: साहित्य और संस्कृति के महाकुंभ में हर कला को मिल रहा मंच
Tue, Nov 28, 2023
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एसीपी डॉ सुकन्या शर्मा बोलीं राष्ट्रीय पुस्तक मेला कर रहा जीवन में जीवंतता लाने का काम
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जीआइसी मैदान में चल रहा है अक्षरा साहित्य आकादमी राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव
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सुबह 10 से रात 10 बजे तक उमड़ रही पुस्तक प्रेमियों की भीड़, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक पहुंच रहे
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पुस्तक मेला में सेंट एंड्रूज, प्रिल्यूड और बलूनी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने दीं रंगारंग प्रस्तुति
आगरा। सही मायने में साहित्य उत्सव क्या होता है यदि ये जानना हो तो एक बार जीआइसी मैदान में लगे अक्षरा साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव में आकर देखें। एक ओर विभिन्न बुक स्टॉल्स पर देश− विदेश के नामचीन लेखकों की विविध विधाओं की पुस्तकें हैं तो दूसरी ओर साहित्यिक मंच पर अलग− अलग सत्रों में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां संस्कृति को दिशा देने का काम कर रही हैं।
दूसरे चित्र में बच्चों का उत्साह वर्धन करते डॉ गिरधर शर्मा, डॉ विनोद माहेश्वरी, श्रुति सिन्हा, दीपक सरीन, आरके कपूर आदि।
मंगलवार को राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव में बाल सत्र का आरंभ विभिन्न स्कूलों के बच्चों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियों से हुआ। मुख्य अतिथि डॉ गिरधर शर्मा (चेयरमैन सैंट एंड्रूज ग्रुप आफ एजूकेशन इंस्टीट्यूट) एवं विशिष्ट अतिथि डॉ सुकन्या शर्मा (एसीपी कोतवाली) थीं।
डॉ गिरधर शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय पुस्तक मेला में कला की हर विधा को स्थान मिल रहा है। एसीपी डॉ सुकन्या शर्मा ने पुस्तक मेला को जीवन में जीवंतता लाने वाला बताया।
जीआइसी मैदान में अक्षरा साहित्य अकादमी द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुति देते सेंट एंड्रूज स्कूल के बच्चे।
मां शारदे की वंदना एवं देशभक्ति गीत पर प्रस्तुति के साथ बलूनी पब्लिक स्कूल के बच्चों ने बाल सत्र का आरंभ किया। प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल के बच्चों ने पूजा गुप्ता के निर्देशन में दशावतार की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद सेंट एंड्रूज स्कूल के विभिन्न यूनिट के बच्चों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सीएफ सेंट एंड्रूज स्कूल के बच्चों ने प्रदीप कुमार और शिखा खंडेलवाल के निर्देशन में श्रीकृष्ण लीला नृत्य नाटिका का मंचन किया। बच्चों की भाव भंगिमाओं और नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकदीर्घा को रोमांचित कर दिया। पर्यावरण बचाना होगा सामूहिक गान से स्वच्छता का संदेश दिया गया। सेंट सीएफ एंड्रूज स्कूल के बच्चों ने अंजली पांडे के मार्गदर्शन में रामायण नृत्य नाटिका का मंचन किया। नाटिका में सीता का त्याग, लव कुश जन्म और सीता जी के धरती में समाने के वृतांत को बच्चों ने सशक्त अभिनय से प्रस्तुत किया। स्कूल के मंथन पाठक, राज दिवाकर और आर्यन ने एकल नृत्य प्रस्तुत किया। वीर अभिमन्यु, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और क्रिकेट विश्व कप 2023 की थीम पर भी शानदार प्रस्तुतियां हुईं। प्रथम सत्र में धन्यवाद ज्ञापन समिति की कोषाध्यक्ष श्रुति सिन्हा ने दिया। अध्यक्ष डॉ विनोद माहेश्वरी, सचिव दीपक सिंह सरीन, आरके कपूर, श्वेता अग्निहोत्री आदि ने अतिथियों का स्वागत किया।
जीआइसी मैदान में अक्षरा साहित्य अकादमी द्वारा लगाए गए राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव में सांस्कृतिक प्रस्तुति देते सेंट एंड्रूज स्कूल के बच्चे।
सहज योग से दिया जीवन को सहज बनाने का संदेश
राष्ट्रीय पुस्तक मेला के द्वितीय सत्र में सहज पर कार्यशाला रखी गई। मुख्य अतिथि स्प्रिच्युल फाउंडेशन के डॉ आईएस बंसल ने सहज योग के बारे में जानकारी दी। सहज योग की संस्थापिका निर्मला देवी द्वारा बताए गए तनाव मुक्त जीवन एवं चेतना प्राप्ति के विभिन्न सूत्र उन्होंने बताए। विशिष्ट अतिथि राज्य महिला आयोग की सदस्य निर्मला दीक्षित थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृष्णा टंडन ने की। सहज योग से डॉ जीवन सैनी, विवेक थिरानिया, अंजली चौधरी, भारती सिंघल, गौतम गुप्ता, सचिन मोतला, सक्षम सिंह, तनिष्का, साक्षी सिंह आदि उपस्थित रहे। तीसरे सत्र में डीईआई के संगीत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो लवली शर्मा और उनके छात्रों ने सुगम संगीत की प्रस्तुति दी। अनिल जैन ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सामाजिक कुरुतियों पर प्रहार किया।
पुस्तक मेला में स्टाल का अवलोकन करतीं एसीपी (कोतवाली) डॉ सुकन्या शर्मा।
ओलम्पियाड बिक रही हाथों हाथ
पुस्तक मेला में साहित्य प्रेमियों का हुजूम तो उमड़ ही रहा है साथ ही मेला में प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले छात्र भी बड़ी संख्या पहुंच रहे हैं। यूपीएसई, आईएएस आदि परीक्षाओं के लिए ओलम्पिडया, इतिहास, सामान्य ज्ञान आदि की पुस्तकें खरीदीं जा रही हैं। एक हजार से अधिक पुस्तक ओलम्पियाड और वैदिक मैथ्स की अब तक बिक चुकी हैं। वहीं धार्मिक पुस्तकों की मांग भी कम नहीं है। हिंदी, इंग्लिश और संस्कृत भाषाओं में एक साथ अनुवादित श्रीमद् भगवत गीता की 200 से अधिक कॉपियां बिक चुकी हैं तो श्रीमद् भगवत गीता यथार्थ रूप आउट आफ स्टॉक हो गई है। सर्वाधिक बिक्री माचिस गीता की हुई है। मांगा कलैक्शन की कॉमिक्स भी युवा काफी संख्या में लेने पहुंच रहे हैं। इन सभी से इतर किलो में बिक रहीं डायरी खरीदने के लिए लोग बड़े बैग लेकर पहुंच रहे हैं।
पुस्तक मेला में स्टाल का अवलोकन करतीं एसीपी (कोतवाली) डॉ सुकन्या शर्मा।
बुधवार को ये रहेगा विशेष
पुस्तक मेला के पंचम दिन पांच विशेष सत्र होंगे। कोषाध्यक्ष श्रुति सिन्हा ने बताया कि मंगलवार को बाल सत्र में आरइआई और एक पहल पाठशाला के बच्चों की प्रस्तुति होगी। द्वितीय सत्र में महिला शांति सेना द्वारा लैंगिक समानता और घरेलू हिंसा पर विमर्श, आथर्स गिल्ड आफ इंडिया द्वारा डिजिटल मीडिया के दौर में पुस्तकों की उपयोगिता पर परिचर्चा और प्रीति आनंद के कहानी संग्रह आशाओं के वातायन का विमोचन होगा। तृतीय सत्र में कवियत्रि सम्मेलन होगा।
: वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ से संपन्न हुआ श्री कृष्ण लीला महोत्सव
Tue, Nov 28, 2023
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बल्केश्वर स्थित गौशाला में 11 दिन संत समागम के साथ बही श्री कृष्णा भक्ति रसधार
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शताब्दी वर्ष में कृष्ण महोत्सव, शोभा यात्रा और गौचरण ने महोत्सव को बनाया आकर्षक
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हवन यज्ञ के साथ श्री कृष्ण लीला महोत्सव समिति ने वर्ष भर आयोजन का लिया संकल्प
आगरा। कलिकाल में भागवत कथा प्रभु नाम स्मरण मात्र से मानव कल्याण संभव है। श्री कृष्ण लीला महोत्सव समिति द्वारा बल्केश्वर गौशाला में पिछले 100 वर्षों से आयोजित श्री कृष्ण लीला महोत्सव का मंचन कुछ इसी सोच और मानव कल्याण की परिकल्पना को लेकर आयोजित किया जा रहा है। 17 नवंबर से शुरू हुआ श्री कृष्ण लीला महोत्सव का समापन वैदिक ऋचाओं पर हवन पूजन के साथ आरती वंदना कर संपन्न हुआ। विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए श्री कृष्ण भक्तों ने यज्ञ भगवान का स्मरण करते हुए हवन में आहुतियां दी।
विगत 11 दिनों में बल्केश्वर स्थित श्री कृष्ण लीला महोत्सव स्थल द्वारका धाम बना हुआ था। जहां पर भक्ति भाव से भक्तों ने श्री कृष्ण लीला महोत्सव का मंचन देखकर महोत्सव में आए संत महात्माओं के उपदेश प्रवचनों को अपने जीवन का सूत्र बनाया। महोत्सव के आखिरी दिन संस्कृत मनीषियों ने हवन यज्ञ कराकर विश्व कल्याण की कामना की। हवन पूजन के उपरांत आरती में घंटे घड़ियाल की मधुर ध्वनि के साथ सभी भक्तों ने एक स्वर में शताब्दी वर्ष में वर्ष भर आयोजन करने का संकल्प लिया। महोत्सव समापन के दिन विगत 11 दिनों से सेवा कर रहे समिति पदाधिकारियों के साथ क्षेत्रीय भक्त लीला कलाकारों के साथ भाव विभोर हो गए।
बल्केश्वर गौशाला में चल रहे श्री कृष्ण लीला शताब्दी समारोह में हवन पूजन कर विश्व शांति की कामना करते समिति के पदाधिकारी और भक्तजन।
ठाकुर जी की रही कृपा, लेकिन नहीं मिला प्रशासन का सहयोग
श्री कृष्ण लीला महोत्सव के शताब्दी वर्ष के आयोजन को भव्य बनाने के लिए महोत्सव समिति से जुड़े हुए पदाधिकारियों ने जी जान लगा दी। लीला मंचन के दौरान समिति पदाधिकारियों के साथ भक्त जनों का विशेष सहयोग रहा। समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने कहा इस भव्य आयोजन में ठाकुर जी की विशेष कृपा रही जिससे यह कार्यक्रम संपन्न हुआ लेकिन शताब्दी वर्ष में समिति को नगर निगम और जिम्मेदार विभागों की ओर से विशेष सहयोग नहीं मिल सका। इतने बड़े महोत्सव के दौरान ना तो फायर ब्रिगेड की ओर से कोई व्यवस्था की गई और ना ही श्री कृष्ण लीला स्थल पर नगर निगम की ओर से विशेष सफाई और पुलिस प्रशासन का भी जो सहयोग अपेक्षित था नहीं मिला यही पीड़ा है।
बाल बाल बचे केंद्रीय राज्यमंत्री बघेल
बल्केश्वर गौशाला में आयोजित श्री कृष्ण लीला महोत्सव में गौशाला कर्मचारियों की लापरवाही और अनदेखी की वजह से दो बार हादसा होते-होते टल गया। प्रभु श्री कृष्ण राधा रानी की कृपा से श्री कृष्ण लीला महोत्सव बिना किसी विघ्न बाधा के संपन्न हुआ लेकिन 26 नवंबर को उस समय एक हादसा होने से बच गया जब शोभायात्रा के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल गौशाला के बारे में जानकारी ले रहे थे उसी वक्त गौशाला परिसर से एक हिंसक सांड बड़ी तेजी से शोभा यात्रा की ओर भागा जिससे केंद्रीय राज्य मंत्री बाल बाल बच गए लेकिन पास में ही खड़ा उनका फोटोग्राफर चोटिल हो गया। हिंसक गोवंश ने उस वक्त कई गाड़ियों के शीशों को भी तोड़कर उत्पात मचाया। श्री कृष्ण लीला महोत्सव संयोजक शेखर गोयल ने बताया कि हवन पूजन के दौरान भी गोवंश का उत्पात भक्त जनों को भयभीत करता रहा। हवन यज्ञ के समय गौशाला की तरफ से आई एक गाय ने स्कूटर को गिरा दिया, डर की वजह से लोग मंदिर की ओर भाग गए। उन्होंने कहा लीला मंचन के दौरान भी गौशाला के कर्मचारियों ने कार्यक्रम में सहभागिता न दिखाते हुए जो लापरवाही की वह चिंतनीय है।
इनकी रही मौजूदगी
श्री कृष्ण लीला महोत्सव बलकेश्वर द्वारा आयोजित श्री कृष्ण महोत्सव में समिति के अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, विजय रोहतगी, शेखर गोयल, अशोक गोयल, केके अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, विनीत सिंघल, कैलाश खन्ना, पीके मोदी, अनूप अग्रवाल, प्रभात रोहतगी, आशु रोहतगी, राजेंद्र अग्रवाल, ब्रज भोग, कोयल शर्मा, बीजी अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, सुजाता अग्रवाल, नीरू, पारुल अग्रवाल कीर्ति अग्रवाल, सचिन शर्मा, कृष्णा, मीडिया प्रभारी तनु गुप्ता सहित बड़ी संख्या में कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारी और भक्तजन मौजूद रहे।
: रुक्मिणी के समर्पण को श्रीकृष्ण ने दिया वैदिक विवाह का वरदान, वरमाला के साथ गूंजे मंगलगान
Mon, Nov 27, 2023
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श्रीकृष्ण लीला शताब्दी समारोह में हुआ द्वारिकापुरी रुक्मिणी मंगल विवाह लीला का मंचन
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जय श्रीकृष्ण हरे के गूंजे जयघोष, लीला स्थल पर ही निकाली गयी वरयात्रा, भक्तों ने बरसाए पुष्प
आगरा। गोविंद हरे, गोपाल हरे के जयघोष थे और मंगलगान गूंज रहे थे श्रीकृष्ण और रुक्मिणी जी के मंगल विवाह के।
श्रीकृष्ण लीला समिति के तत्वावधान में चल रहे श्रीकृष्ण लीला महोत्सव के 11वें दिन शिशुपाल वध और द्वारिकापुरी में भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह लीला का मंचन किया गया। जिसमें श्रद्धालुओं ने जमकर मंगलगान गाए और जयघोष किए।
लीला में दिखाया गया कि विदर्भ देश में भीष्मक नाम के राजा राज्य करते थे। कुण्डिनपुर उनकी राजधानी थी। उनकी पुत्री रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण के गुणों और उनकी सुंदरता पर मुग्ध थी और उसने मन ही मन श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था। भगवान श्रीकृष्ण तो परमज्ञानी हैं। उन्हें ज्ञात था कि रुक्मिणी परम रूपवती और सुलक्षणा भी है और उन्हें वर रूप में प्राप्त करना चाहती है।
भीष्मक का बड़ा पुत्र रुक्मी भगवान श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था। वह बहन रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से कराना चाहता था, क्योंकि शिशुपाल भी श्रीकृष्ण से द्वेष रखता था। भीष्मक ने रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल के साथ ही करने का निश्चय किया और तिथि तय कर दी।
रुक्मिणी ने यह सूचना श्रीकृष्ण के पास भेज दी। उन्हें बता दिया कि उसके पिता उसकी इच्छा के विरुद्ध शिशुपाल के साथ उसका विवाह करना चाहते हैं। विवाह के दिन मैं गिरिजा माता के दर्शन करने को जाऊंगी। मंदिर में पहुंचकर मुझे पत्नी रूप में स्वीकार करें। यदि आप नहीं पहुंचेंगे तो मैं आप अपने प्राणों का परित्याग कर दूंगी। रुक्मिणी का संदेश पाकर भगवान श्रीकृष्ण रथ पर सवार होकर शीघ्र ही कुण्डिनपुर की ओर चल दिए। बलराम भी यादवों की सेना के साथ कुण्डिनपर के लिए रवाना हो गए।
बल्केश्वर गौशाला में चल रहे श्रीकृष्ण लीला शताब्दी समारोह में कृष्ण रुक्मणि विवाह लीला का मंचन करते कलाकार
शिशुपाल निश्चित तिथि पर बारात लेकर कुण्डिनपुर जा पहुंचा। वहीं दूसरी ओर रुक्मिणी सज-धजकर गिरिजा देवी के मंदिर की ओर चल पड़ी। पूजन करने के बाद रुक्मिणी जब मंदिर से बाहर निकल कर अपने रथ पर बैठना ही चाहती थी कि श्रीकृष्ण ने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे खींचकर अपने रथ पर बैठा लिया। तीव्र गति से द्वारका की ओर चल पड़े।
शिशुपाल ने श्रीकृष्ण का पीछा किया। बलराम और यदुवंशियों ने शिशुपाल को रोक लिया। भयंकर युद्ध में बलराम और यदुवंशियों ने शिशुपाल की सेना को नष्ट कर दिया। फलतः शिशुपाल निराश होकर कुण्डिनपुर से चले गए।
रुक्मी ने श्रीकृष्ण का पीछा किया। रुक्मी और श्रीकृष्ण का घनघोर युद्ध हुआ। श्रीकृष्ण ने उसे युद्ध में हराकर अपने रथ से बांध दिया, किंतु बलराम ने उसे छुड़ा लिया। रुक्मी अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार पुनः लौटकर कुण्डिनपुर नहीं गया। वह एक नया नगर बसाकर वहीं रहने लगा। कहते हैं, रुक्मी के वंशज आज भी उस नगर में रहते हैं।
भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी को द्वारका ले जाकर उनके साथ विधिवत विवाह किया। श्री कृष्ण की वरयात्रा लीला स्थल पर ही निकाली गई। इस अवसर पर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल, विजय रोहतगी, अशोक गोयल, संजय गर्ग, बीजी अग्रवाल, मनीष शर्मा, शेखर गोयल, विनीत सिंघल, केसी अग्रवाल, कैलाश खन्ना, संजय चेली, मनीष बंसल, गिर्राज बंसल, बृजेश अग्रवाल, केके अग्रवाल, विष्णु अग्रवाल, मनीष बंसल, मीडिया प्रभारी तनु गुप्ता, डीके चौधरी आदि उपस्थित रहे।
हवन के साथ होगा लीला का समापन
अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने बताया कि 11 दिन के लीला मंचन आयोजन को मंगलवार सुबह 9 बजे हवन के साथ विराम दिया जाएगा।