•
महायज्ञ में दूर दराज से आए हजारों श्रद्धुओं ने परिक्रमा लगाकर दी पूर्णाहूति, कल होगा मूर्तियों का विसर्जन
आगरा। मुख पर महामाई कामाख्या देवी के जयकारे और मन में श्रद्धा का भाव। हर तरफ पर्यावरण को शुद्ध करती हवन कुण्ड से उठती यज्ञधूनि। जिधर देखों माता की भक्ति थी। मानों शास्त्रीपुरम सुनारी में आयोजित मां कामाख्या सहस्त्र चण्डी 108 कुण्डीय महायज्ञ नीलांचल पर्वत बन गया। दस दिवसीय महायज्ञ के सम्पन्न होने पर आज हजारों श्रद्धालुओं ने पूर्णाहूति दी। फल, मेवा, टॉफी आदि से किसी ने एक तो किसी ने 21 परिक्रमा लगाई।
परम पूज्य संत श्री कीर्तिनाथ जी महाराज के नेतृत्व में हजारों श्रद्धालुओं ने पूर्णाहूति दी। हर भक्त महामाई कामाख्या के दर्शन को उत्सुक दिखा। मां कामाख्या चरण सेवा आयोजन समिति के नेतृत्व में महामाई की पूर्णाहूति के बाद भण्डारे का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने महामाई का प्रसाद ग्रहण किया। कामाख्या आयोजन सेवा समिति वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुरारी प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि समिति अध्यक्ष कान्ता प्रसाद अग्रवाल द्वारा साढ़े छह बीघा जमीन मां कामाख्या के मंदिर निर्माण के लिए रेणुका धाम में दान की गई है। जल्दी मंदिर निर्माण प्रारम्भ होगा। अंत में आरती कर सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के अध्यक्ष कान्ता प्रसाद अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुरारीप्रसाद अग्रवाल, अजय गोयल, राजदरबार ग्रुप के पवन दीक्षित, अमित वाष््र्णेय, बी एस पाण्डेय, वंदना मेड़तवाल, गुड्डा प्रधान, मुख्य संयोजक राहुल अग्रवाल, जयशिव छोकर, चैधरी यशपाल सिंह, शम्भूनाथ चैबे, मुकेश अग्रवाल अवि गोयल, विक्रम सिंह राणा, मुन्ना मिश्रा, पवन भदौरिया, सुनील पाराशर, खेमसिंह पहलवान, मीना अग्रवाल, वीरेन्द्र मेड़तवाल, दिव्या मेढतवाल, सीमा गोयल, रीया आदि उपस्थित थे।
इन्होंने ली संत श्री कीर्तिनाथ जी महाराज से गुरु दीक्षा
कामाख्या मंदिर आसाम के परम पूज्य संत श्री कीर्तिनाथ जी महाराज से आज राहुल अग्रवाल, पवन भदौरिया, अवि गोयल, अखिलेश पाराशर, वीरेन्द्र मेढतवाल, जयशिव छोकर ने ली। संत श्री कीर्तिनाथ जी महाराज ने इन सभी शिष्यों को गुरु मंत्र दिया।
21 फरवरी को सुबह 9 बजे होगा विसर्जन
बुधवार को सुबह 9 बजे मां कामाख्या सहस्त्र चण्डी 108 कुण्डीय महायज्ञ में प्रतिष्ठत की गई मां कामाख्या की मूर्ति सहित सभी 56 मूर्तियों को कैलाश घट पर यमुन मैया में विसर्जित किया जाएगा। सभी मूर्तियां मिट्टी, धाम की फूस, बांस आदि से ईकोफ्रैंडली तैयार करायी गई थी, जिससे पर्यावरण को किसी प्रकार का नुकसान न हो। मुर्ति विसर्जन के उपरान्त कन्या लांगुर को भोजन कराया जाएगा व कलश वितरण किया जाएगा।