: मंगल कलश यात्रा के साथ आरंभ हुई श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ
Sun, Jun 16, 2024
आगरा। आज पावन गंगा दिवस के उपलक्ष में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा का शुभारंभ संतो के द्वारा पवित्र धाम रगूराम धाम कैलाशपुरी आगरा में होने जा रहा है। आज प्रथम दिवस में मंगल कलश यात्रा निकाली गयी। मातृशक्ति माताऐं और बहनें पीतांबर वस्त्र धारण किए, बैंड बाजे की भक्ति धुन में भव्य तरीकें से सजे रथ के आगे झूमते नाचते चल रही थी। राधे राधे श्याम श्याम के जयकारो कि गूंज से क्षेत्र गुंजायमान हुआ।
मगल कलश यात्रा का भ्रमण के दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत सत्कार जलपान आदि के साथ किया गया। यात्रा में परम पूज्य भागवताचार्य स्वामी नित्यानंद गोवर्धन व संत स्वामी गुरमुख दास उदासीन सम्मान के साथ भागवत ग्रंथ लिए बिहारी जी के श्रद्धालुओं के साथ चल रहे थे। सभी श्रद्धालुओं का दास दीपक उदासीन द्वारा पीतांबर पटका पहनाकर सम्मान किया।
मंगल कलश यात्रा के कथा पंडाल पहुंचते ही भागवताचार्य जी के मुखार बिंद से आज प्रथम दिवस की कथा में नारद भक्ति संवाद एवं गोकर्ण धुंधकारी कथा एवं श्रीमद् भागवत कथा श्रवण विधि की कथा महात्म में सुनाई गई।
मुख्य रूप से सेवा में दास दीपक उदासीन, महेश भवानी, समाज सेवी श्याम भोजवानी, नंदलाल छत्तानी, गुरदासमल संगतानी, सुरेश कल्याणी, राजा सोनी, शंकर लाल सचदेवा, विनोद पंजवानी, सोनू मेहरा, चंद्रप्रकाश, कान्हा गनवानी, सुमित आडवानी, बिट्टू आडवानी, विक्की भाई आदि उपस्थित रहे।
: विप्र चिन्तन शिविर में प्रदेश के एक हजार से अधिक लोग लेंगे भाग
Sun, Jun 16, 2024
आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज ने एकजुट होकर सामाजिक कार्य करने का लिया संकल्प
अलीगढ़, झांसी, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा सहित विभिन्न जिलों से पहुंचेंगे लोग
आगरा। ब्राह्मण समाज एकजुट होकर समाज के विकास और उत्थान के लिए काम करेगा। समाज की कुरीतियों को दूर करने के लिए लोगों के बीच जाकर जागरूकता कार्यक्रम योजित किए जाएंगे। वहीं समाज में हो रहे विघटन को रोकने के लिए एक संरक मण्डल भी बनाया जाएगा। इन सभी उद्देश्यों को दिशा देने के लिए 23 जून को सूरसदन में विप्र चिन्तन कार्यक्रम का योजन किया जा रहा है। यह जानकारी होटल लेमन ट्री में आयोजित शिविर के आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रम में पदाधिकारियों द्वारा दी गई।
महर्षि परशुराम की तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। दोनों हाथ ऊपर उठाकर महर्षि परशुराम के खूब जयकारे गूंजे। गजेन्द्र शर्मा, डॉ. तरुण शर्मा, प्रो. लवकुश मिश्रा व राहुल चतुर्वेदी ने कहा कि 23 जून को सूसदन में आयोजित होने जा रहे शिविर में एक हजार से अधिक लोग आगरा सहित अलीगढ़, हाथरस, एटा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, कासगंज, इटावा, झांसी से शिविर में भाग लेने पहुंचेंगे।
त्रयोदशी संस्कार को सूक्ष्म रूप से ही किया जाने के साथ विबिन्न बिन्दुओं पर चिन्तन व उन्हें अमल में लाने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। त्रयोदशी को सूक्ष्म रूप से मनाने के लिए जब अन्य समाज इसमें आगे आ रहे है तो हम लोगो को भी इस पर विचार करना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में समाज पिछड़ता जा रहा है। घर की मजबूरी हो या कोई और संकट। हमको इसके बारे में भी चिंतन करना होगा जहां पहले 90 प्रतिशत समाज के बच्चे उच्च पदों पर रहते थे। आज की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। बेरोजगारी पर भी हमे सोचना होगा जो भी समाज के व्यापारी है, उन लोगो को पहले समाज के बच्चो को रोजगार देना होगा। जहां भी समाज की परशुराम जयंती निकलती है या अन्य कोई कार्यक्रम हो बढ़ के हिस्सा लेना होगा। सख्या बल दिखना चाहिए।
ब्राह्मण समाज के लोगों पर पूरे प्रदेश में झूठे मुकदमे लग रहे है उनकी हत्याएं हो रही है। इस पर एक आंदोलन की रूप रेखा बने ताकि शासन प्रशासन तक इसकी गूंज हो सके। दहेज रहित विवाह पर भी हमें सोचना होगा हम कहते तो एक इसपे अमल नहीं करते और जहां विवाह विघटन समाज में हो रहे है इसका एक सरक्षक मंडल बने ताकि वो इस तरह के विवाद को सुलझा सके।
इस अवसर पर संजय शर्मा, शैलेन्द्र शर्मा, राहुल शर्मा, सुशील शर्मा, महेश शर्मा, राजेश शर्मा, संजय तिवारी, विक्रांत बरुआ, पवन समाधिया, कुलदीप शुक्ला, अभिनव दीक्षित, यतीश लवानिया आदि उपस्थित रहे।
: जलवा फरोश हैं आज जिनकी वजह से हम, वह जिंदगी की खुशियां मेरे नाम कर गए
Sun, Jun 16, 2024
आगरा साहित्य समारोह एवं काव्य संगोष्ठी में दिखी साहित्य साधना की झलक
फादर्स डे पर इंद्रजीत सिंह भदौरिया की स्मृति में सजा काव्य दरबार
आगरा। जलवा फरोश हैं आज जिनकी वजह से हम, वो जिंदगी की खुशियां मेरे नाम कर गए। जो है वजूद मेरा वह इशरत ओ मुहतरम, वह हाथ मेरे सर से देखो कब सरक गए… हरीश कुमार सिंह भदोरिया की इन पंक्तियों के साथ मानस अनुरागी इंद्रजीत सिंह भदौरिया की स्मृति में वृहद साहित्य संगोष्ठी एवं काव्य समारोह का शुभारंभ हुआ।
फादर्स डे के उपलक्ष्य में रविवार को संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ देश भर से आए कवियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ राजेंद्र मिलन ने और संचालन सुशील सरित ने किया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संचार क्रांति का हिंदी साहित्य पर प्रभाव विषय पर गोष्ठी में साहित्य मनीषियों ने वर्तमान परिदृश्य पर अपने उदगार प्रस्तुत किये। कार्यक्रम आयोजक हरीश कुमार सिंह भदौरिया ने कि कहा सूचना प्रौद्योगिकी के इस प्रभावशाली दौर में मातृभाषा के वर्चस्व में बढ़ोत्तरी हुई है। डाटा क्रांति के कारण जो बदलाव हुए हैं उनका साक्षी बनने का सुनहरा अवसर इस पीढ़ी को मिल रहा है। विषय परिवर्तन करते हुए काशी से आईं अन्नपूर्णा मालवीय ने कहा कि भारत आज विश्व का सबसे युवा देश है इसलिए युवाओं की सोच विचार आचार व्यवहार और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में काव्य समारोह में दिल्ली, कानपुर, प्रयागराज, रायबरेली, ग्वालियर, मेरठ, जयपुर, मथुरा और आगरा के कवियों ने काव्य पाठ में हास्य श्रृंगार और वीर रस की कविताओं से श्रोताओं की जमकर तालियां बटोरीं। आगरा की कवियत्री डॉ हेमलता सुमन ने काव्य पाठ के माध्यम से पिता की भूमिका बताते हुए कहा पिता ब्रह्मा है पिता ईश हैं, पिता जगत के पालक हैं। जीवन रूपी गाड़ी के यह कुशल महा संचालक हैं।
आगरा के ही डॉ शेशपाल सिंह शेष ने कहा मिला जन्म तो सबसे पहले, मां जी को पहचाना है। समय गुजर जाने पर हमने पूज्य पिता को जाना है। इसी कड़ी में रामेंद्र कुमार शर्मा रवि ने पीपल बरगद सम पिता ऊंचे पर्वतराज। चढ़े पुत्र उन्नत शिखर पिता करे वो काज.., सुधीर कुमार सिंह सुधाकर ने मेरा कमरा वह कब तेरा कमरा हो गया….केंद्रीय हिंदी संस्थान की प्रो. वीणा शर्मा ने कहा पिता का अभिमान होती है संतान। बनाए रखें जो इसे तो कहलाती महान.. विनय बंसल, लुल्लू कानपुरी ने ये देश बूचड़ खाना बन गया है। दरिंदों का ठिकाना बन गया है… कुमारी डॉ शशी जायसवाल ने मैं पिता पूज्य के चरणों में, करती वन्दन हूं सुबहो- शाम… मुक्ति सिकरवार, डॉ रितु अग्रवाल, रामकुमार, इंद्रेश भदोरिया, डॉ नीता सरोजिनी, मीरा परिहार , मीना राजू वर्मा, रामेंद्र कुमार शर्मा रवि, मदन मुरादाबादी, सीमा गर्ग, रिया अग्रवाल, श्याम जीत श्याम आदि ने काव्य पाठ किया।
साहित्य समारोह में हुआ पुस्तकों का विमोचन
कार्यक्रम में हरीश कुमार भदौरिया की पुस्तक संचार क्रांति का हिंदी साहित्य पर प्रभाव एवं अहिल्या पत्थर की हो गई पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक विमोचन के उपरांत देशभर से आए कवि और साहित्य प्रेमियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।