: संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज हुए ब्रह्मलीन
Mon, Feb 19, 2024
आगरा। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन जैसवाल पांचयति मन्दिर, जैन भवन छिपीटोला, आगरा में आज क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज जी ने बताया कि आज युग दृष्टा ब्रहमांड के देवता संत शिरोमणि आचार्य प्रवर श्री विद्यासागर जी महामुनिराज आज दिनांक 17 फरवरी शनिवार तदनुसार माघ शुक्ल अष्टमी पर्वराज के अंतर्गत उत्तम सत्य धर्म के दिन रात्रि में 2ः35 बजे ब्रह्मलीन हो गये। हम सबके प्राण दाता राष्ट्रहित चिंतक परम पूज्य गुरुदेव ने विधिवत सल्लेखना बुद्धिपूर्वक धारण करली थी। पूर्ण जागृतावस्था में उन्होंने आचार्य पद का त्याग करते हुए 3 दिन के उपवास गृहण करते हुए आहार एवं संघ का प्रत्याख्यान कर दिया था एवं प्रत्याख्यान व प्रायश्चित देना बंद कर दिया था और अखंड मौन धारण कर लिया था। 6 फरवरी मंगलवार को दोपहर शौच से लौटने के उपरांत साथ के मुनिराजों को अलग भेजकर निर्यापक श्रमण मुनिश्री योग सागर जी से चर्चा करते हुए संघ संबंधी कार्यों से निवृत्ति ले ली और उसी दिन आचार्य पद का त्याग कर दिया था। उन्होंने आचार्य पद के योग्य प्रथम मुनि शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री समयसागर जी महाराज को योग्य समझा और तभी उन्हें आचार्य पद दिया जावे ऐसी घोषणा कर दी थी जिसकी विधिवत जानकारी कल दी जाएगी।
जैन जगत के उदय मान नक्षत्र अध्या जगत के राजहंस जिनकी वाणी से तो कम कहा गया मगर मुद्रा के आचरण से सम्पूर्ण विश्व को जीने की राह बतायी। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज केवल वे सन्त नहीं चलते फिरते इस धरती पर अरिहंत के स्वरूप थे। सरलता और बालक वद मुस्कान ने सम्पूर्ण विश्व को संयम और चरित्र के पथ पर बढ़ने की प्रेरणा दी है। ऐसे महान संत को कैसे भूल सकते अचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज शरीर से इस दुनिया से जा सकते है। लेकिन भक्तों के ह्रदय में हमेशा मूर्तिवान बनकर स्थापित रहेंगे उक्त विचार क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने समाधि के अवसर पर जैन भवन छीपीटोला में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए आगे कहा कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज केवल जैन संत नहीं थे, अपितु जन-जन के संत थे इसलिए इनकी श्रद्धांजलि सभा में केवल जैन ही नहीं जन-जन को उपस्थित होने का अवाहन करता हूँ।
श्री मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अनिल जैन, मंत्री प्रवेश जैन, रविन्द्र कुमार जैन, प्रदीप जैन, विपिन जैन, सतेंद्र जैन मुन्नालाल जैन,प्रवीन जैन नेता जी, आशु बाबा, रोहित जैन, अभिषेक जैन मामा, दीपक जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज ने संयुक्त रुप से बताया कि क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में सम्पूर्ण दिगम्बर जैन समाज एवं सभी समाजों के लिए आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज में समाधि के प्रसंग पर विराट श्रद्धांजलि सभा का आयोजन पाश्र्वधाम, छीपीटोला, आगरा में होगा। मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 19 फरवरी को सुबह प्रातः 9ः30 बजे श्रृद्धांजलि सभा आयोजित होगी। जिसमें अनेकों समाजों के गणमान्य व्यक्ति सभी राजनैतिक पार्टी के नेता उपस्थित होंगे।
: गुप्त नवरात्रों की सप्तमी के दिन अर्ध रात्रि में हुआ महामाई का महायज्ञ, 108 श्रीफलों की दी गई आहूति
Sun, Feb 18, 2024
आगरा। गुरु के बिना कोई संसार रूपी भवसागर को नहीं तर सकता, चाहे वह ब्रह्मा जी और शंकर के समान ही क्यों न हो। मां कामाख्या सहस्त्र चण्डी 108 कुण्डीय महायज्ञ में आज श्रीराम कथा में कथा वाचक संजय शास्त्री ने श्रीराम कथा में गुरु की महिमा का बखान करते हुए कहा कि भगवान की प्राप्ति गुरु के बिना सम्भव नहीं। श्री राम कथा में राम जन्म, सीता स्वयंवर का संगीतमय कथा का वर्णन किया। कहा कि सिर्फ राम नाम ही भरोसे का है। राम नाम एक ऐसा बटन है जो आपकी हर मनोकामना को पूरा करेगा।
श्रीराम के अवतार का कारण अपने भक्तों का उद्धार है। बड़े बड़े संत मन में इच्छा को लेकर चले गए कि अयोध्या में श्रीराम कब विराजमान होंगे। हम बड़े सौभाग्यशाली है जो हमने श्रीराम को अयोध्या में बिराजते देखा। भगवान श्रीराम का वनवास तो केवल 14 वर्ष का था, भक्तों का 500 वर्ष का वनवास था। श्रीहरि ने श्रीराम के रूप में राजा बनने के लिए अवतार नहीं लिया था, वह संतों और भक्तों को हृदय से लगाने के लिए आए थे। भक्त और संत का हृदय भगवान का घर है। बड़े महलों से उन्हें कोई मतलब नहीं। सीता स्वयंवर की कथा में जैसे ही सीता जी ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली कथा स्थल सियाराम के जयकारों से गूंजने लगा।
महायज्ञ स्थल पर एक जोड़े का विवाह भी सम्पन्न हुआ
मां कामाख्या सहस्त्र चण्डी 108 कुण्डीय महायज्ञ में आज एक जोड़े का विवाह भी सम्पन्न हुआ। महायज्ञ की पवित्र अग्नि के समक्ष वर वधू ने फेरे लिए और सात वचनों को निभाने का संकल्प लिया। पवन दीक्षित, ब्लॉक प्रमुख सोनू दिवाकर व आयोजन समिति के सदस्यों ने कन्यादान लेकर वर वधू को आशीर्वाद व ग्रहस्थी का सभी सामान उपहार स्वरूप प्रदान किया गया। वर वधू के परिवारी जनों ने मंगल गीत गाए। पूर्व मेयर नवीन जैन ने युगल दम्पत्ति को आशीर्वाद देने के साथ महायज्ञ में मां कामाख्या के समक्ष आहूति भी दी।
इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के अध्यक्ष कान्ता प्रसाद अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुरारीप्रसाद अग्रवाल, वंदना मेड़तवाल, गुड्डा प्रधान, मुख्य संयोजक राहुल अग्रवाल, जयशिव छोकर, चैधरी यशपाल सिंह, शम्भूनाथ चैबे, मुकेश अग्रवाल अवि गोयल, विक्रम सिंह राणा, मुन्ना मिश्रा, पवन भदौरिया, सुनील पाराशर, खेमसिंह पहलवान, मीना अग्रवाल, वीरेन्द्र मेड़तवाल, दिव्या मेढतवाल, सीमा गोयल, रीया आदि उपस्थित थे।
अष्टमी के रात्रि में 108 किलो फलों की आहूति से हुआ मां कामाख्या के निशा पूजन
गुप्त नवरात्रों की अष्टमी पर कालरात्रि में मां कामाख्या का निशा पूजन किया गया। अष्टमी और आज नवमी तिथि में सुबह भी वासुदेव गर्ग ने प्रधान कुण्ड पर पूजन कर सभी आचार्यों से आशीर्वाद लिया। राजदरबार ग्रुप के पवन दीक्षित, अमित वाष्र्णेय, बी एस पाण्डेय, मुख्य मीडिया प्रभारी रमेश राय, धरमवीर सोलंकी, जितेन्द्र अग्निहोत्री, नीरज शर्मा, दिनेश शर्मा आदि शामिल रहे। परम पूज्य संत श्री कीर्तिनाथ जी महाराज के नेतृत्व में शास्त्रीपुरम, सुनारी में महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। प्रातः 108 यज्ञकुण्डों में श्रद्धालुओं ने आहूति दी व विधि विधान के साथ पूजन किया।
: 108 श्रीफलों की आहूति से हुए मां कामाख्या के निशा पूजन
Sat, Feb 17, 2024
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गुप्त नवरात्रों की सप्तमी के दिन अर्ध रात्रि में हुआ महामाई का महायज्ञ, 108 श्रीफलों की दी गई आहूति
आगरा। गुप्त नवरात्रों की सप्तमी पर कालरात्रि में मां कामाख्या का निशा पूजन किया गया। महायज्ञ में महामाई को 108 श्रीफलों के साथ सात्विक पेठे व नींबू की भी आहूति दी गई। महायज्ञ परिसर में स्थापित 56 मूर्तियों पर दीपदान किया गया। जिससे समस्त यज्ञ परिसर दिव्य रोशनी से जगमगा उठा। महामाई के विभिन्न पाठों व महायज्ञ की धूनि से समस्त वातावरण पवित्र व सुगन्धित हो गया। अष्टमी के दिन कालरात्रि पूजन में दीपदान के साथ 108 किलों फलों व नवमी के दिन 108 किलो मेवाओं की आहूति महामायी के महायज्ञ में दी जाएगी। परम पूज्य संत श्री कीर्तिनाथ जी महाराज के नेतृत्व में शास्त्रीपुरम, सुनारी में महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु मां कामाख्या व भैरव बाबा के स्थापित ध्वज व मुख्य हवन कुण्ड की परिक्रमा के लिए पहुंच रहे हैं।
परम पूज्य संत श्री कीर्तिनाथ जी महाराज ने कहा कि गुप्त नवरात्रों के अवसर पर सप्तमी, अष्टमी व नवमी के दिन महामाई कामाख्या का कालरात्रि में विशेष पूजन व दीपदान किया जा रहा है। नगला चंद्रभान दीनदयाल धाम के निर्देशक सोहनपाल जी ने महायज्ञ में आहूति दी। रास रचो है रास रचो है वृन्दावन में रास रचो है… कीर्तन पर आज श्रीहरि की कथा में भक्तजन भगवान की भक्ति में खूब झूमें। शिवजी के गोपी बनकर महारास में पहुंचने व माखन चोरी, मिट्टी खाकर माता यशोदा को ब्रह्माण्ड के दर्शन कराने की लीलाओं का वर्णन कथा वाचक संजय शास्त्री ने किया। सामाजिक विषयों पर बोलते हुए कहा कि जो हमें तार दे वह पुत्र है, वह पुत्र नहीं जो बुढापे में माता-पिता को रोटी न दे। ऐसे पुत्रों का कभी तारण नहीं हो सकता, चाहे कितने भी धर्म कर्म करें। चाहे कितनी भागवत करा ले। नर्क कहीं दूसरी जगह नहीं धरती पर ही है। जैसे कर्म करोगे वैसा ही भोगोगे।
इस अवसर पर मुख्य रूप से इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के अध्यक्ष कान्ता प्रसाद अग्रवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मुरारीप्रसाद अग्रवाल, वंदना मेड़तवाल, गुड्डा प्रधान, राहुल अग्रवाल, जयशिव छोकर, चैधरी यशपाल सिंह, विक्रम सिंह राणा, मुन्ना मिश्रा, शम्भूनाथ चैबे, मुकेश अग्रवाल अवि गोयल, पवन भदौरिया, सुनील पाराशर, खेमसिंह पहलवान, मीना अग्रवाल, वीरेन्द्र मेड़तवाल, दिव्या मेढतवाल, सीमा गोयल, रीया आदि उपस्थित थे।
18 फरवरी को होगा संतों का विराट सम्मेलन
मां कामाख्या आयोजन सेवा समिति के अध्यक्ष कान्ता प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि 18 फरवरी को संतों का दोपहर 12 से 2 बजे विराट सम्मेलन, सामूहिक विवाह समारोह, यज्ञोपवीत (जनेऊ संस्कार) का आयोजन व दो निर्धन कन्याओं का विवाह कराया जाएगा। संतों के सम्मेलन में भारत के विभिन्न धार्मित स्थलों (काशी, उज्जैन, अयोध्या, मिथिला, आसाम, वृन्दावन) के 300 से अधिक साधू संत भाग लेंगे। सनातम धर्म व संस्कृति विषय पर संवाद होगा। 20 फरवरी को महायज्ञ पूर्णाहूति, सम्मान समारोह व भंडारे का आयोजन होगा। 21 फरवरी को सभी स्थापित मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा।