: सात्विक होगी माता तो पुत्र अवश्य होगा राम और कृष्ण साः अतुल कृष्ण महाराज
Tue, Nov 5, 2024
अग्रसेन भवन, लोहामंडी में चल रही श्रीराम कथा के तृतीय दिवस हुआ राम जन्म प्रसंग
श्रीप्रेमनिधि जी मंदिर न्यास ने आयोजित की है सात दिवसीय श्रीराम कथा
बुधवार को पंचमी तिथि पर होगा अहिल्या उद्धार के बाद सीता−राम का शुभ विवाह प्रसंग
प्रतिदिनि दोपहर 3 बजे से हो रही कथा, आरती के बाद भक्त ले रहे महाप्रसादी का आनंद
आगरा। जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल। चर अरु अचर हर्षजुत, राम जनम सुख मूल।।…जैसे ही ये चौपाइ गूंजी और प्रकाट्य हुआ जगत के पालन श्रीराम का तो जय जयकार से वातावरण पवित्र हो उठा। लोहामंडी स्थित अग्रसेन भवन में श्रीप्रेमनिधि जी मंदिर न्यास द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर श्रीराम जन्म प्रसंग का बखान कथा व्यास अतुल कृष्ण महाराज ने किया।
कथा आरंभ से पूर्व मुख्य यजमान बृजेश सुतैल–सुमन सुतैल एवं दैनिक यजमान राधा एवं महेश पचौरी ने श्रीराम चरित मानस और व्यास पूजन किया।
लोहामंडी स्थित अग्रसेन भवन में श्रीप्रेमनिधि मंदिर न्यास द्वारा आयोजित श्रीराम कथा का वाचन करते कथा व्यास अतुल कृष्ण महाराज।
कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने प्रसंग में कहा कि भगवान हर कण, हर तत्व में विद्यमान हैं। प्रभु को प्राप्त करना ही एक मात्र जीवन उद्देश्य है और माध्यम है सच्चे मन की भक्ति। इसलिए कहा गया है कि हरि व्यापक सर्वत्र समाना। राम जन्म प्रसंग पर उन्होंने कहा कि त्रेतायुग में जग असुरों की शक्ति बढ़ने लगी तो संत कृपा से भगवान राम ने राजा दशरथ की रानी माता कौशल्या की कोख से भगवान राम का जन्म लिया। जिससे समस्त अयोध्यावासी आनंदित हो उठे। इस आनंद की वर्तमान में भजनों द्वारा कथा व्यास ने जब वर्षा की तो उपस्थित श्रद्धालु भी झूम उठे।
व्यास जी ने कहा निरगुण से सगुण भगवान सदैव भक्त के प्रेम के वशीभूत रहते हैं। भक्तों के भाव पर सगुण रूप लेते हैं। जब-जब होये धर्म की हानि, बढ़र्हि असुर अधर्म अभिमानी, तब-तब प्रभु धरि विविध शरीरा। धर्म व सम्प्रदाय में अन्तर को समझाते हुए उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्ति के अन्दर एकजुटता का भाव पैदा करता है वहीं सम्प्रदाय व्यक्ति को बाहरी रूप से एक बनाता है। मानव को एकजुटता की व्याख्या करते हुए व्यास जी ने कहा कि एक पुस्तक, एक पूजा स्थल, एक पैगम्बर, एक पूजा पद्धति ही, व्यक्ति को सीमित व संकुचित बनाती है जबकि ईश्वर के विभिन्न रूपों को विभिन्न माध्यमों से स्मरण करना मात्र सनातन धर्म ही सिखाता है। ईश्वर व पैगम्बर में अन्तर को बताते हुए कहा कि ईश्वर के अवतार से असुरों का नाश होता है। अधर्म पर धर्म की विजय होती है। यह अद्भुत कार्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम एवं भगवान श्री कृष्ण ने अयोध्या व मथुरा की धरती पर अवतार लेकर दिखाया। व्यास जी ने देश की युवा पीढी पर चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि आज का युवा पाश्चात्य सभ्यता के भंवर में फंसा हुआ है। उसे राम कृष्ण सीता के साथ भारतीय सभ्यता से मतलब नहीं है। उन्होंने माताओं से आग्रह कि यदि माताएं चाहें तो युवा पाश्चात्य सभ्यता से अलग हो सकता है। सभी माताओं से आग्रह किया कि गर्भवती माताओं के चिन्तन मनन खान-पान, पठन-पाठन रहन सहन का बच्चे पर अत्यन्त प्रभाव पडता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान माताओं को भगवान का सुमिरन करना चाहिए। साथ ही साथ सात्विक भोजन व चिन्तन आदि करना चाहिए।
रामायण जी की आरती एवं प्रसादी के साथ तृतीय दिवस कथा प्रसंग का समापन हुआ। मंदिर सेवायत सुनीत गोस्वामी और मंदिर प्रशासक दिनेश पचौरी ने बताया कि कथा आयोजन के चतुर्थ दिवस बुधवार को श्रीराम विवाह प्रसंग होगा।
इस अवसर पर अखिलेश अग्रवाल, राजेश खंडेलवाल, पीयूष अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, संजीव जैन, शरद मित्तल, निर्मल धाकड़, राम प्रसाद धाकड़, मनीष गोयल, नवीन प्रजापति, श्याम सुंदर शर्मा
फूल सिंह, स्वास्तिक हैंड राइटिंग ट्रस्ट से पल्लवी अग्रवाल, गीता सैनी, रागिनी, ज्योतिशा आदि उपस्थित रहे। व्यवस्था प्रकाश धाकड़, मोहित वशिष्ठ, आशीष सिंघल, सचेंद्र शर्मा आदि ने संभाली।
: गुरुद्वारा दशमेश दरबार में हुआ भव्य अमृत संचार का आयोजन
Tue, Nov 5, 2024
आगरा। ‘‘मिल पीवो भाई अमृत नाम निधान है’’। सिख धर्म के दसवें गुरु साहिब श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज द्वारा सर्वप्रथम अमृत संचार की शुरुआत की गई। पांच प्यारों द्वारा खंडे बाटे के अमृत को ग्रहण करके खालसा पंथ की स्थापना हुई थी। इसी कड़ी में आज गुरुद्वारा दशमेश दरबार, शहीद नगर विभव नगर, आगरा में भव्य अमृत संचार का आयोजन किया गया। अकाल तख्त साहिब से पधारे पंच प्यारो ने अमृत अभिलाषियों को अमृत की दात दी।
इस अवसर पर वीर महेंद्र पाल सिंह द्वारा अमृत रस कीर्तन से सभी को प्रभु चरणों से जोड़ा। उन्होंने ‘‘मिल पीवो भाई अमृत नाम निधान है’’ का गायन कर सभी को भक्ति रस में डुबो दिया। उन्होंने बताया की अमृत की दात से ही गुरु के सिख में न्यारापन आता है और उसके अंदर-बाहर सच, संतोष, संयम, सहनशीलता का अमृत बरसता है और अमृत की दात लेकर गुरु का सिख खालसा बन जाता है खालसा अर्थात खालिस जिसमें कोई मिलावट न हो उन्होंने सभी गुरु के प्यारो से जिन्होंने अमृत की दात नहीं ली उनसे अमृत छकने की अपील की। अंत में उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जी की रचना ‘देह शिवा बर मोहे ए है शुभ करमन ते कबहूं न टरों’ का गायन कर पूरे माहौल को जोशमय बना दिया।
इस अवसर पर अमृत पान करने वालों में हरपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह लवली, मलकीत सिंह, परमजीत सिंह, सुरेंद्र सिंह लाडी, जसविंदर कौर, कुलबीर कौर भसीन, जसकरण सिंह, इकबाल कौर, अमरीक जीत सिंह, इंद्रजीत कौर, अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही जिसमें प्रबंधक कमेटी द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया। राजू सलूजा, गुरु सेवक श्याम भोजवानी, इंद्रजीत सिंह वाधवा, गुरिंदर सिंह ओबेरॉय, देवेंद्र सिंह जुल्का, अमरजीत सिंह भसीन, हरजिंदर सिंह, संजय सेठ, गुरुद्वारा प्रमुख सरदार हरपाल सिंह ने सारी संगत का धन्यवाद किया।
: देवोत्थान एकादशी पर हरीनाम संकीर्तन सेवा ट्रस्ट करेगा निर्धन कन्याओं का विवाह
Tue, Nov 5, 2024
आगरा। हरिनाम संकीर्तन सेवा ट्रस्ट बड़े ही उत्साह के साथ अपनी लाडलियो का सामूहिक विवाह देवोत्थान एकादशी (12 नवंबर) को बड़ी ही धूम धाम से करेगा। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ट्रस्ट द्वारा 5 कन्यायों का विवाह परशुराम पार्क 100 फूटा चैराहा शमशावाद रोड़ पर किया जायेगा। कथा वाचिका पंडित गरिमा किशोरी के पावन मार्गदर्शन में ट्रस्ट, गरीब कन्यायों का विवाह, गौ सेवा, पशु सेवा, अनेकों धार्मिक आयोजन आदि का कार्य कर रहा है।
वरिष्ठ सदस्य श्याम भोजवानी नेे बताया कि ट्रस्ट द्वारा तृतीय सामूहिक कन्या विवाह इस वर्ष 12 नवंबर को किया जायेगा। शहर के गणमान्य व्यक्तिओं के सहयोग से संचालित ट्रस्ट ऐसे आयोजन करता रहेगा।
इस मौके पर श्याम भोजवानी, श्रीनिवास अग्रवाल, अमित गुप्ता, घनश्यामदास गोयल, राजू गोस्वामी, बलवीर सिंह बघेल बल्लो, सत्यम शर्मा, हर्षिल आरती शर्मा, सुधा शर्मा, मानसी आदि उपस्थित रहे।