: फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन में बच्चों ने निभाई जैन चरित्रों की भूमिका, लोगों का मन मोहा
Mon, Sep 16, 2024
आगरा। शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर 7 आवास विकास कालोनी सिकंदरा में पर्युषण महापर्व के मौके पर आज उत्तम त्याग धर्म के दिन उपरांत सामूहिक आरती और संगीत मय पूजन किया गया। विधि विधान की क्रिया शुभम जैन शास्त्री मथुरा द्वारा कराई गई। सर्व प्रथम मूल नायक भगवान श्री शांतिनाथ जी का अभिषेक 4 महानुभावों द्वारा स्वर्ण कलश से किया गया।
पंडित शुभम जैन शास्त्री जी ने बताया कि क्या मुनि भी दान करते हैं या दान कर सकते हैं ? क्योंकि उनके पास एक फूटी कोड़ी भी नहीं होती, तो वह किसी को क्या कुछ देेंगे। लेकिन मुनिराज भी दान कर सकते हैं और किया भी करते हैं। उनका दान गृहस्थों के दान से भी अधिक महत्वपूर्ण होता है। मुनिवर सब जीवों को अभयदान देते हैं क्योंकि वे परम करुणामय अहिंसा महाव्रत के धारी होते हैं। दिन रात, उठते-बैठते, सोते जागते बहुत सावधानी से छोटे बड़े, स्थावर जीवों की रक्षा में तत्पर रहते हैं। यदि उनको कोई मारे या गाली दे, अपमान करे तो भी न तो किसी को दुर्वचन कहते हैं, न शाप देते हैं और न कुछ अपने मन में उसके लिये बुरा विचार रखते हैं। इसी कारण उनकी शांति और अहिंसा का प्रभाव उनके निकटवर्ती पशु पक्षियों के ऊपर भी ऐसा पड़ता है कि वे भी अपनी हिंसक वृत्ति छोड़ देते हैं।
श्रेणिक राजा जब बौद्ध धर्मी था तब उसने ध्यान मग्न यशोधर मुनि को मार डालने के लिये अपने शिकारी कुत्ते छोड़ दिये थे। परन्तु परम शांत, यशोधर मुनि के पास पहुँच कुत्ते शांति होकर उनके चारों ओर बैठ गये। इस प्रकार मुनिराज अपने पास आये हुये जीवों की रक्षा करते हुए उनको अभयदान देते हैं। हिंसकों को अहिंसक बनाकर जीवों की रक्षा करने की प्रेरणा देते हैं, वह इस तरह वे सबको अभयदान करते हैं। तथा-अपने पास आने वाले प्रत्येक स्त्री-पुरुष को आत्मा, अनात्मा, परमात्मा, बंध मोक्ष का, पुण्य पाप का ज्ञान कराते हैं, सुगति दुर्गति जाने का बोध कराते हैं, भक्ष्य अभक्ष्य का भेद समझाते हैं। सबको दान करते रहते हैं।
आज सखी बहु मण्डल द्वारा धार्मिक फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में चंदनबाला बनकर सभी का मन मोह लिया तो किसी ने त्रिशला माता की भूमिका निभाई और कोई मैना सुंदरी का किरदार निभाकर खुश हुआ। वहीं किसी ने कर्म राजा बनकर तालियां बटोरी। अवसर था जैन समाज के पर्यूषण पर्व के प्रथम दिवस आयोजित बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का, जिसमें नन्हें-मुन्नों ने अलग-अलग प्रेरक सामाजिक चरित्रों के जीवंत पात्र बनकर प्रस्तुतियां दी। जिसमें बच्चों ने सांवलिया पाश्र्वनाथ, सती सीता, चंदनबाला, गिरनार पर्वत, त्रिशला माता, कर्म राजा, मैना सुंदरी, श्रीपाल महाराजा, बाल साध्वी, पूजा की थाली, जैन प्रतीक चिंह का रूप धारण कर अपनी प्रभावी प्रस्तुतियां दी। जिस पर उपस्थितजनों ने तालियां बजाकर उत्साह वर्धन किया। निर्णायकों की ओर से बेहतर प्रस्तुतियों के आधार पर बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया।
श्री शांतिनाथ मंदिर प्रबंध कमेटी के राजेश बैनाड़ा, विजय जैन निमोरब, मगन कुमार जैन, महेश चंद जैन, अनिल आदर्श जैन, अरुण जैन, राजेंद्र जैन, सतीश जैन, राकेश जैन पेंट, मनोज जैन, जितेश जैन, वैभव जैन, राकेश जैन, मोहित जैन, आलोक जैन, विपुल जैन, प्रशांत जैन, दीपक बैनाड़ा,अनन्त जैन, विपिन जैन मीडिया प्रभारी राहुल जैन आदि थे।
: न्यूक्लियर मेडिसिन के क्षेत्र में क्रांति लाये हैं डाॅ.हाजरा
Mon, Sep 16, 2024
पूरे विश्व में आगरा को चिकित्सा जगत में दिलाई पहचान
दुनिया को दिखाई थायरायड़ उपचार की दिशा
लीडर्स आगरा ने दिया तपन सम्मान, चिकित्सकों के कहलाते है विश्व गुरु
आगराः अपनी खोज से चिकित्सा जगत में क्रांति लाने वाले पद्मश्री डाॅ.डीके हाजरा (दया किशोर हाजरा) ने विश्व पटल पर आगरा को गौरवान्वित किया है। न्यूक्लियर मेडिसिन के क्षेत्र में उनका बड़ा योगदान है। उन्होंने थायराइड पहचानने की जांच थायराइड स्टूमलेटिंग हारमोन (टीएसएच) की खोज की। एसएन में देश की पहली न्यूक्लियर मेडिसिन यूनिट स्थापित की थी। उनके योगदान की सराहना करते हुए उन्हें वर्ष 2014 में भारत सरकार ने पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित किया गया।
दयालबाग निवासी डाॅ.हाजरा को उनके आवास पर पहुंच कर लीडर्स आगरा और तपन फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने सम्मानित, अभिनंदित किया। उन्हें तपन फाउंडेशन और लीडर्स आगरा की ओर से ‘तपन सम्मान’ प्रदान किया गया। लीडर्स के महामंत्री एवं पूर्व पार्षद सुनील जैन ने बताया कि एसएन मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभागाध्यक्ष रह चुके डॉ. डीके हाजरा की खोज के बाद थायरॉयड के स्तर का पता चलने से उन मरीजों का इलाज संभव हो सका, जो इसकी उम्मीद छोड़ चुके थे। अब पूरी दुनिया में थायरॉयड के स्तर का पता लगाने के लिए इसी तकनीक से परीक्षण किया जाता है।
डॉ. हाजरा न्यूक्लियर मेडिसिन सोसाइटी के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। वह विश्व स्वास्थ्य संगठन के लिए सक्रिय रहे। हार्मोन के क्षेत्र में भी उनका विशेष योगदान है। भारत सरकार ने 2014 मे उन्हें गण़तंत्र दिवस पर पद्मश्री से सम्मानित किया, इस सम्मान को पाने वाले वह आगरा के एकमात्र चिकित्सक है,उनके अब तक 450 शोध प्रकाशित हो चुके है, 10 पुस्तके भी डॉ हाजरा लिख चुके है, 82 साल की उम्र मे भी डॉ हाजरा मरीजो को उपचार दे रहे है। उनको चिकित्सकों का विश्व गुरु भी कहा जाता है द्य उनका नाम नोबेल पुरुस्कार के लिए भी चला था, लेकिन देश का दुर्भाग्य था यह उनको मिल न सका।
डाॅ.हाजरा ने अपने सम्मान के प्रति आभार व्यक्त किया। कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में पूरे देश में आगरा अग्रणी रहा है। यहां के चिकित्सकों का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा आगरा मे जोंन्स लाइब्रेरी चालू करनी चाहिए, इसके अलावा शहर मे अन्य स्थानों पर लाइब्रेरी खोलना आवश्यक है, ताकि पढ़ने वाले छात्र -छात्राओं को पढ़ने के लिए बेशकीमती किताबें उपलब्ध हो सके। उन्होंने लीडर्स आगरा द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
इससे पूर्व सुनील जैन, डॉ अशोक कुशवाह, हरिकांत शर्मा ने डाॅ.डीके हाजरा को शाॅल ओढ़ा कर प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। कार्यक्रम संयोजक आदर्श नंदन गुप्ता, रजनी अग्रवाल, अंजलि गुप्ता ने उनका और उनकी पत्नी का इलायची की माला से माल्यार्पण किया। सुनील जैन, रजनी अग्रवाल, आसुतोष शर्मा, राहुल जैन, मेहरवान खान, डॉ राज श्रीवास्तव ने तपन सम्मान से सम्मानित कर स्मृति चिन्ह दिया। कार्यक्रम मे सुनील जैन, आदर्श नंदन गुप्ता, रजनी अग्रवाल, अंजलि गुप्ता, मेहरवान् खान, डॉ अशोक कुशवाहा, डॉ राज श्रीवास्तव राहुल जैन, सुनील बग्गा, रोबिन जैन, आशुतोष शर्मा, हरिकांत शर्मा आदि ने भी डाॅ.हाजरा का सम्मान किया। कार्यक्रम का संचालन सुनील जैन ने किया।
: बरहन में घर के पास खेल रहे 5 वर्ष के मासूम का अपहरण, मुकदमा दर्ज़
Mon, Sep 16, 2024
आगरा, एत्मादपुर। थाना क्षेत्र के गांव आमानाबाद, (कनराऊ) में घर के पास सहपाठियों के साथ खेल रहा 5 वर्ष का मासूम शनिवार सांय 6-7 बजे से लापता है। मासूम का रविवार सुबह तक कोई सुराग नहीं लगने पर पिता ने थाना बरहन में अपहरण का केस दर्ज कराया है। पुलिस बच्चे को खोजने में जुटी है। इसके लिये डॉग स्क्वायड , सर्विसलाइंस टीम व एसओजी टीम की मदद ली जा रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बरहन थाना क्षेत्र के अमनाबाद, कनराऊ, निवासी संजय कुमार उर्फ गोविंद का 5 वर्षीय पुत्र मुन्नू उर्फ मयंक नर्सरी का छात्र है। शनिवार सांय वह पडौस में स्थित स्कूल से लौटने के बाद घर के बाहर सड़क पर खेलने चला गया। साथ में उसके सहपाठी भी खेल रहे थे। पिता संजय उर्फ गोविन्द ने बताया कि खेलते हुये सहपाठी घर की तरफ लौट आये लेकिन मुन्नू बंबा की तरफ अकेला रह गया। वह घर नहीं आया। परिजनों ने बच्चे की काफी खोजबीन की लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। देर रात पुलिस को सूचना देकर पिता ने बच्चे के अपहरण की आशंका व्यक्त की। जिस पर पुलिस ने धारा 363 के तहत केस दर्ज कर लिया।
सूचना पर एसीपी एत्मादपुर पियूश कान्त राय, थानाध्यक्ष उदयवीर सिंह मय पुलिस बल के रात में ही पहुँच गये थे। परिजनों से पूछताछ करने के अलावा घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। रात में ही डॉग स्क्वायड को बुलाकर बच्चे का सुराग लगाने का प्रयास किया गया। बच्चे की खोजवीन में सर्विसलॉयन्स, एंव एसओजी टीम की मदद भी ली जा रही है। रविवार को भी डाग स्क्वयड को बुलाया गया था। समाचार लिखे जाने तक मासूम का सुराग नहीं लग सका है।
थानाध्यक्ष बरहन उदयवीर सिंह ने बताया कि धारा 363 के तहत बच्चे के अपहरण का केस दर्ज किया गया है। अपहरण हुआ है या नहीं यह अभी कुछ नहीं कहा जा सकता पुलिस टीम सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। बच्चा कहां है, इसका पता लगाया जा रहा है। मासूम के गायब हो जाने के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।