राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट ने आयोजित की है सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा
डिफेंस एस्टेट फेस−1 स्थित श्रीराम पार्क में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में हुआ रुक्मिणी मंगल प्रसंग
उद्धव गोपी संवाद सुन द्रवित हुआ भक्तों का हृदय, भक्तिमय प्रेम की बही धारा
आगरा। जयति तेधिकं जन्मना व्रजः, श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि। दयित दृश्यतां दिक्षु तावका स्त्वयि धृतासवस्त्वां विचिन्वते….आत्र भाव में जब कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज के कंठ से गूंजा गोपी गीत तो उपस्थित जनसमूह के नेत्र सजल हो उठे।
डिफेंस एस्टेट फेस−1 स्थित श्रीराम पार्क में राजेंद्र प्रसाद गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवे दिन कंस वध, उद्धव गोपी संवाद और रुक्मिणी मंगल लीला प्रसंग हुए। मुख्य यजमान सुनील एवं श्वेता गोयल ने व्यास पूजन किया। मंगलवार काे कथा प्रसंग में वीर, श्रंगार और भक्ति रस की त्रिवेणी बही। कथा व्यास अतुल कृष्ण भारद्वाज ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान सभी श्रृदालुओं के समक्ष भगवान श्री कृष्ण लीला प्रसंगों को बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे सुनकर श्रद्धालुगण राधा- कृष्ण की भक्ति में डूब गए। कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की ओर से की गई रासलीला- जीव एवं परमात्मा के मिलन का रास्ता दिखाती है। गाेपी यानी जीवात्मा, कृष्ण अर्थात ईश्वर परमात्मा ने रास रचाया। काम को पराजित करने की लीला साक्षात जीव एवं परमात्मा का मिलन है। हम परमात्मा को चाहते हैं, परन्तु अपने चारों ओर अनेक प्रकार के आडम्बर को फैलाए रखते हैं। यदि ईश्वर को जानना अथवा पाना है, तो सबसे पहले अपने आपको जानना पडे़गा और अपने ऊपर पड़े हुए मोह के परदे को हटाना पड़ेगा। व्यास जी ने कहा कि एक कृष्ण रूपी ईश्वर और गोपी रूपी जीव के ऊपर पड़े अज्ञान व मोह के परदे को चीर हरण रूपी लीला से हटाते हैं। गोपी अर्थात जीव, कृष्ण परमात्मा और वस्त्र यानि अविद्या। कोई लाल, हरे एवं पीले वस्त्रों को नहीं चुराया बल्कि जल में नग्न होकर स्नान करने से वरूण देवता का अपमान होता है, इसीलिए वस्त्र को चुराया अर्थात चीर हरण हुआ। उस समय भगवान श्री कृष्ण की अवस्था 5 वर्ष की थी अर्थात 5 वर्ष के बालक में कोई काम वासना नहीं होती।
भगवान ने कहा कि इस बात को हमें समझना है, यदि तुम नहीं समझ सकोगे और ना देख सकोगे, मैं तुम सब के सर्वत्र व्याप्त हूं। आवश्यकता है अपने भीतर के चक्षुओं को खोलकर देखने की। रासलीला वास्तव में जीव और परमात्मा के मिलन की एक आध्यात्मिक यात्रा है, जिस पर चलकर असीम शांति एवं आन्नद का अनुभव प्राप्त होता है। श्रीकृष्ण ने कंस रूपी अभिमान को मारा। रुक्मिणी साक्षात लक्ष्मी, कृष्ण साक्षात नारायण। भगवान ने रुक्मिणी का हरण करके उसके भाई रूकमी को ब्रह्म होने का प्रमाण दिया। राजा भीस्मक ने भगवत दर्शन करके अपनी कन्या रुक्मिणी का विवाह श्री कृष्ण से किया, अर्थात लक्ष्मी नारायण का पुनः मिलन हुआ। इस मंगल लीला के साथ छठवें दिन के कथा प्रसंग का समापन हुआ।
पंकज बंसल ने बताया कि बुधवार को सातवें दिन श्रीकृष्ण विवाह, सुदामा चरित्र एवं शुकदेव विदाइ प्रसंग के साथ फूलों की होली होगी।
कथा में दीपक गोयल, तनु गोयल, रवि गोयल, आरती गोयल, मनमोहन गोयल, पवन गोयन, भगवान दास बंसल, विष्णु दयाल बंसल, कल्याण प्रसाद मंगल, राजेश मित्तल आदि उपस्थित रहे।