: बीमारियों से मृत्यु का 48 फीसदी कारण सूक्ष्मजीवों का संक्रमण - डॉ कटोच
Fri, Feb 9, 2024
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इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, देश में माइक्रोबायोलॉजिस्ट की कमी दूर करने पर जोर
आगरा। भारत में बीमारियों से होने वाली मृत्यु में 48 फीसदी कारण सूक्ष्म जीवों से होने वाला संक्रमण है। इस पर नियंत्रण के लिए मेडिकल माइक्रोबायोलॉजीकल मोल्यीक्यूलर सुविधाओं का बेहतर नेटवर्क की जरूरत है। जिससे संक्रमण की समस्या को प्रारम्भिक अवस्था में जाना जा सके। देश में माइक्रोबयोलॉजिस्ट की काफी कमी है, जिसे दूर किया जाना चाहिए। देश की कुल जनसंख्या की 18 फीसदी आबादी उप्र में है। इसलिए उप्र में इनफेक्शन से होने वाली बीमारियों पर विशेष ध्यान केन्द्रित होना चाहिए। आईसीएमआर के पूर्व डीजी डॉ. बीएम कटोच ने यह बात एसएन मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही।
डॉ. बीएम कटोच ने कहा कि जरूरत ग्रामीण क्षेत्रों तक सामान्य चिकित्सकीय सुविधाओं के साथ माइक्रोऑर्गेनिज्म की जांच की सुविधाओं व माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट की कमी को पूरा करने की है। जिससे इनफेक्शन होने पर लोगों को सही समय पर सही जांच होने से सही इलाज मिल सके। भारत सरकार के 2024 तक देश को टीबी मुक्त बनाने की योजना के बारे में कहा कि बहुत तेजी से और अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं। सफलता तो मिलेगी लेकिन कितनी, इसके नतीजे तो 2025 में पता चल पाएंगे। एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता ने कहा कि किसी भी बीमारी में इलाज शुरु करने का आधार माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट हैं।
कार्यशाला का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ. वीएम कटोच, विवि की कुलपति आशु रानी, एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. प्रशांत गुप्ता, इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट प्रो. भारती मल्होत्रा, एसएन माइक्रोबयोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल, डॉ. शम्पा, डॉ. विनीता मित्तल ने सम्मिलित रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। संचालन डॉ. विकास गुप्ता ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. अमिता जैन, डॉ. केएन प्रसाद, डॉ. मलिनी कपूर, डॉ. रंगमी, डॉ. मुनीष गुप्ता, डॉ. अतुल गर्ग आदि उपस्थित थे।
डॉ. बीएम अग्रवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट प्रदान किया
एसएन मेडिकल कालेज माइक्रोबॉयोलजी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल को स्मृति चिन्ह व शॉल उढ़ाकर लाइफ टाइम अचीवमेंट प्रदान किया गया। एसजीपीजीआई के डॉ. टीएन ढोल को मरणोपरान्त सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सोविनियर का भी विमोचन किया गया, जिसमें 300 रिसर्च पेपर पब्लिक किए गए हैं।
: उत्तर भारत में एच1एन1 स्वाइन फ्लू फैलने का खतराः डॉ. अतुल गर्ग
Fri, Feb 9, 2024
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फरवरी से अप्रैल और सितंबर से अक्टूबर तक आ सकते हैं केस, लखनऊ में छह केस मिले, नहीं है घातक
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दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, पहले दिन हुआ 6 वर्कशॉप का आयोजन
आगरा। इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में आज एसजीपीजीआइ, लखनऊ असिस्टेंट प्रोफेसर अतुल गर्ग ने बताया कि हर वर्ष वायरल संक्रमण को लेकर एडवाइजरी जारी की जाती है। इस बार फरवरी से लेकर मार्च तक और सितंबर से लेकर अक्टूबर तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण फैल सकता है। लखनऊ में छह केस मिल चुके हैं लेकिन यह घातक नहीं है, उन्होंने बताया कि हर बार स्वाइन फ्लू का स्ट्रेन बदल रहा है, 2022 में एच3एन2 का संक्रमण फैला था, इस बार वायरस में बदलाव हुआ है और 2009 में फैले एच1एन1 से स्वाइन फ्लू फैलने की आशंका है, इसे लेकर स्वाइन फ्लू की वैक्सीन में भी बदलाव किया गया है।
टेमी फ्लू हो रही कारगर साबित
स्वाइन फ्लू की घातकता कम हुई है, साथ ही टेमी फ्लू दवा इस पर कारगर साबित हो रही है। ऐसे में स्वाइन फ्लू का संक्रमण घातक नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, इसमें मोटापा, मधुमेह, कैंसर, एचआइवी के मरीज शामिल हैं उन्हें परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाएं व किसी भी ग तरह का ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों को भी ख्याल रखना होगा। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण खत्म हो जाएगा। इसकी दूसरी लहर अगस्त से सितम्बर के बीच आ सकती है।
सूक्ष्मजीवों की पहचान व जांच के लिए छह वर्कशॉप का आयोजन
कार्यशाला के तहत वैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे सूक्ष्मजीव व उनसे होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए एसएन मेडिकल कालेज में 6 वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में 450 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल, सचिव डॉ. अंकुर गोयल, सहसचिव डॉ. विकास कुमार, डॉ. आरती अग्रवाल, डॉ. प्रज्ञा शाक्य, डॉ. सपना गोयल, डॉ. पारुल गर्ग, डॉ. श्वेता सिंघल आदि मौजूद थीं।
10 फरवरी को बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जागरूकता के लिए निकलेगी वॉकथॉन
कार्यशाला के तहत 10 फरवरी को खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार से शहीद स्मारक तक वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। जिसका उद्देश्य अस्पताल व नर्सिंग होम के अलावा घरेलू इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण करने के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करना होगा। वॉकथॉन में एसएन मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों, डॉक्टर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों सहित सैकड़ों लोग शामिल होंगे। जेपी सभागार में ही सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक साइंटिफिक सेशन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग व उसके कारण माइक्रोऑरगेनिज्म में दवाओं के प्रति पैदा होने वाली प्रतिरोधकता जैसे गम्भीर विषयों पर डॉक्टरों के साथ पैनल डिसकशन में चर्चा होगी। 300 से अधिक रिसर्च पेपर व पोस्टर का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।
: यूपी-यूके माइक्रोकॉन 2024 में सूक्ष्मजीवों की पहचान व इलाज पर होगा मंथन
Thu, Feb 8, 2024
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दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ करेंगे आईसीएमआर के पूर्व डीजी डॉ. वीएम कटोच, फंगल, बैक्टीरियल और अमीबिक बीमारियों पर होगी चर्चा,
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कार्यशाला में 450 से अधिक देश विदेश के प्रतिनिधि लेंगे भाग, 300 रिसर्च पेपर व पोस्टर का होगा प्रस्तुतिकरण
आगरा। सामान्य आंखों से नजर न आने वाले व मानव शरीर को कोरोना, टीबी जैसे घातक बीमारियों के शिकंजे में जकड़ने वाले सूक्ष्म जीवों की पहचान व इलाज पर दो दिवसीय कार्यशाला यूपी-यूके माइक्रोकॉन 2024 में मंथन करने के लिए देश भर के 450 से अधिक विशेषज्ञ जुटेंगे। इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा 9,10 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ 9 फरवरी को सायं 7 बजे खंदारी परिसर स्थित जे पी सभागार में आईसीएमआर के पूर्व डीजी डॉ. वी एम कटोच करेंगे। इस अवसर पर विवि की कुलपति आशु रानी, इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. भारती मल्होत्रा, एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. प्रशान्त गुप्ता भी मौजूद रहेंगी।
यह जानकारी आयोजन समिति के सचिव डॉ. अंकुल गोयल ने देते हुए बताया कि 9 फरवरी को एसएन मेडिकल कॉलेज में प्रातः 9 से सायं 5 बजे तक 6 वर्कशॉप (दो माइक्रोबायोलॉजी विभाग में, एक गेस्ट हाउस में, दो न्यू सर्जरी बिल्डिंग में, एक स्टेट ट्यूबरक्लोसिस डिमोन्सट्रेशन सेन्टर में) आयोजित की गई हैं। जिसमें माइक्रोऑरगेनिज्म (फंगल, बैक्सीटिरीयल, वायरल इनफेक्शन) से होने वाली बीमारियों के साथ उसके कारण, इलाज के लिए 150 से अधिक प्रतिनिधियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग व उसके कारण माइक्रोऑरगेनिज्म में दवाओं के प्रति पैदा होने वाली प्रतिरोधकता जैसे गम्भीर विषयों पर डॉक्टरों के साथ पैनल डिसकशन में चर्चा होगी। 300 से अधिक रिसर्च पेपर व पोस्टर का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।
10 फरवरी को बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जागरूकता के लिए निकलेगी वॉकथॉन
कार्यशाला के तहत 10 फरवरी को खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार से शहीद स्मारक तक वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। जिसका अस्पताल व नर्सिंग होम के अलावा उद्देश्य घरेलू इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण करने के प्रति जागरूकता पैदा करना होगा। वॉकथॉन में एसएन मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों, डॉक्टर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों सहित सैकड़ों लोग शामिल होंगे। जेपी सभागार में ही सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक साइंटिफिक सेशन आयोजित किए जाएंगे।