रामलीला महोत्सव-2026 : रणभूमि में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, प्रभु श्रीराम के अमोघ अस्त्र से धराशायी हुआ कुंभकर्ण
Pragya News 24
Sun, Oct 18, 2026
आगरा। “छाड़ि कपट निज रूप बहोरी। सोइ रावनु कपट बल जोरी॥” श्रीरामलीला महोत्सव 2026 के अंतर्गत रविवार को आगरा किला के सामने स्थित रामलीला मैदान में राम-कुंभकर्ण युद्ध का भव्य एवं सजीव मंचन किया गया। रणभूमि में दोनों ओर से तीरों की बौछार, तलवारों की टंकार और गदा-भालों के प्रहारों के बीच युद्ध का रोमांच चरम पर पहुंच गया। प्रभु श्रीराम के जयकारों से पूरा मैदान गूंज उठा। अंततः प्रभु श्रीराम के अमोघ अस्त्र से कुंभकर्ण का वध हुआ। इसके बाद तोपों के धमाकों और आतिशबाजी के बीच लगभग 40 फुट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले का दहन किया गया।
स्वरूपों की आरती हेल्प आगरा के अध्यक्ष सुरेंद्र जैन, गौतम सेठ, शांति स्वरूप गोयल, राजकिशोर खंडेलवाल, अनिल वर्मा तथा नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज एवं अपना घर अन्नपूर्णा महिला आश्रम के सदस्यों ने उतारी।
छह माह की निद्रा से जागा कुंभकर्ण, युद्धभूमि में मचा घमासान

रविवार की लीला का आरंभ लक्ष्मण जी के मूर्छा से जागने के प्रसंग से हुआ। रामसेना के पराक्रम से चिंतित रावण ने अपनी सेना को मजबूत करने के लिए कुंभकर्ण को जगाने का निर्णय लिया। छह माह तक निद्रा में रहने वाले कुंभकर्ण को जगाने के लिए रावण स्वयं उसके महल पहुंचा। काफी प्रयासों के बाद उसकी निद्रा टूटी तो वह मदमस्त हाथी की भांति युद्धभूमि की ओर चल पड़ा। विशालकाय कुंभकर्ण के रणभूमि में उतरते ही युद्ध का रोमांच बढ़ गया।
तीरों की बौछार के बीच रथों पर सवार स्वरूपों ने दिखाया युद्ध कौशल
मंचीय लीला के बाद राम और कुंभकर्ण की सेनाओं के मैदान में उतरते ही युद्ध का दृश्य जीवंत हो उठा। प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण की ओर से शत्रु सेना पर तीर चलाए गए, वहीं कुंभकर्ण की सेना ने भी जवाबी प्रहार किए। तलवार, गदा और भालों से सुसज्जित सैनिकों के बीच घमासान युद्ध हुआ। दोनों रथों पर सवार स्वरूपों के युद्ध को देखने के लिए दर्शक उत्साहित नजर आए।


युद्ध के दौरान मैदान में गिरे तीरों को उठाने के लिए दर्शक रथों के आगे-पीछे दौड़ते दिखाई दिए। दर्शकों की निगाहें कभी रणभूमि में युद्ध करते स्वरूपों पर टिकतीं तो कभी मैदान में लगी एलईडी स्क्रीन पर। पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए व्यवस्था संभाली।
अमोघ अस्त्र से हुआ कुंभकर्ण का वध, जयघोष से गूंजा मैदान
प्रभु श्रीराम के लगातार प्रहारों के बावजूद कुंभकर्ण अपने विशाल शरीर और युद्ध कौशल के कारण चुनौती बना रहा। रणभूमि में दोनों ओर से संघर्ष जारी रहा। अंततः प्रभु श्रीराम ने अमोघ अस्त्र का संधान किया। अस्त्र लगते ही कुंभकर्ण का शीश धड़ से अलग होकर धरती पर जा गिरा। कुंभकर्ण के वध के साथ ही पूरा मैदान जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा। धार्मिक मान्यता के अनुरूप प्रभु श्रीराम ने कुंभकर्ण का उद्धार कर उसे श्रीधाम पहुंचाया।

आतिशबाजी और तोपों के धमाकों के बीच जला 40 फुट ऊंचा पुतला
कुंभकर्ण वध के बाद रामलीला मैदान में आतिशबाजी का प्रदर्शन हुआ। तोपों के गोलों के धमाकों ने आयोजन के रोमांच को और बढ़ा दिया। इसके बाद लगभग 40 फुट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतले का दहन किया गया।

पुतला धू-धू कर जलने लगा तो दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। आतिशबाजी और पुतला दहन के दौरान मैदान में उत्साह का माहौल बना रहा।
रामलीला कमेटी के पदाधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद, टीएन अग्रवाल, भगवानदास बंसल, विजय प्रकाश गोयल, मुकेश जौहरी, रामकिशन अग्रवाल, मनोज (पोली), विष्णु दयाल बंसल, संजय तिवारी, महेश चंद, राकेश जैन, संजय अग्रवाल, रामाशीष शर्मा, रामांशु शर्मा, अजय अग्रवाल, दिलीप कुमार अग्रवाल, मनोज कुमार अग्रवाल, आयुष तार, राहुल शर्मा और राहुल गौतम सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
इनकी देखरेख में हुआ युद्ध संचालन
रामलीला मैदान में युद्ध के दृश्यों का संचालन मुकेश जौहरी, प्रवीण स्वरूप, प्रकाशचंद, आनंद मंगल और अंजुल बंसल ने किया।
आज होगा मेघनाद वध, 90 फुट लंबे पुतले का दहन
श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि सोमवार को मेघनाद वध के उपलक्ष्य में विशेष आतिशबाजी का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें प्रमुख आतिशबाज अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि सोमवार, 19 अक्टूबर को शाम सात बजे से मेघनाद वध की लीला का मंचन होगा। इसके बाद मेघनाद के लगभग 90 फुट लंबे पुतले का दहन किया जाएगा।
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