: संचारी रोगों के नियंत्रण को शुरू हुआ अभियान
Wed, Apr 2, 2025
एमजी रोड पर आगरा कॉलेज ग्राउंड से निकाली गई जागरुकता रैली
विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने रैली को दिखाई हरी झंडी
एक से तीस अप्रैल तक चलेगा अभियान, घर घर जाकर टीमें संचारी रोगों के प्रति लोगों को करेंगे जागरूक
10 से अप्रैल से शुरू होगा दस्तक अभियान, घर-घर जाकर दस्तक देंगी आशा, पूछेंगी सेहत का हाल
आगरा। जनपद में मंगलवार से विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू हो गया। एमजी रोड पर आगरा कॉलेज ग्राउंड से सुभाष पार्क तक जागरुकता रैली निकाली गई। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने रैली को दिखाई हरी झंडी। नेतृत्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने किया।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि जनपद में एक अप्रैल विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान शुरू हो रहा है। यह अभियान 30 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान जनपदवासियों को वेक्टर जनित रोगों, जल जनित रोगों व लू आदि से बचाव व उपचार के बारे में जागरूक किया जाएगा। इसी बीच 10 अप्रैल से 30 अप्रैल तक दस्तक अभियान भी संचालित किया जाएगा। घर-घर जाकर आशा कार्यकर्ता सेहत का हाल पूछेंगी सही जानकारी प्राप्त कराए और अभियान में सहयोग करें।
वेक्टर बॉर्न डिजीज रोगों के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि जो बीमारी एक मरीज से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में दूषित भोजन, जल या संपर्क या कीटनाशक या जानवर से फैलती है उसे संचारी रोग कहते हैं। इसमें प्रमुख रूप से डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार, चिकिनगुनिया, क्षय और कुष्ठ रोग आदि हैं। इन्हीं बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए विशेष संचारी रोग चल रहा है। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग एक नोडल के रूप में कार्य कर रहा है जबकि अन्य विभागों को सहयोग करने की ज़िम्मेदारी दी गई है। साथ ही ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में सफाई के साथ लारवारोधी गतिविधियां और फागिंग भी कराई जा रही है।
जिला मलेरिया अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि अभियान के तहत घर-घर सर्वेक्षण कर फ्लू, खांसी, बुखार के रोगियों व कुपोषित बच्चों की जांच की जाएगी। सभी को मच्छरों से बचाव के तरीकों के बारे में जानना जरूरी हैं । बुखार होने पर झोलाछाप चिकित्सक से बचे बिना चिकित्सक की सलाह के अनावश्यक औषधियों का सेवन ना करें। सभी बातों का अगर हम सब पालन करेंगे तो बीमारियों से हम सब बचे रहेंगे ।
सहायक मलेरिया अधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान आशा संगिनी, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रमुख भूमिका में घर-घर जाकर अभियान सफल बनाएंगी। उन्होंने बताया कि 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस पर जिले में मलेरिया निगरानी में सुधार और वार्षिक रक्त परीक्षण दर 10 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। रैली में आशा कार्यकर्ता और एंबेड संस्था के डीसी मुहम्मद इरशाद, बीसीसीएफ वर्कर एवं एनसीसी कैडेट्स ने प्रतिभाग किया।
इस अवसर पर डब्ल्यूएचओ से एसएमओ डॉ. महिमा, डीपीएम कुलदीप भारद्वाज, यूनिसेफ के डीएमसी राहुल कुलश्रेष्ठ, स्कूलों के अध्यापक सहित छात्र- छात्राएं मौजूद रहे
: आसोपा हॉस्पिटल 34 वर्षों से गरीब मरीजों की सेवा में अग्रणी : डॉ ज्योति आसोपा
Wed, Mar 26, 2025
आगरा। आसोपा हॉस्पिटल एण्ड रिसर्च सेंटर के 34 वर्ष पूरे होने पर मंगलवार को प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ ज्योति आसोपा ने बताया कि आसोपा हॉस्पिटल स्व. प्रोफेसर हरी शंकरआसोपा और उनकी पत्नी विमला आसोपा द्वारा निर्मित कराया गया था जो गरीबों की सेवा में हमेशा आगे रहते थे। उन्होंने बताया कि प्रति माह कैम्प लगाकर मरीजों को निशुल्क परामर्श दिया जाएगा। कैम्प में लगभग 50 मरीजों को निशुल्क देखा जाएगा जिसके लिए किसी प्रकार के रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होगी।
हॉस्पिटल की डायरेक्टर डॉ. ज्योति आसोपा ने बताया कि यह हॉस्पिटल कोई कॉरपोरेट हॉस्पिटल नहीं हैं। यह विशुद्ध रूप से एक सेवा करने वाला हॉपिटल है जो डॉ. हरिशंकर आसोपा के बनाए हुए सिद्धांतों को पूरा कर रहा है। उन्होंने बताया कि 1971 में उनका शोध इंटरनेशनल सर्जरी जर्नल में प्रकाशित हुआ था। यह प्रक्रिया जिसे आसोपा प्रक्रिया के नाम से जाना जाता है। पूरे विश्व में यूरोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, प्लास्टिक एवं सामान्य सर्जन द्वारा की जाने लगी हैं। आसोपा हॉस्पिटल अपने विश्वस्तरीय सेवाओं के लिए विख्यात है। डायरेक्टर डॉ पुनीता आसोपा ने बताया कि वर्तमान में हॉस्पिटल में डॉक्टर्स की एक प्रशिक्षित टीम डॉ ज्योति आसोपा के संचालन में काम करती है जो खुद न्यूयॉर्क मेडिकल कॉलेज, न्यूयॉर्क अमेरिका से एम.डी. है। यह हॉस्पिटल गरीब मरीजों की सेवा करने में सबसे अग्रणी रहता है। इस मौके पर डॉ ज्योति आसोपा (डायरेक्टर), डॉ पुनीता आसोपा डायरेक्टर, डॉ ए के खन्ना (फिजिशियन), डॉ जी जी सिंघल (सर्जन), डॉ रमन मरचंद( सर्जन )डॉ. शालिनी मुंजाल (गाइनेकोलॉजिस्ट), डॉ एल के गर्ग (बाल रोग विशेषज्ञ), पी के श्रीवास्तव (मैनेजर) आदि अन्य उपस्थित थे।
: टीबी हारेगा, देश जीतेगा – भारत एवं उत्तर प्रदेश में टीबी उन्मूलन के लिए समर्पित प्रयास
Sun, Mar 23, 2025
आगरा I विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस के अवसर पर एसएन मेडिकल कॉलेज के क्षय रोग विभाग में स्टेट टीबी टास्क फ़ोर्स, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष डॉ गजेंद्र विक्रम सिंह ने भारत सरकार के “टीबी मुक्त भारत अभियान” के तहत टीबी उन्मूलन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया। विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस के अवसर पर डॉ गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि भारत विश्व में टीबी से सर्वाधिक प्रभावित देशों में से एक है, और इसे जड़ से खत्म करने के लिए सभी हितधारकों को एकजुट होकर कार्य करना होगा।
भारत में टीबी की स्थिति:
उन्होंने कहा कि भारत में टीबी अब भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। विश्व में हर चार में से एक टीबी मरीज भारत में है। 2023 में भारत में 28 लाख से अधिक नए टीबी मरीज दर्ज किए गए। प्रतिवर्ष 3.25 लाख से अधिक लोग टीबी के कारण अपनी जान गंवाते हैं। 1 लाख से अधिक एमडीआर-टीबी मरीज, एमडीआर-टीबी (MDR-TB) और एक्सडीआर-टीबी (XDR-TB) के मामले बढ़ रहे हैं, जिससे उपचार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
-टीबी और कुपोषण का गहरा संबंध है ।60% से अधिक टीबी रोगी कुपोषण से पीड़ित होते हैं।
उत्तर प्रदेश में टीबी की स्थिति एवं चुनौतियाँ:
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हर वर्ष 4 लाख से अधिक नए टीबी मरीज सामने आते हैं। राज्य के ग्रामीण इलाकों में जागरूकता की कमी, गलत धारणाओं और सामाजिक कलंक (Stigma) के कारण मरीज इलाज अधूरा छोड़ देते हैं। निजी क्षेत्र में इलाज लेने वाले मरीजों का डेटा समुचित रूप से दर्ज नहीं होता, जिससे टीबी नियंत्रण में बाधा आती है। कुपोषण, गरीबी और भीड़भाड़ वाली बस्तियों में टीबी संक्रमण तेजी से फैलता है। कुछ जिलों में दवा-प्रतिरोधी टीबी (MDR-TB) के मामले अधिक हैं, जिससे इलाज अधिक महंगा और जटिल हो जाता है।
डॉ गजेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि टीबी को हराने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं – इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। इस विश्व क्षय रोग दिवस पर, हम सभी संकल्प लें कि समाज के हर वर्ग को जागरूक कर, टीबी रोगियों को संबल प्रदान कर और सामूहिक प्रयासों से “टीबी मुक्त उत्तर प्रदेश एवं भारत” का सपना साकार करेंगे।
टीबी उन्मूलन के लिए भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास
1- प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान:
• 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य, जो वैश्विक लक्ष्य (2030) से 5 साल पहले रखा गया है।
• निक्षय पोषण योजना के तहत टीबी रोगियों को पोषण सहायता के रूप में ₹100 प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
• निक्षय मित्र योजना के तहत सामाजिक संगठनों, कॉर्पोरेट सेक्टर और व्यक्तियों को टीबी मरीजों की सहायता के लिए जोड़ा जा रहा है।
2- उत्तर प्रदेश में टीबी नियंत्रण के लिए विशेष कदम:
• टीबी रोगियों की सक्रिय पहचान के लिए डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग अभियान।
• एचआईवी-टीबी सह-संक्रमण की विशेष जांच एवं उपचार योजना।
• “टीबी मुक्त पंचायत” पहल, जिससे गांवों को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
• निजी चिकित्सकों को टीबी की रिपोर्टिंग एवं उपचार प्रोटोकॉल में शामिल करने के प्रयास।
• जीनएक्सपर्ट (GeneXpert) और ट्रूनैट (Truenat) जैसी आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का विस्तार।
आगे की राह: ठोस रणनीति आवश्यक
टीबी के समूल नाश के लिए एक व्यापक रणनीति की आवश्यकता है:
• सक्रिय मामलों की खोज एवं शीघ्र निदान सुनिश्चित करना।
• टीबी उपचार को मजबूत करना एवं ड्रग-रेसिस्टेंट टीबी (MDR/XDR-TB) के इलाज में सुधार।
• कुपोषण से ग्रस्त मरीजों के लिए पोषण योजनाओं का विस्तार।
• सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए मीडिया, स्कूलों, और स्थानीय समुदायों को शामिल करना।
• नई टीबी वैक्सीन और उन्नत दवाओं के शोध को गति देना।
• सरकारी एवं निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत करना।