: एलोपैथी रेडीमेड दवा और होम्योपैथी टेलरमेड दवा, जमाना है इंटीग्रेटिड मेडिसिन का
Sun, Dec 10, 2023
आगरा। एलोपैथी रेडीमेड दवा और होम्योपैथी टेलरमेड दवा है। यानि व्यक्ति की बीमारी मानसिक स्थिति सहित तमाम बारीकियां जानने के बाद होम्योपैथी की दवा दी जाती है। लगभग सभी बीमारियों के 80 फीसदी मरीजों को होम्योपैथी इलाज से ठीक किया जा सकता है। परन्तु वर्तमान में दोनों साइंस को जोड़ने की आवश्यकता है। मरीजों के हित में जहां जिसका लाभ अधिक हो वहीं उपयोग में लायी जानी चाहिए। इंटीग्रेटिड मेडिसिन का जमाना है। जिसे बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने आयुष (आयुर्वेद, योगा, यूनानी, सिद्धा, होम्योपैथी) मिनिस्ट्री का गठन किया है।
होटल रेडीसन में आयोजित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी फिजीशियन्स (आईआईएचपी) की एक दिवसीय कार्यशाला में लुधियाना के डॉ. मुक्तेन्दर ने कहा कि ऐलोपैथी में बीमारी को कंट्रोल जबकि होम्योपैथी में उसका जड़ से इलाज किया जाता है। कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते। जीवन भर इलाज से बेहतर है कि 3-4 वर्ष के इलाज से बीमारी को खत्म कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि आज इंटीग्रेटिड मेडिसिन का जमाना है। जहां जो विज्ञान बेहतर परिणाम दे उसे अपनाया जाना चाहिए। ऐलोपैथी में बीपी, थायरॉयड, शुगर जैसी बीमारियों का इलाज नहीं जबकि होम्योपैथी में उन्हें ठीक किया जा सकता है। लिवर, किडनी ट्रांसप्लांट, कैंसर जैसे मरीजों को ठीक किया गया है।
आईआईएचपी के अध्यक्ष डॉ. तनवीर हुसैन ने किडनी फैलियोर के मरीज को होम्योपैथी दवा से ठीक करने की केस स्टडी के बारे में विस्तार से बताया। कहा कि 10 माह के इलाज के बीद किडनी रिप्लेसमेंट की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। न ही इलाज के दौरान कोई डायलिसिस की आवश्यकता पड़ी। जलगांव के डॉ. जसवन्त पाटिल ने हृदय व फेफड़ों से सम्बंधिक बीमारियों पर व्याख्यान दिया। कार्यशाला में आईआईएचपी के सेन्ड्रल बॉडी के सचिव डॉ. सुधांशु आर्य, कोषाध्यक्ष डॉ. महेश पगड़ाला (हैदराबाद), उपाध्यक्ष डॉ. गीता मोविया द्वारा भी विभिन्न बीमारियों पर व्याख्यान दिया।
मानसिक परेशानी से जुड़ी होती है हर बीमारी
डॉ. तनवीर हुसैन ने बताया कि मरीज की मनसिकता को समझना बहुत जरूरी है होम्योपैथी का सही इलाज करने के लिए। मानसिकता को समझे बिना सही इलाज नहीं किया जा सकता। हर बीमारी के पीछे कोई न कोई मानसिक समस्या अवश्य होती है। मानसिक समस्या से नींद गायब हो जाती है, जिससे व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाला मेलाटोनिन होर्मोन का बनना कम हो जाता है। यानि तनाव और अनिद्रा की समस्या व्यक्ति की प्रतिरोधकता को कम कर देती है। जिसके कारण सबसे पहले व्यक्ति को आनुवांशिक बीमारियां पकड़ने लगती है। गुर्दे की समस्या का मुख्य कारण मन का डर, गुस्से को अन्दर ही न्दर पीना लिवर की समस्या और पित्ताशय की पथरी का कारण है। हृदय रोग के लिए तिन्ता और फेफड़ों की समस्या के लिए कोई सदमा जिम्मेदार है। होम्योपैथी दवाओं में व्यक्ति के तनाव को दूर कर उसकी प्रतिरोधकता बढ़ाने की क्षमता है।
डॉ. हनीमैन के प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर किया शुभारम्भ
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी फिजीशियन्स (आईआईएचपी) की एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ राष्ट्रीय अध्यक्ष व मुख्य अतिथि डॉ. तनवीर हुसैन ने मां सरस्वती व होम्योपैथी के जनक डॉ. हनीमैन की प्रतिमा पर माल्यापर्ण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने मौजूद विशेषज्ञों व विद्यार्थियों से कहा कि इस बात पर विचार करें कि हमने होम्योपैथी को क्या दिया। सफल कार्यशाला के लिए उन्होंने स्थानीय आयोजन समिति को शुभकामनाएं दीं। आयोजन सचिव डॉ. राजेन्द्र सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि कार्यशाला में कानपुर, अलीगढ़, ग्वालियर, गोरखपुर के होम्योपैथी मेडिकल कालेजों के 100 से अधिक विद्यार्थियों सहित 300 से धिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया है। संचालन डॉ. योगेश शुक्ला व डॉ. पवन पारीक ने किया।
कार्यशाला का समापन समारोह में मुख्य अतिथि स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने आयोजन समिति के सदस्यों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सफल आयोजन के लिए सम्मानित किया। कहा कि होम्योपैथी का लाभ जन-जन तक पहुंचाने व विशेषज्ञों को अपडेट रखने के लिए इस तरह के आयोजन जरूरी है। इस अवसर पर होम्योपैथी में विशेष योगदान प्रदान करने वाले डॉक्टरों को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से आयोजन समिति के सचिव विष्णु शर्मा, पंकज त्रिपाठी, बीपीएस जादौन, डॉ. धीरेन्द्र सिंह, डॉ. दिवाकर वशिष्ठ, डॉ. एके शर्मा, डॉ. सचिन पाल, डॉ. सुभाष गुप्ता, डॉ. देव प्रकाश राठौर, डॉ. राहुल गहलोत, डॉ. प्रियंका वर्मा, डॉ. राजकुमार परमार आदि मौजूद थे।
: एस.एन. मेडिकल कॉलेज में हुआ राष्ट्रीय वायरल हेपिटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का आयोजन
Sat, Dec 9, 2023
आगरा। एस.एन. मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय वायरल हेपिटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ प्रशांत गुप्ता द्वारा किया गया। कार्यक्रम में हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस सी की जानकारी, जागरूकता, जांच उपचार के संबंध में बैठक का आयोजन किया। विभाग अध्यक्ष माइक्रोबायोलॉजी डॉ अंकुर गोयल द्वारा हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी की जांच के बारे में अवगत कराया गया। डॉ आरती अग्रवाल प्रभारी अधिकारी एसआरएल द्वारा राष्ट्रीय वायरल हेपिटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम पर प्रकाश डाला गया। डॉ सूर्य कमल वर्मा प्रभारी अधिकारी एमटीसी व डॉक्टर पारूल गर्ग द्वारा हेपेटाइटिस के मैनेजमेंट एवं नीडल स्टिक इंजरी के बारे में जानकारी दी गई। डॉ विकास कुमार सह प्रभारी अधिकारी एसआरएल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन दिया गया।
कार्यक्रम में प्रमुख अधीक्षक का डॉ. संगीता गोयल, उप प्रधानाचार्य डॉ. टी.पी. सिंह, सर्जरी विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत लवनिया, मेडिसिन विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. मृदुल चतुर्वेदी, पैथोलॉजी विभाग की विभाग अध्यक्ष डॉ गरिमा, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग विभाग अध्यक्ष डॉ. नीतू चौहान, एआरटी प्रभारी डॉक्टर जितेंद्र, डॉ. हिमालय, डॉ. प्रीति भारद्वाज आदि संकाय सदस्य एवं रेजिडेंट डॉक्टर्स उपस्थित रहे।
रिपोर्ट प्रमोद कुशवाह
: एस.एन. में 20 करोड़ की मशीन से होगी कैंसर की सिंकाई
Thu, Dec 7, 2023
आगरा। एसएन मेडिकल कालेज में नए साल से कैंसर की सुपर सिकाई हो पाएगी। इसके लिए 20 करोड़ रुपए की लीनियर एक्सलेरेटर (लिनेक) मशीन मंगाई गई है। इसका इंस्टालेशन चल रहा है। एक अन्य मशीन भी जल्द स्थापित हो जाएगी। इसके बाद यहां दिल्ली, जयपुर, लखनऊ स्तर का इलाज मिल पाएगा।
मशीन से सिर्फ कैंसर वाले स्थान में टारगेटेड सिंकाई की जाती है। इससे सामान्य सेल खराब नहीं होते। शरीर में सूखापन नहीं आता, चेहरा काला नहीं पड़ता, मरीज को दर्द भी कम होता है। कोई साइड इफेक्ट नहीं है। अभी यहां टेलीकोवाल्ट मशीन से रेडियोथेरेपी की जा रही है, जबकि एम्स, केजीएमयू में लीनियर एक्सलेटर का प्रयोग होता है।
एसएनएमसी में कैंसर के रोज 10 से 15 मरीज आते हैं। 8 से 10 इलाज लेते हैं। जिला महिला अस्पताल (लेडी लायल) में कैंसर की सुपर सिंकाई के लिए लिनेक ब्लाक बनाया गया है। आसपास में रहने वाले लोगों को रेडिएशन से बचाए रखने के लिए इसे भूमिगत बनाया गया है। एटामिक एनर्जी इंस्टीट्यूट के निर्देशों के मुताबिक मशीन को स्थापित किया जा रहा है। यह सेंटर पूरी तरह रेडिएशन फ्री होगा। मशीन का सेटअप हो रहा है। एक और सीटी सिम मशीन के लिए भी निर्माणदायी संस्था हाइट्स ने आर्डर कर दिए हैं। करीब 45 दिनों में दोनों मशीनों का इंस्टालेशन हो जाएगा।
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि लेडी लायल में 30 करोड़ से 750 वर्ग मीटर में लिनेक ब्लाक बनाया गया है। लीनियर एक्सलेटर के लिए कांक्रीट के बंकर बनाए गए हैं। इससे रोज 50 मरीजों तक की सिंकाई संभव हो जाएगी।
रिपोर्ट प्रमोद कुशवाहा