इस्कॉन : धवल पोशाक में श्रीहरि के दिव्य दर्शन, 2100 दीपों से जगमगाया श्रीजगन्नाथ मंदिर
Pragya News 24
Mon, Oct 26, 2026
इस्कॉन कमला नगर में कार्तिक मास दीपदान महोत्सव का शुभारंभ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम संग विराजे भगवान जगन्नाथ
राधारानी के प्रिय कार्तिक मास में प्रतिदिन होगा दीपदान, दामोदराष्टकम, गोपीगीत और संकीर्तन से भक्तिमय रहेगा मंदिर परिसर
आगरा। राधारानी के प्रिय कार्तिक मास के आगमन पर कमला नगर स्थित श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) में दीपदान महोत्सव का शुभारंभ भक्तिभाव के साथ हुआ। मंगला आरती, हरिनाम संकीर्तन और 2100 दीपों की जगमगाती शृंखला ने मंदिर परिसर को दिव्य आभा से आलोकित कर दिया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ ने बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ धवल पोशाक में श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। दीपों की रोशनी, हरे रामा-हरे कृष्णा के संकीर्तन और भगवान के अलौकिक शृंगार ने भक्तों को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
प्रातः 4:30 बजे मंगला आरती के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने दामोदराष्टकम का पाठ किया, दीपदान किया और तुलसी मैया की आरती उतारी। इसके बाद हरिनाम संकीर्तन से मंदिर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान के दिव्य दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
इस्कॉन आगरा के अध्यक्ष अरविंद स्वरूप ने बताया कि कार्तिक मास के दौरान प्रतिदिन दामोदराष्टकम और गोपीगीत का आयोजन किया जाएगा। मंदिर परिसर में रोजाना 2100 दीप प्रज्ज्वलित कर दीपदान किया जाएगा। इस दौरान भगवान के विभिन्न वेशों के दर्शन के साथ गोपाष्टमी, बैकुंठ चतुर्दशी, दीपावली और देवउठनी एकादशी सहित विभिन्न धार्मिक उत्सव भी श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाए जाएंगे।
इस अवसर पर नितेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, शैलेन्द्र अग्रवाल, कान्ता प्रसाद अग्रवाल, राजेश उपाध्याय, संजीव बंसल, शैलेश बंसल, ओमप्रकाश अग्रवाल, संजय कुकरैजा, राजेश मल्होत्रा, संजीव मित्तल, देव केशव, राजेश गर्ग, सुनील मनचंदा और अदिति गौरांगी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
श्रीकृष्ण से पहले राधा और मार्गशीर्ष से पहले कार्तिक मास, जानिए धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में कार्तिक मास को भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की आराधना के लिए विशेष महत्व प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह मास श्रीहरि को अत्यंत प्रिय है और राधारानी की कृपा प्राप्त करने के लिए इसमें व्रत, पूजन, संकीर्तन तथा दीपदान का विशेष विधान है।
श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने मासों में मार्गशीर्ष को अपना स्वरूप बताया है। वहीं, वैष्णव परंपरा में मार्गशीर्ष से पहले आने वाले कार्तिक मास को राधारानी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस मास में श्रद्धापूर्वक की गई साधना और सेवा से भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। कार्तिक मास के व्रत को उज्ज्वल व्रत भी कहा जाता है। इस दौरान श्रद्धालु भगवान दामोदर की पूजा, तुलसी सेवा और दीपदान के माध्यम से भक्ति एवं समर्पण का भाव प्रकट करते हैं।
कार्तिक मास में होंगे यशोदा-दामोदर के विशेष दर्शन
कार्तिक मास में भगवान श्रीकृष्ण की दामोदर लीला का विशेष स्मरण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीपावली के अवसर पर माता यशोदा ने बालकृष्ण को ओखल से बांधा था। भगवान का माता के प्रेम और वात्सल्य के आगे बंध जाना भक्ति की महिमा का प्रतीक माना जाता है। इसी लीला के स्मरण में कार्तिक मास के दौरान प्रतिदिन यशोदा-दामोदर के दर्शन और पूजा का विशेष महत्व है।
वैष्णव परंपरा में इस मास को भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के स्मरण और आराधना के लिए अत्यंत पावन माना जाता है। गोचारण, गोवर्धन धारण, महारास, कालिय नाग मर्दन, इंद्र के मान-मर्दन और गोवर्धन पूजा जैसी लीलाओं का स्मरण भक्तिभाव से किया जाता है। मंदिरों में दामोदराष्टकम के पाठ, दीपदान और हरिनाम संकीर्तन के माध्यम से श्रद्धालु भगवान के प्रति प्रेम, समर्पण और भक्ति निवेदित करते हैं।
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