: श्रीमद् भागवत कथा में गूंजी बधाइयां, अजन्मे के जन्म पर भक्तजन झूमे
Sun, Feb 9, 2025
राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट ने आयोजित की सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा
डिफेंस एस्टेट फेस−1 स्थित श्रीराम पार्क में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की रही धूम, लुटे उपहार
कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज करा रहा भगवत प्राप्ति के लिए कथा का रसपान
स्वामी प्रदीप कृष्ण ठाकुर द्वारा प्रस्तुत रासलीला का बरस रहा आनंद
आगरा। डिफेंस एस्टेट फेस−1 स्थित श्रीराम पार्क में राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर आनंद की अमृत वर्षा हुयी। नंद घर आनंद भयौ जय कन्हैया लाल की…भजन की धुन पर भक्त जमकर झूमे। नंदोत्सव मनाते हुए उपहार खूब लुटाए गए। रविवार को कथा के चौथे दिन कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने समुद्र मंथन, वामन और राम अवतार कथा सहित श्रीकृष्ण जन्म की कथा कहते हुए नंदोत्सव का प्रसंग भक्तिमय कंठ से सुनाया।
मुख्य यजमान सुनील गोयल एव श्वेता गोयल ने भागवत जी की आरती उतारी। दीपक गोयल और तनु गोयल ने नंद बाबा और यशाेदा बनकर कान्हा के जन्म पर बधाइयां लुटायीं। कथा पंडाल में उपस्थित भक्तजनों ने बड़े ही धैर्य के साथ नंदबाबा और यशोदा मैया को बधाइयां दीं और उपहार प्राप्त किये।
इस प्रसंग से पूर्व कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान ज्ञान की महिमा के बारे में श्रद्धालु जनों को बताया कि मनुष्य को गृहस्थ जीवन जीने के लिए भगवान शिव के आदर्शों पर चलना चाहिए। भगवान शिव अपने विवाह के श्रृंगार से समाज को बताना चाहते हैं कि मेरे सिर पर नाग विराजमान है, जिसका तात्पर्य है कि संसार के समस्त प्राणियों के सिर पर कालरूपी नाग बैठा है, जो प्रत्येक दिन उसकी आयु को खा रहा है। भगवान शेर की खाल धारण कर यह बताना चाह रहे हैं कि मनुष्य को संयमित जीवन सिंह की तरह जीना चाहिए, क्योंकि शेर अपने जीवन में एक नारीव्रत धारी है। लोगों ने कहा है कि विवाह में दूल्हा घोड़े पर बैठता है परन्तु भगवान शिव नन्दी पर बैठे हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि नन्दी धर्म का प्रतीक है और घोड़ा काम का प्रतीक है। भगवान शिव पूरे शरीर पर चिता की राख लपेटे हैं, जिसका तात्पर्य यह है कि दुनिया के सभी प्राणियों को एक दिन चिता में ही जाना है। कथा व्यास ने भगवान श्री राम एवं भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव का सुन्दर वर्णन करते हुए कहा है कि जब-जब धरती पर अधर्म का बोलबाला होता है तब-तब भगवान किसी ना किसी रूप में धरती पर अवतरित होकर असुरों का नाश करते हैं, जिससे अधर्म पर धर्म की विजय होती है। भगवान को प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को फ्रिज में बने फ्रिजर की तरह होना चाहिए, अर्थात काम, क्रोध, मोह, लालच एवं ईर्ष्या को त्याग कर भक्ति मय मन को प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि "निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपन छल. छिद्र ना भावा।"
त्रेतायुग में जब असुरों की शक्ति बढ़ने लगी, धर्म प्रायः लुप्त हो रहा था, तब मां कौशल्या की कोख से भगवान श्री राम ने जन्म लिया। द्वापर में मां देवकी की कोख से भगवान श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया। उन्होंने कहा कि भगवान कण-कण में विराजमान हैं, सर्वत्र विद्यमान हैं। प्रेम से पुकारने पर कहीं भी प्रकट हो सकते हैं। भगवान तो निर्मल मन एवं भक्ति देखते हैं, इसीलिए कहा गया है कि हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम से प्रकट होंही मैं जाना"। कथा प्रसंग के पश्चात सुस्वादु प्रसादी का वितरण हुआ। इसके बाद भक्तों ने प्रदीप कृष्ण ठाकुर, वृंदावन धाम के मार्गदर्शन में ब्रज की विशेष रासलीला के मंचन का आनंद लिया।
पंकज बंसल ने बताया कि सोमवार को पांचवे दिन श्रीकृष्ण अवतार बाल लीला एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग होंगे। कथा में रवि गोयल, आरती गोयल, मनमोहन गोयल, पवन गोयन, भगवान दास बंसल, विष्णु दयाल बंसल, कल्याण प्रसाद मंगल, राजेश मित्तल आदि उपस्थित रहे।
: श्रीमद् भागवत के हर अक्षर में वास है श्रीनारायण हरि विष्णु काः अतुल कृष्ण भारद्वाज
Thu, Feb 6, 2025
राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट ने आयोजित की सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा
कथा से पूर्व डिफेंस एस्टेट फेस−1 में निकाली गयी भव्य कलश यात्रा, 501 महिलाओं ने उठाए कलश
कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज प्रतिदिन देंगे भवगत प्राप्ति का उपदेश, 8 और 10 को होगी रासलीला भी
आगरा। श्रीमद् भागवत कथा के हर अक्षर में भगवान श्रीनारायण का वास है। जीवन की हर समस्या का निदान कथा श्रवण मात्र से प्राप्त होता है। कथा का रसपान न सिर्फ दिव्य अनुभूति प्रदान करता है अपितु जीवन आदर्श भी देता है…सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन ज्ञान, वैराग्य और भक्ति पर यह उपदेश दिया कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने।
गुरुवार से डिफेंस एस्टेट, फेस−1 स्थित श्रीराम पार्क में राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा दिव्य श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया गया। कथा से पूर्व 501 कलशों के साथ भव्य और दिव्य कलश यात्रा निकाली गयी। कलश लेकर पीत वस्त्र धारण कर महिलाएं दुर्गा मंदिर से बैंड बाजों के साथ चलीं। कलश यात्रा की अगुवानी स्वयं प्रथम पूज्य श्रीगणेश जी की सवारी कर रही थी।
पदयात्रा करते भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज चल रहे थे। मुख्य यजमान सुनील गोयल एवं श्वेता गोयल सिर पर पवित्र ग्रंथ को लेकर चल रहे थे। उनके साथ− साथ दीपक गोयल, तनु गोयल, रवि गोयल, मनमोहन गोयल, पवन गोयल, भगवान दास बंसल, विष्णु दयाल बंसल, कल्याण प्रसाद मंगल, राजेश मित्तल, पंकज बंसल आदि व्यवस्थाएं संभाले साथ थे।
डिफेंस एस्टेट, फेस 1 में राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा से पूर्व कलश यात्रा में सहभागिता करतीं महिलाएं।
कलश यात्रा समापन पर कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा हमारी जीवन पद्धति की सभी समस्याओं का निदान है। यदि आमजन उसका अंश मात्र भी जीवन में उतार ले तो सद्गति को प्राप्त हो सकता है। व्यास जी ने बताया कि ज्ञान रूपी दीपक प्रत्येक व्यक्ति में विराजमान है, परन्तु वह व्यक्ति के जीवन में प्रखर रूप में विकास हेतु भागवत कथा ज्ञान के श्रवण से ही प्राप्त होता है और उसे व्यक्ति अपने जीवन में अखण्ड प्रज्वलित रख सकता है। नाम जप की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु के नाम को भजकर ही भक्त प्रहलाद, बालक ध्रुव, मीराबाई, सन्त रविदास, कबीरदास, चैतन्य महाप्रभु सभी इस भवसागर से पार हो गए। आज नाम महिमा के कारण ही लाखों अंग्रेज वैष्णव हो गए। विश्व के प्रसिद्ध फिल्म निर्माता स्टीफन स्पील वर्ग, जूलिया राबर्ट्स प्रसिद्ध अभिनेत्री, लन्दन के उद्योगपति फोर्ड इत्यादि सभी हिन्दू धर्म स्वीकार कर वैष्णव हो गए। व्यास जी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण से अन्तिम समय में उद्धवजी ने प्रश्न किया कि प्रभु आप इस संसार से जा रहे हैं, तो हम भक्तगण आपका दर्शन कब, किस रूप में और कहां प्राप्त कर सकते हैं? प्रभु श्रीकृष्ण ने कहा कि मेरा दर्शन मेरे नाम, मेरे धाम एवं मेरे ग्रन्थ में कर सकते हैं, जैसे आप सोने, चांदी, लकड़ी एवं मिट्टी की मूर्ति में दर्शन करते हैं, उसी तरह अक्षरों के रूप में हम अपने ग्रन्थ श्रीमद् भागवत एवं श्री मानस में विराजमान रहेंगे। श्रीमद् भागवत कथा प्रतिदिन दोपहर 2 से सायं 6 बजे तक होगी। द्वितीय दिवस शुक्रवार को सृष्टि रचना, नारद चरित्र, परीक्षित जन्म एवं सुखदेव आगमन के प्रसंग होंगे।
: रुनकता में बनेगा 51 सीढ़ी वाला राधारानी का मंदिर, रखी गयी नींव, हुआ भूमि पूजन
Thu, Feb 6, 2025
साईं की सच्ची सरकार चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा रुनकता स्थित साईंं धाम मंदिर परिसर में होगा निर्माण
11 हजार 800 वर्ग फुट में बनेगा मंदिर, होंगी अष्टसखियों की प्रतिमा की स्थापना भी
आगरा। ब्रज क्षेत्र आगरा के रुनकता में शीघ्र ही राधारानी के भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण होगा। 11 हजार 800 वर्ग फुट में बनने जा रहे 51 सीढ़ियों वाले मंदिर में राधारानी सरकार अपनी अष्ट सखियों संग दर्शन देंगी। आगरा में बरसाना का आनंद बरसाने की तैयारियों के साथ साईं की सच्ची सरकार चैरिटेबल ट्रस्ट ने रुनकता स्थित साईंं धाम मंदिर परिसर में राधारानी मंदिर की नींव रखी।
गुरुवार को मुख्य अतिथि सुरेश चंद्र गर्ग, सुशील अग्रवाल और लॉयंस क्लब के पूर्व इंटरनेशनल डायरेक्टर जितेंद्र चौहान ने मंदिर के लिए भूमि पूजन किया। साथ ही परिसर में असहाय एवं दिव्यांग बच्चों के लिए बनाए गए एक हॉल का उद्घाटन फीता काटकर किया।
जितेंद्र चौहान ने बताया कि मंदिर स्थापना के साथ व्यवस्थापक एवं प्रबंधक बाबा देवानंद उन मानसिक दिव्यांग बच्चों, जिन्हें लाइलाज बीमारी है और उनके परिजनों ने त्याग दिया है, उनकी सेवा कर रहे हैं।
रुनकता स्थित साईंं धाम मंदिर परिसर में साईंं की सच्ची सरकार चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा बनाए जा रहे राधारानी मंदिर निर्माण का भूमि पूजन करते सुरेश चंद्र गर्ग, सुशील अग्रवाल, जितेंद्र चौहान, देवानंद बाबा आदि
बाबा देवानंद ने बताया कि परिजनों से परित्याग किये दिव्यांग एवं असहाय बच्चों के लिए अस्पताल बनाने का संकल्प लिया गया है। सभी के सहयोग से इसी दिशा में कार्य किया जा रहा है।
सुरेश चंद्र गर्ग ने कहा कि यमुना मैया के अति निकट राधारानी का मंदिर निर्माण होना, सभी आगरावासियों के लिए उत्साह की बात है। धर्म के साथ कर्म का यथार्थ भाव रखकर साईंं की सच्ची सरकार चैरिटेबल ट्रस्ट कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में एक निर्धन कन्या का विवाह भी कराया गया, जिसे गृहस्थी का सभी सामान देकर विदा किया गया।
इस अवसर पर कांता प्रसाद, सुशील अग्रवाल, राहुल बंसल, सुमंत यादव, पवन कुमार अग्रवाल, टीसी अग्रवाल, कुलदीप सिंह, श्रीगोपाल अग्रवाल, राजू अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।