Wed 23 Sep 2026
Breaking News Exclusive
अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन का शपथ ग्रहण समारोह 23 सितंबर को केंद्रीय विद्यालय-2 में विश्व पर्यटन दिवस पर दिखी भारत की सांस्कृतिक विविधता जनकपुरी केंद्रीय कार्यालय में जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ मंजू भदौरिया ने की महाआरती कारोबार, तकनीक और वैश्विक साझेदारी के नए द्वार खोलेगा ‘मीट एट आगरा’ यूजीसी के विरोध में आगरा में तेज हुआ आंदोलन, ट्रैक्टर मार्च को लेकर बढ़ी हलचल जरूरतमंदों के लिए शुरू हुई एक रुपये में भरपेट भोजन की सेवा दान की राशि से जनसेवा का संकल्प, बालिका कॉलेज के दो कक्षों का जीर्णोद्धार वनवासी कल्याण आश्रम की 37 बालिकाओं ने लायंस क्लब प्रयास के साथ देखी हनुमान अंश, उत्साह से लिया आउटिंग का आनंद संत शिरोमणि दुर्बलनाथ के 165वें जन्मोत्सव पर निकलेगी भव्य शोभायात्रा जनकपुरी महोत्सव की तैयारियां तेज, 1 से 10 अक्टूबर तक होंगे भव्य आयोजन

सूचना

Pragya News 24 is News Blog to Providing all over News of World.

करुणानिधान परिवार : रामकथा में गूंजा जीवन का मंत्र—‘भोजन कम, भजन ज्यादा’

Pragya News 24

Thu, Sep 17, 2026
Post views : 52

आगरा। फतेहाबाद रोड स्थित जेपी वेडिंग ग्राउंड में करुणानिधान परिवार की ओर से आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामकथा के तीसरे दिन भक्ति, रामनाम और संतवाणी का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास मोरारी बापू ने ‘मानस ऋषि पंचमी’ प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए ऋषि और मुनि के अंतर, मौन की साधना, गुरु-शिष्य संबंध और भक्ति के स्वरूप पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा के दौरान रामधुन और मीराबाई के पदों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। हजारों श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए और कई भक्तों की आंखों से भावाश्रु छलक पड़े।

ऋषि बाहरी ब्रह्मांड का अन्वेषक, मुनि अंतर्जगत का साधक
बापू ने ‘मानस’ से ‘ऋषि’ शब्द का उल्लेख करते हुए सभी मुनियों को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े वैज्ञानिकों ने बाहरी जगत और ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने का प्रयास किया। आइंस्टीन और न्यूटन से लेकर अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले नील आर्मस्ट्रांग तक ने बाहरी ब्रह्मांड की खोज की। भारतीय मनीषा ने ऐसे अन्वेषकों को ऋषि-भाव से देखा है। उन्होंने कहा कि परमाणु से लेकर अंतरिक्ष तक की खोज करने वाला बाहरी ब्रह्मांड को जानता है, जबकि मुनि अपने भीतर उतरकर अंतर्जगत की यात्रा करता है। ऋषि और मुनि की साधना की यही मूलभूत भिन्नता है।

काकभुशुंडि ने की बाहरी और आंतरिक दोनों यात्राएं
रामकथा के परम गायक काकभुशुंडि जी का उदाहरण देते हुए बापू ने कहा कि उनकी यात्रा बाहरी और भीतरी दोनों रही। उन्होंने कहा कि एक यात्रा ब्रह्मांड को जानने की है, जबकि दूसरी अपने भीतर के ब्रह्मांड को पहचानने की। उन्होंने विश्वामित्र के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब वे स्वर्ग की रचना करते हैं तो उनका ऋषि स्वरूप सामने आता है, वहीं जब भीतर के दर्शन जागृत होते हैं तो मुनि भाव प्रकट होता है।

बापू ने साधकों से नियमित रूप से मौन का अभ्यास करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन मौन रखना चाहिए। यदि ऐसा संभव न हो तो जन्मदिन पर अपनी आयु के बराबर घंटे मौन धारण करने का प्रयास करना चाहिए।

कबीर से मीरा तक संतों में दिखे ऋषि और मुनि के गुण
श्रद्धालुओं की प्रश्न-पत्रियों का उत्तर देते हुए बापू ने कबीर, गुरु नानक, रामकृष्ण, मीराबाई, नरसी मेहता और तुकाराम जैसे संतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संतों में ऋषि और मुनि दोनों के गुण दिखाई देते हैं और इसी कारण उनका संत स्वरूप व्यापक है। गुरु का चित्र घर में रखने संबंधी प्रश्न पर उन्होंने कहा कि गुरु का चित्र आंखों के सामने रहकर प्रेरणा देता है। एकलव्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उसने गुरु की मूर्ति के सामने साधना कर अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। चित्र केवल देखने के लिए नहीं, बल्कि गुरु के चरित्र से प्रेरणा लेकर उसे जीवन में उतारने के लिए होना चाहिए।

श्रीराम की लीलाओं में जीवन और मर्यादा का संदेश
बापू ने श्रीराम के जीवन की विभिन्न लीलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या से लेकर पंचवटी, वनवास, किष्किंधा, रावण युद्ध और रामराज्याभिषेक तक भगवान राम ने अपने जीवन के माध्यम से धर्म और मर्यादा का संदेश दिया। वहीं श्रीकृष्ण की ब्रज लीलाओं में प्रेम, भक्ति और समर्पण की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा कि सच्चा शिष्य अपने गुरु का अत्यधिक बखान नहीं करता। उसके आचरण से ही गुरु की सुगंध समाज तक पहुंचती है।

‘ऋषियों के पास सिद्धि, मुनियों के पास शुद्धि’
बापू ने कहा कि ऋषियों के पास सिद्धि और मुनियों के पास शुद्धि होती है। ऋषि कर्मयोगी होते हैं और समाज के लिए निर्माण का कार्य करते हैं। उन्होंने कपटपूर्ण साधु-संग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि जिसके जीवन में भजन की संपदा नहीं है, वह मुनि भाव को प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि मुनि का मौन भी सार्थक होता है और उसका वचन भी। इसलिए जीवन में किसी का संग सोच-समझकर करना चाहिए।

जगद्गुरु वल्लभाचार्य के सूत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि घर के लोग एक-दूसरे के सहायक बनें तो वही सत्संग है। यदि परिवार के लोग स्वयं सत्संग न करें, लेकिन आपको भी न रोकें तो उनके प्रति धन्यवाद का भाव रखना चाहिए।

युवाओं के तनाव का उपाय बताया—एकांत में हनुमान चालीसा
युवाओं में बढ़ते तनाव से जुड़े प्रश्न पर बापू ने सुबह और शाम कुछ समय एकांत में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की बात कही। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का स्मरण चंचल मन को स्थिर और शांत करने में सहायक हो सकता है। व्यासपीठ के पीछे हनुमान जी का चित्र रखने के कारण पर उन्होंने कहा कि व्यासपीठ की प्रतिष्ठा हनुमान जी से जुड़ी है। उन्होंने हनुमान जी को गृहस्थ, ब्रह्मचारी, संन्यासी और वानप्रस्थ—हर जीवन अवस्था के लिए आदर्श बताया।

‘भोजन कम करो, भजन ज्यादा’
बापू ने श्रद्धालुओं को सरल जीवन सूत्र देते हुए कहा—“भोजन कम करो और भजन ज्यादा करें।” उन्होंने कहा कि भजन केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि मनुष्य को भीतर से बदलने वाली साधना है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रेम और करुणा के साथ जीवन जीने का आह्वान करते हुए कहा कि दुखी व्यक्ति मिले तो उसे गले लगाकर साथ चलें और जीवन में प्रेम की गंगा बहाते रहें।

मीरा के पदों पर भावविभोर हुए श्रद्धालु
रामकथा के दौरान श्रीकृष्ण की धुन और मीराबाई के पदों की गूंज से कथा पंडाल भक्तिमय हो उठा। बापू ने मीरा की कृष्णभक्ति का उल्लेख करते हुए भक्ति और समर्पण की भावना को रेखांकित किया। वातावरण ऐसा भावपूर्ण हुआ कि कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति मानस की उपासना करेगा, मानस सदैव उसके सामने उपस्थित रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं को सोने से पहले मानस की कुछ चौपाइयों का पाठ करने और शुभ विचारों के साथ दिन का समापन करने की प्रेरणा दी।

‘मशीन मशीन है, व्यासपीठ मिशन है’
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए बापू ने कहा कि तकनीक मनुष्य के लिए उपयोगी है, लेकिन यदि उसका प्रभाव मन और मस्तिष्क पर प्रतिकूल पड़ने लगे तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा—“मशीन मशीन है, व्यासपीठ मिशन है।” व्यासपीठ का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि बेहतर मनुष्य के निर्माण की दिशा में कार्य करना है।

कथा के दौरान उमाशंकर व्यास, श्री प्रेमनिधि मंदिर के मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने आरती उतारी।

Tags :

Agra News

Pragya News

Uttar Pradesh News

UP News

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन