: ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों ने गणतंत्र दिवस पर बिखेरे देशभक्ति के रंग
Sat, Jan 27, 2024
आगरा। शाहगंज-भेगीपुरा स्थित आध्यान्त फाउंडेशन ऑफ ऑटिज्म में गणतंत्र दिवस उत्साह व उमंग के साथ मनाया गया। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों ने देशभक्ति गीतों पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर सभी दर्शकों को आश्चर्य चकित कर दिया।
हर तरफ देशभक्ति के रंग बिखरे थे। श्रीराम की भक्ति के रंग भी नजर आए कार्यक्रम में। देशभक्ति के गीतों संग राम आएंगे… जैसे गीतों पर भी फाउंडेशन के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि फिरोजाबाद होम्योपैथी गवरमेंट हॉस्पीटल के डॉ. सतीश शुक्ला, शहगंज थानाध्यक्ष आलोक सिंह व फाउंडेशन की निदेशक डॉ. रेनू तिवारी, नीरज तिवारी ने सम्मलित रूप से झंडारोहण किया। सभी अतिथियों का स्वागत तिरंगा रंग का पटका पहनाकर किया गया। संचालन संजय दुबे, धीरज बाथम ने किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से पंकज तिवारी, प्रमोद वर्मा, हेमन्त वर्मा, सतेन्द्र तिवारी, रचना जिन्दल, ममता अग्रवाल आदि उपस्थित थीं।
: हम विवेकानंद हैं जो धर्म के ध्वज गाड़ देते, हम ही अंग्रेजों के सीने बोस बनकर फाड़ देते…
Tue, Jan 23, 2024
अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में किया गया नेताजी सुभाष चंद्र बोस को याद
श्री चित्रगुप्त परिषद् युवा शाखा ने किया पराक्रम दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन
आगरा। भारत की स्वतंत्रता के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की की जयंती “पराक्रम दिवस” और अयोध्या धाम में श्रीराम लला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर श्री चित्रगुप्त परिषद आगरा, युवा शाखा द्वार अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल में आयोजित कवि सम्मेलन का आरंभ मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर और नेताजी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। पदम गौतम ने मां विमल पद्मासने हमें ज्ञान की गंगा देदो… सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।
कार्यक्रम संयोजक मोहित सक्सेना ने अतिथियों का स्वागत किया। इसके बाद देशभर से आये कवियों ने वीर रस और भक्ति रस से ओतप्रोत काव्य रस धारा प्रस्तुत की। एक ओर वीर रस से पगी कविताओं में नेताजी, स्वामी विवेकानंद जी के प्रति शब्दांजलि थी तो दूसरी ओर अयोध्या धाम में पधारे राम लला की भक्ति की उमंग की झलक थी।
फरीदाबाद से आए हास्य कवि विनोद पाल ने भक्ति रस पर आधारित कविता वो जो कल तक कहते थे कि हम देखते हैँ कैसे बनेगा धाम, वो भी कल मुझे कहते मिले जय श्री राम, जय श्री राम… का पाठ जब किया तो समूचा परिसर ही श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा।
नेताओं पर व्यंग्य करते हुए टूंडला से आए कवि लटूरी लट्ठ ने आज जब मैं किसी को नेता कहता हूं, मांस की ये जीभ मेरी कट फट जाती है… रचना प्रस्तुत की तो सभागार की भरपूर तालियां बटोर लीं।
कवि सम्मेलन का माहौल फिर बदला जब आगरा की कांची सिंघल ने रामा रामा सिया पुकारे राम पुकारे सीता को, जंगल जंगल ढूंढ रहे हैं रामचंद्र मनमीता को… पंक्तियों का पाठ किया और सीता विछोह की विरह वेदना से श्रोता भाव विभोर हो उठे।
कार्यक्रम संयोजक मोहित सक्सेना ने वीर से पगी पंक्तियां हम विवेकानंद हैं जो धर्म के ध्वज गाड़ देते, हम ही अंग्रेजों के सीने बोस बनकर फाड़ देते… का पाठ किया।
अरमानों के फूल खिलाया करता है, वो ख़््वाबों में आया-जाया करता है… श्रंगार रस की इन पंक्तियों का पाठ भरत दीप माथुर ने किया। झांसी से पधारे पंकज अभिराज ने लक्ष्य तक ले जाएगी तुमको ये ठोकर देखना, गिर गये तो क्या, खड़े तुम फिर से होकर देखना… पंक्तियों से युवाओं में उत्साह का संचार किया। जिसने फूलों की सेज छोड़, भारत माता की आह सुनी, हम वीर सुभाष की जय बोलें, जिसने कांटों की राह चुनी… वीरता की ये पंक्तियां धौलपुर के पदम गौतम ने पढ़कर वंदे मातरम की गूंज करवा दी।
इसी क्रम में डॉ पीएन अस्थाना, भरत दीप माथुर, पंकज अधिराज, विनोद पाल, राकेश निर्मल आदि ने काव्य रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम का संचालन लटूरी लट्ठ ने किया। अध्यक्ष सुभाष सक्सेना, महासचिव अम्बेश श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष सुशील श्रीवास्तव, समीर सक्सेना, प्रेमचंद अस्थाना, सोनिका सक्सेना, अभिनव कुलश्रेष्ठ, प्रशांत सक्सेना, संजीव सक्सेना, विशाल, आरती सक्सेना, नितिन जौहरी, सुधीर कुलश्रेष्ठ, सुभाष सारस्वत, उमाशंकर शर्मा, उमाशंकर मिश्र, संजय शर्मा, विशाल रायजादा, मीनू आनंद, राकेश शर्मा, आशुतोष, निधि, शुभि पालीवाल, अभिषेक, प्रवेश आदि उपस्थित रहे।
भारत के युवाओं के लिए नेता जी हैं प्रेरणा स्त्रोत
कार्यकम संयोजक मोहित सक्सेना ने बताया कि अद्भुत नेतृत्वशक्ति से नेताजी ने “आजाद हिंद फौज” की स्थापना कर भारत के स्वतंत्रता संघर्ष को दिशा दी थी। उनके जीवन का एक मात्र लक्ष्य भारत की स्वतंत्रता था, जिसके लिए उन्होंने अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। नेताजी का जीवन, उनका देश के प्रति प्रेम और शौर्य देश के प्रत्येक युवा के लिए प्रेरणा स्त्रोत रहेगा। युवा को यही संदेश देने हेतु कवि सम्मेलन से पूर्व फतेहाबाद रोड स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की प्रतिमा पर श्री चित्रगुप्त परिषद के पदाधिकारियों ने माल्यार्पण करके उनकी जयंती मनाई व उनके आदर्शाे पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर सुभाष सक्सेना, अम्बेश श्रीवास्तव, सुशील श्रीवास्तव, नीलेन्द्र श्रीवास्तव, विशाल सक्सेना, मोहित सक्सेना, अरविन्द कुमार सक्सेना, रवि श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहेा।
: एक समाज का नहीं समस्त भारत का बेटा था वीर हेमू कालानी: मेयर
Sat, Jan 20, 2024
पूज्य सिंधी महापंचायत ने शहीद हेमू कालानी के 81वें बलिदान दिवस पर शाहगंज स्थित सोमनाथ धाम पर किया संगोष्ठी का आयोजन!
आगरा। 19 वर्ष की अल्पायु में देश पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले हेमू कालानी किसी एक समाज के नहीं बल्कि समस्त भारतवर्ष के बेटे थे। आज हमारा यह फर्ज बनता है कि हम आने वाली पीढ़ी को ऐसे महापुरुषों और शहीदों के बारे में बताएं। उन्हें बताएं कि किस तरह से देश की आजादी के लिए भारत के सपूतों ने अपने प्राणों की बलि दे दी, लेकिन ब्रिटिश सरकार के सामने झुके नहीं। हेमू कालानी के 81वें बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्य अतिथि मेयर हेमलता दिवाकर ने अपना वक्तव्य रखते हुए भविष्य की पीढ़ी को संस्कारवान बनाने को कहा।
शाहगंज स्थित सोमनाथ धाम पर आज पूज्य सिंधी महापंचायत द्वारा शहीद हेमू कालानी के 81वें बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। शहीद कैप्टन शुभम गुप्ता के पिता बसंत गुप्ता ने अभिभावकों को अपने बच्चों को सेना में भेजने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि मुझे गर्व है अपने बेटे पर, जिसके नाम से आज मुझे जाना जा रहा है। वक्ताओं ने हेमू कालानी के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया कि 19 वर्ष की आयु में हेमू कालानी को फांसी दे दी गई। हिन्दस्तान की आजादी में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। गोष्ठी का शुभारम्भ सोमनाथ धाम के मठाधीष डा० योगी शंकरनाथ जी ने हेमू कालानी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से गौरव राजावत, रामचंद छावड़िया, श्याम भोजवानी, मोहनलाल वोधवानी, पार्षद राधारानी, रवि दिवाकर, पूजा वाल्मीकि मौजूद थे। संचालन महापंचायत के महामंत्री हेमन्त भोजवानी ने किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से लालचंद मोटवानी, घनश्याम ख्यानी, संगठन मंत्री जयप्रकाश धर्मानी, भोजराज लालवानी, सुनील करमचंदानी, भारत वाधवानी, हरीश टहलयानी, विजय भाटिया, संजय नोतनानी, आनंद नोतनानी, दिनेश नोतनानी नानकचंद जगवानी, जयप्रकाश रामानी, राम बाबानी, घनश्याम टिलवानी, धनश्याम हेमलानी, अनूप भोजवानी, नरेश लखवानी, प्रदीप वनबारी, लक्ष्मण भावनानी, टीकम लालवानी, अशोक सोनी जितेन्द्र धनजानी, अंजू शर्मा, महक, मान्या आदि उपस्थित थीं।