श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव 2026 : शिव धनुष टूटते ही जय श्रीराम से गूंज उठी मिथिला, सीता स्वयंवर में साकार हुआ दिव्य विवाह प्रसंग
Pragya News 24
Wed, Oct 14, 2026
आगरा। “जाइ न बरनि मनोहर जोरी। जो उपमा कहौं सो थोरी॥” श्रीरामचरितमानस की इन चौपाइयों के भावों के अनुरूप श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव-2026 में धनुष यज्ञ लीला का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड पर आयोजित लीला में सीता स्वयंवर, भगवान शिव के धनुष भंग और परशुराम-लक्ष्मण संवाद के प्रसंगों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रभु श्रीराम के धनुष तोड़ते ही पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा और मिथिला नगरी में आनंदोत्सव छा गया।
राजाओं के प्रयास विफल, श्रीराम ने सहजता से तोड़ा शिव धनुष
धनुष यज्ञ लीला का शुभारंभ राजा जनक द्वारा आयोजित सीता स्वयंवर के प्रसंग से हुआ। माता सीता के विवाह के लिए देश-विदेश के राजा-महाराजा मिथिला पहुंचे। स्वयंवर की शर्त थी कि जो वीर भगवान शिव के विशाल धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ माता सीता का विवाह होगा। एक से बढ़कर एक बलशाली राजाओं और योद्धाओं ने धनुष उठाने का प्रयास किया, लेकिन सभी असफल रहे।
राजाओं की विफलता से राजा जनक की चिंता बढ़ने लगी। इसी बीच गुरु विश्वामित्र के साथ आए प्रभु श्रीराम शांत और विनम्र भाव से बैठे रहे। गुरु की आज्ञा मिलने पर श्रीराम धनुष के समीप पहुंचे और सहजता से उसे उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे। इसी दौरान भगवान शिव का धनुष भंग हो गया। धनुष टूटने की गगनभेदी ध्वनि के साथ ही स्वयंवर स्थल उल्लास से भर उठा। देवताओं की पुष्पवर्षा के बीच माता सीता ने प्रभु श्रीराम के गले में वरमाला पहनाई। इस दिव्य प्रसंग के मंचन पर श्रद्धालुओं ने जय श्रीराम के जयकारों के साथ हर्ष व्यक्त किया।
परशुराम-लक्ष्मण संवाद में वीररस और हास्य का संगम
शिव धनुष भंग होने का समाचार सुनकर भगवान परशुराम क्रोधित अवस्था में स्वयंवर स्थल पर पहुंचे। धनुष तोड़ने वाले के प्रति उन्होंने रोष व्यक्त किया, जिसके बाद लक्ष्मण और परशुराम के बीच तीखे संवाद हुए। लक्ष्मण ने अपनी निर्भीक वाणी और तर्कों से परशुराम के क्रोध का उत्तर दिया, वहीं प्रभु श्रीराम ने विनम्रता, धैर्य और मर्यादा का परिचय देते हुए परिस्थिति को संभाला।
इस प्रसंग में वीररस और हास्य का अनूठा संगम देखने को मिला। संवादों और कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों को बांधे रखा। अंततः प्रभु श्रीराम के दिव्य स्वरूप और विनम्रता को पहचानकर परशुराम का क्रोध शांत हुआ। लीला ने दर्शकों को शक्ति के साथ विनम्रता और धैर्य के महत्व का संदेश दिया।
अयोध्या भेजा गया विवाह का निमंत्रण
धनुष भंग और वरमाला के बाद मिथिला में विवाहोत्सव की तैयारियां आरंभ हो गईं। राजा जनक ने अयोध्या में महाराज दशरथ के पास विवाह का शुभ समाचार और आमंत्रण भेजने की व्यवस्था की। इस प्रसंग के साथ अयोध्या में भी हर्ष और उत्साह का वातावरण बनने तथा श्रीराम बारात के आगमन की तैयारियों का मार्ग प्रशस्त हुआ।
पहली बार आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद पहुंचेगी श्रीराम बारात
श्री मनःकामेश्वर मठ के प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि रामलीला महोत्सव के अंतर्गत 15 अक्टूबर, गुरुवार को श्रीराम बारात का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष बारात की विशेषता यह है कि वह पहली बार लगभग आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद पहुंचेगी। शमशाबाद क्षेत्र को जनकपुरी का स्वरूप दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग से जुड़ी परंपराओं का सजीव अनुभव प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि श्रीराम बारात की शोभा 51 से अधिक झांकियां बढ़ाएंगी। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। इसके बाद 16 अक्टूबर को शिव वाटिका, जनकपुर में तुलसी-शालिग्राम विवाह का आयोजन किया जाएगा। इन धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को रामकथा की परंपरा, भक्ति और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
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