: पूज्य सिंधी महापंचायत के चिकित्सा शिविर में परामर्श के साथ मिला उपचार
Mon, Jan 8, 2024
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नव वर्ष के उपलक्ष्य में पूज्य सिंधी महापंचायत ने लगाया निःशुल्क चिकित्सा महाशिविर
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निःशुल्क परामर्श के साथ दवाईयां पाकर जरूरतमंदों को मिली राहत
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परहित सरस धर्म नहीं भाई झूलेलाल जी का परम संदेश हेमंत भोजवानी
आगरा। परहित सरस धर्म नहीं भाई इस तरह का संदेश भगवान झूलेलाल ने सिंधी समाज को समाज सेवा की प्रेरणा के लिए दिया था। भगवान झूलेलाल के बताए मार्ग पर चलते हुए पूज्य सिंधी महापंचायत आगरा महानगर द्वारा विशाल चिकित्सा महाशिविर का आयोजन झूलेलाल भवन आलोक नगर जयपुर हाउस में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि शोभाराम पुरुसनानी, कार्यक्रम संयोजक महेश मंघरानी, सह संयोजक जेठा भाई पुरुसनानी, एवं अतिथियों ने भगवान झूलेलाल के चित्र के समक्ष दीप जलाकर माल्यार्पण कर किया। चिकित्सा शिविर में एस एम हॉस्पिटल के सहयोग से शहर के जाने-माने चिकित्सकों ने जरूरतमंदों को परामर्श के साथ उपचार दिया।
निःशुल्क मैडिकल कैंप में डॉक्टर निखिल पुरुसनानी फिजीशियन, डॉ किशोर पंजवानी बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ सुनील सबनानी हड्डी योग विशेषज्ञ, डॉ हर्ष सक्सैना नेत्र रोग, डॉ फरहत अली, डॉ संजना तारानी दंत रोग विशेषज्ञ, डॉ फुरकान आदिल,डॉ पवन यादव, डॉ अजीत सिंह, सहित शहर के प्रमुख चिकित्सकों ने जरूरतमंदों के स्वास्थ्य परीक्षण के साथ उपचार और रोगों से बचाव के उपाय बताए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर किशोर पंजवानी ने कहा सर्दी के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों की सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है सर्दी से बचाव के लिए गर्म कपड़ों के साथ खान-पान का विशेष ध्यान रखें। इस मौके पर अन्य विषय विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी दांतों की देखभाल, त्वचा रोग की जानकारी के साथ सर्दी के मौसम में खांसी बुखार जुकाम जैसी बीमारियों से बचाव के उपाय बताए।
इस मौके पर कार्यक्रम संचालक हेमंत भोजवानी ने कहा पूज्य सिंधी महापंचायत के द्वारा चिकित्सा महाशिविर के साथ विभिन्न सामाजिक सेवा प्रकल्प चलाए जाते हैं इसी क्रम में जरूरतमंदों की मदद के लिए मेडिकल कैंप का आयोजन किया गया है। समाजसेवी जयप्रकाश धर्मानी ने कहा भगवान झूलेलाल ने नर सेवा नारायण सेवा के साथ पर हित सरस धर्म नहीं भाई की परिकल्पना को हमेशा चरितार्थ किया था। आज उन्हीं की प्रेरणा से पूज्य सिंधी महापंचायत विभिन्न सेवा प्रकल्प चला रही है।
जरूरतमंदों को परामर्श के साथ मिलीं निःशुल्क दवाईयां
पूज्य सिंधी महापंचायत आगरा महानगर द्वारा आयोजित चिकित्सा महा शिविर में एस एम हॉस्पिटल के सहयोग से जरूरतमंदों को चिकित्सकों द्वारा लिखी गईं दवाइयां उपलब्ध कराईं गईं। संगठन के द्वारा आयोजित कैंप में निशुल्क उपचार और परामर्श के साथ दवाईयां पाकर जरूरतमंदों ने राहत की सांस ली।
इनकी रही मौजूदगी
पूज्य सिंधी महापंचायत के द्वारा आयोजित निशुल्क चिकित्सा शिविर में अध्यक्ष जीवतराम करीरा, कार्यक्रम संयोजक महेश मंघरानी, सह संयोजक जेठा भाई पुरुसनानी, शोभाराम पुरुसनानी, रामचंद्र छाबड़िया, जयप्रकाश धर्मानी, हेमंत भोजवानी, सूर्यप्रकाश मदनानी, नंदलाल आयलानी, श्याम भोजवानी, वासुदेव नेताजी, सुंदरलाल हरजानी, रमेश बालानी, लालचंद मोटवानी, विपिन करीरा, प्रदीप वनवारी, नरेश लखवानी, डॉ आर के आनंद, सुंदर चेतवानी, सुनील करमचंदानी, के लाल त्रिलोकानी, हरीश टहलयानी, कहैन्या सोनी, राजकुमार भाटिया, हरीश लालवानी, दौलतराम साधवानी, दिनेश नोतनानी, विनोद सीतलानी , नानकराम मानवानी, मनोहर मतलानी, टीकम लालवानी, सुनील मानवानी, सुशील गिडवानी, हेमंत बालानी, तीरथ भावनानी, नारायनदास देवनानी, रवि गिडवानी, भारत होतचंदानी, दीपक सिंघानी, दिनेश कोडवानी सहित बड़ी संख्या में पूज्य सिंधी महापंचायत के पदाधिकारी सदस्य और उपचार पाने वाले जरूरतमंद लोग मौजूद रहे।
: आई आई एच पी की दो दिवसीय राष्ट्रीय होमियोपैथिक सेमिनार फवरी माह 2024 में हैदराबाद में
Fri, Jan 5, 2024
आगरा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होमियोपैथिक फिजिशियंस की दो दिवसीय राष्ट्रीय होमियोपैथिक सेमिनार हैदराबाद, तेलंगाना में आगामी 10 व 11 फरवरी 2024 को आयोजित की जा रही है
इस सेमिनार में देश, विदेश से कई होमियोपैथिक चिकित्सक भाग लेने वाले है। यह जानकारी आईआईएचपी के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डॉ. राजेंद्र सिंह ने दी है। डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि इस सेमिनार में प्रख्यात होमियोपैथिक चिकित्सक अपने अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे जिस से आज के समय में वातावरण के बदलाव से कई प्रकार की नई नई बीमारियां पैदा हो रहीं हैं उन पर काबू पाया जा सके। साथ ही वहां पर होमियोपैथिक के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकत्सकों को सम्मानित भी किया जायेगा।
: आगरा में सक्रिय क्षय रोगी खोज अभियान में मिले 390 नये टीबी मरीज
Fri, Jan 5, 2024
जिले की 20 प्रतिशत आबादी में 23 नवंबर से पांच दिसंबर तक खोजे गए नये टीबी मरीज
अपने आसपास टीबी के लक्षण वाले मरीज दिखें तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर कराएं जांच
आगरा। भारत को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने क लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत 23 नवंबर से पांच दिसंबर तक “एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान” ( सक्रिय क्षय रोगी खोजी अभियान) चलाया गया। अभियान के दौरान 390 नये टीबी मरीज मिले हैं जिनका इलाज शुरू कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि अगर किसी के आसपास टीबी के लक्षणों वाले मरीज दिखें तो नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच अवश्य कराएं। टीबी संबंधी समस्त जांचे और इलाज सरकारी प्रावधानों के तहत उपलब्ध कराई जा रही हैं।
सीएमओ डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने जनपदवासियों से कहा है कि एक क्षय रोगी का इलाज समय से शुरू न होने से वह साल भर में अपने सम्पर्क में आने वाले दस से पंद्रह लोगों क्षय रोगी बना सकता है । वहीं अगर क्षय रोगी का इलाज शुरू कर दिया जाता है तो तीन सप्ताह दवा खाने के बाद वह किसी अन्य व्यक्ति को संक्रमित नहीं करता है । दवा का कोर्स पूरा होने पर वह पूरी तरह से स्वस्थ हो जाता है । ऐसे में सभी लोग क्षय रोग के लक्षणों वाले व्यक्तियों को जाँच करने के लिए प्रेरित कर निकटतम सरकारी स्वास्थ्य इकाई ,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ,सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर भेजकर जिले को क्षय रोग मुक्त करने में अपना योगदान दें।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुखेश गुप्ता ने बताया कि एसीएफ कैंपेन के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित टीम द्वारा जनपद में 10.99 लाख लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की गयी। इस दौरान 6013 संभावित टीबी मरीजों के बलगम की जांच की गयी जिनमें से 390 लोग टीबी से ग्रसित मिले।
डीटीओ ने बताया कि मरीज में टीबी पुष्टि होने पर उसके परिवार के सदस्यों की भी टीबी की जांच कराई जाती है। परिवार के अन्य सदस्यों में टीबी न निकलने पर भी उनको टीपीटी(टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी) दी जाती है । इससे उन्हें भविष्य में टीबी होने की आशंका नहीं रह जाती । उन्होंने बताया कि टीबी मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, इसलिए इन मरीजों की एचआईवी और मधुमेह की भी जांच कराई जाती है । सभी मरीजों की ड्रग सेंस्टिविटी की भी जांच कराई जाती है । जो मरीज ड्रग सेंस्टिव मिलते हैं उनकी दवा छह महीने तक चलती है, जबकि ड्रग रेसिस्टेंट (डीआर) टीबी मरीजों का इलाज डेढ़ से दो साल तक चलता है । ड्रग सेंस्टिव टीबी के मरीज जब बीच में दवा बंद कर देते हैं तो उनके डीआर टीबी मरीज बनने की आशंका बढ़ जाती है, इसलिए दवा पूरा किये बिना इलाज बंद नहीं होना चाहिए अन्यथा टीबी से जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
डीटीओ ने बताया कि टीबी मरीजों को ट्रीटमेंट के दौरान बेहतर पोषण की आवश्यकता होती है । इसलिए प्रत्येक टीबी मरीज को निक्षय पोषण योजना से जोड़कर 500 रुपए प्रतिमाह सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर किए जाते हैं। इसके साथ ही निक्षय मित्रों के द्वारा भी टीबी मरीजों को उनकी सहमति पर गोद लिया जाता है और उन्हें पोषण संबंधी सहयोग के साथ साथ मानसिक संबल भी दिया जाता है । इस योजना के तहत कोई भी व्यक्ति, राजनेता, अधिकारी, जनप्रतिनिधि या स्वयंसेवी संस्था टीबी मरीज को गोद लेकर उन्हें हर माह पोषण सामग्री दे सकता है । साथ ही इलाज चलने तक मरीज को मानसिक संबल प्रदान करना है ताकि वह निराश न हो और बीच में दवा न बंद करे ।
टीम की मदद से मिली राह
ब्लॉक फतेहपुर सीकरी के नगला डंबर के निवासी 46 वर्षीय कुंवर सिंह (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि उन्हें 15 दिनों से लगातार खांसी आ रही थी । इसके अलावा कोई परेशानी नहीं थी । इसलिए उन्होंने मर्ज की गंभीरता पर ध्यान नहीं दिया । 3 दिसंबर 2023 को को स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर आई और टीबी के लक्षणों के बारे में बताया । जब उन्होंने खांसी वाली परेशानी के बारे में टीम को बताया तो उनका बलगम जांच के लिए लिया गया। जांच के उपरांत पता चला कि उन्हें टीबी हो गया है । वह बताते हैं कि उन्होंने टीबी यूनिट फतेहपुर सिकरी जाकर डॉक्टर को दिखाया और दवाइयां प्राप्त की । डॉक्टर ने उन्हें नियमित दवा का सेवन करने की सलाह दी है । उन्होंने बताया, ‘‘अभी मैं अपनी नियमित रूप से दवाई का सेवन कर रहा हूं, ताकि मैं जल्द से जल्द स्वस्थ हो सकूं । सीनियर ट्रीटमेंट सुपरवाइजर सीमा द्वारा मुझे बताया गया कि आपको निक्षय पोषण योजना से भी जोड़ा जा चुका है । उपचार के दौरान तक 500 रुपये प्रतिमाह सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएंगे। मास्क लगाने और पौष्टिक आहार जैसे दूध, अंडा, पनीर, फल आदि का सेवन करने की भी सलाह दी गयी है ।’’