: उत्तर भारत में एच1एन1 स्वाइन फ्लू फैलने का खतराः डॉ. अतुल गर्ग
Fri, Feb 9, 2024
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फरवरी से अप्रैल और सितंबर से अक्टूबर तक आ सकते हैं केस, लखनऊ में छह केस मिले, नहीं है घातक
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दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, पहले दिन हुआ 6 वर्कशॉप का आयोजन
आगरा। इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में आज एसजीपीजीआइ, लखनऊ असिस्टेंट प्रोफेसर अतुल गर्ग ने बताया कि हर वर्ष वायरल संक्रमण को लेकर एडवाइजरी जारी की जाती है। इस बार फरवरी से लेकर मार्च तक और सितंबर से लेकर अक्टूबर तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण फैल सकता है। लखनऊ में छह केस मिल चुके हैं लेकिन यह घातक नहीं है, उन्होंने बताया कि हर बार स्वाइन फ्लू का स्ट्रेन बदल रहा है, 2022 में एच3एन2 का संक्रमण फैला था, इस बार वायरस में बदलाव हुआ है और 2009 में फैले एच1एन1 से स्वाइन फ्लू फैलने की आशंका है, इसे लेकर स्वाइन फ्लू की वैक्सीन में भी बदलाव किया गया है।
टेमी फ्लू हो रही कारगर साबित
स्वाइन फ्लू की घातकता कम हुई है, साथ ही टेमी फ्लू दवा इस पर कारगर साबित हो रही है। ऐसे में स्वाइन फ्लू का संक्रमण घातक नहीं हैं। लेकिन जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, इसमें मोटापा, मधुमेह, कैंसर, एचआइवी के मरीज शामिल हैं उन्हें परेशानी हो सकती है। गर्भवती महिलाएं व किसी भी ग तरह का ट्रांसप्लांट करा चुके मरीजों को भी ख्याल रखना होगा। अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक स्वाइन फ्लू का संक्रमण खत्म हो जाएगा। इसकी दूसरी लहर अगस्त से सितम्बर के बीच आ सकती है।
सूक्ष्मजीवों की पहचान व जांच के लिए छह वर्कशॉप का आयोजन
कार्यशाला के तहत वैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे सूक्ष्मजीव व उनसे होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए एसएन मेडिकल कालेज में 6 वर्कशॉप का आयोजन किया गया। जिसमें 150 से अधिक प्रतिनिधियों ने विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला में 450 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. बीएम अग्रवाल, सचिव डॉ. अंकुर गोयल, सहसचिव डॉ. विकास कुमार, डॉ. आरती अग्रवाल, डॉ. प्रज्ञा शाक्य, डॉ. सपना गोयल, डॉ. पारुल गर्ग, डॉ. श्वेता सिंघल आदि मौजूद थीं।
10 फरवरी को बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जागरूकता के लिए निकलेगी वॉकथॉन
कार्यशाला के तहत 10 फरवरी को खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार से शहीद स्मारक तक वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। जिसका उद्देश्य अस्पताल व नर्सिंग होम के अलावा घरेलू इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण करने के प्रति आमजन में जागरूकता पैदा करना होगा। वॉकथॉन में एसएन मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों, डॉक्टर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों सहित सैकड़ों लोग शामिल होंगे। जेपी सभागार में ही सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक साइंटिफिक सेशन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग व उसके कारण माइक्रोऑरगेनिज्म में दवाओं के प्रति पैदा होने वाली प्रतिरोधकता जैसे गम्भीर विषयों पर डॉक्टरों के साथ पैनल डिसकशन में चर्चा होगी। 300 से अधिक रिसर्च पेपर व पोस्टर का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।
: यूपी-यूके माइक्रोकॉन 2024 में सूक्ष्मजीवों की पहचान व इलाज पर होगा मंथन
Thu, Feb 8, 2024
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दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ करेंगे आईसीएमआर के पूर्व डीजी डॉ. वीएम कटोच, फंगल, बैक्टीरियल और अमीबिक बीमारियों पर होगी चर्चा,
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कार्यशाला में 450 से अधिक देश विदेश के प्रतिनिधि लेंगे भाग, 300 रिसर्च पेपर व पोस्टर का होगा प्रस्तुतिकरण
आगरा। सामान्य आंखों से नजर न आने वाले व मानव शरीर को कोरोना, टीबी जैसे घातक बीमारियों के शिकंजे में जकड़ने वाले सूक्ष्म जीवों की पहचान व इलाज पर दो दिवसीय कार्यशाला यूपी-यूके माइक्रोकॉन 2024 में मंथन करने के लिए देश भर के 450 से अधिक विशेषज्ञ जुटेंगे। इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट द्वारा 9,10 फरवरी को आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ 9 फरवरी को सायं 7 बजे खंदारी परिसर स्थित जे पी सभागार में आईसीएमआर के पूर्व डीजी डॉ. वी एम कटोच करेंगे। इस अवसर पर विवि की कुलपति आशु रानी, इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेडिकल माइक्रोबायोलॉजिस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. भारती मल्होत्रा, एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रो. प्रशान्त गुप्ता भी मौजूद रहेंगी।
यह जानकारी आयोजन समिति के सचिव डॉ. अंकुल गोयल ने देते हुए बताया कि 9 फरवरी को एसएन मेडिकल कॉलेज में प्रातः 9 से सायं 5 बजे तक 6 वर्कशॉप (दो माइक्रोबायोलॉजी विभाग में, एक गेस्ट हाउस में, दो न्यू सर्जरी बिल्डिंग में, एक स्टेट ट्यूबरक्लोसिस डिमोन्सट्रेशन सेन्टर में) आयोजित की गई हैं। जिसमें माइक्रोऑरगेनिज्म (फंगल, बैक्सीटिरीयल, वायरल इनफेक्शन) से होने वाली बीमारियों के साथ उसके कारण, इलाज के लिए 150 से अधिक प्रतिनिधियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं के अनावश्यक प्रयोग व उसके कारण माइक्रोऑरगेनिज्म में दवाओं के प्रति पैदा होने वाली प्रतिरोधकता जैसे गम्भीर विषयों पर डॉक्टरों के साथ पैनल डिसकशन में चर्चा होगी। 300 से अधिक रिसर्च पेपर व पोस्टर का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा।
10 फरवरी को बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जागरूकता के लिए निकलेगी वॉकथॉन
कार्यशाला के तहत 10 फरवरी को खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार से शहीद स्मारक तक वॉकथॉन का आयोजन किया जाएगा। जिसका अस्पताल व नर्सिंग होम के अलावा उद्देश्य घरेलू इलाज के दौरान निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण करने के प्रति जागरूकता पैदा करना होगा। वॉकथॉन में एसएन मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों, डॉक्टर, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्यों सहित सैकड़ों लोग शामिल होंगे। जेपी सभागार में ही सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक साइंटिफिक सेशन आयोजित किए जाएंगे।
: किडनी ने लिया था अंगूर के गुच्छे का रूप, पहली बार एस.एन. में हुई सर्जरी
Sat, Feb 3, 2024
आगरा के एस.एन. मेडिकल कॉलेज आगरा में 4 साल की बच्ची की दूरबीन विधि से जन्म से पीड़ित किडनी की बीमारी की सर्जरी की गई। 4 साल की बच्ची को बाएं गुर्दे में जन्म जात मल्टीसिस्टिक डिसएबल प्लास्टिक किडनी की शिकायत थी, जिससे बाया गुर्दा काम नहीं कर रहा था। गुर्दे ने अंगूर के गुच्छे का प्रारूप ले लिया था। ऑपरेशन द्वारा बिना चीरे के दूरबीन विधि द्वारा बाया गुर्दा को निकाला गया।
इस तरह के ऑपरेशन को पीडियाट्रिक सर्जरी टीम द्वारा पहली बार एस.एन. मेडिकल कॉलेज में किया गया। टीम में डॉ. पुनीत श्रीवास्तव, डॉ. मीनाक्षी, डॉ. सागर, डॉ. राहुल एनेस्थीसिया रहे। प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के अथक प्रयासों की वजह से सुपर स्पेशलिटी की सुविधा प्राप्त हुई। एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉक्टर प्रशांत गुप्ता ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर द्वारा जटिल से जटिल ऑपरेशन किया जा रहे हैं। आगरा एवं आसपास के जिलों के मरीजों के दृष्टिगत, यह अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है।