: अध्यात्म की गहराई से लेकर कॉमिक्स की दुनिया तक, पुस्तक मेला बन रहा साहित्य की हर विद्या का साक्षी
Sun, Nov 26, 2023
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अक्षरा साहित्य अकादमी के नौ दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव का आयोजन
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जीआइसी मैदान में लगे पुस्तक मेले में हिंदी, संस्कृत, अंग्रजी, उर्दू सहित अन्य भारतीय भाषाओं की पुस्तकें भी
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स्कूली बच्चे पहुंच रहे अवलोकन करने, रविवार को मेले में होगी हैंडराइटिंग एवं पोस्टर मैकिंग प्रतियोगिता
जीआइसी मैदान में अक्षरा साहित्य अकादमी द्वारा लगाए गए नौ दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव का शुभारंभ करते केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, महंत श्री योगेश पुरी, नजीर अहमद, डॉ रंजना बंसल, प्रो. लवकुश मिश्रा व अन्य।
आगरा। यदि ज्ञान को सदैव जीवित एवं वृहद बनाना चाहते हैं और चाहते हैं कि आपका दिया उपहार कभी भी पुराना न हो तो समाज में एक नई पहल आरंभ करें। फूलों के गुलदस्ते के स्थान पर पुस्तकें देना आरंभ करें। पुस्तकों के शब्द जीवन को उर्जावान करने के साथ ज्ञान की रोशनी भी देते हैं। यह बातें कहीं मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री परिवार एवं स्वास्थ कल्याण मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने।
पुस्तक मेला का अवलोकन करते केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो.एसपी सिंह बघेल।
जीआइसी मैदान पर अक्षरा साहित्य अकादमी द्वारा लगाए गए नौ दिवसीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव का शुभारंभ हुआ। केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो एसपी सिंह बघेल के साथ मधु बघेल, डॉ रंजना बंसल, महंत योगेश पुरी, नजीर अहमद, डॉ संजीव और प्रो. लवकुश मिश्रा ने दीप प्रज्जवलित किया।
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्रुति सिन्हा ने सभी अतिथियों का परिचय दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विनोद माहेश्वरी, उपाध्यक्ष वत्सला प्रभाकर, सहसचिव कैप्टन शीला बहल, श्वेता अग्निहोत्री ने सभी का स्वागत किया। जॉन मिल्टन पब्लिक स्कूल के बच्चों ने गणेश वंदना की मनमोहक प्रस्तुति दी।
प्रो एसपी सिंह बघेल ने कहा कि जीवन में बाबा साहब आंबेडकर के तीन सूत्र सदैव स्मरण रखें, शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो। आप कभी भी हारेंगे नहीं। उन्होंने उपहारों में पुस्तक और पौधे देने की पहल आरंभ करने की बात भी कही।
महंत योगेश पुरी ने कहा कि आगरा में पुस्तक मेले के आयोजन का आरंभ वरिष्ठ पत्रकार अमि आधार निडर ने किया था। कोविड काल ने उन्हें छीन लिया किंतु पुस्तक मेले की सौगात के रूप में वे आज भी हम सभी के साथ हैं। उन्होंने आए हुए स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि पुस्तक और गैजेट्स में बहुत बड़ा फर्क ये है कि पुस्तकों का अध्ययन कल्पनाशक्ति को बढ़ाते हुए आनंदित करता है जबकि गैजेट्स का अधिक प्रयोग दिमाग को संकुचित कर निरस बनाकर थका देता है।
डॉ रंजना बंसल ने कहा कि हर छह माह में इस तरह के आयोजन आगरा की धरती पर होते रहने चाहिए। हर व्यक्ति यदि प्रतिदिन आधा घंटे भी पुस्तक पढ़े तो बहुत सारी बीमारियों से खुद को बचा सकता है।
प्रो.लवकुश मिश्रा ने पाठ्यक्रम की पुस्तकें योग्यता बढ़ाती हैं और साहित्य पढ़ने से संवेदनशील व्यक्तित्व बनता है। पुस्तकें जीवन दर्शन देती हैं। उद्घाटन सत्र के समापन पर राष्ट्रीय सचिव दीपक सिंह सरीन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
सायंकाल द्वितीय सत्र में संगीत कला केंद्र द्वारा सुरीले नगमे की प्रस्तुति हुई। प्रेरणा और शुभ्रा तलेगांवकर के निर्देशन में आर्ची, लवेश और कल्पना ठाकुर ने सुगम संगीत से मंत्रमुग्ध किया। नीलम गुप्ता की तुलना दो विधाओं की और यवपुल गीत पुस्तक का विमोचन महंत योगेश पुरी ने किया।
रविवार को होगी हैंडराइटिंग एवं पोस्टर मैकिंग प्रतियोगिता
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विनोद माहेश्वरी ने बताया कि नौ दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन तीन− तीन सत्र होंगे। रविवार 26 नवंबर को बाल सत्र में स्वास्तिक हैंडराइटिंग एवं रिसर्च सेंटर द्वारा हैंडराइटिंग एवं पोस्टर मैकिंग प्रतियोगिता होगी। द्वितीय सत्र में प्रकृति और पर्यावरण पर परिचर्चा एवं तृतीय सत्र में माधुर्य साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था की प्रस्तुति होगी।
पुस्तक मेला के है ये मुख्य आकर्षण
स्टॉल संयोजक राजकुमार शुक्ला ने बताया कि पुस्तक मेले में राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, मुंबई, रायपुर, नोएडा, तमिलनाडु आदि शहरों से 50 स्टॉल्स लगी हैं। स्टॉल्स पर धार्मिक, उर्दू, मैथोलोजिकल कॉमिक्स सहित कालजयी लेखक मुंशी प्रेमचंद्र, शरद चंद्र, रविंद्र नाथ टैगोर, शेक्सपीयर, एमली डिकिन्सन, मार्डन इंग्लिश आदि की हजारों पुस्तकें अपने पाठकों के इंतजार में हैं। मेले में प्रतिदिन विभिन्न स्कूलों के बच्चे अवलोकन करने पहुंचेंगे।
ये रहे मुख्य रूप से उपस्थित
उद्घाटन सत्र में हरविजय बाहिया, मुकेश जैन, रीनेश मित्तल, आरके कपूर, शमी अगाई, शारदा गुप्ता, डॉ अपर्णा पोद्दार, श्रीकृष्ण, प्रो. सुगम आनंद, आनंद राय, अनिमेष दयाल, रितु गोयल, डॉ माधवी कुलश्रेष्ठ, प्रो. आभा शर्मा, प्रो. चंद्रशेखर शर्मा, राकेश चंद्र शुक्ला, हेमलता त्रिवेदी, डॉ अरुण उपाध्याय, जयवीर सिंह आदि उपस्थित रहे।
: अनुशासित रहने पर मिलती है स्वतंत्रता
Sun, Nov 26, 2023
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लाइफ लीडर्स क्लब द्वारा एयर फोर्स स्कूल में आयोजित की गई कल्टीवेट द पॉवरफुल ग्रोथ माइंडसेट फॉर सक्सेस विषय पर कार्यशाला
आगरा। अनुशासित रहने पर ही व्यक्ति स्वतंत्र रह सकता है। ठीक वैसे ही जैसे सीमा पर हमारी सुरक्षा कर रहे नौजवान जब अनुशासित रहकर देश की सुरक्षा करते हैं, तभी हम देशवासी देश के अन्दर स्वतंत्र रह पाते हैं। इसलिए अपने जीवन और दिनचर्या को अनुशासित रखेंगे तो कोई काम पेंडिंग नहीं रहेगा। न ही किसी काम के लिए समय का अभाव रहेगा। एयर फोर्स स्कूल में आज लाइफ लीडर्स क्लब द्वारा कल्टीवेट द पॉवरफुल ग्रोथ माइंडसेट फॉर सक्सेस विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें जयपुर से आई लाइफ लीडर्स क्लब की संस्थापिक स्मृति श्रीवास्तव ने अपने व्याख्यान में कक्षा 9 व 11 के विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के लिए सरल व महत्वपूर्ण सूत्र दिए।
ग्रोथ माइंडसेट कोच स्मृति श्रीवास्तव ने बताया कि फेल होने जैसा कुछ नहीं होता। आपने एक लक्ष्य निर्धिरत किया। या तो आप वहां पहुंच पाए या फिर आपने वहां तक पहुंचने के मार्ग में बहुत कुछ सीखा। अपने विचारों में फेल जैसे नकारात्मक जैसे शब्द को शामिल न करें। नकारात्मक चीजों पर ध्यान देने से उसके पराधीन नहीं बनना है आपको। किसी और को नहीं बल्कि खुद को साबित करें। खुद से प्रतिस्पर्धा करें। सोचें कल आप क्या थे और आज यदि उससे बेहतर हैं तो आप सफल हैं। अपनी भावनाओं में सकारात्मकता को बढ़ाएंगे तभी सफलता का प्रतिशत बढ़ेगा। जो नहीं आते उसे स्वीकारना सीखें। पूछने या कुछ नया सीखने में झिझके नहीं। हाथ न होने पर भी शूटिंग में एशियन पेरा में दो गोल्ड मेडल जीतने वाली शीतल देवी और पैर न होने पर भी एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाले हरी बुद्धा का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन की दुर्घटनाओं को लेकर न बैठें। आगे बढ़े। आपकी सफलता किसी और के पास नहीं बल्कि खुद आपकी सोच में हैं। इस अवसर पर शिक्षिकाओं में मुख्य रूप से विभा अरोरा, विनोद दुबे आदि उपस्थित थे।
: श्रीकृष्ण−सुदामा का मिलन देख श्रद्धालु हुए भाव विभोर, मित्रता की सीख लेकर निकले पंडाल से
Fri, Nov 24, 2023
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श्रीकृष्ण लीला शताब्दी समारोह में आठवे दिन हुआ श्रीकृष्ण− सुदामा मिलन लीला का मंचन
बल्केश्वर गौशाला में चल रहे श्रीकृष्ण लीला शताब्दी समारोह में श्रीकृष्ण सुदामा मिलन लीला का मंचन करते कलाकार।
आगरा। मित्र वही है जो किसी भी परिस्थिति में मित्र का साथ न छोड़े। मित्र के कहे बगैर मित्र के मन की बात को समझ ले और उसकी पीड़ा को स्वयं की पीड़ा माने। श्रीकृष्ण के प्रिय सखा सुदामा के प्रति स्नेह को राधा विनोद लीला संस्थान, वृंदावन के लीला निर्देशक स्वामी श्रीराम शर्मा (निमाई) के निर्देशन में कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से मंचित किया।
श्री कृष्ण के स्वरूप की आरती उतारते कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन प्रदीप भाटी व मनीष अग्रवाल।
बल्केश्वर स्थित गौशाला में श्रीकृष्ण लीला समिति के तत्त्वावधान में चल रहे श्री कृष्ण लीला शताब्दी समारोह में श्रीकृष्ण− सुदामा लीला का मंचन किया गया। मुख्य अतिथि प्रदीप भाटी (चेयरमैन, कॉपरेटिव बैंक) थे।
आठवें दिन के लीला मंचन में दिखाया गया कि श्रीकृष्ण व सुदामा बचपन में उज्जैन नगरी में संदीपन गुरु के यहां विद्याध्यन करते हैं। एक दिन गुरु की आज्ञा से दोनों मित्र वन में समिधा (हवन की लकड़ी) लेने जाते हैं। जहां श्री कृष्ण व सुदामा दोनों को दिए गए चनों को सुदामा अकेले ही खा जाते हैं, जिसके कारण सुदामा को दरिद्रता का सामना करना पड़ता है परंतु सुदामा कभी भी श्री कृष्ण का भजन नहीं छोड़ते। एक बार पत्नी के विशेष आग्रह पर सुदामा द्वारिका जाते हैं और भेंट में थोड़े से चावल श्री कृष्ण के लिए ले जाते हैं। श्री कृष्ण उसमें से दो मुट्ठी चावल खाते हैं, जिसके बदले सुदामा को दो लोक की संपत्ति दे देते हैं। द्वारकापुरी जैसा सुदामापुरी का वैभव करते हैं।
अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि श्रीकृष्ण− सुदामा मिलन लीला से समाज को दो शिक्षाएं मिलती हैं प्रथम किसी का भाग चोरी से ग्रहण नहीं करना चाहिए। दूसरे अपने मित्र का दुख अपना दुख समझना चाहिए। उसे कभी हेय दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। लीला मंचन में पात्रों के अभिनय ने सभी को भाव विभोर कर दिया।
इस अवसर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, विजय रोहतगी, अशोक गोयल, शेखर गोयल, ब्रजेश अग्रवाल, उत्तम चंद्र, कृष्ण कन्हैया अग्रवाल, मनोज गुप्ता, संजय गुप्ता, संजीव गुप्ता, विष्णु अग्रवाल, राजेंद्र, संजय चेली, डीके चौधरी, रेणु गोयल, मनीष बंसल, नीलिमा, सुजाता, संजय गर्ग, नीरज अग्रवाल, अशोक हरियाणा, दीपक अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।