: मरते नहीं वो वीर सिपाही, सदा अमर हो जाते हैं…लहू से अपने आसमान पर जय हिन्द लिख जाते हैं…
Fri, Jan 12, 2024
28 जनवरी को सूरसदन प्रेक्षागृह में होगा, कैप्टन शुभम गुप्ता पर बनी फिल्म ‘‘अभी मैं जिन्दा हूँ माँ’’ फिल्म का प्रीमियर शो
फिल्म का गीत सुन लोगों की आंखें हुई नम, देश पर बलिदान होने वाले वीर की फिल्म देखने के लिए हर कोई उत्साहित
आगरा। आंखों में नमी और दिलो में जोश भरा था। देश पर मर मिटने वाला वीर जवान कैप्टन शुभम जो याद आया था। कैप्टन शुभम गुप्ता के जीवन पर आधारित फिल्म के गीत, ‘किस्मत वाले होते हैं जो सरहद पर मिट जाते हैं, मरते नहीं वो वीर सिपाही सदा अमर हो जाते हैं। शान तिरंगे की रखने को मौत से वो लड़ जाते हैं। लहू से अपने आसमान पर जय हिन्द लिख जाते हैं…’ ने मानों एक बार फिर देश के लाल को आंखों के सामने लाकर खड़ा कर दिया। कुछ ऐसा ही नजारा था कैप्टन शुभम गुप्ता स्मृति संस्थान द्वारा सेल्फी रेस्टरां में आयोजित फिल्म के पोस्टर विमोचन कार्यक्रम का।
कार्यक्रम एवं गाने की रिलीजिंग में मौजूद फिल्म निर्माता रंजीत सामा व विजय सामा ने जानकारी देते हुए बताया कि आरए मूवीज के बैनर तले बनी फिल्म की अवधि 40 मिनट है। कार्यक्रम में मौजूद अभी मैं जिन्दा हूं मां (कैप्टन शुभम गुप्ता के जीवन पर आधारित बायोग्राफी) इस बायोग्राफी फिल्म के माध्यम से मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्य को निभाते हुए, देश की माटी के लिए मर मिटने वाले आगरा के बेटे कैप्टन शुभम गुप्ता की यादों को जीवन्त करने का प्रयास किया गया है। इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म में कैप्टन शुभम के परिजनों के साथ-साथ उनके आस-पड़ौस के लोगों तथा आगरा के गणमान्य-जनों के मन में उमड़ रही उनके जीवन एवं व्यक्तित्व की स्मृतियों को भी साझा किया गया है।
गीतकार संजय दुबे द्वारा लिखित इस फिल्म के गीत को अपनी सुरमयी आवाज से मौ. सलामत व सुरैया ने सजाया है। फिल्म के निर्देशक हेमन्त वर्मा व संगीत निर्देशक दिलीप ताहिर हैं।
फिल्म का प्रीमियर शो 28 जनवरी को सूरसदन प्रेक्षागृह में होगा। इस कार्यक्रम की रूपरेखा की जानकारी साझा करते हुए डॉ तरुण शर्मा, केशव दत्त गुप्ता एवं संयोजक प्रमोद सिंघल ने बताया कि कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व थलसेना अध्यक्ष एवं भारत सरकार के राज्यमंत्री जनरल वी के सिंह जी होंगे। साथ ही आगरा के गणमान्य प्रबुद्ध जन तथा जनप्रतिनिधि प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे। आगरा की विभिन्न सामाजिक व सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से कार्यक्रम में मुख्य रूप से रंजीत सामा, डॉ. केशव दत्त गुप्ता, डॉ. तरुण शर्मा, प्रमोद सिंघल, विजय सामा, बबलू लोधी, कैप्टन शुभम गुप्ता के पिता बसंत गुप्ता, राम निवास गुप्ता, राजीव गुप्ता, शोभा राम राठौर एवं गीतकार संजय दुबे आदि उपस्थित थे।
: बच्चों में कुपोषण के साथ एनीमिया से भी मुक्ति दिला रहा एनआरसी
Thu, Jan 11, 2024
आगरा, 09 जनवरी 2024। 15 माह की शिशु आरबी को अचानक बुखार आने लगा और शरीर में सूजन आने लगी। चिकित्सक की सलाह पर जब उसे उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) लाया गया तो पता चला कि आरबी को कुपोषण के साथ-साथ सीवियर एनीमिया (खून की अत्यधिक कमी) की भी दिक्कत है। एनआरसी में भर्ती कर सही समय पर उपचार मिलने से आरबी अब पहले की अपेक्षा स्वस्थ्य हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आरबी जैसे कई अति कुपोषित बच्चों में कुपोषण के साथ-साथ एनीमिया की भी समस्या सामने आ रही है। ऐसे में एनआरसी न केवल कुपोषण से मुक्ति दिला रहा है बल्कि बच्चों में एनीमिया का भी इलाज कर रहा है।
बीते एक साल में एनआरसी में उपचार कराने के लिए भर्ती हुए 21 बच्चों में गंभीर स्वास्थ्य समस्या के साथ खून की कमी (एनीमिया) भी मिली। एनआरसी की आहार परामर्शदाता ललितेश शर्मा का कहना है एनआरसी में अति कुपोषित बच्चों को 14 दिन के लिए भर्ती किया जाता है। इस दौरान बच्चे को उसकी जांच के बाद इलाज के साथ साथ पौष्टिक खानपान भी दिया जाता है। बच्चे को यदि कुपोषण के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं जैसे डायरिया निमोनिया, त्वचा संक्रमण, खून की कमी और पैरों में सूजन आदि है तो एनआरसी में उसका भी उपचार किया जाता है।
ललितेश ने बताया कि एनआरसी में भर्ती बच्चे के साथ में उसकी मां को भी रखा जाता है। यदि बच्चे की मां नहीं है तो घर की अन्य महिला सदस्य भी रह सकती हैं। साथ रहने वाले सदस्य को 50 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बच्चे के डिस्चार्ज होने पर उसके खाते में दिये जाते हैं। एनआरसी में भर्ती बच्चो के अभिभावकों की भी काउंसलिंग की जाती है। काउंसिलिंग के दौरान कुपोषण के कारणों और पोषण के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया जाता है। एनआरसी से डिस्चार्ज होने के बाद अधिकतम चार फॉलो अप किए जाते हैं, ताकि पता चल सके कि परामर्श के अनुसार घर पर भी बच्चों की सही देखभाल की जा रही है या नहीं। प्रत्येक फॉलो अप के लिए भी 140 रुपए अभिभावक के बैंक के खाते में दिये जाते हैं ।
कुपोषण होने के कारण
एनआरसी की मेडिकल ऑफिसर डॉ. नीता चिवटे ने बताया कि किशोरावस्था में किशोरी का कुपोषित होना, कम उम्र में शादी, बार-बार प्रसव, बच्चों में अंतराल ना रखना, मां का कुपोषित होना, संतुलित आहार ना मिलना, सूखा रोग होना और खून की कमी होना जैसे कारक बाल कुपोषण के लिए जिम्मेदार हैं ।
ऐसे सुपोषित हो गयी आरबी
सैंया ब्लॉक के रहलई गांव की निवासी आरबी की मां नीलम ने बताया कि उनकी शादी को दस साल हो गए हैं। उनका पहला बच्चा बेटा शिवम छह साल का है। शिवम के जन्म के चार वर्ष बाद आरबी का जन्म हुआ। वह अब 15 माह की है। जन्म के बाद वह ठीक थी, लेकिन पांच माह पहले अचानक उसे बुखार हुआ और शरीर में सूजन भी दिखने लगा। क्षेत्रीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मदद से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सकों की टीम ने आरबी की जांच कराई। इसके बाद टीम ने उसे जिला अस्पताल स्थित एनआरसी में भर्ती करा दिया गया। एनआरसी में डॉ. नीता चिवटे द्वारा आरबी की विभिन्न प्रकार की जांचें हुईं जिनमें खून की कमी भी सामने आई। उसे हाईग्रेड बुखार के साथ दस्त भी हो रहे थे। उसका हीमोग्लोबिन 5.6 था। इसके बाद आरबी को सही पोषण आहार दिया गया और उसे तीन बार में एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। आरबी के पिता रूपेश ने खून दिया। 14 दिन के बाद आरबी को एनआरसी से डिस्चार्ज कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि आरबी को रोजाना हर दो घंटे पर फार्मूला फूड (आहार परामर्शदाता द्वारा दिए गए निर्देश पर तैयार किया गया खिचड़ी, दलिया सहित स्पेशल खाना) खिलाया जाता था। उन्होंने बताया कि आरबी को डिस्चार्ज करने से पहले भी चिकित्सीय जांचें की गई थीं। इसमें सामने आया कि आरबी के वजन और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार हुआ है। भर्ती होने के समय उसका वजन 6.4 किलोग्राम था और डिस्चार्ज के समय यह बढ़ कर 6.7 किलोग्राम हो गया था। उपचार के बाद में आरबी का हीमोग्लोबिन 8.6 हो गया। वह अब पहले से स्वस्थ है। आरबी का फॉलोअप भी चुका है। नीलम ने बताया कि आरबी को आहार परामर्शदाता ललितेश ने भुने हुए चने, चुकंदर, हरी सब्जियों को लोहे की कढ़ाई में पकाकर खिलाने के लिए कहा है। इसके साथ ही उन्होंने आरबी को विटामिन-सी युक्त नींबू का रस, आंवले का मुरब्बा जैसी चीजें और घर पर पकाए गए खाने की सलाह दी है। घर के बाहर पका हुआ कोई भी खाना न खाने की सलाह दी गयी है।
तीन प्रकार का होता है कुपोषण
बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में जिला कार्यक्रम अधिकारी आदीश मिश्रा ने बताया कि कुपोषण तब होता है जब किसी व्यक्ति के आहार में पोषक तत्वों की सही मात्रा नहीं होती है। कुपोषण को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। कुपोषित, अति कुपोषित और अति गंभीर कुपोषित। अति गंभीर कुपोषित बच्चों एनआरसी में भर्ती किया जाता है। जनपद में लाल श्रेणी में 2691 बच्चे हैं, इसमें 400 बच्चे अति गंभीर कुपोषित श्रेणी में हैं, इन्हें तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा सैम बच्चों वाले परिवार को प्रेरित करके छाया ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता पोषण दिवस (छाया वीएचएसएनडी) के सत्र पर लाकर बच्चों की लंबाई और वजन किया जाता है। लंबाई और वजन के अनुसार जो बच्चे सैम श्रेणी में आते हैं, उन बच्चों की सत्र स्थल पर ही एएनएम द्वारा स्क्रीनिंग की जाती है साथ ही सैम बच्चों को उपचारित भी किया जाता है। सैम बच्चों के उपचार के दौरान एएनएम के द्वारा 6 दवाएं दी जाती हैं। एएनएम द्वारा ऐसे बच्चों का ब्यौरा ई-कवच पोर्टल पर दर्ज किया जाता हैं । एएनएम के द्वारा उन्ही बच्चों को उपचारित किया जाता है जो बच्चे सैम श्रेणी में तो है लेकिन उन्हें कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है । जो बच्चे सैम श्रेणी में है और साथ ही उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्या जैसे बुखार, दस्त, डायरिया, त्वचा रोग आदि है तो ऐसे अति गंभीर कुपोषित बच्चों को तुरंत चिकित्सीय प्रबंधन की आवश्यकता होती है। लाल श्रेणी में आने वाले सभी बच्चों को सर्वप्रथम नजदीकी स्वास्थ्य इकाई पर रेफर किया जाता है। अति गंभीर कुपोषित बच्चों पर ध्यान ना दिया जाए तो जटिलताएं बढ़ सकती हैं। अति गंभीर कुपोषित बच्चों को तुरंत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम, क्षेत्रीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा जटिलताएं दिखने पर पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) रेफर किया जाता है । एनआरसी में ऐसे बच्चों को भर्ती कराने पर प्रत्येक आशा को 100 रुपए प्रति केस भुगतान करने का प्रावधान है।
एनआरसी में स्वस्थ हुए बच्चे
वित्तीय वर्ष भर्ती होकर स्वस्थ हुए बच्चे
2015-16 - 157
2016-17 - 202
2017-18 - 260
2018-19 - 274
2019-20 - 274
2020-21 - 115
2021-22 - 313
2022-23 - 406
अप्रैल 2023 से अक्टूबर 2023 तक - 233
: हॉफ मैराथन का फर्स्ट प्रोमो 14 जनवरी को, दौड़ेंगे सैकड़ों धावक
Thu, Jan 11, 2024
3 मार्च को एकलव्य स्टेडियम से होगा हॉफ मैराथन का शुभारम्भ
आगरा। ताजनगरी में पहली बार आगरा स्पोर्ट्स फाउंडेशन द्वारा 3 मार्च को आयोजित होने जा रही 21 किमी की हॉफ मैराथन के फर्स्ट प्रोमो रन में 14 जनवरी को 300 से अधिक धावक दौड़ेंगे। खेलगांव से सुबह 7 बजे प्रारम्भ होने वाली फर्स्ट प्रोमो रन 5 किमी की होगी। जिसका शुभारम्भ सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव व एसएन मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. प्रशान्त गुप्ता करेंगे। यह जानकारी फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. विकास मित्तल ने तोता का ताल स्थित आईएमए भवन पर आयोजित पोस्टर विमोचन कार्यक्रम में दी।
डॉ. विकास मित्तल, सचिव डॉ. एनएस लोधी, अजय दीप सिंह व कोषाध्यक्ष आवेग मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि मैराथन से पूर्व उत्साहित प्रतिभागियों के अभ्यास व जागरूकता के उद्देश्य से तीन प्रोमो आयोजित किए जाएंगे। 14 जनवरी को फर्स्ट प्रोमो रन का शुभारम्भ खेलगांव से किया जाएगा। 5 किमी की इस दौड़ में धावक पोइया घाट होते हुए पुनः खेलगांव पहुंचेंगे। जिसका कटऑफ टाइम एक घंटा रहेगा। हॉफ मैराथन से पहले तीन प्रोमो का आयोजन किया जाएगा। दूसरा प्रोमो 10 किमी की होगा जो एकलव्य स्टेडियम से प्रारम्भ होकर लाल किला, ताजमहल, सर्किट हाउस मार्ग से होते हुए एकलव्य स्टेडियम पर ही समाप्त होगा। वहीं तीसरा प्रोमो वेलेन्टाइन थीम पर आयोजित किया जाएगा।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. मुकेश गोयल ने शहरवासियों को स्वास्थ्य की दृष्टि से हॉफ मैराथन में अधिक से अधिक लोगों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया। मैराथन में तीन कैटगरी 5 किमी, 10 किमी एवं 21 किमी हैं। 12 वर्ष की उम्र से अधिक हर व्यक्ति हॉफ मैराथन में हिस्सा ले सकता है। हॉफ मैराथन में भाग लेने के इच्छुक लोग agrasportsfoundation.org पर रजिस्ट्रेशन व 8126640855 पर फोन कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हमारी संस्था सभी प्रतिभागीयों कों अभूतपूर्व मैराथन अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. संजय गुप्ता, महेश सारस्वत, दीपक नेगी, संदीप ढल, चारू कपूर, डॉ. रचना. डॉ. माला, सपना, कमल, बारत, तुषार आदि उपस्थित थे।