श्री मनः कामेश्वर रामलीला : श्री राम वरयात्रा के स्वागत में दुल्हन बनी शमशाबाद की धरती, आठ किलोमीटर के मार्ग पर उमड़ा आस्था का सैलाब
Pragya News 24
Thu, Oct 15, 2026
आगरा। रामहि केवल प्रेमु पिआरा। जानि लेउ जो जाननिहारा॥ प्रेम, श्रद्धा और समर्पण की इसी सनातन भावना को साकार करते हुए श्री मनःकामेश्वर रामलीला महोत्सव 2026 की दिव्य श्री राम वरयात्रा गुरुवार को भव्यता के साथ निकाली गई। पहली बार लगभग आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद पहुंचे प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों के स्वागत में पूरा ग्रामीण अंचल जनकपुर बन गया। घर-घर सजी रंगोलियां, दरवाजों पर बंधे बंदनवार, बिजली की रंग-बिरंगी झालरें, मार्गों पर पुष्पवर्षा और सैकड़ों स्थानों पर हुई आरती ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। 50 से अधिक सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक झांकियों से सुसज्जित श्री राम वरयात्रा जहां से गुजरी, वहां श्रद्धा और उत्साह का सैलाब उमड़ पड़ा। ग्रामीणों ने अपने आराध्य के स्वागत में पलक-पांवड़े बिछा दिए।
श्री मनःकामेश्वर ग्रामीण संस्थान, गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड से प्रारंभ हुई श्री राम वरयात्रा का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य एवं पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने नारियल फोड़कर और प्रभु श्रीराम सहित सभी स्वरूपों की आरती उतारकर किया। इसके बाद ऋषि वशिष्ठ के स्वरूप में विराजमान श्री महंत योगेश पुरी ने प्रभु श्रीराम, माता सीता सहित अन्य स्वरूपों को मेवा-मिष्ठान खिलाकर मंगल तिलक किया और श्री राम वरयात्रा को जनकपुर के लिए प्रस्थान कराया। मठ प्रशासक हरिहर पुरी सभी बारातियों और श्रद्धालुओं को साथ लेकर शमशाबाद की ओर बढ़े। श्री राम वरयात्रा के आगे बढ़ने के साथ ही जय श्रीराम के उद्घोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती की थालियां सजाकर प्रभु के दर्शन किए। पुष्पवर्षा के बीच श्री राम वरयात्रा का स्वागत किसी भव्य राजकीय विवाह समारोह से कम नहीं दिखाई दिया। श्रद्धालुओं के चेहरों पर उल्लास और आंखों में प्रभु के दर्शन की आस्था साफ झलक रही थी।

50 से अधिक झांकियों ने प्रस्तुत की भारत की सांस्कृतिक विविधता
श्री राम वरयात्रा में 50 से अधिक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित इन झांकियों ने भारतीय परंपराओं, धार्मिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। विभिन्न प्रदेशों की सांस्कृतिक और धार्मिक झलक प्रस्तुत करती झांकियों में असम, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की झांकियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया।
श्री राम वरयात्रा का स्वरूप केवल धार्मिक शोभायात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह विविधता में एकता और सनातन संस्कृति की व्यापकता का उत्सव बन गया।
श्री राम वरयात्रा में ग्रामीण बालिकाओं द्वारा नवदेवियों के स्वरूप धारण करना विशेष आकर्षण रहा। नौ देवियों के रूप में सजी बालिकाओं ने शक्ति, श्रद्धा और नारी सम्मान का संदेश दिया।
पुष्पवर्षा और आरती से हुआ स्वागत, हर घर बना उत्सव का साक्षी
शमशाबाद की ओर बढ़ती श्री राम वरयात्रा के स्वागत में ग्रामीण क्षेत्र का हर घर उत्सव की रोशनी से जगमगा उठा। घरों के द्वार पर रंगोलियां बनाई गईं, बंदनवार सजाए गए और बिजली की रंग-बिरंगी झालरों से गलियों तथा मकानों को रोशन किया गया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा क्षेत्र प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाहोत्सव के लिए दुल्हन की तरह सज गया हो।
मार्ग में सैकड़ों स्थानों पर श्रद्धालुओं और स्थानीय परिवारों ने रामबारात का भव्य स्वागत किया। कहीं पुष्पवर्षा हुई, कहीं आरती उतारी गई, तो कहीं श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर प्रभु के दर्शन किए।
शुक्रवार सुबह 11 बजे जनक महल में होगा तुलसी-शालिग्राम विवाह
श्री मनःकामेश्वर मठ के प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि शुक्रवार को सुबह 11 बजे शमशाबाद स्थित शिव वाटिका में निर्मित जनक महल में तुलसी-शालिग्राम विवाह का भव्य आयोजन किया जाएगा। इसके लिए जनकपुर के स्वरूप में सजाए गए परिसर में धार्मिक परंपराओं के अनुरूप विवाह की तैयारियां की गई हैं। उन्होंने बताया कि श्री राम वरयात्रा को पहली बार लगभग आठ किलोमीटर की यात्रा कर शमशाबाद लाने का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में रामकथा की परंपरा को विस्तार देना और अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति से जोड़ना है।
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