावन के लिए फण्ड के माध्यम से बच्चों के लिए वजन मशीन, वयस्कों के लिए वजन मशीन, टेबल, चेयर, केंद्र की पुताई, आयुष्मान आरोग्य मंदिर के स्वच्छता और रखरखाव में उपयोग होने वाली वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं जिस समुदाय और स्वास्थ्य केंद्र का समन्वय बना रहे। समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा कर हम आयुष्मान आरोग्य मंदिर को आइडियल बना सकते हैं। वीएचएसएनडी को सफल बनाने सभी विभागों का सहयोग महत्वपूर्ण है, मैं आशा करती हूं सभी विभाग इसके लिए अपनी जिम्मेदारियां का नियम अनुसार पालन करेंगे।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन, जिला पंचायती राज अधिकारी श्री मनीष, जिला कार्यक्रम अधिकारी हरीश मौर्य, डब्ल्यूएचओ से एसएमओ डॉ. महिमा चतुर्वेदी, डीपीएम कुलदीप भारद्वाज, यूनिसेफ से रीजनल कोऑर्डिनेटर अरविंद शर्मा, यूनिसेफ के डीएमसी राहुल कुलश्रेष्ठ, समुदाय स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी व सीडीपीओ मौजूद रहे।
: पीएमएसएमए योजना आई काम, 81488 गर्भवती ने कराई प्रसव से पहले जांच
Sat, Dec 14, 2024
हर महीने की 1, 9, 16, 24 तारीख को आयोजित होता है पीएमएसएमए दिवस
स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरुक करते हुए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है उद्देश्य
आगरा। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका उद्देश्य मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करना है। योजना के अंतर्गत गर्भवती को उनकी गर्भावस्था के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती है। अप्रैल से नौ दिसंबर तक जिले की 81488 गर्भवती ने पीएमएसएमए दिवस पर प्रसव पूर्व जांच कराई। दिवस का उद्देश्य गर्भवती को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।
प्रत्येक महीने की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को पीएमएसएमए दिवस का आयोजन होता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए पीएमएसएमए दिवस का आयोजन किया जाता है। इसमें गर्भवती की दूसरे व तीसरे त्रैमास में एमबीबीएस डॉक्टर से प्रसव पूर्व जांच कराई जाती है। इसका आयोजन स्वास्थ्य इकाईयों पर किया जाता है और गर्भवतियों की प्रसव पूर्व जांच करके उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान की जाती है साथ ही संदर्भित भी किया जाता है।
एसीएमओ आरसीएच डॉ. संजीव वर्मन ने बताया कि पीएमएसएमए दिवस में गर्भवती की प्रसव पूर्व हीमोग्लोबिन, शुगर, यूरिन जांच, ब्लड ग्रुप, एचआईवी, सिफ़लिस, टीबी, हेपेटाइटिस बी, वजन, ब्लड प्रेशर एवं अन्य जांच की जाती हैं। एचआरपी युक्त गर्भवती की पहचान करके संदर्भित किया जाता है। गर्भवती को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। ई-रुपी वाउचर के जरिये गर्भवती को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच की सुविधा मिल रही।
जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता संगीता भारती बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक पीएमएसएमए दिवस पर जिले की 1.19 लाख गर्भवती ने प्रसव पूर्व जांच कराई। इसमें 13100 उच्च जोखिम वाली गर्भवती को चिह्नित किया गया। इन्हीं चिह्नित उच्च जोखिम वाली गर्भवती को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व क्लीनिक में जनपद के एफआरयू पर जांच संदर्भित किया गया।
यूपीएचसी हरीपर्वत वेस्ट की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. वीनम चतुर्वेदी ने बताया कि ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को प्रसव पूर्व चार जांच कराना अति आवश्यक है l आयरन और कैल्शियम की टेबलेट लेने के साथ-साथ गर्भवती को पौष्टिक आहार और मौसमी फलों का सेवन अवश्य करना चाहिए l पीएमएसएमए दिवस पर उच्च जोखिम वाली गर्भवती को चिन्हित करके संदर्भित भी किया जाता है और कुछ गर्भवती को एनीमिया से बचाव के लिए आयरन सुक्रोज भी दिया जाता है|
आवास विकास सेक्टर-2 की निवासी 31 वर्षीय कृष्णा बताती है कि मेरा आठवां महीना चल रहा है और यह मेरा दूसरा बच्चा है। जब मैं घर के काम करती थी तो मुझे थकान हो जाती थी और मेरी सांस भी फूलने लगती थी। मेरे क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता ने मुझे सलाह दी कि मैं स्वास्थ्य केंद्र पर अपनी जांच करा लूं । मैंने यूपीएचसी हरीपर्वत में स्टाफ नर्स संध्या यादव से अपनी जांच कराई। मेरा हीमोग्लोबिन 8 था। उन्होंने बताया कि आप में खून की कमी है,फिर मुझे अच्छे से समझाया और पौष्टिक आहार का सेवन करने और समय-समय पर नियमित अपनी जांच करने की सलाह दी साथ ही उन्होंने परिवार नियोजन से संबंधित भी जानकारी दी। वर्तमान समय में मेरा हीमोग्लोबिन 10 हो चुका है। मैं चिकित्सक की सलाह के अनुसार सभी कार्य नियम से कर रही हूं और सबसे अच्छा यह है कि मेरे घर के नजदीक मुझे सारी स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हो रही हैं। पौष्टिक आहार का सेवन करने और समय-समय पर नियमित अपनी जांच करने की सलाह दी। मैं चिकित्सक की सलाह के अनुसार सभी कार्य नियम से कर रही हूं।
बोदला निवासी 24 वर्षीय गर्भवती सुरभि बताती है कि मेरा पहले मिसकैरेज हो चुका है इसलिए मैंने आशा कार्यकर्ता की सलाह से स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सक डॉ. वीनम चतुर्वेदी से संपर्क करके अपने बारे में जानकारी दी। उन्होंने मुझे बताया कि मिसकैरेज के बाद दोबारा गर्भावस्था के दौरान आपको विशेष सावधानियां बरतनी होंगी। आपको अपने चिकित्सक से नियमित रूप से परामर्श करना चाहिए और उनकी सलाह का पालन करना चाहिए। आपको अपने आहार पर ध्यान देना होगा। आपको पौष्टिक आहार लेना चाहिए जिसमें फल, सब्जियां, साबुत अनाज, और प्रोटीन शामिल हों। आपको पर्याप्त नींद लेनी चाहिए। नींद आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आपको नियमित जांच करानी चाहिए। नियमित जांच से आपके गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की निगरानी की जा सकती है।
वित्तीय वर्ष में अप्रैल से नौ दिसंबर 2024 तक प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के जिला स्तरीय आंकड़े-
81488 जांच के लिए आई गर्भवती
81488 गर्भवती की जांच की गई
9150 उच्च जोखिम वाली गर्भवती चिन्हित हुई व उन्हें संदर्भित किया गया
28881 क्यूआर कोड जनरेट किए
11634 वाउचर रिडीम हुए
13634 जिला महिला चिकित्सालय (लेडी लॉयल), (एसएन मेडिकल कॉलेज और 81 निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र) में अल्ट्रासाउंड हुए ।