: कथा व्यास पूज्यश्री मृदुल कान्त शास्त्री ने की अश्वत्थाना की कथा के माध्यम से सुमति और कुमति की व्याख्या
Mon, Feb 26, 2024
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सज्जन लोगों की संगति समति और दुर्जन लोगों की संगति कुमति
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दुनिया का सबसे बड़ा मंत्र विश्वास
आगरा। जैसी संगति वैसी बुद्धि। सज्जन लोगों की संगति सुमति और दुर्जन लोगों की संगति कुमति है। शिव पुराण के अनुसार अश्वत्थामा शिवजी का पांचवा अवतार था। परन्तु कौरवों की संगति के कारण उसने ऐसे-ऐसे कर्म किए मुक्ति नहीं मिली। कुसंग का प्रभाव था कि अश्वथामा सिर में घाव लिए भटक रहा है। अश्वत्थामा के प्रसंग के माध्यम से आज श्रीहरि सत्संग समिति द्वारा विजय नगर स्थित स्पोर्टबज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज दूसरे दिन कथा व्यास पूज्यश्री मृदुल कान्त शास्त्री ने संगति के प्रभाव को समझाया। कहा कि जैसे लोगों के साथ रहोगे वैसी ही बुद्धि हो जाती है। इसलिए अच्छे लोगों की संगत में रहे। जीवन आपका है इसलिए जीवन में क्या करना है, इसका निर्णय लेने का अधिकार भी आपको है। आप क्या करते हैं इस पर आपके अलावा किसी का अधिकार नहीं। इसलिए अच्छे कर्मों और अच्छी संगति के प्रति आसक्त रहें।
कथा व्यास पूज्यश्री मृदुल कान्त शास्त्री ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा मंत्र विश्वास है। ईश्वर के प्रति भक्त का विश्वास एक दिन उसकी इच्चा को अवश्य पूरा करता है। इसलिए ईश्वर पर विश्वास को बनाए रखें। भगवान पर भक्त का भरोसा भगवान को भक्त की इच्चा पूरी करने के लिए विवश करता है। इस अवसर पर शुकदेव व राजा परिक्षित के स्वरूपों का भक्तों ने पूजन किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष शांतिस्वरूप गोयल, महामंत्री उमेश बंसल, अनिल अग्रवाल, संजय गोयल, रश्मि अग्रवाल, श्यामसुन्दर अग्रवाल, मीना, शंकर अग्रवाल, बीना, गोपाल गुप्ता, अशोक रामदास अग्रवाल, अविराग, सुखदेव बिरला, रमेशचंद मित्तल, भगवानदास बंसल, अंशु अग्रवाल, रुचि, रश्मि सिंघल, मधु गोयल, रितु, सीमा बंसल, मीनू त्यागी, सीमा अग्रवाल आदि मौजूद थे।
सामाजिक विषयों पर भी की चर्चा
बच्चों को संस्कारवान बनाइये और निश्चिन्त हो जाइये। बच्चों के सामने आप जैसे कर्म करेंगे और उन्हें जैसे संस्कार देंगे बच्चे वैसा ही करेंगे। किसी की दुनिया में किसी के भी साथ रहे परन्तु भगवान का संग न छोड़िए, मंदिर आते जाते रहिए। भगवान वही करते हैं जो उनके भक्त चाहते हैं।
: एक जियाला हुआ था बृज में, नाम गोकुला वीर था…
Mon, Feb 26, 2024
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औरंगजेव ने जंजीरों से बंधवाकर कटवाएं थे अंग, हर अंग के कटने पर खून की फुहारें निकलने से पड़ा था फुहारा नाम
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वीर सपूत गोकुला जाट पर लिखे गीत का हुआ विमोचन, कर्मवीर चाहर निभाएंगे गोकुला जाट का किरदार, भारत माता व गोकुला जाट के जयकारों से गूंजा कार्यक्रम स्थल
आगरा। कोतवाली के पास स्थित फुहारा जगह बृज के वीर सपूत गोकुला जाट की वीरता और मुगलों के अत्याचार की गवाह है। मुगलों से जुड्ड लेने वाले साहसी गोकुला जाट को श्रद्धाजलि स्वरूप आरए मूवीज के वैनर तले गोकुला जाट पर फिल्म का निर्माण किया जा रहा है, जिसके गीत जेठमासी सूर्य जैसा दहकता अंगार था, बाजुओं में गज जैसा बल का अम्बार था, दीवाना था आजादी का मौत का वो शमशीर थे, एक जिलाया हुआ था बृज में नाम गोकुला वीर था… व फिल्म के पोस्टर का आज सेल्फी रेस्टरां में आयोजित कार्यक्रम में विमोचन मुख्य अतिथि मेयर हेमलता दिवाकर ने किया गया। फिल्म के एसोसिएट प्रोड्यूसर राजकुमार चाहर व आरए मूवीज के रंजीत सामा ने बताया कि जल्दी फिल्म की शूटिंग शुरु की जाएगी, जिसमें गोकुला जाट की भूमिका सांसद राजकुमार चाहर के बेटे कर्मवीर चाहर निभाएंगे।
कार्यक्रम में मौजूद एसोसिएट प्रोड्यूसर राजकुमार चाहर ने बताया कि गोकुला जाट वो वीर था जिसने औरंगजेब जैसे क्रूर शासक के सामने झुकने के बजाय अपने प्राण देना ज्यादा उचित समझा। ऐसे वीर जवानों की वारगाथा देश के युवा पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए। फिल्म के निर्माता रंजीत सामा व विजय सामा है। हेमन्त वर्मा के निर्देशन में गीत को फिल्माया जाएगा। संगीत पं. दलीप ताहिर व गीत को शब्दों में संजय दुबे ने संजोया है। मौहम्मद सलामत ने गीत को अपनी आवाज दी है। गीत की शूटिंग बृज क्षेत्र में की जाएगी, जिसमें गोकुला जाट के मुगलों के अत्याचार के खिलाफ साहस, पराक्रम और शौर्य को समाहित लोगों तक पहुंचाने का प्रयास होगा। संचालन संजय दुबे ने किया।
इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष गिर्राज कुशवाह, डॉ. गौरीशंकर, उत्तम सिंह काका, उमर शैल राज सिंह, कप्तान सिंह चाहर, गोपीचंद, सोनू दिवाकर, गुड्डू चाहर, अशोक चैबे, चैधरी भूरी सिंह, डॉ. दीपक सिंह, बहुरन सिंह, भीमसेन, मानसिंह, लोकेन्द्र सिंह, प्रमोद वर्मा, मनीष शर्मा, नीरज तिवारी, प्रदीप सरीन, राहुल आर्य, विजय सहगल, यश गांधी, विनोद शीतलानी, सतेन्द्र तिवारी, नारायण दास आदि उपस्थित थे।
ये है गोकुला जाट का इतिहास
गोकुला जाट के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि गोकुल सिंह तिलपत गांव का सरदार थे। 10 मई 1666 को जाटों व औरंगजेब की सेना में तिलपट में युद्ध छिड़ गया। युद्ध में जाटों की विजय हुई। मुगल शासन स्लाम धर्म को बढ़ावा दिया और किसानों पर कर बढ़ा रहा था। वीर गोकुला जाट ने किसानों को संगठित किया और कर जमा करने से मना कर दिया। और औरंगजेब के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया। औरंगजेब ने धोखे से गोकुला जाट को आगरा किले में बंदी बना लिया और इस्लाम स्वीकार करने पर जान बख्शने की शर्त रखी। गोकुला जाट ने शर्त को स्वीकार नहीं किया तो उन्हें जंजीरों से कोतवाली के पास बंधवा दिया गया। भरी जनता के सामने उनके शरीर का एक-एक अंग काटा गया। हर अंग कटने पर खून की फुहारे निकलती थी। इसी कारण कोतवाली के पास उस जगह का नाम फुहारा पड़ गया।
डॉ. भानू प्रताप को किया सम्मानित
वरिष्ठ पत्रकार डॉ भानु प्रताप सिंह ने हिंदू धर्म रक्षक वीर गोकुला जाट पुस्तक लिखी है। इसके लिए उन्होंने 1 वर्ष तक शोध किया और 32 पुस्तकों का अध्ययन किया। गोकुल जाट के गांव तिलपत तक दौरा किया। पुस्तक में हिंदू वीरांगनाओं के चतुर्थ जौहर और गोकुला जाट की बहन भंवरी कौर के बलिदान को भी उकेरा गया है। गोकुल जाट के चाचा उदय सिंह का बलिदान भी साथ में हुआ था। पांच 5000 किसानों को भी बंदी बनाकर लाया गया था। जीवित रहने की शर्त पर उन किसानों ने मुगलों का मैला उठाना मंजूर किया लेकिन मुस्लिम धर्म स्वीकार नहीं किया। गोकुला जाट शोध कर लिखी गी पुस्तक के लिए डॉ. भानू प्रताप को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
: चिकित्सा आपात स्थितियों के प्रबंधन पर एक दिवसीय सेमिनार का हुआ आयोजन
Mon, Feb 26, 2024
आगरा। दयालबाग रोड स्थित होटल पूनम प्लाजा में सोसाइटी फॉर एंडोडोंटिक एक्सीलेंस आगरा के बैनर तले दंत चिकित्सा कार्यालय में चिकित्सा आपात स्थितियों के प्रबंधन पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया।
मुख्य प्रवक्ता के रूप में ओरल एंड मैक्सॉलोफेसिअल सर्जन डॉ संदीप फौजदार द्वारा बताया कि दंत चिकित्सकों को व्यवहार में उत्पन्न होने वाली चिकित्सीय आपात स्थितियों के प्रबंधन के लिए तैयार रहना चाहिए। बेहोशी के अलावा, घटित होने वाली अन्य आपात स्थितियों में एलर्जी प्रतिक्रियाएं, एनजाइना पेक्टोरिसध्मायोकार्डियल रोधगलन, कार्डियक अरेस्ट, पोस्टुरल हाइपोटेंशन, दौरे, ब्रोंकोस्पजम और मधुमेह संबंधी आपात स्थिति शामिल हैं।
दंत चिकित्सा कार्यालय में लगभग सभी चिकित्सीय आपात स्थितियों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मस्तिष्क और हृदय की अपर्याप्त ऑक्सीजन को रोकना या ठीक करना है। इसलिए, सभी चिकित्सा आपात स्थितियों के प्रबंधन में यह सुनिश्चित करना शामिल होना चाहिए कि इन महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाया जा रहा है।
एसोसिएशन की प्रेसिडेंट डॉ सुषमा प्रतिहार ने बताया कि यह बुनियादी कार्डियोपल्मोनरी पुनर्जीवन (सीपीआर) के अनुरूप है, जिसके लिए दंत चिकित्सक को सक्षम होना चाहिए। इस सेमिनार में डॉ असीम शिरोमणी, डॉ अमित नारायन, डॉ दीपक कुरूप, डॉ आशीष गुप्ता, डॉ पुनीत श्रीवास्तव, डॉ दीप्ती चड्ढा श्रीवास्तव, डॉ चकित माहेश्वरी, डॉ श्रेया कपूर मल्होत्रा, डॉ जया पम्बू, डॉ भरत चैहान, डॉ विपुल अरोरा, डॉ वैभव कृष्णा सिंह, डॉ राहुल आदि ने प्रतिभाग लिया।