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: बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र संग सज-धज कर राजाधिराज भेष में नगर भ्रमण को निकले श्रीजगन्नाथ

Pragya News 24

Fri, Jun 27, 2025
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  • बल्केश्वर महालक्ष्मी मंदिर से प्रारम्भ हुई श्रीजगन्नाथ रथयात्रा
  • नंदीघोष रथ पर सवार हो भक्तों को दर्शन देने निकले श्रीजगन्नाथ भगवान
  • श्रीजगन्नाथ जी के रथ की रस्सी खींचने की भक्तों में लगी होड़
  • जगह-जगह थाल सजाए आरती की प्रतीक्षा में दिखे भक्तजन, पुष्प वर्षा कर हुआ स्वागत

आगरा। गले में बैजयन्ती माला और सिर पर सुशोभित सतरंगी पगड़ी। रथ की आकृति और जरी के तार, सितारों से सजे नीले परिधान में सज संवरकर बहन सुभद्रा व भाई बलभद्र संग आज भगवान जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकले। शंखनाद के साथ जैसे ही रथ पर विराजमान भगवान के पट खुले हर ओर हरिबोल के जयकारों संग हजारों भक्त हाथ ऊपर कर नाचने झूमने लगे। मंजीरे और मृदंग पर हरे राम हरे कृष्णा… कीर्तन पर नृत्य करने लगे। हर तरफ सिर्फ परमानांद, श्रद्धा और भक्ति की गंगा बहती नजर रही थी। भगवान के अलौकिक रूप को भक्त एकटक निगाह से निहारते रहे। कहीं सड़क पर दण्डवत प्रणाम करते श्रद्धालु तो कहीं रस्सी को मात्र छू लेने की होड। कहीं भक्तों के हाथ झाड़ू लगाकर श्रीहरि के मार्ग स्वच्छ करते तो कहीं श्रीहरि की भक्ति में झूमते। कहीं श्रद्धालु अपने भगवान की राह में झाड़ू लगाते तो कहीं सतरंगी रंगोली सजाते। रंग भक्ति के, गीत भक्ति के, भाव भक्ति के, मन भक्तिमय, नृत्य भक्तिमय, जो था सब भक्ति में डूबा था।

प्रथम आरती वृन्दावन इस्कॉन के हरिविजय प्रभु व आगरा इस्कॉन के अध्यक्ष अरविद प्रभु ने कर रथयात्रा का शुभारम्भ किया। भक्त अपने हाथों से रथ की रस्सी को नाचते गाते खींचते हुए क्षेत्र में भ्रमण कराते हुए मंदिर तक लेकर गए। जहां भगवान की भव्य आरती कर रथयात्रा का स्वागत किया गया। रथयात्रा के रास्ते में लोग अपने घरों व प्रतिष्ठानों से निकलकर भगवान के रथ को रस्सी को मात्र स्पर्श करने के लिए उत्साहित दिखे। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ की रस्सी को खींचने से मनुष्य जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है। रथ को खींचने के लिए भक्त अधिक और रस्सी छोटी थी। जगह-जगह रथयात्रा का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। जगह जगह लोग थाल सजाए श्रीहरि की आरती के लिए इंतजार कर रहे थे। प्रतिष्ठानों और घर के अंदर बैठे लोग भी श्रीहरि के दर्शन के लिए शीश झुकाए इंतजार में खड़े थे।

केन्द्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने भी लगाई रथयात्रा मार्ग में झाड़ू
केन्द्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने भी रथयात्रा मार्ग में झाड़ू लगाई। कहा कि जो लोग आर्थिक कारणों से पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में शामिल नहीं हो सकते, वह अपने शहर में ही रथयात्रा में शामिल होने का पुण्य कमा सकते हैं। मेरा भी सौभाग्य है कि मुझे यहां सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ। आगरा शहर में रथयात्रा का आयोजन शहरवासियों के लिए सौभाग्य की बात है। इस अवसर पर मुख्य रूप से नितेश अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, आशु मित्तल, नवीन सिंघल, संजय कुकरैजा, अनूप अग्रवाल, रमेश यादव, दिनेश अग्रवाल, शैलेश बंसल, विभु सिंघल, राजेश उपाध्याय, ओमप्रकाश अग्रवाल, मनोज अग्रवाल, राजीव मल्होत्रा, प्रदीप बंसल, सूरज, शाश्वत नंदलाल, ज्योति बंसल आदि उपस्थित थे।

प्रभुपाद जी और चैतन्यमहाप्रभु की झांकी भी रही आकर्षण का केन्द्र
घोड़ों और ऊंट की अगुवाई में दर्जनों ध्वजों के साथ रथयात्रा का शुभारम्भ हुआ। रथयात्रा में बैंडबाजों संग प्रभुपाद जी, राधा कृष्ण और चैतन्यमहाप्रभु की झांकी भी आकर्षक का केन्द्र रही। रथ पर नाचते मोरो संग विराजमान राधा-कृष्ण की झांकी देख हर कोई भाव विभोर हो उठा। रथयात्रा के उत्सव में महिलाएं गोपी ड्रेस में तो पुरुष ग्वाला ड्रेस में सज संवर कर पहुंचे। हर भक्त के माथे पर तिलक और गले में तुलसी की माला सजी थी। कुछ भक्तजन को अपने घर के लड्डू गोपाल जी को भी सजा धजा कर रथयात्रा में लेकर आए। ढोल, मृदंग और मंजीरों के हरे राम-हरे कृष्णा… संकीर्तन पर झूमते गाते श्रद्धालुओं ने हर्ष उल्लास के साथ मनाया रथयात्रा महोत्सव।

वृन्दावन के चंदुआ श्रंगार और राजपूताना भेष में सज-धज कर निकले श्रीहरि
वृन्दावन इस्कॉन मंदिर के माधव प्रभु ने भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा व भाई बलभद्रा का वृन्दावन का चंदुआ श्रंगार किया। नाथद्वारा के कारीगरों द्वारा तैयार जर्किन और स्वर्ण तारों से सजी नीली पोशान श्रीहरि के आसमान की तरह अनन्त रूप को प्रदर्शित कर रही थी। तीनों भगवानों का पूरा श्रंगार लगभग 25 किलो का था। सिर पर पगड़ी और बाका मुकुट में राजपूताना भेष के दर्शन की एक झलक पाने को हर भक्त व्याकुल दिखा। श्रंगार में श्रीहरि के प्रिय पुष्प कदम्ब, बैजयन्ती, मालती, मोगरा जैसे पुष्पों का विशेष प्रयोग किया गया। एंथोरियम, अमेरिकन गुलाब, बेला जैसे पांच कुंतल फूलों से भगवान के 25 फीट ऊंचे को रथ को सजाया गया।

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