: डिप्टी सीएम ने सुनी श्रीमद्भागवत कथा, सती चरित्र व ध्रुव चरित्र का हुआ वर्णन
Thu, Oct 19, 2023
आगरा। जो जगत में माया का दास बनकर नाच रहा है वह जीवात्मा, श्रीहरि की माया के जगत में रहकर भी जो भगवान की भक्ति में डूबा है वह महात्मा और जो अपनी माया से जगतको नचा रहा है वह परमात्मा है। जीवात्मा को परमात्मा से मिलाने का सेतू है महात्मा। सिद्ध संत ही जीवात्मा को परमात्मा से मिला सकते हैं। परमात्मा को पाने से भी कठिन कार्य सिद्ध संत को प्राप्त करना है। महात्मा जीव की व्यथा परमात्मा से और जीव को हरि कथा सुनाते हैं। फतेहाबाद रोड स्थित राज देवम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठाचार्य डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर ने आज संत की महिमा का वर्णन करते हुए सति चरित्र व ध्रुव चरित्र का संगीतमय वर्णन किया।
श्रीरामचरित मानस की चौपाई अस कहि चला विभीषण जबहीं, आयु हीन भए सब तबहीं, साधु अवग्या तुरत भवानी, कर कल्याण अखिल के हानी… की व्याख्या करते हुए कहा कि लंका में जब तक संत विभिषण और हस्तिनापुर में जब तक विदुर रहे वहां धर्म रहा। लेकिन संत रूपी विदुर और विभीषण के हस्तिनापुर व लंका त्यागने पर समस्त पुण्य चला गया। धर्मचारी व्यक्ति के पुण्यकारी कर्मों से राक्षस भी बच जाते हैं। जब आप धर्म की रक्षा करेंगे तभी धर्म बल आपकी रक्षा कर पाएगा। धर्म रूपी विदुर के जाने से हस्तिनापुर धर्मनिरपेक्ष हो गया। जो हाल धर्मनिरपेक्ष पार्टियों का होता है वही हाल हस्तिनापुर का हुआ। वंश और राज्य दोनों का विनाश हो गया।
दासी पुत्र विदुर की कथा का भी भावपूर्ण वर्णन किया। कहा भगवान नन्द सिंधु, सुखदायी है और दुनिया भव सागर है। विपरीत ज्ञान के कारण भवरोग से ग्रसित होने से हमारा मन श्रीहरि की भक्ति में नहीं लगता। कहा गली संत वहीं है जिसमें सहनशीलता, करुणा, सुहृदय, अजात शत्रु और महात्मा होने के गुण हों। कथा विश्राम पर संतोष शर्मा व उनकी धर्मपत्नी ने आरती कर सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया। कथा के उपरान्त बृज किशोर वशिष्ठ ने संगीतमय सुन्दरकाण्ड का पाठ किया।
अपने सुख दुख की चाबी अपने हाथ में रखिए
अपने सुख दुख की चाबी किसी दूसरे के हाथों में न दें। यह पराधीनता का संकेत है। साधू अपनी मस्ती में मस्त रहते हैं, इसलिए स्वस्थ रहते हैं। जो स्व स्वरूप में स्थित रहे वही स्वस्थ है। स्व स्वरूप का र्थ है न किसी के अपमान से दुखी हों और किसी के सम्मान से अहंकार करें।
सृष्टि का पहला संविधान है मनुवृत्ति
कथावाचक डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर ने कहा कि सृष्टि का पहला संविधान है मनुवृत्ति, जिसका आधार वेद हैं। जो मानव को जीवन जीने की नियम और व्यवस्था सिखाते हैं। वर्ण व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा इस व्यवस्था के मूल स्वरूप को हम समझ ही नहीं पाए। जाति बुरी नहीं थी, जातिवाद खतरनाक है, जो दूषित राजनिती का परिणाम है।
डिप्टी सीएम ने भी सुनी श्रीमद्भागवत
श्रीमद्भागत कथा का रसपान करने आज डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी पहुंचे। व्यासपीठाचार्य डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर का आर्शीवाद प्रदान किया। इस अवसर पर सांसद रामशकर कठेरिया, राजकुमार चाहर, रानी पक्षालिका, मेयर हेमलता दिवाकर, विधायक धर्मपाल सिंह, एमएलसी विजय शिवहरे, गिरार्ज सिंह कुशवाह, भानू महाजन, शैलू पंडित, गौरव राजावत आदि उपस्थित रहे।
: आगरा कैंट रेलवे संस्थान पर चल रही रामलीला महोत्सव में आज हुआ सीता मैया का जन्म
Thu, Oct 19, 2023
Agra. आगरा कैंट रेलवे संस्थान पर चल रही श्री रामलीला महोत्सव के तीसरे दिन अनेकों आकर्षक लीलाओं का मंचन किया गया। सबसे पहले भगवान गणेश की वन्दना की गई। उसके पश्चात श्री राम लीला का मंचन शुरू हुआ। रामलीला संयोजक राकेश कनौजिया ने बताया कि रामजन्म के पश्चात सीता जन्म की लीला का मंचन हुआ। शानदार अंदाज में सीता जन्म की लीला का मंचन किया गया। सीता जन्म के पश्चात विश्वामित्र द्वारा राम लक्ष्मण को राजा दशरथ से मांग कर ले जाना, ताड़का वध, मारीच सुभाहु से राम लक्ष्मण का युद्ध हुआ।
रामलीला के संयोजक राकेश कनौजिया ने बताया कि पिछले लगभग 5 दशक से रेलवे संस्थान में रामलीला मंचन का आयोजन किया जा रहा है। दशहरा पर्व से पहले लगभग 10 दिनों का रामलीला का मंचन होता है और फिर दशहरे को रावण वध के साथ रावण दहन किया जाता है। इस रामलीला मंचन में रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चे ही प्रतिभाग करते हैं और वह ही अपना अभिनय करते हैं।
: तेहि छन मध्य राम धनु तोरा, भरे भुवन धुनि घोर कठोरा…
Thu, Oct 19, 2023
श्रीमनःकामेश्वर बाल विद्यालय, दिगनेर में चल रही है श्रीराम लीला
चतुर्थ दिन लीला में हुआ धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और परशुराम संवाद लीला मंचन
गुरुवार को दिगनेर गांव में पहली बार निकाली जाएगी राम बरात
आगरा। जैसे ही भगवान श्रीनारायण के अवतार श्रीराम ने शिव धनुष तोड़ा हर ओर, हर कोई पुलिकित− हर्षित हो उठा। गढ़ी ईश्वरा, ग्राम दिगनेर, शमशाबाद रोड स्थित श्रीमनः कामेश्वर बाल विद्यालय में चल रहे बाबा मनःकामेश्वरनाथ रामलीला महोत्सव के चतुर्थ दिन धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर और परशुराम संवाद प्रसंग का मंचन हुआ।
प्रसंग में जनकपुर में निवास कर रहे राम, लक्ष्मण व मुनि विश्वामित्र को राजा अपने मंत्री सतानंद को भेज स्वयंवर में आने का निमंत्रण भेजते हैं। मुनि विश्वामित्र के साथ पहुंचे, श्रीराम व लक्ष्मण की शोभा स्वयंवर में उपस्थित समस्त राजा आश्चर्य से देखते हैं। रंग भूमि में उपस्थित राक्षस राज रावण, बांणा सुर सहित अनेक राजा धनुष उठाने में असमर्थ होकर चले जाते हैं। वहीं कुछ अपना बल पौरुष दिखाकर लोगों के हंसी का पात्र भी बनते हैं।
राजा जनक परेशान होकर एक टिप्पणी कर देते हैं , जिसे सुन लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं।
मुनि विश्वामित्र के आज्ञा पाकर श्रीराम धनुष उठाने चलते हैं। सखियां श्रीराम को हाथों धनुष टूटने की भगवान गणेश से प्रार्थना करती हैं।
महारानी सुनयना एक बालक के हाथों धनुष तोड़े जाने में संदेह जताती हैं। शर्त रखने के लिए राजा जनक को कोसती हैं। सीता मन ही मन स्तुति करती हैं। इस बीच धनुष की प्रत्यंचा खिंचते ही वह तीन खंडों में विभक्त हो जाता है। लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें, काहुं न लखा देख सबु ठाढें। चौपाई गूंजती है और मंगल गीत के बीच सीता जयमाला लेकर रंगभूमि में आती हैं। उधर शिव के धनुष टूटने की सूचना से परशुराम क्रोधित होकर जनकपुर पहुंचते हैं। लक्ष्मण− परशुराम संवाद होता है। विश्वामित्र परशुराम का क्रोध शांत कराते हुए श्री राम जी को नारायण का अवतार कहते हैं।
यह सुन परशुराम श्रीराम को अपना रमापति धनुष देकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाने को कहते हैं। श्रीराम के प्रत्यंचा चढ़ाते ही परशुराम का संशय दूर हो जाता है वे श्रीराम की स्तुति कर लौट जाते हैं। और इसके साथ ही श्रीराम सीता के विवाह की तैयारियां जनकपुर में आरंभ हो जाती हैं।
इससे पूर्व स्वरूपों की आरती आज श्रीमहंत योगेश पुरी, उत्तम सिंह (ब्लाक प्रमुख, बरौली), जितेंद्र सिंह ( प्रधान , नगला नाथू) और हरेन्द्र सिंह (प्रधान, दिगनेर) ने उतारी।
गुरुवार को निकलेगी राम बरात
मठ प्रशासन हरीहर पुरी ने बताया कि अब तक गांव से लोग शहर राम बरात देखने जाते थे किंतु ये पहली बार होगा कि श्रीराम की भव्य बरात दिगनेर की सड़कों और गलियों में निकलेगी। गुरुवार को श्रीराम वरयात्रा की तैयारियां पूर्ण कर ली गयी हैं। हर गली, सड़क को दोनों ओर से सजा दिया गया है। पुष्पवर्षा के मध्य द्वार− द्वार आरती की जाएगी। ग्रामीणों में उत्साह अथाह है। भगवान की बरात में जाने के लिए बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं तैयारी की योजना बना रहे हैं तो युवा बरात की अगवानी के लिए रूपरेखा बनाने में जुटे हैं। श्रीराम वरयात्रा में विभिन्न झांकियां भी निकाली जाएंगी। आगरा शहर से बड़ी संख्या में लोग आयोजन में भाग लेने के लिए पहुंचेंगे। आयोजन का लाइव प्रसारण श्रीमनःकामेश्वर मंदिर सहित शहर के विभिन्न चौराहाें और विदेशाें तक में किया जा रहा है।