: प्रो. (डॉ.) चित्रलेखा सिंह के 80 वें जन्मदिवस पर आयोजित ‘चित्रांजलि’ प्रदर्शनी में उनके चित्रों में मुखर हुआ रचनात्मकता और कल्पना संसार
Pragya News 24
Fri, Jun 20, 2025
आगरा। केसरिया बालम आवो जी पधारो म्हारे देस…ये मधुर स्वर प्रवाहित हुए संस्कृति भवन में, साथ ही ओडिसी नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति में राधा और कृष्ण की मनोहारी छवियों और लीलाओं के दर्शन कर दर्शक सम्मोहित से हो गए। कथक नृत्य की मनभावन प्रस्तुति और सितार वादन से भी संस्कृति भवन का सभागार आनंद से खिल उठा। मौका था डॉ. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा के ललित कला संस्थान के पच्चीसवें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में रजत जयंती समारोह 'ललितोत्सव' और संस्थान की संस्थापक निदेशक प्रो.(डॉ.) चित्रलेखा सिंह के 80 वें जन्मदिवस के जश्न का। इसमें कलाकारों ने रंग भरे।
मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी थीं। *विशिष्ट अतिथियों में मेवाड़ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. अशोक कुमार गदिया और निदेशक डॉ. अलका अग्रवाल, पूर्व सांसद डॉ. महेश चंद्र शर्मा थे। कुलपति प्रो. आशु रानी, ललित कला संस्थान के निदेशक प्रो. संजय चौधरी ने डॉ. चित्रलेखा सिंह का सम्मान किया। वहीं पूर्व सांसद डॉ. महेश शर्मा का भी सम्मान किया गया।
शुरुआत दीप मल्लिका से हुई। ललित कला संस्थान की संस्थापक निदेशिका प्रो. (डॉ.) चित्रलेखा सिंह की जीवन यात्रा की एक गुंफित कला माला प्रदर्शनी 'चित्रांजली' का शुभारंभ हुआ। इससे संबंधित कैटलॉग भी लॉन्च किया गया। एक "वेबसाइट का शुभारंभ* हुआ। सांस्कृतिक संध्या में रसोत्सव कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) चित्रलेखा सिंह के ऊपर कनाडा के मुनीर मानी निर्देशित 'सोल ऑफ़ कलर्स' डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म की स्क्रीनिंग हुई। 'मेरे सहयात्री मेरे पथ प्रदर्शक' नामक पुस्तक का विमोचन हुआ। अभिनंदन ग्रंथ 'रंगों और रेखाओं की मेघा प्रो.(डॉ.) चित्रलेखा' के प्रकाशन की घोषणा की गई। जिसका संपादन डॉ. महेश धाकड़ द्वारा किया जायेगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. संजय चौधरी ने कहा कि, "संस्थान के रजत जयंती वर्ष में 25 सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे, जो कि वर्ष भर चलेंगे।" संस्थापक निदेशक प्रो. (डॉ.) चित्रलेखा सिंह ने कहा, "तत्कालीन कुलपति मंजूर अहमद से मैने इस संस्थान की नीव रखे जाने का अनुरोध किया था, जो उन्होंने कलाओं के उन्नयन और नई पीढ़ी को कलाओं में पारंगत करने के लिए शुरू कराया। इस संस्थान के छात्र और छात्राओं ने अर्श को छूकर हमारे इस प्रयास को सफल और सार्थक बनाया है। अपनी भव्य चित्रकला प्रदर्शनी के बाबत उन्होंने बताया "मैंने जीवन के 80 वर्षों की यात्रा को ललित कलाओं के लिए समर्पित किया। अपने आसपास के अनुभवों और संवेदनाओं को रचनात्मकता और कल्पना संग समेटा है, जो आज इस 'चित्रांजलि' प्रदर्शनी में प्रदर्शित चित्रों में आपने देखा है।"
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी की सदस्य डॉ.आभा, डॉ.डीवी शर्मा, अशोक कुमार, प्रो. सर्वोत्तम दीक्षित (मेवाड़ यूनिवर्सिटी), चितकारा यूनिवर्सिटी के डॉ. रंजन मलिक, प्रो. मंजुला चतुर्वेदी (काशी विद्यापीठ), डॉ. रेखा कक्कड़, डॉ. गिरिजा शंकर शर्मा, डॉ.विजय ढोरे, डॉ. मोनिका वार्ष्णेय (डीएस कॉलेज, अलीगढ़), डॉ. गिरीश गुप्ता, बी.डी. अग्रवाल, डॉ. वंदिनी सकारिया, राधा दौनेरिया, लकी, चित्राक्ष शर्मा आदि थे।
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