रामलीला महोत्सव-2026 : स्वर्ण लंका में लगी आग, रामलीला मैदान में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे
Pragya News 24
Thu, Oct 15, 2026
आगराः “प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥” सुंदरकांड की यह चौपाई गुरुवार को श्रीरामलीला मैदान में हनुमान जी के अद्भुत पराक्रम और प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति का सजीव चित्रण करती नजर आई। बजरंगबली ने लंका पहुंचकर माता सीता का पता लगाया, अशोक वाटिका उजाड़ी और रावण की स्वर्णनगरी को अग्नि के हवाले कर उसके अहंकार को चुनौती दी। तीन मंजिला ऊंची सोने की लंका धू-धू कर जली तो पूरा मैदान जय श्रीराम और बजरंगबली के जयघोष से गूंज उठा।
उत्तर भारत की प्रमुख श्रीरामलीला में इस बार लंका दहन की लीला को भव्य स्वरूप दिया गया। रामलीला मैदान में बनाई गई तीन मंजिला स्वर्ण लंका दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रही। लंका के द्वार पर बनाए गए दो विशाल द्वारपालों के पुतलों ने भी इसकी भव्यता बढ़ाई। मैदान में पहुंचते ही दर्शक लंका को नजदीक से देखने के लिए उत्सुक नजर आए। वहीं, अशोक वाटिका में विराजमान माता जानकी के स्वरूप ने भी श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। रामलीला के भव्य आयोजन में सामाजिक संगठनों की बढ़ती सहभागिता भी विशेष आकर्षण बनी हुई है।
समुद्र लांघकर माता जानकी की खोज में पहुंचे पवनपुत्र
लीला का आरंभ समुद्र तट पर पहुंची श्रीराम की वानर सेना के प्रसंग से हुआ। जामवंत और सुग्रीव द्वारा हनुमान जी को उनकी अपार शक्ति का स्मरण कराने पर पवनपुत्र प्रभु श्रीराम का नाम लेकर समुद्र लांघने के लिए उड़ चले। लंका पहुंचकर उन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता को खोज लिया। प्रभु श्रीराम की मुद्रिका देकर उन्होंने माता जानकी को विश्वास दिलाया कि वे श्रीराम के दूत हैं और शीघ्र ही प्रभु उन्हें रावण के बंधन से मुक्त कराने आएंगे।

इसके बाद हनुमान जी ने अशोक वाटिका में फल खाए और वृक्षों को उजाड़कर रावण की सेना को चुनौती दी। राक्षसों के साथ युद्ध, हनुमान जी को बंदी बनाकर रावण के दरबार में प्रस्तुत करने और उनकी पूंछ में आग लगाने के प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। रावण के आदेश पर हनुमान जी की पूंछ में आग लगाई गई, लेकिन यही अग्नि उसकी स्वर्णनगरी के विनाश का कारण बन गई।
एक ही क्षण में जल उठी सोने की लंका
पूंछ में लगी आग को बजरंगबली ने अपनी शक्ति और बुद्धिमत्ता से रावण के अहंकार के विरुद्ध अस्त्र बना लिया। देखते ही देखते वे लंका के एक भवन से दूसरे भवन तक पहुंचे और पूरी स्वर्णनगरी आग की लपटों से घिर गई। तीन मंजिला भव्य लंका के साथ उसके द्वार पर बने दोनों द्वारपालों के पुतले भी जल उठे। अग्नि की लपटों और भव्य दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

लंका दहन होते ही मैदान में बैंड-बाजों की उत्साहित धुन गूंजने लगी। दर्शकों ने खड़े होकर बजरंगबली और प्रभु श्रीराम के जयकारे लगाए। वातावरण भक्तिमय हो उठा और हर ओर श्रीराम के नाम का उद्घोष सुनाई देने लगा।
इस प्रसंग के साथ गोस्वामी तुलसीदास की चौपाई व्यासपीठ से सुनाई गई— “लंका जारि असुर दल मारे। रामचंद के काज संवारे॥” इसके साथ ही सुंदरकांड की चौपाइयों ने लीला के आध्यात्मिक संदेश को और प्रभावशाली बनाया।
एलईडी स्क्रीन पर भी दिखा भव्य मंचन
रामलीला मैदान में बने मुख्य मंच के साथ दोनों ओर लगाई गईं एलईडी स्क्रीन पर भी लीला का प्रसारण किया गया। इससे दूर बैठे दर्शक भी प्रत्येक प्रसंग को स्पष्ट रूप से देख सके। भव्य सज्जा, अशोक वाटिका और तीन मंजिला स्वर्ण लंका ने आयोजन की आकर्षक छवि प्रस्तुत की।
इन्होंने उतारी स्वरूपों की आरती
भारत विकास परिषद संस्कार, अग्रवाल संगठन कमला नगर, श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी और आगरा फार्मा द्वारा स्वरूपों की आरती उतारी गई।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर रामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, मुख्य संरक्षक जगदीश बागला, अजय अग्रवाल बीएन ग्रुप, ताराचंद, प्रवीण स्वरूप, भगवानदास बंसल, मुकेश जौहरी, अंजुल बंसल, विष्णु दयाल, राहुल गौतम, आनंद मंगल, राकेश जैन, दिलीप अग्रवाल, रामांशु शर्मा, विकास, प्रकाश चंद्र, गिरधर शरण, तपिश, मनोज अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
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