: हॉफ मैराथन 3 मार्च को, दौड़ेंगे दो हजार से अधिक धावक
Fri, Mar 1, 2024
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आगरा स्पोर्ट्स फाउंडेशन द्वारा आयोजित हॉफ मैराथन का
3 मार्च को एकलव्य स्टेडियम से होगा
शुभारम्भ
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प्रशासनिक अधिकारी, व्यवसायी, डॉक्टरों सहित कई वर्गों के लोग लेंगे भाग
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टीशर्ट व मेडल का हुआ अनावरण, 7 से 75 वर्ष से अधिक उम्र के लोग लेंगे भाग
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शहर के लोगों में मैराथन के लेकर उत्साह, हर रोज हो रही प्रैक्टिस
आगरा। ताजनगरी में एक नई शुरुआत होने जा रही है। पहली बार 21 किमी की हॉफ मैराथन का आयोजन आगरा स्पोर्ट्स फाउंडेशन द्वारा 3 मार्च को एकलव्य स्टेडियम से किया जा रहा है। जिसमें दो हजार से अधिक लोग दौड़ेंगे। एडीशनल कमिश्नर प्रशासन आगरा राजेश कुमार व एसीपी ट्रैफिक अरीब अहमद भी भाग लेंगे। यह जानकारी आज कॉसमॉस मॉल स्थित होटल फेयरफील्ड बॉय मैरिएट में टी-शर्ट व मेडल लॉन्च कार्यक्रम में आयोजकों द्वारा दी गई। मैराथन का शुभाम्भ आगरा के पहले आयरन मैन ऋदिम गर्ग 3 मार्च को सुबह 5.30 बजे झंडी दिखाकर करेंगे।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. रंजना बंसल ने टी शर्ट व मेडल का अनावरण करते हुए कहा कि इससे पहले मैराथन में हिस्सा लेने के लिए लोग मुम्बई, दिल्ली और बैंगलोर जैसे शहरों में जाते हैं। आगरा में हाफ मैराथन का आयोजन सराहनीय कदम है। फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. विकास मित्तल व उपाध्यक्ष डॉ. संजय गुप्ता ने कहा कि सभी अपनी बिब, टीशर्ट, गुडी बैग 2 मार्च को सुबह 10 से शाम 5.30 बजे तक एकलव्य स्टेडियम से प्राप्त कर सकते हैं।
मैराथन का आयोजन तीन कैटेगरी (5 किमी, 10 किमी व 21 किमी) में किया जा रहा है। 5 किमी मैराथन का मार्ग एकलव्य स्टेडियम से प्रारम्भ होकर मॉल रोड होते हुए करिअप्पा मार्ग पर ढाई किमी के बाद पुनः एकलव्य स्टेडियम पर पहुंचेगा। 10 किमी मैराथन का मार्ग एकलव्य स्टेडियम से प्रारम्भ होकर लाल किला होते हुए सर्किट मार्ग होते हुए एकलव्य स्टेडियम होगा। 21 किमी की मैराथन का मार्ग एकलव्य स्टेडियम से लाल किला सर्किट हाउस, सेल्फी प्वाइंट, जेपी होटल से यू टर्न लेते हुए फतेहाबाद रोड होते हुए एकलव्य स्टेडियम पर समाप्त होगा। 10 व 21 किमी की मैराथन के धवकों में आरएफआईडी चिप लगी होगी जो दौड़ पूरी करने के समय को प्रतिभागी के मोबाइल दौड़ पूरी होते ही भेजेगी।
इस अवसर मुख्य रूप से अजय दीपसिंह, डॉ. एनएस लोधी, महेश सारस्वत, भरत सारस्वत, संदीप ढल, आवेग मित्तल, कमलकान्त, संकल्प, दीपक नेगी, डॉ. रचना अग्रवाल, डॉ. सपना, शिवानी वशिष्ठ, गितिका, मोहित, शुभम, विकास, विनय, मोहित, कीर्तिराज, सुमित विभव, पवन चैहान, आलोक अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
ये होंगी सुविधाएं
मैराथन के लिए प्रत्येक 1-2 किमी के बीच हाइडिरेशन प्वाइंट बनाए गए हैं। 12 फिजियोथैरिपिस्ट, 4 एम्बूलेंस (विद कम्पलीट मेडिकल सपोर्ट), मार्ग में फल, धावकों का उत्साह बढ़ाने के लिए ढोल नगाड़े व लोक नृत्य करते कलाकार होंगे।
: 221 उदासीन परिवारों के बच्चों का किया टीकाकरण
Tue, Feb 27, 2024
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उदासीन परिवारों की काउंसलिंग बताए नियमित टीकाकरण के फायदे
काउंसलिंग के बाद किया नियमित टीकाकरण
आगरा। नियमित टीकाकरण बच्चों के जीवन और भविष्य की सुरक्षा के लिए सबसे प्रभावी और किफायती तरीकों में से एक है, समय से शिशुओं का टीकाकरण कराने पर वह गंभीर रोगों से बच सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को 11 जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत टीकाकरण किया जाता है। लेकिन कुछ परिवार नियमित टीकाकरण के प्रति उदासीन होते हैं, वह भय व भ्रांतियों के कारण बच्चों का टीकाकरण करवाने से मना करते हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऐसे 221 उदासीन परिवारों के बच्चों का नियमित टीकाकरण कराया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जो परिवार नियमित टीकाकरण के प्रति उदासीन होते हैं, विभाग द्वारा ऐसे परिवारों की लगातार काउंसलिंग करके उन्हें टीकाकरण के फायदों से अवगत कराया जाता है, जो लोग मान जाते हैं, इसके बाद इन परिवारों के बच्चों को टीका लगाया जाता है।
सीएमओ ने बताया कि नियमित टीकाकरण के प्रति उदासीन परिवारों को टीकाकरण के लिए जागरुक कर शत-प्रतिशत लाभ जन समुदाय को दिलाना ही प्राथमिकता है। शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों को 11 जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण किया जाता हैँ जैसे डिप्थीरिया एक संक्रामक रोग है। यह रोग कोराइन बैक्टीरियम डिप्थीरिया के कारण होता है जो गले और ऊपरी वायुमार्ग को संक्रमित करता है तथा टॉक्सिन एवं अन्य अंगों को प्रभावित करता है। दूसरे प्रकार का डिप्थीरिया गले और कभी-कभी टॉन्सिल को प्रभावित करता है। डिप्थीरिया के खिलाफ टीकाकरण से होने वाली मृत्यु दर कम हुई है। अपने बच्चे को सरकारी अस्पताल में डिप्थीरिया का टीका जरूर लगवाएं। यह निःशुल्क लगाया जाता है। टीकाकरण अभियान सभी की सहभागिता से ही सफल हो सकता है।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. संजीव वर्मन (डीआईओ) ने बताया कि टिटनेस बैक्टीरिया की वजह से होता है, जो शरीर के अन्दर त्वचा पर पडे दरार के माध्यम से प्रवेश करते है और एक विष उत्पन्न करते है जो तंत्रिका तंत्र पर आक्रमण करता है। इससे शरीर मे दर्दनाक कसाव और जबड़ो मे जडाव पैदा होता है, जिससे संक्रमित व्यक्ति उसकाध्उनका मुँह नही खोल सकता या निगल सकता है। जब टिटनेस सांस लेने में मदद करने वाली मांसपेशियों को प्रभावित करता है, तब रोगी तुरुन्त ही मर भी सकता है।
डीआईओ ने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत टीकाकरण से वंचित वैब (वैक्सीन अवॉइडेंस बिहैवियर) झिझक ध्उदासीन परिवारों को मोबिलाइज कर टीकाकरण कराने में स्वास्थ्य विभाग सभी की सहभागिता से ही सफल हो सकता है। आशा और एएनएम छूटे हुए बच्चों को चिन्हित करने के बाद ई कवच पोर्टल पर अपडेट कर रही हैं। टीकाकरण होने के बाद भी जानकारी पोर्टल पर अपडेट की जा ही हैं। डीआईओ ने बताया कि इस दौरान यूपीएचसी जगदीशपुरा, नगला बूढ़ी, सिकंदरा, हरीपर्वत ईस्ट, मंटोला, ताजगंज, जमुनापार, नरायच, इस्लाम नगर, शाहगंज फर्स्ट, शाहगंज द्वितीय क्षेत्र के परिवारों में यह सफलता हासिल हुई है।
इस गतिविधि यूनिसेफ के रीजनल कोऑर्डिनेटर, डीएमसी राहुल कुलश्रेष्ठ, एमओआईसी डॉ. आरएस लकरा, डॉ. गायत्री, डॉ. राहुल सारस्वत, डॉ. प्रताप सिंह, डॉ. अरुक्षिका यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
: चिकित्सा आपात स्थितियों के प्रबंधन पर एक दिवसीय सेमिनार का हुआ आयोजन
Mon, Feb 26, 2024
आगरा। दयालबाग रोड स्थित होटल पूनम प्लाजा में सोसाइटी फॉर एंडोडोंटिक एक्सीलेंस आगरा के बैनर तले दंत चिकित्सा कार्यालय में चिकित्सा आपात स्थितियों के प्रबंधन पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
मुख्य प्रवक्ता के रूप में ओरल एंड मैक्सॉलोफेसिअल सर्जन डॉ संदीप फौजदार द्वारा बताया कि दंत चिकित्सकों को व्यवहार में उत्पन्न होने वाली चिकित्सीय आपात स्थितियों के प्रबंधन के लिए तैयार रहना चाहिए। बेहोशी के अलावा, घटित होने वाली अन्य आपात स्थितियों में एलर्जी प्रतिक्रियाएं, एनजाइना पेक्टोरिसध्मायोकार्डियल रोधगलन, कार्डियक अरेस्ट, पोस्टुरल हाइपोटेंशन, दौरे, ब्रोंकोस्पजम और मधुमेह संबंधी आपात स्थिति शामिल हैं।
दंत चिकित्सा कार्यालय में लगभग सभी चिकित्सीय आपात स्थितियों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मस्तिष्क और हृदय की अपर्याप्त ऑक्सीजन को रोकना या ठीक करना है। इसलिए, सभी चिकित्सा आपात स्थितियों के प्रबंधन में यह सुनिश्चित करना शामिल होना चाहिए कि इन महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाया जा रहा है।
एसोसिएशन की प्रेसिडेंट डॉ सुषमा प्रतिहार ने बताया कि यह बुनियादी कार्डियोपल्मोनरी पुनर्जीवन (सीपीआर) के अनुरूप है, जिसके लिए दंत चिकित्सक को सक्षम होना चाहिए। इस सेमिनार में डॉ असीम शिरोमणी, डॉ अमित नारायन, डॉ दीपक कुरूप, डॉ आशीष गुप्ता, डॉ पुनीत श्रीवास्तव, डॉ दीप्ती चड्ढा श्रीवास्तव, डॉ चकित माहेश्वरी, डॉ श्रेया कपूर मल्होत्रा, डॉ जया पम्बू, डॉ भरत चैहान, डॉ विपुल अरोरा, डॉ वैभव कृष्णा सिंह, डॉ राहुल आदि ने प्रतिभाग लिया।