रामलीला महोत्सव-2026 : स्वर्ण सिंहासन पर विराजे प्रभु श्रीराम, हनुमान ने सीना चीरकर दिखाए हृदय में बसे राम-जानकी
Pragya News 24
Fri, Oct 23, 2026
गुरु वशिष्ठ के मंत्रोच्चार के बीच हुआ राज्याभिषेक, भावपूर्ण लीला के साथ श्रीरामलीला महोत्सव का समापन
आगरा। लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की भव्य लीला के साथ शुक्रवार को श्रीरामलीला महोत्सव का समापन हुआ। स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जयघोष से रामलीला मैदान गूंज उठा। गुरु वशिष्ठ की भूमिका निभा रहे पंडित वेद प्रकाश प्रचेता ने मंत्रोच्चार किया। सुंदरधाम, गोवर्धन के महंत नारायण दास ने प्रभु श्रीराम का प्रथम राज्याभिषेक तिलक किया। इसके बाद श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने माता सीता और लक्ष्मण जी का तिलक किया। राज्याभिषेक और हनुमान जी की अनन्य भक्ति के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
गुरु वशिष्ठ ने किया प्रथम तिलक, गूंज उठी रामचरितमानस की चौपाई
शुक्रवार को रामलीला मैदान में मंचित राज्याभिषेक लीला में वनवास की अवधि पूरी कर लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे प्रभु श्रीराम के स्वागत का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया गया। अयोध्यावासियों की प्रसन्नता के बीच प्रभु श्रीराम को राजगद्दी पर विराजमान कराया गया। गुरु वशिष्ठ के रूप में पंडित वेद प्रकाश प्रचेता ने वैदिक मंत्रोच्चार किया और महंत नारायण दास ने प्रभु श्रीराम का प्रथम तिलक किया। इसके बाद कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल सहित अन्य पदाधिकारियों ने तिलक कर प्रभु का अभिनंदन किया।

इस दौरान व्यास पीठ से गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस की चौपाई— “प्रथम तिलक बसिष्ठ मुनि कीन्हा। पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा॥ सुत बिलोकि हरषीं महतारी। बार बार आरती उतारी॥” —का सस्वर पाठ हुआ। चौपाई के साथ राज्याभिषेक के दृश्य ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। मंचन में अयोध्यावासियों के उल्लास और माताओं के वात्सल्य का भावपूर्ण चित्रण देखने को मिला।
हनुमान जी ने सीना चीरकर दिखाए हृदय में बसे राम-जानकी
राज्याभिषेक लीला के दौरान हनुमान जी की अनन्य भक्ति का प्रसंग विशेष आकर्षण रहा। माता जानकी से उनके मस्तक पर लगे सिंदूर का कारण पूछने पर माता सीता ने बताया कि वह प्रभु श्रीराम की प्रसन्नता और मंगलकामना के लिए सिंदूर लगाती हैं। यह सुनकर हनुमान जी ने विचार किया कि यदि थोड़े से सिंदूर से प्रभु प्रसन्न होते हैं, तो पूरे शरीर पर सिंदूर लगाने से वे और अधिक प्रसन्न होंगे। इसी भाव से उन्होंने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया।
इसके बाद हनुमान जी ने अपना सीना चीरकर हृदय में विराजमान प्रभु श्रीराम और माता जानकी के दर्शन कराए। भक्ति और समर्पण से ओतप्रोत इस दृश्य पर पूरा मैदान जय श्रीराम और जय बजरंगबली के जयघोष से गूंज उठा।

श्रृंगार कमेटी के सहयोग की सराहना
श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल और कोषाध्यक्ष ताराचंद अग्रवाल ने आयोजन में सहयोग के लिए श्रृंगार कमेटी का आभार जताया। उन्होंने कहा कि राहुल शर्मा और राम अभिषेक शर्मा के मार्गदर्शन में टीम ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सहयोग करने वालों में रवि बंसल, सुमित बंसल, हृदेश वल्लभ, किट्टू शर्मा, कृष्ण बंसल, अभिषेक अग्रवाल, यश पाराशर, राम वरुण, आदित्य शर्मा, माधव पांडे, सक्षम शर्मा, सार्थक अग्रवाल, तुषार, हर्ष, शिवम और बृजमोहन सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।
इस अवसर पर अशोक राठी, भगवान दास बंसल, विष्णु दयाल बंसल, रामकिशन अग्रवाल, विजय प्रकाश गोयल, टीएन अग्रवाल, मुकेश जौहरी, संजय तिवारी, विनोद जौहरी, आनंद मंगल, अंजुल बंसल, रमांशु शर्मा, विकास अग्रवाल, शालू अग्रवाल, महेश बंसल, शैलेश अग्रवाल, प्रकाश चंद्र, शैलेश बॉबी और राहुल गौतम सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
आज हवन के बाद होगी स्वरूपों की विदाई
श्रीरामलीला के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि शनिवार, 24 अक्टूबर को सुबह 10 बजे श्री मनःकामेश्वर मंदिर, बाराद्वारी पर हवन एवं श्रीरामचरितमानस का पारायण होगा। इसके बाद दोपहर 12 बजे रामलीला मैदान स्थित श्रीराम-हनुमान मंदिर से रामलीला के स्वरूपों का विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा।
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