: निर्यात सम्मेलन में रखी जाएगी आगरा में कालीन बुनाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापना की मांग
Mon, Jan 1, 2024
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8 और 9 जनवरी को होने जा रहे एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 (निर्यात सम्मेलन) में रखेंगे आगरा फ्लोर कवरिंग संगठन अपनी बात
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संगठन ने निर्यात सम्मेलन आयोजन समिति के समक्ष उठाई आगरा दरी की तरह आगरा कालीन को जीआई टैग मिलने की मांग
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आगरा फ्लोर कवरिंग संगठन के पदाधिकारी बोले, कारपेट उद्योग के लिए प्रदूषण बोर्ड की अलग से बने नीति तभी मिलेगा बढ़ावा
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मुगलकाल में हुई थी आगरा में कालीन और बुनाई उद्योग की स्थापना, फारसी तकनीक से होता है कालीनों की बुनाई का काम, लाल पृष्ठभूमि होती है विशेषता
आगरा। मुगलिया काल में आगरा को एक विशेष उद्योग मिला था। मुगल बादशाह अकबर ने आगरा के लोगों को कालीन बुनाई के उद्योग से जोड़ा और इसके बाद यहां के कारीगरों ने अपनी पहचान विश्व पटल तक पर बना दी। आज वही उद्योग मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। 8 और 9 जनवरी को होने जा रहे एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 (निर्यात सम्मेलन) में कालीन बुनाई उद्योग से जुड़ा आगरा फ्लोर कवरिंग संगठन अपनी बात रखेगा और सरकार से प्रमुख मांग करेगा।
सोमवार को बंसल नगर, फतेहाबाद रोड स्थित रमन एक्सपोर्ट पर एक्सपोर्ट सिम्पोजियम 2024 (निर्यात सम्मेलन) आयोजन समिति के पदाधिकारियों के साथ आगरा फ्लोर कवरिंग संगठन ने बैठक की। संगठन के अध्यक्ष संतोष माहेश्वरी ने कहा कि ‘आगरा कालीन’ को ‘आगरा दरी’ की तरह सरकार द्वारा जीआई टैग (भौगोलिक संकेत) प्रदान किया जाना चाहिए। ताकि आगरा के कालीन का मूल्य और उससे जुड़े लोगों का महत्व बढ़ सके। इतना ही नहीं, जीआई टैग मिलने से फेक प्रॉडक्ट को रोकने में मदद भी मिलेगी और कालीन निर्यातकों को आर्थिक फायदा मिलेगा।
उपाध्यक्ष राजेश जैन कोटा ने कहा कि कालीन उद्योग श्रमिक प्रधान उद्योग है किंतु यहां के निर्यातक कुशल बुनकरों की कमी से जूझ रहे हैं। इस कमी को दूर करने के लिए आवश्यक है कि नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देने हेतु आगरा शहर में सरकार द्वारा कालीन बुनाई प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की जाए। ताकि ये उद्योग बंद न हो और शहर में ही युवाओं को रोजगार मिल सके। तभी आगरा जिले से युवाओं का पलायन भी रुक सकेगा।
कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल भारत सरकार के कमेटी ऑफ एडमिनिस्ट्रेटर के सदस्य राम दर्शन शर्मा ने ऊन आयात शुल्क समस्या पर अपनी बात रखी, कहा कि भारत में उत्पादित ऊन अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुकूल नहीं होता। इसकी भरपाई के लिए कालीन उत्पादकों को न्यूजीलैंड, टर्की एवं अन्य देशों से गुणवत्तापूर्ण ऊन का आयात करना होता है। सरकार द्वारा आयातित ऊन पर अत्याधिक आयत एवं सीमा शुल्क रोपण के कारण कालीन उत्पादकों की लागत एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है। ऐसे में केंद्र सरकार को आयातित ऊन पर अधिरोपित आयात एवं सीमा शुल्क में युक्तिकरण एवं घटौती करनी चाहिए।
कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध अग्रवाल ने कहा कि कालीन निर्यातकों द्वारा कालीन और दरी जैसे निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट आरओडीटीईपी योजना के तहत दरों में बढ़ोत्तरी और मूल्य सीमा को हटाने की प्रमुख मांग रही है। यह सभी बातें करों के लिए पर्याप्त रूप से मुआवजा नहीं देती हैं जिसका कालीन निर्यातकों द्वारा भुगतान किया गया। कालीनों के लिए आरओडीटीईपी दरें निर्यात के मूल्य के 1.2 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत के बीच हैं। निर्यातकों का कहना है कि यह अत्यधिक अपर्याप्त है। विभिन्न श्रेणियों के कालीनों पर भी विभिन्न सीमाएं लगाई गई हैं, जिसका अर्थ है कि छूट निर्दिष्ट सीमा से अधिक नहीं हो सकती। आरओडीटीईपी योजना, परिवहन में उपयोग किए जाने वाले ईंधन पर वैट, मंडी कर और निर्यातित वस्तुओं के निर्माण के दौरान उपयोग की जाने वाली बिजली पर शुल्क जैसे एम्बेडेड कर्तव्यों और करों को वापस करती है, जिन्हें अन्य योजनाओं के तहत छूट नहीं मिलती है। इसने WTO-असंगत MEIS योजना का स्थान ले लिया है।
एक्सपोर्ट सिम्पोजियम के टैक्निकल कॉर्डिनेटर राहुल जैन ने कहा कि आगरा टीटीजेड क्षेत्र में आता है। यहां वही उद्योग लग सकते हैं जिनसे प्रदूषण न होता हो किंतु कालीन उद्योग को रंगाई के कारण प्रदूषणकारी उद्योग में रखा गया है। जिसके कारण उद्यमियों को रंगाई दूसरे शहरों में करवानी पड़ती है। जिसमें लागत अधिक लगती है। यदि नीरी और उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गाइड लाइन बना दे और प्रदूषण रोकथाम के लिए लगने वाले उपकरणों पर सब्सिडी दे दे तो उद्यमियों की लागत कम हो जाएगी। इसके अलावा उद्योग में काम करने वाले कारीगरों को श्रमिक कानून में लाभ मिलना चाहिए। इन सभी प्रमुख बातों का बिंदुवार ड्राफ्ट बनाया गया है जो कि निर्यात सम्मेलन में सरकार के प्रतिनिधियों को सौंपा जाएगा।
प्रोग्राम कन्वीनर मनीष अग्रवाल ने बताया कि निर्यात सम्मेलन आगर और अलीगढ़ जिलों के सभी उद्योगों की निर्यात के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशेगा और समस्याओं का समाधान खोजेगा। निश्चित रूप से सम्मलेन के माध्यम से आगरा और अलीगढ़ के सभी उद्योगों की पहचान विश्वपटल पर बन सकेगी। बैठक में रिपुदमन सिंह, सागर तोमर, अमित यादव आदि उपस्थित रहे।
ये है आगरा के कालीन उद्योग की विशेषता
आगरा में कालीन बुनाई उद्योग की स्थापना बादशाह अकबर ने 16 शताब्दी में की थी। तभी से फारसी तकनीक से उच्चतम गुढ़वत्ता के कालीनों की बुनाई का काम यहां होता आ रहा है। आगरा के कालीनों में पारंपरिक सफ़ाविद डिज़ाइन और बुनाई तकनीक के साथ एक लाल पृष्ठभूमि की विशेषता होती है। आगरा में कालीन बुनाई उद्योग से प्रत्यक्ष रूप से 20000 से अधिक लोग रोजगार पा रहे हैं। आगरा परिधि में 100 से अधिक गांव में 5000 लूम ( खढी, करघा) यंत्र मौजूद हैं। 6 स्क्वायर फीट से लेकर 300 स्क्वायर फीट तक के कालीन यहां बनते हैं। उच्च गुणवत्ता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में आगरा के कालीन अपनी अलग पहचान रखते हैं।
: नववर्ष का स्वागत परसेवा संग, निर्धनों को वितरित किया भोजन
Mon, Jan 1, 2024
समाज सेवी सुभाष चंद अग्रवाल की स्मृति में नववर्ष पर विकल चौक पर हुआ महाभंडारा
आगरा। किसी भी शुभ कार्य की शुरूआत यदि वरिष्ठों के स्मरण और नमन के साथ की जाए तो वो कार्य फलीभूत होता है। इसी विचार के साथ समाज सेवी सुभाष चंद्र अग्रवाल की स्मृति में विकल चौक, सुल्तानगंज की पुलिया, कमला नगर पर महाभंडारे का आयोजन किया गया। इसके साथ ही निर्धनों को गर्म वस्त्र भी वितरित किये गए।
आयोजन समिति के अमित अग्रवाल पारुल (अध्यक्ष कमला नगर व्यापार संगठन) ने बताया कि विगत 13 वर्षों से भंडारे का आयोजन नववर्ष पर शहर के विभिन्न स्थानों पर किया जा रहा है। समाज सेवी सुभाष चंद्र अग्रवाल समाज के आदरणीय व्यक्ति थे। उनकी सीख का अनुसरण करते हुए ही हर वर्ष परसेवा का संकल्प लेते हैं। मुख्य अतिथि विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, एमएलसी विजय शिवहरे ने भी प्रसाद वितरण में बढ़चढ़ कर योगदान दिया। कहा कि नववर्ष का आरंभ भंडारे के साथ करना समाज को सार्थक संदेश देना है।
इस अवसर पर मीना अग्रवाल, छवि अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, दीपक ढल, पार्षद पंकज अग्रवाल, पार्षद मुरारी लाल गोयल, अशोक गोयल, रमेश मनीष, टिंकू कर्मचंदानी, संतोष, राजेश, सूरज, रिंकू, बिट्टू, नरेश अग्रवाल, जीतू, विरेंद्र, विष्णु, मनीष आदि उपस्थित रहे।
: नववर्ष का स्वागत स्वावलंबन के साथ, सशक्त होंगे तभी विकसित होंगे
Mon, Jan 1, 2024
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अशोक मेडिकेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन एवं चेतना सेवा समिति ने नववर्ष पर किया जरूरतमंदों को उपहारों का वितरण
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महिला सशक्तिकरण के लिए बांटी सिलाई मशीन, मेधावी छात्रों को दी प्रोत्साहन राशि, सूर विद्यालय के लिए बढ़ाए मदद के हाथ
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इस्कॉन के संकीर्तन पर झूमे आगरा के लोग, महामंत्र की धुन के साथ किया नये साल का स्वागत, बोले सनातन हैं तो हम हैं
आगरा। नूतन वर्ष मंगलमय तभी होगा जब हर वर्ग का मंगल होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला स्वावलंबन का नारा देते हैं तो इस दिशा में हम सभी को प्रयास करने होंगे। इसी संकल्प के साथ अशोक मेडिकेयर एंड रिसर्च फाउंडेशन एवं चेतना सेवा समिति ने नववर्ष उत्सव का आयोजन किया।
सोमवार को संजय प्लेस स्थित अशोक कॉसमॉस मॉल पर नववर्ष उत्सव का शुभारंभ विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, आरएसएस के विभाग प्रचारक आनंदजी, राज्य महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित, समाज सेवी मधु बघेल एवं अशोक आटो सेल्स की चेयरमैन डॉ रंजना बंसल ने प्रथम पूज्य देव गणेशजी के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया। इसके बाद नववर्ष का स्वागत सनातन संस्कृति के संदेश के साथ करते हुए इस्कान मंदिर द्वारा हरी नाम संकीर्तन के साथ किया गया। हरे कृष्ण, हरे राम महामंत्र की धुन पर उपस्थित हर आयु वर्ग के लोग भक्तिमय नृत्य करते नजर आ रहे थे। संकीर्तन की लहर के बाद स्वावलंबन, प्रोत्साहन और सेवा की बात चली। मुख्य अतिथि विधायक पुरुषोत्तम खण्डेलवाल ने कहा कि नववर्ष का आरंभ समाज सेवा के कार्य से ही होना चाहिए। इससे समाज को दिशा और संदेश दोनों मिलते हैं।
डॉ रंजना बंसल ने कहा कि आधी आबादी को हक नहीं बल्कि अवसर चाहिए। साधन चाहिए। यदि हाथ में हुनर है तो वो अपना समाज में मुकाम स्वयं बना लेती है। इन विचारों के साथ 40 महिलाओं को रोजगार सिलाई मशीन प्रदान की। राधा स्वामी अंध विद्यालय, टेढ़ी बगिया के छात्र-छात्राओं लिए उपकरण, श्रमिकों को जैकेट, जरूरतमंदों के लिए कंबल, शाल आदि वितरित किये गए। इसके अलावा मेधावी छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।
चेतना सेवा समिति के संस्थापक सत्यप्रकाश जैसवाल ने बताया कि उनकी संस्था प्रतिवर्ष सामूहिक विवाह समारोह सहित अन्य सामाजिक कार्य करती है। कार्यक्रम का संचालन श्रुति सिन्हा ने किया। इस अवसर पर वीरेंद्र गुप्ता, वीके गुप्ता, सुनील जोशान, इस्कान मंदिर के अरविंद प्रभु जी, आशु मित्तल, अनामिका मिश्रा, उपमा गुप्ता आदि उपस्थित रहीं। व्यवस्थाएं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शुभम, आशीष, प्रियंका, तान्या, कर्मवीर, पुनीत, नीरज, दीपक, आराध्या आदि ने संभालीं। कार्यक्रम का समापन प्रसादी के साथ हुआ।