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श्रीमथुराधीश जी महाराज : श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज के मंदिर में हुआ दान लीला (दान एकादशी) का आयोजन

Pragya News 24

Wed, May 27, 2026
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आगरा। प्राचीन पुष्टिमार्गीय श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज के मंदिर में पुरुषोत्तम मास के तहत आज दान मनोरथ का भव्य आयोजन किया गया। फूलों से सजे सिंहासन पर विराजमान श्रीठाकुर मतुराधीश को दही का प्रसाद लगाया गया। भजन कीर्तन का भी आयोजन हुआ, जिसमें भक्तों ने खूब नृत्य किया।

यमुना भक्त बृज खंडेलवाल व मंदिर के महन्त नन्दन श्रोत्रिय ने बताया कि दान लीला श्रीकृष्ण की चंचल बाल-लीला का स्मरण कराती है। व्रज में ग्वालिनें (गोपियां) दूध, दही, मक्खन आदि लेकर मथुरा जा रही होती हैं। कंस (मथुरा के राजा) के टैक्स (मार्ग-शुल्क/ दान) की मांग के रूप में बाल कृष्ण (या उनके सखा) रास्ते में रोके और मज़ाकिया ढंग से दान वसूल करते हैं। यह लीला दिव्य प्रेम, आत्म-समर्पण, वात्सल्य और माधुर्य का प्रतीक है। गोपियां प्रेमवश सब कुछ अर्पण कर देती हैं। पुष्टिमार्ग में इसे ठाकुरजी के सुख के लिए मनोरथ के रूप में सजाया जाता है, भक्त स्वयं को ग्वालिन मानकर ठाकुरजी को दान अर्पित करने का भाव रखते हैं।

पुरुषोत्तम मास में सभी वार्षिक उत्सव संक्षिप्त रूप में मनोरथ के रूप में मनाए जाते हैं। यह प्रभु-सुखार्थ सेवा है, न कि केवल उत्सव। नाथद्वारा, अन्य हवेलियों और वैष्णव घरों में इसे भव्य रूप से आयोजित किया जाता है। दान लीला के विशेष पद गाए गए (जैसे गढते ग्वालिन उतारी, दधि कान्चन मोल भाई आदि)। पुष्टिमार्गीय कीर्तन परंपरा में बड़े और छोटे दान लीला पद प्रचलित हैं। पुरुषोत्तम मास में निर्धारित तिथि पर (अक्सर शुक्ल पक्ष की एकादशी या आसपास)। राजभोग या विशेष आरती के समय दर्शन होते हैं।

इस अवसर पर मुख्य रूप से जुगल श्रोत्रिय, नदल किशोर, मंजरी, बल्लभ, अनन्या आदि उपस्थित थीं।

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