: “ रामराज अभिषेक सुनि हिय हरषे नर नारि। लगे सुमंगल सजन सब विधि अनुकूल विचारि॥”
Pragya News 24
Sat, Oct 4, 2025
- बाबा श्री मनकामेश्वर रामलीला महोत्सव में प्रभु श्री राम राज्याभिषेक का हुआ भव्य दिव्य मंचन
- जय जय श्री राम के उद्घोष से गूंजा रामलीला पंडाल, भक्तों ने भी गाए बधाई गीत
आगरा। गढ़ी ईश्वरा, दिगनेर, शमशाबाद रोड में चल रहे बाबा श्री मनकामेश्वर रामलीला महोत्सव में शुक्रवार को प्रभु श्री राम राज्याभिषेक का मंचन अत्यंत भव्य और दिव्य रहा। इस दिन की प्रमुख झांकियाँ और प्रसंग प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक की खबर सुनकर अयोध्या के सभी स्त्री पुरुष आनंदित होते और उन्होंने अपने अनुकूल समझ कर सुंदर साज सजाने लगे। जिनसे पूरा पंडाल प्रभु श्री राम की जय जयकार और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।लंका में दशानन दहन के उपरांत अयोध्या वापसी पर अयोध्या नगरी के लोगों ने प्रभु श्री राम जी का माता जानकी के साथ भव्य रूप से स्वागत किया। मंचन की शुरुआत भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण के पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन के दृश्य से हुई । अयोध्या के नर नारी जय जयकार करते हुए आरती उतार कर उनका स्वागत करते हैं और पूरा वातावरण जयकारों से गूंज उठता है। शुभ मुहूर्त में गुरु वशिष्ठ ने श्री राम जी का राजतिलक कर राज्याभिषेक संपन्न कराया। इस अवसर पर देवताओं ने पुष्प वर्षा कर मंगल गीत गए और अवध नगरी का उत्साह उमंग देखते ही बन रहा था। "रामराज अभिषेक सुनि हिय हरषे नर नारि।लगे सुमंगल सजन सब विधि अनुकूल विचारि।।" प्रभु श्री राम जी के राज्याभिषेक की लीला आज के समय भी लोगों को यह संदेश देती है की मर्यादा पालन के साथ जीवन में संघर्ष से लड़ते हुए अंत में विजय सत्य की होती है। यह प्रसंग दर्शकों के लिए प्रेरणादायी और आध्यात्मिक रहा। वृंदावन की किशोरी रास लीला मंडली के कलाकारों का जीवंत अभिनय सभी को मंत्रमुग्ध और भक्ति से ओतप्रोत कर दिया।
लीला प्रसंग की व्याख्या करते हुए श्री महंत योगेश पुरी ने कहा कि श्री रामचरितमानस और श्री राम जी का चरित्र कलिकाल में भी मानव जीवन के कल्याण के साथ-साथ मर्यादा के पालन की सीख देता है। प्रभु श्री राम जी ने मर्यादा पालन के लिए कई प्रकार के कष्टों को उठाते हुए माता-पिता की आज्ञा और गुरु आज्ञा को हमेशा सर्वोपरि रखा।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि लंका में दशानन दहन के बाद विजय प्राप्त करते हुए प्रभु श्री राम जी का अयोध्या आगमन सत्य की विजय का प्रेरक है। रामलीला का हर चरित्र और इसका मंचन आज भी हम सभी के लिए विषम परिस्थितियों से लड़ने और विजय श्री प्राप्त करने का एक नया संकल्प देता है। उन्होंने बताया कि लीला विश्राम गौशाला में सुस्वादु प्रसादी के साथ हुआ ।
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन