: पर्यटन पुलिस ने निभाया वादा : ऑटो चालक को गिरफ्तार कर पर्यटक को लौटाया आभूषण से भरा बैग
Tue, May 14, 2024
आगरा. तीन महीने से जिस ऑटो चालक को पर्यटन पुलिस ढूंढ रही थी आखिरकार वह गिरफ्त में आ ही गया। पर्यटन पुलिस ने ऑटो चालक से आभूषण वाले बैग को लेकर पूछताछ की तो वह मुकर गया लेकिन उसकी पत्नी ने पति का सारा राज खोल दिया। ऑटो चालक की पत्नी ने बताया कि लगभग 3 महीने पहले वह आभूषण से भरा एक बैग लेकर आए थे जो घर पर ही है। पुलिस ने ऑटो चालक के घर से आभूषण से भरा हुआ बैग बरामद किया और ऑटो चालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर जेल भेज दिया।
पूरा मामला थाना पर्यटन से जुड़ा हुआ है। घटना फरवरी माह में हुई थी। किन्नरों का एक ग्रुप ताजमहल भ्रमण के लिए आया था। पीड़ित पर्यटक ने ताजमहल जाने के लिए एक ऑटो हायर किया जिसमें वह अपनी सहेली और उसके हस्बैंड के साथ बैठकर ताजमहल पहुंची लेकिन उस ऑटो में पर्यटक का सोने के आभूषण से भरा हुआ बैग छूट गया। उसने ऑटो को रोकने का प्रयास किया लेकिन ऑटो चालक उसे लेकर फरार हो गया। उसने फिर पर्यटन पुलिस से शिकायत की थी। पर्यटन पुलिस ने भी शिकायत को गंभीरता से लिया था और कई ऑटो चालकों से पूछताछ की। सीसीटीवी फुटेज में वह ऑटो कैद भी हुआ लेकिन नंबर साफ नहीं दिख रहा था जैसे उसकी उसे समय गिरफ्तारी नहीं हो पाई।
ताज सुरक्षा एसीपी सैय्यद अरीब अहमद ने बताया कि उस समय पर्यटक काफी निराश हो चुका था लेकिन हमारे पर्यटन थाने की इंस्पेक्टर नीलम ने उन्हें मायूस नहीं होने दिया। उन्हें प्रॉमिस किया कि आपका आभूषण वाला बैग ढूंढकर सपुर्द किया जाएगा। इस ऑटो ड्राइवर को ढूंढने के लिए कई टीम काम कर रही थी। आज ड्यूटी पर जा रहे सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार को उस घटना से संबंधित जाना पहचाना ऑटो दिखाई दिया। शक के आधार पर ऑटो चालक को पकड़ा और शक्ति से पूछताछ की तो ऑटो चालक ने किसी भी तरह की इस तरह की घटना और बैग मिलने से इनकार किया। इसके बाद ऑटो चालक की पत्नी से पूछताछ की तो उसने अपने पति की करतूत का खुलासा कर दिया। जिसके बाद उस ऑटो चालक के घर से आभूषण वाला बैग बरामद किया। आभूषण वाला बैग मिलने पर पर्यटक को सूचित किया गया। सूचना पर पर्यटक आज आगरा पहुंचा और पर्यटन पुलिस ने उसे आभूषण से भरा बैग लौटाया।
3 महीने पहले खोए हुए बैग को वापस पाकर पर्यटक काफी उत्साहित नजर आए। क्योंकि उसमें उसकी सोने चांदी की आभूषण थे। सभी आभूषण वापस मिलने पर पर्यटक ने आगरा पुलिस और पर्यटन पुलिस का दिल से आभार व्यक्त किया। उसने बताया कि वह ताजमहल भ्रमण के लिए आई थी। उस दौरान उसके साथ यह घटना घटी। बैग के ऑटो में छूट जाने और न मिलने से वह काफी परेशान थी। पुलिस ने भी उसे दिलासा दिया था कि तुम्हारा बैग जरूर मिल जाएगा लेकिन उसे ना उम्मीद थी। आज पर्यटन पुलिस ने उसकी नाउम्मीद को उम्मीद में बदल दिया इसलिए पर्यटन पुलिस का आभार है।
: मां पीताम्बरा देवी का प्राकट्य उत्सव एवं स्थापना दिवस समारोह 15 को
Tue, May 14, 2024
वजीरपुरा स्थित प्राचीन सीताराम मंदिर में आयोजित होगा भव्य-दिव्य समारोह
मां पीतांबरा के अभिषेक से आरंभ होगा उत्सव, फूल बंगला में देंगी मां दर्शन, होगी प्रसादी
5001 आहुतियों के साथ संपन्न होगा वैदिक हवन, मां पीतांबरा के 108 नामों का होगा स्मरण
आगरा। सत्ता की देवी, शत्रु विनाशनी, वाक् सिद्धि दायिनी मां पीतांबरा के प्राकट्य उत्सव पर आगरा नगरी में भव्य दिव्य समारोह आयोजित होगा। वजीरपुरा स्थित सीताराम मंदिर में आयोजित होने जा रहे समारोह के आमंत्रण पत्र का विमोचन सोमवार को किया गया।
मंदिर महंत अनंत उपाध्याय ने बताया कि 15 मई, दिन बुधवार को मां पीतांबरा सेवा समिति द्वारा मां पीतांबरा देवी का प्राकट्य उत्सव मंदिर परिसर में मनाया जाएगा। वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मां पीतांबरा का प्राकट्य हुआ था। अशोक उपाध्याय और मनीष अग्रवाल ने बताया कि उत्सव का आरंभ प्रातः अभिषेक से होगा। माता के विग्रह का पंचगव्य, पंचामृत, फलामृत, इत्र आदि से अभिषेक होगा। प्रातः दस बजे 5001 आहुतियों के साथ हवन एवं फूल बंगला सजेगा। दोपहर 3 बजे से प्रसादी का वितरण होगा। सायं 7 बजे श्रीजी बैंड द्वारा आरती होगी। रात्रि 9 बजे आतिशबाजी के साथ उत्सव का समापन किया जाएगा। प्राकट्य उत्सव समारोह के आमंत्रण पत्र विमोचन के अवसर पर अशोक उपाध्याय, अजय उपाध्याय, अरुण उपाध्याय, मुकेश शर्मा, कृष्णा मिठास, पंकज शास्त्री, मनीष अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, आयुष, हनी, बॉबी, प्रदीप सैनी आदि उपस्थित रहे।
हर मनोकामना पूर्ण करती हैं मां पीतांबरा
यूं तो सीताराम मंदिर में मां पीतांबरा के विग्रह की स्थापना 2021 में की गयी थी किंतु इससे 10 वर्ष पूर्ण माता के विग्रह स्थापना के लिए हवन और अनुष्ठान किये जा रहे थे, जोकि आज भी पंडित मुकेश शर्मा और अनंत उपाध्याय द्वारा किये जा रहे हैं। महंत अनंत उपाध्याय ने बताया कि मंदिर 400 वर्ष प्राचीन है। सीताराम और दक्षिणमुखी हनुमान जी के विग्रह यहां आरंभ से ही पधारे हुए हैं। मंदिर में मां पीतांबरा का विग्रह पधारने के कुछ समय बाद ही परिसर में खड़े नीम के पेड़ में स्वतः ही भैरव नाथ की मुखाकृति उभर आई। मां पीतांबरा को सत्ता की देवी कहा जाता है। इसलिए आये दिन यहां राजनीतिक लोग अनुष्ठान करवाते हैं। गुप्त नवरात्र में मां की विशेष पूजा सेवा होती है। मंदिर में मां के विग्रह स्थापना में श्याम मुरारी का विशेष सहयोग रहा।
मंदिर में रहकर पुरी के पूर्व शंकराचार्य निरंजन देव तीर्थ महाराज ने शिक्षा ग्रहण की थी। वहीं स्वामी करपात्री जी महाराज और पुरी के वर्तमान शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती भी यहां प्रवास कर चुके हैं।
: हर भाव की अनुभूति है, “अनुभूतिः कुछ भी मैंने न पाया” साहित्यिक कृति
Mon, May 13, 2024
भाषा की बाधा को भेदती कृति अनुभूतिः कुछ भी मैंने न पाया की रचना हिंदी और रशियन भाषी साहित्यकारों ने की
अंतरराष्ट्रीय कवि दीपक श्रीवास्तव और रूसी कवयित्री स्वेतलाना मगानोवा का साझा है संकलन
माधुर्य सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था की संस्थापिका अध्यक्ष निशिराज ने किया है अनुवाद
आगरा। हृदय से निकले भावों की अनुभूति की कोई भाषा की बाधा नहीं होती। इस बात का प्रमाण है साहित्यिक कृति अनुभूतिः कुछ भी मैंने न पाया”।
अन्तरराष्ट्रीय कवि दीपक श्रीवास्तव और रूसी कवयित्री स्वेतलाना मगानोवा के साझा संकलन अनुभूतिः कुछ भी मैंने न पाया का विमोचन माधुर्य सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में रविवार को किया गया।
राजदीप एंक्लेव, दयालबाग स्थित संस्था के कार्यालय पर आयोजित समारोह का आरंभ मां शारदे की वंदना के साथ हुआ। मुख्य अतिथि प्रो वेद प्रकाश त्रिपाठी, विशिष्ट अतिथि गिरिराज किशोर गुप्त, नीरज जैन, डॉ राजीव शर्मा “निस्पृह”, संस्था के संरक्षक डॉ राजेंद्र मिलन और आदर्श नंदन गुप्ता, संस्थापक अध्यक्ष निशिराज ने पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक में रूसी भाषा की कविताओं का काव्यानुवाद माधुर्य संस्था की संस्थापक एवं कवयित्री निशिराज ने किया है।
मुख्य अतिथि प्रो वेद प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि दीपक श्रीवास्तव अपने साहित्य से पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का प्रकाश फैला रहे हैं। संस्था की संस्थापक निशिराज ने कहा कि साहित्य सृजन की प्रतिभा सम्पूर्ण व्यक्तित्व के विकास में सहायता करती है। लेखक दीपक श्रीवास्तव की हर कृति में उनके सधे व्यक्तित्व की झलक है। अपने लेखन से विश्वपटल पर प्रसिद्धि प्राप्त कर चुके कवि दीपक श्रीवास्तव की ये तीसरी साहित्यिक कृति है। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी और हिंदी में लिखने के बाद उनकी तीसरी कृति में रशियन भाषा के भाव भी समाहित हैं। पुस्तक में दीपक की प्रेम पर आधारित 30 गजले हैं। वहीं जीवन के हर रिश्ते और राजनीति पर आधारित 15 काव्य रचनाएं भी हैं। दीपक ने कहा कि उनका प्रयास है कि उनकी हर कृति विश्वपटल पर भारतीय संस्कार और संस्कृति की पताका लहरा सके। पुस्तक समीक्षा डॉ राजीव शर्मा निस्पृह ने की।
पुस्तक विमोचन के बाद काव्य की सरस रस धारा प्रवाहित हुई। जिसमें खोल गई चुपके से दरवाजे बंद सभी…. प्रो वेद प्रकाश त्रिपाठी, जरूरी नहीं आदमी का अमीर होना, जरूरी है आदमी का जमीर होना… डॉ.सुषमा सिंह, पी लिया हमने हलाहल कुछ असर तो आएगा, तेरी दिलकश सी अदा में जिक्र मेरा आएगा… डॉ.शशि गुप्ता, यूं ही नहीं हर मंजिल कदमों तले बिछ जाती है, जो रोशनी दे उस दीए की देह तक जल जाती है…निशिराज, जिंदगी के हर गम को मैंने खुशी से पिया है, जिंदगी को पल पल मैंने दुआ में जिया है…. पद्मावती बघेल, कभी नहीं पड़ने दी हम पर, दुःख की काली छाया, दुःख आए तो खुद रो ली पर, हमको नहीं रुलाया, उस मां के उपकार हैं अनगिन, जिसने मुझको जाया… विनय बंसल, काहे मुरली अधर धरी है, मोहे माखन तेरो नाय खानो… राजीव शर्मा निस्पृह, कभी सादगी में पूरी कभी सोलह सिंगार में, रह - रह के देखता था तुझे लाखों बार मैं… प्रकाश गुप्ता बेबाक, आइना क्यूं यूं आज छले जा रहा है शोखियों पर मेरी हाथ मले जा रहा है.. सुधा वर्मा, मैंने तुझे पाला था … अशोक अश्रु, पियर्जन गए… रामा वर्मा, भारत माता मां सबकी है… डॉ हरवीर सिंह परमार आदि ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
इस अवसर पर संजय गुप्त, रमा रश्मि, यशोधरा यशो, गिरीराज किशोर गुप्त, डॉ परमानंद शर्मा, रेखा शर्मा आदि उपस्थित रहे।