: राधा नाचे-कृष्ण नाचे, नाचे गोपी संग, मन मेरो बन गयो सखी री पावन वृन्दावन
Sat, Oct 21, 2023
आगरा। जिस महारास में योगेश्वर संग काम को अपने नेत्र से भस्म करने वाली शिव शंकर ता-ता थैया कर रहे हो वहां भला काम-वासना कैसे हो सकती है। महारास काम विजय क्रीड़ा है। जहां योगेश्वर श्रीकृष्ण ने काम का मान मर्दन किया है। महारास पूर्णिमा और रात के ऐसे समय में हुआ जब काम सर्वाधिक बलशाली होता है। पूर्णिमा पर मन के देवता चंद्रमा शक्तिशाली तो काम अधिक उद्दीप्त होता है। ऐसी परिस्थिति में भी कामदेव श्रीहरि को नहीं हरा पाया। योगेश्वर के चित्त पर पर कोई विकार पैदा नहीं कर पाया। तब कामदेव ने श्रीकृष्ण की स्तुति की और अच्युत नाम दिया। जिसका अर्थ है अविनाशी, जिसके चित्त पर किसी का प्रभाव न पड़े।
फतेहाबाद रोड स्थित राज देवम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज व्यासपीठापार्य डॉ. श्यामसुन्दर पाराशर में महारास का वर्णन करते हुए कहा महारास वो परमानन्द है जिसमें हर किसी का प्रवेश सम्भव नहीं। वस्त्र हरण प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि 6 वर्ष की उम्र में श्रीकृष्ण ने जीवात्मा रूपी गोपिया के ऊपर चढ़े, माया रूपी वस्त्रों का आवरण हटाने के लिए यह लीला रची। परन्तु अज्ञानवश लोग वस्त्र हरण व महारास को काम-वासना से जड़ते हैं। महारास में मायारूपी आवरण के साथ प्रवेश नहीं का जा सकता। महारास में प्रवेश पाने के लिए सात सीढ़ियों को पार करना होता है।
पहली सीढ़ी भक्तमुख से श्रीमद्बागवत कथा का श्रवण, नवधा भक्ति का आचरण, सद् गुरु का वरण, विरक्ति, शरीर व संसार से मोह त्याग, दिव्य रास मण्डप का मन में भाव तब कहीं सातवीं सीढ़ी पर महारास में प्रवेश मिलता है। किन्तु परन्तु से ऊपर की लीला है महारास। महारास के वर्णन के साथ राधा नाचे, कृष्ण नाचे, नाचे गोपी संग, मन मेरो बन गया री सखी पावन वृन्दावन…, रास रचौ है, रास रचौ है, गोपिन के संग कान्हा रास रचौ है… जैसी भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में खूब झूमें।
कंस वध पर कृष्ण कन्हैया के जयकारों से गूंजा कथा पंडाल
कुबड़ी का उद्धार और तमाम दैत्यों के वध के बाद कंस वध होने पर कृष्ण कन्हैया और बांके बिहारी के जयकारों से कथा पंडाल गूंज उठा। आकाश से देवता श्रीहरि के पर पुष्प वर्षा करने लगे। उज्जैन अवन्तिकापुरी में भगवान शिक्षा ग्रहण करने गए। भगवान को ज्ञानी प्रिय हैं, अभिमानी नहीं। ज्ञानी अभिमानी न बने यह बहुत मुश्किल है। उद्धव जी के ज्ञान पर लगी अभिमान की जंग को वृन्दावन श्रीहरि की भक्ति में डूबी गोपियों के पास भेजकर हटाया। श्रीकृष्ण परमतत्व है। जिसमें सभी रस समाहित है। अलौकिक वृन्दावन के दर्शन चर्म चक्षुओं से नहीं किए जा सकते। दिव्य वृन्दावन के दर्शन के लिए श्रीकृष्ण ने उद्धव को दिव्य दृष्टि दी।
श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह के उत्सव में श्रीकृष्ण व रादा बनकर पहुंचे स्वरूपों का विधि विधान से पूजन किया गया। संतोष शर्मा व उनकी धर्मपत्नी ललिता शर्मा ने आरती कर सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से सांसद रामशंकर कठेरिया, रामसकल गुर्जर, विधायक छोटेलाल वर्मा, अध्यक्ष जिला पंचायत मंजू भदौरिया, आननंद शर्मा, मनीष थापा, मनीष शर्मा, विवेक उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।
नेत्र रोग शिविर में हुआ 300 लोगों की परीक्षण
श्रीमद्भागवत कथा में सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक नि:शुल्क नेत्र रोग शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 300 से अधिक लोगों का परीक्षण एसएन मेडिकल कालेज के वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा किया गया। 125 लोगों को निशुल्क चश्मा वितरण व 50 लोगों का चयन मोतियाबिंद ऑपरेशन के लिए किया गया।
: कोपभवन सुनि सकुचेउ राऊ, भय बस अगहुइ परइ न पाऊ
Fri, Oct 20, 2023
श्रीमनःकामेश्वर बाल विद्यालय, दिगनेर में चल रहे श्रीराम लीला महोत्सव में सीता जी की विदाई के बाद हुई कोपभवन लीला
कन्यादान के गूंजे गीत, कैकई− मंथरा और कैकई− दशरथ संवाद सुन श्रद्धालु हुए भावुक
आगरा। उत्साह, उमंग के साथ सीता जी का कन्यादान हुआ और अपने प्रिय पुत्र श्रीराम की वधू सहित अन्य पुत्रों का माता कौशल्या, सुमित्रा और कैकई ने अयोध्या नगरी आगमन पर स्वागत हृदय लगाकर किया किंतु आनंद के इन क्षणाें को जब मंथरा के शब्दों ने भेदा तो जैसे हर श्रद्धालु का हृदय द्रवित हो उठा। इसके बाद हाय कैकई ये तू क्या करने जा रही है….जैसे शब्द हर किसी की जिव्हा पर आ गए। कोप भवन लीला में एक पिता और पति राजा दशरथ जब भाव युद्ध में फंसे तो हर आंख भर आई। सभी भक्त बोल उठे, अरे अभी तो विवाह की उमंग बिसराई भी न गई थी, ये क्या घड़ी आई।
गढ़ी ईश्वरा, ग्राम दिगनेर, शमशाबाद रोड स्थित श्रीमनः कामेश्वर बाल विद्यालय में चल रहे बाबा मनःकामेश्वरनाथ रामलीला महोत्सव के छठवें दिन राम विवाह, कन्यादान, कैकई मंथरा संवाद, कैकई− राजा दशरथ संवाद लीला का मंचन किया गया। श्रीमहंत योगेश पुरी और मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने स्वरूपों की आरती उतारी। लीला मंचन में जब भगवान राम को अयोध्या का राज देने की चर्चाएं आईं तो रानी कैकई को उसकी दासी मंथरा ने भड़का दिया। मंथरा के बहकावे में आकर कैकई कोप भवन में चली जाती है। कोप भवन का नाम सुनकर ही राजा दशरथ सहम जाते हैं। कैकई राजा दशरथ से राम को वनवास और भरत को राजगद्दी के वर मांगती है। राजा दशरथ विनती करते हैं कि राम को वनवास देने का वर मत मांगों। किंतु कैकई कहती है कि ठीक है राजन अपने वचन से मुकर जाओ। राजा दशरथ कहते हैं रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाएं पर वचन न जाई…। इसी प्रसंग के साथ जब लीला का समापन होता है तो हर श्रद्धालु का हृदय व्याकुल हो उठता है।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि शनिवार को राम वनवास, केवट संवाद, दशरथ मरण और भरत आगमन लीला होगी।
: राम सरिस बरु दुलहिनि सीता, समधी दसरथु जनकु पुनीता…. मिथिला नगरी बना दिगनेर, निकली राम बारात
Fri, Oct 20, 2023
श्रीमनःकामेश्वर बाल विद्यालय, दिगनेर में चल रहे श्रीराम लीला महोत्सव में निकाली गयी भव्य राम बारात
पंचम दिन निकाली गई श्रीराम बारात में उमड़ा जनसैलाब, गांव की हर गली में गूंजे जय श्रीराम के जयघोष
राम बारात शाेभायात्रा में स्थानीय बालिकाओं ने निकाली नौ देवियों की झांकी, बलइयां लेने को महिलाएं में दिखा उत्साह
आगरा। जब बारात निकली तो सारे मंगल शगुन होने लगे। मंगलमय, कल्याणमय और मनोवांछित फल देने वाले शगुन मानो सच्चे होने के लिए एक ही साथ हो गए। जहां श्री रामचंद्र दूल्हा और सीता जी दुल्हन बनी हैं। राजा दशरथ और राजा जनक जैसे पवित्र समधी हैं, ये दिव्य ब्याह सुनकर मानो सभी शगुन नाच उठे।
इसी तरह के शुभ शगुनों के साथ गुरुवार को माता सीता को ब्याहने जब प्रभु राम अपने भाइयों के साथ चले तो मानो पूरा दिगनेर गांव से लेकर आगरा शहर तक साथ हो लिया। गढ़ी ईश्वरा, ग्राम दिगनेर, शमशाबाद रोड स्थित श्रीमनः कामेश्वर बाल विद्यालय में चल रहे बाबा मनःकामेश्वरनाथ रामलीला महोत्सव के पंचम दिन राम बारात निकाली गई।
श्रीमनः कामेश्वर मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि राम बारात शोभायात्रा प्रारंभ से पहले श्री हनुमान चालीसा का पाठ मंचन स्थल पर किया गया। प्रभु श्रीराम अपने भाइयों के साथ गुरू समाधि स्थान पर गिरिराज महाराज के दर्शन किए। तत्पश्चात् गोधूली बेला में श्री महंत योगेश पुरी जी ने चारों भाइयों की आरता कर श्वेत अश्वों पर विराजमान कराया।
वरयात्रा में सबसे आगे ऊंटों पर ध्वजा धारण करें सवार थे और उनके पीछे ढोल ताशों की गूंज के साथ गणेश जी की झांकी थी। दूसरी झांकी में मां भगवती का दर्शन व गांव की नौ कन्याएं देवी स्वरूप में रथ पर थीं। आगे− आगे दिगनेर गांव के युवा गाड़ी सजाकर भजन गाते हुए चल रहे थे।
सबसे आख़िर में बैन्ड की मधुर धुन में घोड़ों पर सवार गुरू वशिष्ठ स्वरूप में श्री महंत योगेश पुरी जी घोड़े पर सवार चारों भाइयों को लेकर बाबा मनःकामेश्वरनाथ जी की झांकी के साथ चल रहे थे।
श्रीराम की जय के उद्घोष से गूंज उठा दिगनेर
ग्रामीण क्षेत्र दिगनेर में पहली राम बारात निकाली जा रही थी। स्थानीय युवाओं का उत्साह अपने चरम पर था। युवाओं की टोली आगे बढ़कर वरयात्रा की व्यवस्थाएं संभाल रही थी। हर ओर से बस जय श्रीराम के जय घाेष लग रहे थे। वहीं महिलाएं वरयात्रा में शामिल होने केलिए विशेष रूप से श्रंगारित होकर पहुंची। बारात के साथ चलते हुए शगुन के गीत गाती महिलाएं यूं लग रही थीं मानों अपने पुत्र के विवाह की उमंग से उमंगित हैं।
द्वार− द्वार हुआ वरयात्रा का स्वागत
दिगनेर क्षेत्र में राम बारात की अगवानी करने के लिए मानो होड़ सी लग गयी थी। पुष्पों की वर्षा से पूरा मार्ग पट गया था तो द्वार− द्वार वरयात्रा की आरती उतारी जा रही थी।
गूंजे ये भक्तिमय गीत
वरयात्रा के साथ चल रहे बैंड बाजों पर राम जी की निकली सवारी…, चली राम जी की बारात जनकपुरी मे…जैसे गीत बैंड बाजों पर बज रहे थे। जो जहां था वो वहीं झूम रहा था।
https://youtu.be/W5IE60qAcJQ