: नारी मन की अभिव्यक्ति को मिला मंच, शब्दों संग थिरके कदम
Tue, Mar 5, 2024
विद्या स्वरूप फाउंडेशन ने महिला दिवस पर आयोजित की द्वितीय काव्य एवं नृत्य प्रतियोगिता
महिला लेखिका निधि सहगल की पुस्तक तुम से तुम तक सोलह खत अनवरत का हुआ विमोचन
तीन महिला उद्यमी सम्मानित, मयूरी चालक सावित्री देवी को भी प्रदान किया गया सम्मान
आगरा। यूं तो मन में विचार कई होते हैं लेकिन उन्हें शब्दों की माला में पिरोकर कविता का रूप दे पाना आसान नहीं होता। नारी मन की अभिव्यक्ति को मंच प्रदान करते हुए विद्या स्वरूप फाउंडेशन ने महिला दिवस के अवसर पर द्वितीय काव्य एवं नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की।
मंगलवार को कमला नगर स्थित विद्या स्वरूप फाउंडेशन के कार्यालय पर आयोजित प्रतियोगिता का आरंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ। संस्थापक मोनिका अग्रवाल ने बताया कि महिला दिवस समारोह तभी सार्थक है जब हर महिला की प्रतिभा को उचित सम्मान मिल सके। फिर चाहे उसकी उम्र कोई भी हो। उन्होंने बताया कि कविता और नृत्य प्रतियोगिता बालिका और महिला वर्ग में आयोजित की गई।
काव्य पाठ प्रतियोगिता का आरंभ पूनम लाहौटी ने शीर्षक सिंपल वाला लव के अंतर्गत मेरी गलतियों को तुम, तुम्हारी गलतियों को मैं नजर अंदाज कर सकूं से की। बाल कवियत्री संसिधि ने सुनो द्रोपदी शस्त्र उठा लो … पंक्तियों से सभी को भाव विभोर कर दिया। वहीं अन्य बाल कवियत्री दर्पण भदौरिया ने मैं लड़की हूं कमजोर नहीं … पंक्तियों से तालियां बटोरी।
शशि गोयल ने एक अनजान रिश्ता मजबूत हो गया … से दाम्पत्य जीवन के महत्व को शब्दों से सजाया।
निधि सहगल की पुस्तक तुम से तुम तक सोलह खत अनवरत कहानी पुस्तक का विमोचन भी किया गया। लेखिका ने बताया कि खत लेखन की विलुप्त कला को पुनः जीवित करने का प्रयास पुस्तक में किया गया है।
नृत्य प्रतियोगिता में होली के रंगों की उमंग भी घुली दिखी। कविता प्रतियोगिता में प्रथम कियारा अग्रवाल (बालिका) और छवि सिंघल (महिला) रहीं। नृत्य प्रतियोगिता में सांवी गोयल (बालिका) शगुन (महिला) प्रथम रहीं।
आयोजन में महिला उद्यमी अवॉर्ड नारी सशक्तिकरण को समर्पित थे। शशि गुप्ता द्वारा सारिका गुप्ता, प्रतक्ष्या मालू, पूनम जैन को प्रदान किया गया। विशेष पुरस्कार मयूरी चालक सावित्री को दिया गया।
प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका अलका अग्रवाल, नेहा अग्रवाल, रोशनी गिडवानी और मीनू बंसल ने निभाई। अध्यक्ष सीमा अग्रवाल, क्षेत्र प्रभारी शशि गोयल, नीलम अग्रवाल, अंशु अग्रवाल, स्नेहा गर्ग आदि उपस्थित रहीं।
: फ्लैग आफ के साथ हुआ द आगरा ताज कार रैली का आगाज, फतेहाबाद क्षेत्र में सरपाटी दौड़ी रफ्तार
Sat, Feb 24, 2024
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9 वीं आगरा ताज कार रैली शुरु, दो दिन तक आगरा मंडल में दिखेगा रफ्तार का रोमांच
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ताज महोत्सव के अन्तर्गत मोटर्स स्पोर्टस क्लब कर रहा है द आगरा ताज कार रैली का आयोजन
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32 प्रतिभागियों में 5 कारों की चालक महिलाएं भी, उत्तराखंड के दिव्यांग दिग्विजय ने भी लिया भाग
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रैली में आगरा की साहित्यकार, शिक्षाविद सहित 68 और 72 वर्षीय बुजुर्ग महिलाओं ने भी लिया भाग
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बाह, जरार, बटेश्वर क्षेत्र की प्राचीन हवेलियों को पर्यटकों के समक्ष लाना ध्येय, चंबल सफारी में दौड़ीं कार
आगरा। जब बात कुछ कर गुजरने की हो तो उम्र या शरीर की सीमाएं मायने नहीं रखतीं। हौसले का यही जज्बा देखने को मिल रहा है ताज महोत्सव के अन्तर्गत हो रही द आगरा ताज कार रैली में। शनिवार को दो दिवसीय रैली के पहले दौर का आरंभ फ्लैग आफ के साथ किया गया। फतेहाबाद रोड स्थित सेल्फी पॉइंट पर जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी, ज्वाइंट डायरेक्टर टूरिज्म अविनाश चंद्र मिश्रा, अशोक ग्रुप की चेयरमैन डॉ रंजना बंसल, मोटर्स स्पोर्टस क्लब के चेयरमैन राम मोहन कपूर, तरुन रावत, प्रो बाइकिंग क्लब के प्रवीन सिकरवार ने फ्लैग आफ कर रैली में शामिल 32 कारों को रवाना किया।
रैली संयोजक सुदेव बरार ने बताया कि आयोजन के पहले दिन रैली फतेहाबाद, बाह, पिनाहट होते हुए जरार पहुंची। जरार स्थित विभिन्न हवेलियों को पर्यटन की दृष्टि से सामने लाना रैली का ध्येय था, जिसकी प्रशंसा सभी प्रतिभागियों ने की। इसके बाद सभी प्रतिभागियों ने चंबल सफारी में विश्राम किया और बटेश्वर, होली पुरा आदि होते हुए वापस स्टार्टिंग पाइंट पर सभी प्रतिभागी पहुंचे। इस मध्य में पिनाहट क्षेत्र में नदी पर बने पैंटून पुल को पार करना, चंबल के उबड़ खाबड़ रास्ते, अंडर पास, संकरी गलियों की बाधा को पीछे छोड़ते हुए सभी प्रतियोगी आगे आने की दौड़ के लिए उत्साहित दिखे। फेडरेशन आफ मोटर स्पोर्ट क्लब आफ इंडिया के नियमों के अनुसार हो रही रैली टीएसडी थीम यानी टाइम, स्पीड और डिस्टेंस पर आधारित है।
रैली में देश के विभिन्न राज्यों से प्रतिभागियों ने भाग लिया है, जिसमें तमिलनाडु, उत्तराखंड, हरियाणा, उप्र, मध्य प्रदेश, कोलकाता, जमशेदपुर आदि राज्यों से 32 प्रतिभागियों ने भाग लिया है, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी के साथ एक-एक नेविगेटर भी है। प्रतिभागियों में उत्तराखंड के हरिद्वार से आए दिव्यांग दिग्विजय भी शामिल हैं।
रविवार को पूरी होगी 400 किमी कार रैली
द आगरा ताज कार रैली रविवार को सुबह 8 बजे फतेहाबाद रोड स्थित सेल्फी पॉइंट से मथुरा की ओर रवाना होगी। मथुरा, वृंदावन, बरसाना होते हुए रैली वापस आगरा पहुंचेगी। दो दिन में प्रतिभागी 400 किमी की दूरी तय समय में पूरी करेंगे। जिसके आधार पर विजेता को 75 हजार रुपये की धनराशि एवं ट्राफी प्रदान की जाएगी। सायं 5 बजे सेल्फी पॉइइंट पर पुरस्कार वितरण समारोह होगा। रैली चार श्रेणियों विशेषज्ञ, अनुभवी, बिगनर्स एवं महिला वर्ग में हो रही है। सभी वर्गों के विजेताओं और महिला प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार के साथ कुल डेढ़ लाख की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
देवरानी-जेठानी की जोड़ी ने दिखाया कमाल
शहर के साहित्य जगत का सुप्रसिद्ध नाम श्रुति सिन्हा ने अपनी जेठानी पूनम सिन्हा, जोकि दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में शिक्षक हैं, के साथ रैली में पहली बार प्रतिभाग किया है। श्रुति सिन्हा ने कहा कि चंबल की पथरीली सड़क और उंची नीची सड़क पर कार दौड़ाने का रोमांच जीवन भर याद रहेगा।
65-70 पार लेकिन उत्साह बेशुमार
द आगरा ताज कार रैली में उम्र की बाधाएं तोड़ने का गजब उत्साह भी देखने को मिल रहा है। 68 वर्षीय गीता चैहान ने ड्राइविंग सीट को किसी युवा की तरह संभाला। उनके साथ 78 वर्षीय नेवीगेटर उर्वशी आर्या भी पूरे जोश में उनका साथ दे रही थीं। गीता और उर्वशी ने बताया कि 15 वर्षों से कार ड्राइव कर रही हैं लेकिन कार रैली में प्रतिभाग पहली बार ही किया है। जीवन संध्या में मिला नया अनुभव सदैव स्मृति पटल पर रहेगा और महिलाओं को सशक्तिकरण की प्रेरणा भी देगा।
: आदिवासियों पर बनी डाक्यूमेंट्री फिल्म में निर्देशन का हुनर दिखा रहे हैं अविनाश
Wed, Feb 7, 2024
आगरा में जन्मे अविनाश वर्मा ने मलेशियाई फिल्म से की थी शुरुआत
एक म्यूजिक वीडियो के साथ तीन अन्य प्रोजेट्स पर अविनाश कर रहे हैं काम
आगरा। उभरते युवा फिल्म निर्देशक अविनाश वर्मा ने कृषि विकास शिल्प केंद्र के साथ मिलकर फिल्म "Roots Resurge: Nurturing Hope in Rural India" निर्माण कर रहे हैं। इस अद्भुत चलचित्र ने आदिवासी समाज के मुद्दों और उनके सांस्कृतिक विविधता को साझा करने का प्रयास किया है।
फिल्म मुख्यतः भारत ग्राम विकास की ओर रुख करती है। निर्देशक अविनाश वर्मा ने बताया, "यह एक अद्वितीय चलचित्र है जो आदिवासी समाज की जीवनशैली, संघर्ष और समृद्धि को दर्शाती है। हमने इस फिल्म के माध्यम से बंगाल के गाँव समर्थन और समर्पण के साथ प्रस्तुत किया है।"
फिल्म के बंगाल में हुए प्रमोशन के दौरान अविनाश वर्मा को कई जगह सम्मान किया और उन्होंने साकारात्मक संवादों में भाग लिया। उन्होंने बताया कि फिल्म का मकसद आदिवासी समाज को समर्थन और सम्मान प्रदान करना है और भारत देश के अनछुए गाँव आत्मा को उजागर करना है।
अविनाश वर्मा ने बताया फिल्म "Roots Resurge: Nurturing Hope in Rural India" समाप्त होने के बाद कृषि विकास शिल्प केंद्र की संस्था द्वारा वो ओर भी कई फिल्मों का निर्माण करेंगे।