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: एसएन में टीबी उन्मूलन को लेकर हुई कार्यशाला

Pragya News 24

Fri, Apr 26, 2024
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  • विशेषज्ञों ने उपचार की जानकारी को किया साझा
  • देश को 2025 तक टीबी मुक्त करने का लिया संकल्प

आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के रेस्पिरेट्री मेडिसिन विभाग द्वारा राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत गुरुवार को एक प्रशिक्षण कार्यक्रम मेडिसिन विभाग के एलटी 4 में आयोजित किया गया।

सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि टीबी का इलाज करते वक्त डॉक्टर द्वारा मरीज को नियमित दवा लेने के महत्व के बारे में बताना अत्यधिक आवश्यक है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा 2025 तक टीबी मुक्त भारत करने की बात कही। प्रधानाचार्य ने डॉक्टर को अपनी सुरक्षा जैसे मास्क ग्लव्स इत्यादि पहन कर इलाज करने पर ध्यान देने की भी बात कही।

रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के आचार्य एवं विभाग अध्यक्ष डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने ड्रग रेसिस्टेंट टीबी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि टीबी में बार-बार मरीजों द्वारा टीबी की बीच में दवाइयां छोड़ने से बहुत नुकसान होता है तथा ड्रग रेजिस्टेंट टीबी बन जाती है। ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीजों की वजह से आम जनमानस में टीबी ज्यादा फैलने की संभावना रहती है। डॉ. जीवी सिंह आचार्य एवं विभाग अध्यक्ष रेस्पिरेटरी मेडिसिन एवं अध्यक्ष, स्टेट टास्क फोर्स फॉर टीबी एलिमिनेशन ने एक्स्ट्रापल्मोनरी टीबी के निदान में माइक्रोबायोलॉजिकल पुष्टी पर जोर देते हुए ऐसी टीबी में मॉलिक्यूलर जाँचो जैसे सीबीनाट की उपयोगिता बताई।

टीबी एवं चेस्ट विभाग के आचार्य डॉ. संतोष आचार्य ने टीबी की डायग्नोसिस एवं इलाज के बारे में बताया। डॉ. मानस शर्मा, डबल्यूएचओ कंसलटेंट, प्रभारी आगरा मथुरा निक्षय पोर्टल के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार टीबी के मरीजों को इनरोल किया जाता है।

डॉ अनुराग मेडिकल ऑफिसर, कंसल्टेंट स्टेट टीबी ट्रेनिंग सेंटर ने एंड टीबी 2025, यस वी कैन का स्लोगन दोहराया। उन्होंने बताया कि टीबी प्रिवेंटिव थेरेपी (टीपीटी) भारत सरकार की योजना के तहत टीबी के मरीजों के परिवार के सदस्यों को डॉक्टर के सलाह के उपरांत एक गोली रोज 6 महीने तक दी जाती है। टीपीटी पर डा. गीतू ने विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की योजना के तहत घोषित टीबी के मरीजों को पोषण के लिए 500 रुपये हर महीना 6 महीने के इलाज तक दिया जाता है।
डॉ. सचिन गुप्ता, सहायक आचार्य टीबी एवं चेस्ट विभाग द्वारा के टीबी की दवाइयां से होने वाले दुष्परिणाम एवं उसके रोकथाम के बारे में पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को विस्तार से बताया। डॉ. मधु नायक सह आचार्य द्वारा टीबी की गांठ के उपचार के बारे में विस्तार से बताया। इस ट्रेनिंग में लगभग 90 रेसिडेंट डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया गया।

कार्यक्रम में उप प्रधानाचार्य डॉक्टर टीपी सिंह, मेडिसिन विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. मृदुल चतुर्वेदी, सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर मोना वर्मा, मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर योगेश कौशल, मीडिया प्रभारी डॉक्टर प्रीति भारद्वाज आदि उपस्थित रहे।

टीबी के लक्षण

  1. 15 दिन से ज्यादा खांसी (होने पर चिकित्सा की सलाह पर छाती का एक्सरे व बलगम की जांच करवाएं।
  2. शाम को बुखार आना
  3. अचानक वजन कम हो जाना
  4. भूख का काम होना
    इन लक्षणों के होने पर चिकित्सक से संपर्क कर टीबी की जांच करवाएं।

बचाव

  • खांसी होने पर, मुंह पर रुमाल रुमाल अथवा गमछे का इस्तेमाल करें स
  • जंक फूड एवं कोल्ड ड्रिंक व पैकेट बंद खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करेंस इससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती हो जाती हैस
  • संतुलित आहार का सेवन करें व अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर टीबी की बीमारी से बचा जा सकता हैस
  • यदि किसी परिवार के सदस्य को टीबी है तो अन्य सदस्य भी चिकित्सक के परामर्श के बाद छाती के एक्स-रे एवं बलगम की जांच (मोंटेक टेस्ट) करवाने की सलाह दी जाती है।

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