: अपर नगर आयुक्त ने किया दशहरा शोभायात्रा क्षेत्र का भ्रमण, ढोल नगाड़ों संग 24 अक्टूबर को
Sat, Oct 21, 2023
आगरा। अपर नगर आयुक्त सुरेन्द्र यादव ने आज श्रीरामचंद्र जी महाराज के प्राचीन मंदिर खातीपाड़ा-जयपुरा की दशहरा शोभायात्रा मार्ग का निरीक्षण किया। शोभायात्रा कमेटी द्वारा बताई गई सभी समस्याओं को जल्दी से जल्दी दूर करने का आश्वासन दिया। जिससे शोभायात्रा भव्यता व सुगमता के साथ निकल सके। 24 अक्टूबर को श्रीरामचंद्र जी महाराज के मंदिर से शाम 6 बजे 101 भव्य झांकियों, ढोल नगाड़ों व बैंड बाजों संग शोभायात्रा निकाली जाएगी।
अपर नगर आयुक्त आज अपनी टीम के साथ शोभायात्रा मार्ग का निरीक्षण करने पहुंचे। इस अवसर पर शोभायात्रा कमेटी के पदाधिकारी व क्षेत्रीय पार्षद भी मौजूद रहे। शोभायात्रा कमेटी के अध्यक्ष महेन्द्र खंडेलवाल ने कहा कि अपर नगर युक्त को शोभायात्रा मार्ग की समस्याओं को अवगत कराया। अपर नगर आयुक्त ने आश्वासन देते हुए कहा शोभायात्रा मार्ग की सफाई, सीवर, लाइट, सड़क, जल भराव आदि सभी समस्याओं को नोट कर लिया गया है। जल्दी ही सभी समस्याएं दूर कर दी जाएंगी। 22 अक्टूबर को दोबारा निरीक्षण किया जाएगा।
निरीक्षण में मौजूद क्षेत्रीय पार्षदों व पदाधिकारियों ने कहा कि श्रीरामचंद्र मंदिर से आयोजित होने वाली शोभायात्रा बहुत प्राचीन है। सभी मिलजुल कर व्यवस्ता करते हैं। शांतिप्रिय ढंग से भव्य शोभायात्रा निकालने का प्रयास है। नई पढ़ी को भी संदेश देना चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा जुड़े।
इस अवसर पर क्षेत्रीय पार्षद शरद चौहान, हेमंत प्रजापति, अमित पटेल, विक्रम कुशवाहा, राजपाल यादव, रामदास कटारा, तरुण सिंह, संजय अग्रवाल, टीटू पंडित कमल लोधी आदि उपस्थित रहे।
: राधा नाचे-कृष्ण नाचे, नाचे गोपी संग, मन मेरो बन गयो सखी री पावन वृन्दावन
Sat, Oct 21, 2023
आगरा। जिस महारास में योगेश्वर संग काम को अपने नेत्र से भस्म करने वाली शिव शंकर ता-ता थैया कर रहे हो वहां भला काम-वासना कैसे हो सकती है। महारास काम विजय क्रीड़ा है। जहां योगेश्वर श्रीकृष्ण ने काम का मान मर्दन किया है। महारास पूर्णिमा और रात के ऐसे समय में हुआ जब काम सर्वाधिक बलशाली होता है। पूर्णिमा पर मन के देवता चंद्रमा शक्तिशाली तो काम अधिक उद्दीप्त होता है। ऐसी परिस्थिति में भी कामदेव श्रीहरि को नहीं हरा पाया। योगेश्वर के चित्त पर पर कोई विकार पैदा नहीं कर पाया। तब कामदेव ने श्रीकृष्ण की स्तुति की और अच्युत नाम दिया। जिसका अर्थ है अविनाशी, जिसके चित्त पर किसी का प्रभाव न पड़े।
फतेहाबाद रोड स्थित राज देवम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज व्यासपीठापार्य डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर में महारास का वर्णन करते हुए कहा महारास वो परमानन्द है जिसमें हर किसी का प्रवेश सम्भव नहीं। वस्त्र हरण प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि 6 वर्ष की उम्र में श्रीकृष्ण ने जीवात्मा रूपी गोपिया के ऊपर चढ़े, माया रूपी वस्त्रों का आवरण हटाने के लिए यह लीला रची। परन्तु अज्ञानवश लोग वस्त्र हरण व महारास को काम-वासना से जड़ते हैं। महारास में मायारूपी आवरण के साथ प्रवेश नहीं का जा सकता। महारास में प्रवेश पाने के लिए सात सीढ़ियों को पार करना होता है।
पहली सीढ़ी भक्तमुख से श्रीमद्बागवत कथा का श्रवण, नवधा भक्ति का आचरण, सद् गुरु का वरण, विरक्ति, शरीर व संसार से मोह त्याग, दिव्य रास मण्डप का मन में भाव तब कहीं सातवीं सीढ़ी पर महारास में प्रवेश मिलता है। किन्तु परन्तु से ऊपर की लीला है महारास। महारास के वर्णन के साथ राधा नाचे, कृष्ण नाचे, नाचे गोपी संग, मन मेरो बन गया री सखी पावन वृन्दावन…, रास रचौ है, रास रचौ है, गोपिन के संग कान्हा रास रचौ है… जैसी भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में खूब झूमें।
कंस वध पर कृष्ण कन्हैया के जयकारों से गूंजा कथा पंडाल
कुबड़ी का उद्धार और तमाम दैत्यों के वध के बाद कंस वध होने पर कृष्ण कन्हैया और बांके बिहारी के जयकारों से कथा पंडाल गूंज उठा। आकाश से देवता श्रीहरि के पर पुष्प वर्षा करने लगे। उज्जैन अवन्तिकापुरी में भगवान शिक्षा ग्रहण करने गए। भगवान को ज्ञानी प्रिय हैं, अभिमानी नहीं। ज्ञानी अभिमानी न बने यह बहुत मुश्किल है। उद्धव जी के ज्ञान पर लगी अभिमान की जंग को वृन्दावन श्रीहरि की भक्ति में डूबी गोपियों के पास भेजकर हटाया। श्रीकृष्ण परमतत्व है। जिसमें सभी रस समाहित है। अलौकिक वृन्दावन के दर्शन चर्म चक्षुओं से नहीं किए जा सकते। दिव्य वृन्दावन के दर्शन के लिए श्रीकृष्ण ने उद्धव को दिव्य दृष्टि दी।
श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह के उत्सव में श्रीकृष्ण व रादा बनकर पहुंचे स्वरूपों का विधि विधान से पूजन किया गया। संतोष शर्मा व उनकी धर्मपत्नी ललिता शर्मा ने आरती कर सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सांसद रामशंकर कठेरिया, रामसकल गुर्जर, विधायक छोटेलाल वर्मा, अध्यक्ष जिला पंचायत मंजू भदौरिया, आननंद शर्मा, मनीष थापा, मनीष शर्मा, विवेक उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।
नेत्र रोग शिविर में हुआ 300 लोगों की परीक्षण
श्रीमद्भागवत कथा में सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक नि:शुल्क नेत्र रोग शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 300 से अधिक लोगों का परीक्षण एसएन मेडिकल कालेज के वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा किया गया। 125 लोगों को निशुल्क चश्मा वितरण व 50 लोगों का चयन मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए किया गया।
: कोपभवन सुनि सकुचेउ राऊ, भय बस अगहुइ परइ न पाऊ
Fri, Oct 20, 2023
श्रीमनःकामेश्वर बाल विद्यालय, दिगनेर में चल रहे श्रीराम लीला महोत्सव में सीता जी की विदाई के बाद हुई कोपभवन लीला
कन्यादान के गूंजे गीत, कैकई− मंथरा और कैकई− दशरथ संवाद सुन श्रद्धालु हुए भावुक
आगरा। उत्साह, उमंग के साथ सीता जी का कन्यादान हुआ और अपने प्रिय पुत्र श्रीराम की वधू सहित अन्य पुत्रों का माता कौशल्या, सुमित्रा और कैकई ने अयोध्या नगरी आगमन पर स्वागत हृदय लगाकर किया किंतु आनंद के इन क्षणाें को जब मंथरा के शब्दों ने भेदा तो जैसे हर श्रद्धालु का हृदय द्रवित हो उठा। इसके बाद हाय कैकई ये तू क्या करने जा रही है….जैसे शब्द हर किसी की जिव्हा पर आ गए। कोप भवन लीला में एक पिता और पति राजा दशरथ जब भाव युद्ध में फंसे तो हर आंख भर आई। सभी भक्त बोल उठे, अरे अभी तो विवाह की उमंग बिसराई भी न गई थी, ये क्या घड़ी आई।
गढ़ी ईश्वरा, ग्राम दिगनेर, शमशाबाद रोड स्थित श्रीमनः कामेश्वर बाल विद्यालय में चल रहे बाबा मनःकामेश्वरनाथ रामलीला महोत्सव के छठवें दिन राम विवाह, कन्यादान, कैकई मंथरा संवाद, कैकई− राजा दशरथ संवाद लीला का मंचन किया गया। श्रीमहंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने स्वरूपों की आरती उतारी। लीला मंचन में जब भगवान राम को अयोध्या का राज देने की चर्चाएं आईं तो रानी कैकई को उसकी दासी मंथरा ने भड़का दिया। मंथरा के बहकावे में आकर कैकई कोप भवन में चली जाती है। कोप भवन का नाम सुनकर ही राजा दशरथ सहम जाते हैं। कैकई राजा दशरथ से राम को वनवास और भरत को राजगद्दी के वर मांगती है। राजा दशरथ विनती करते हैं कि राम को वनवास देने का वर मत मांगों। किंतु कैकई कहती है कि ठीक है राजन अपने वचन से मुकर जाओ। राजा दशरथ कहते हैं रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाएं पर वचन न जाई…। इसी प्रसंग के साथ जब लीला का समापन होता है तो हर श्रद्धालु का हृदय व्याकुल हो उठता है।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि शनिवार को राम वनवास, केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत आगमन लीला होगी।