: लॉयंस क्लब आफ विशाल का 21वां आई कैंप संपन्न, मोतियाबिंद के हुए 100 सफल आपरेशन
Thu, Mar 14, 2024
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ असीम अग्रवाल का लॉयंस क्लब आफ आगरा विशाल ने किया सम्मान
800 से अधिक मरीजों का किया निशुल्क इलाज, इस वर्ष रखा 125 से अधिक आपरेशन का लक्ष्य
डॉ असीम अग्रवाल बोले, 20 से 30 वर्ष की आयु में भी हो रही मोतियाबिंद की परेशानी
आगरा। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में लगातार मिसाल कायम करते जा रहे लॉयन्स क्लब आफ आगरा विशाल ने 21 वें निःशुल्क नेत्र रोग चिकित्सा शिविर का समापन किया। पूरे वर्ष के इस शिविर का लाभ 800 से अधिक मरीजों को मिला और मोतियाबिंद के 100 सफल आपरेशन किये गए।
गुरुवार को गांधी नगर स्थित उदपि रेस्टोरेंट में लॉयंस क्लब आफ आगरा विशाल ने नेत्र रोग चिकित्सा शिविर का समापन समारोह आयोजित किया। दीप प्रज्जवलन एवं गणेश वंदना के साथ समारोह आरंभ हुआ। पूरे वर्ष के शिविर में अतुलनीय सहयोग के लिए डॉ असीम अग्रवाल का सम्मान किया गया।
अध्यक्ष रविंद्र अग्रवाल ने बताया कि क्लब द्वारा गरीबों और असहायों को निःशुल्क चिकित्सकीय सेवाएं मुहैया कराई जाती हैं। इसी क्रम में पूरे वर्ष क्लब के संपर्क में आने वाले जरूरतमंद नेत्र रोगियों का निःशुल्क इलाज डॉ असीम अग्रवाल द्वारा किया जाता है। वर्ष 2023− 24 में 800 से अधिक मरीजों को डॉ असीम अग्रवाल के पास भेजा गया था जिनमें से 100 मरीजों के मोतियाबिंद के सफल आपरेशन हुए।
सचिव एवं शिविर संयोजक राकेश अग्रवाल ने कहा कि शिविर हर वर्ष अधिक संख्या में मरीजों को लाभ दे रहा है। वर्ष 2024−25 के लिए 125 से अधिक मोतियाबिंद के आपरेशन करवाने का लक्ष्य रखा गया है। वरिष्ठ सदस्य अजय बंसल ने कहा कि वर्ष 2024−25 का सेवा प्रकल्प भी आरंभ हो चुका है। प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक संख्या में मरीजों तक चिकित्सकीय सेवाएं पहुंच सकें।
क्लब के अध्यक्ष रविंद्र अग्रवाल, सचिव राकेश अग्रवाल, अजय बंसल, सुनील अग्रवाल, चंदर माहेश्वरी द्वारा डॉ असीम अग्रवाल को स्मृति चिन्ह एवं उपहार देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर प्रमोद अग्रवाल, शिवकुमार अग्रवाल, विष्णु गोयल, कांता माहेश्वरी, अंजू अग्रवाल, सुशील कपूर आदि उपस्थित रहे।
भ्रम में न रहें, 20-30 वर्ष की आयु में भी हो रहा मोतियाबिंदः डॉ असीम अग्रवाल
सम्मान समारोह में डॉ असीम अग्रवाल ने बताया कि मोतियाबिंद की परेशानी को कुछ समय पहले तक बुजुर्गावस्था की परेशानी माना जाता था। किंतु अब उम्र के मानक बदल चुके हैं। वर्तमान में मोतियाबिंद की परेशानी 20 से 30 वर्ष तक की आयु में भी शिकार बना रही है। उन्होंने इसके पीछे बड़ा कारण डायबिटीज के साथ ही खराब दिनचर्या, कम्प्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल का अत्याधिक प्रयोग, प्रकृति से दूरी, प्रदूषण और तनाव बताया। उन्होंने ये भी बताया कि मोतियाबिंद के आपरेशन के बाद आवश्यक नहीं है कि चश्मा हट ही जाएगा। बहुत बार मोतियाबिंद के आपरेशन के बाद भी आंखों की रोशनी पूरी तरह से नहीं लौटती। आपरेशन के बाद चश्मा अवश्य ही लगाना चाहिए। वहीं कई बार कमजोर पर्दे और नसों के कारण रोशनी पूरी नहीं आती। इसलिए समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेते रहना चाहिए।
: श्रीचित्रगुप्त परिषद एवं महिला शाखा ने नारी सम्मान संग मनाया होली मिलन समारोह
Sun, Mar 10, 2024
अपने-अपने क्षेत्र में मिसाल कायम करने वालीं चार महिलाओं को प्रदान किया गया नारी शक्ति सम्मान
अबीर-गुलाल लगाकर महिलाओं ने दी एक दूसरे को रंगोत्सव की शुभकामनाएं, महकी ठंडाई की महक भी
आगरा। नारी ममता की मूरत है तो रणचंडी की भाषा है, भारत की हर नारी, भारत माता की परिभाषा है… कवि मोहित सक्सेना की इन पंक्तियों के साथ श्रीचित्रगुप्त परिषद एवं महिला शाखा ने आयोजित किया महिला दिवस एवं “होली के रंग आपके संग” होली मिलन समारोह।
रविवार को संजय प्लेस स्थित अवध बैंकट हॉल में आयोजित होली मिलन समारोह का आरंभ श्री गणेश एवं श्री चित्रगुप्त वंदना के साथ हुआ। सर्वप्रथम महिला दिवस की सभी सदस्याओं ने एक दूसरे को शुभकामनाएं दीं। महिला शाखा अध्यक्ष सोनिका सक्सेना ने स्वागत करते हुए कहा कि नारी का हर रूप उसे स्वयं में शक्तिस्वरूपा बनाता है। सशक्तिकरण की बात तभी सार्थक हो सकती है जब महिलाएं एक दूसरे को भी सशक्त बनाने में आगे आएं। समाज में अपने कार्य और सेवाभाव से विशिष्ट पहचान बनाने वालीं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं आइएमए की सांस्कृतिक सचिव डॉ कविता भटनागर, डा. अनुपमा श्रीवास्तव असिस्टेंट प्रोफेसर एसएन मेडिकल कॉलेज, श्रीचित्रगुप्त परिषद महिला शाखा की पूर्व अध्यक्ष सोमलता सक्सेना और बैंकर प्रीति रायजादा को नारी शक्ति से सम्मानित किया गया।
महिला दिवस पर गंभीर चिंतन के बाद छिड़ी होली की तरंग की फुहार। सचिव रुचिता भटनागर के निर्देशन में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों सभी को मंत्रमुग्ध किया। होली पर प्रेम सौहृार्द का संदेश देते हुए कवि मोहित सक्सेना ने रंगों की उमंग से सराबोर काव्य पाठ किया। संचालन नीरज स्वरूप ने किया।
इस अवसर पर श्रीचित्रगुप्त परिषद के अध्यक्ष डॉ सुभाष सक्सेना, महासचिव डॉ अम्बेश श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष सुशील श्रीवास्वत, महिला शाखा उपाध्यक्ष प्रतिभा स्वरूप, सह सचिव शिखा श्रीवास्तव, सचिव रुचिता भटनागर, मोहित सक्सेना (युवा अध्यक्ष), प्रशांत सक्सेना (युवा उपाध्यक्ष), अभिनव कुलश्रेष्ठ (युवा उपाध्यक्ष), विशाल सक्सेना (युवा सचिव), आरपी सक्सेना, नितिन जौहरी, संजीव सक्सेना, नीरज स्वरूप, समीर सक्सेना, विशाल रायजादा, सुभाष सक्सेना, सुशील सक्सेना, डॉ.रमेश श्रीवास्तव, सलोनी जौहरी, कृष्णा माथुर, रीना सक्सेना, रंजना सक्सेना, मधुबाला, नीलिमा, निधि सक्सेना आदि उपस्थित रहीं।
: एक जियाला हुआ था बृज में, नाम गोकुला वीर था…
Mon, Feb 26, 2024
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औरंगजेव ने जंजीरों से बंधवाकर कटवाएं थे अंग, हर अंग के कटने पर खून की फुहारें निकलने से पड़ा था फुहारा नाम
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वीर सपूत गोकुला जाट पर लिखे गीत का हुआ विमोचन, कर्मवीर चाहर निभाएंगे गोकुला जाट का किरदार, भारत माता व गोकुला जाट के जयकारों से गूंजा कार्यक्रम स्थल
आगरा। कोतवाली के पास स्थित फुहारा जगह बृज के वीर सपूत गोकुला जाट की वीरता और मुगलों के अत्याचार की गवाह है। मुगलों से जुड्ड लेने वाले साहसी गोकुला जाट को श्रद्धाजलि स्वरूप आरए मूवीज के वैनर तले गोकुला जाट पर फिल्म का निर्माण किया जा रहा है, जिसके गीत जेठमासी सूर्य जैसा दहकता अंगार था, बाजुओं में गज जैसा बल का अम्बार था, दीवाना था आजादी का मौत का वो शमशीर थे, एक जिलाया हुआ था बृज में नाम गोकुला वीर था… व फिल्म के पोस्टर का आज सेल्फी रेस्टरां में आयोजित कार्यक्रम में विमोचन मुख्य अतिथि मेयर हेमलता दिवाकर ने किया गया। फिल्म के एसोसिएट प्रोड्यूसर राजकुमार चाहर व आरए मूवीज के रंजीत सामा ने बताया कि जल्दी फिल्म की शूटिंग शुरु की जाएगी, जिसमें गोकुला जाट की भूमिका सांसद राजकुमार चाहर के बेटे कर्मवीर चाहर निभाएंगे।
कार्यक्रम में मौजूद एसोसिएट प्रोड्यूसर राजकुमार चाहर ने बताया कि गोकुला जाट वो वीर था जिसने औरंगजेब जैसे क्रूर शासक के सामने झुकने के बजाय अपने प्राण देना ज्यादा उचित समझा। ऐसे वीर जवानों की वारगाथा देश के युवा पीढ़ी तक पहुंचनी चाहिए। फिल्म के निर्माता रंजीत सामा व विजय सामा है। हेमन्त वर्मा के निर्देशन में गीत को फिल्माया जाएगा। संगीत पं. दलीप ताहिर व गीत को शब्दों में संजय दुबे ने संजोया है। मौहम्मद सलामत ने गीत को अपनी आवाज दी है। गीत की शूटिंग बृज क्षेत्र में की जाएगी, जिसमें गोकुला जाट के मुगलों के अत्याचार के खिलाफ साहस, पराक्रम और शौर्य को समाहित लोगों तक पहुंचाने का प्रयास होगा। संचालन संजय दुबे ने किया।
इनकी रही विशेष उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष गिर्राज कुशवाह, डॉ. गौरीशंकर, उत्तम सिंह काका, उमर शैल राज सिंह, कप्तान सिंह चाहर, गोपीचंद, सोनू दिवाकर, गुड्डू चाहर, अशोक चैबे, चैधरी भूरी सिंह, डॉ. दीपक सिंह, बहुरन सिंह, भीमसेन, मानसिंह, लोकेन्द्र सिंह, प्रमोद वर्मा, मनीष शर्मा, नीरज तिवारी, प्रदीप सरीन, राहुल आर्य, विजय सहगल, यश गांधी, विनोद शीतलानी, सतेन्द्र तिवारी, नारायण दास आदि उपस्थित थे।
ये है गोकुला जाट का इतिहास
गोकुला जाट के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि गोकुल सिंह तिलपत गांव का सरदार थे। 10 मई 1666 को जाटों व औरंगजेब की सेना में तिलपट में युद्ध छिड़ गया। युद्ध में जाटों की विजय हुई। मुगल शासन स्लाम धर्म को बढ़ावा दिया और किसानों पर कर बढ़ा रहा था। वीर गोकुला जाट ने किसानों को संगठित किया और कर जमा करने से मना कर दिया। और औरंगजेब के खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया। औरंगजेब ने धोखे से गोकुला जाट को आगरा किले में बंदी बना लिया और इस्लाम स्वीकार करने पर जान बख्शने की शर्त रखी। गोकुला जाट ने शर्त को स्वीकार नहीं किया तो उन्हें जंजीरों से कोतवाली के पास बंधवा दिया गया। भरी जनता के सामने उनके शरीर का एक-एक अंग काटा गया। हर अंग कटने पर खून की फुहारे निकलती थी। इसी कारण कोतवाली के पास उस जगह का नाम फुहारा पड़ गया।
डॉ. भानू प्रताप को किया सम्मानित
वरिष्ठ पत्रकार डॉ भानु प्रताप सिंह ने हिंदू धर्म रक्षक वीर गोकुला जाट पुस्तक लिखी है। इसके लिए उन्होंने 1 वर्ष तक शोध किया और 32 पुस्तकों का अध्ययन किया। गोकुल जाट के गांव तिलपत तक दौरा किया। पुस्तक में हिंदू वीरांगनाओं के चतुर्थ जौहर और गोकुला जाट की बहन भंवरी कौर के बलिदान को भी उकेरा गया है। गोकुल जाट के चाचा उदय सिंह का बलिदान भी साथ में हुआ था। पांच 5000 किसानों को भी बंदी बनाकर लाया गया था। जीवित रहने की शर्त पर उन किसानों ने मुगलों का मैला उठाना मंजूर किया लेकिन मुस्लिम धर्म स्वीकार नहीं किया। गोकुला जाट शोध कर लिखी गी पुस्तक के लिए डॉ. भानू प्रताप को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।