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: श्री मनःकामेश्वर धाम में गूंजी श्रद्धा की रजत गूंज, भव्य चाँदी द्वार का लोकार्पण

Pragya News 24

Thu, Jul 10, 2025
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  • शिव के पंच चिन्हों से सुसज्जित, चाँदी का दिव्य द्वार बना आस्था का प्रतीक
  • प्रदेश में सर्वप्रथम किसी मंदिर में लगा है भव्य रजत द्वार, जिसमें लगी हैं चाँदी की कीलें

आगरा। रावतपाड़ा स्थित, प्राचीन बाबा श्री मनःकामेश्वर नाथ महादेव मंदिर में, भक्तों की आस्था का प्रतीक बनकर, अब एक दिव्य और भव्य रजत द्वार स्थापित हो गया है। यह द्वार न केवल स्थापत्य का अनुपम उदाहरण है, बल्कि श्रद्धालुओं की भक्ति, सहभागिता और संकल्प की सामूहिक अभिव्यक्ति भी है।

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, महानगर आगरा के इतिहास में पहली बार, किसी भी मंदिर में, भरपूर श्रद्धा और भक्ति से निर्मित रजत द्वार का विधिवत पूजन और भव्य लोकार्पण किया गया। सर्वप्रथम गणपति पूजन एवं आरती, शटर पर स्वास्तिक पूजन इसके बाद द्वार पर सिंह पूजन एवं लोकार्पण हुआ। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु गद्दी जी पूजन संपन्न के पश्चात प्रसादी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बाबा श्री मनःकामेश्वर नाथ के भव्य फूल बंगला और छप्पन भोग दर्शन का लाभ भी भक्तों ने लिया।

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि इस ऐतिहासिक कार्य ने मंदिर की गरिमा और श्रद्धालुओं की भक्ति को एक नई ऊँचाई दी है। द्वार का निर्माण कार्य, 17 जून 2025 को प्रारंभ हुआ और 20 दिनों के अथक प्रयासों के बाद, आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (10 जुलाई 2025, संवत 2082) को यह पूर्ण हुआ। लगभग पौने 13 फीट लंबा और 12 फीट चौड़ा यह द्वार, कारीगरों की कला और भक्तों की भावना का सुंदर संगम है।

श्रीमहंत योगेश पुरी ने बताया कि यह द्वार बाबा की कृपा और भक्तों की निष्ठा का सजीव उदाहरण है। हर एक चाँदी का टुकड़ा (जो इसमें अर्पित हुआ है) श्रद्धा का प्रतीक है। हम चाहते थे कि बाबा श्री मनकामेश्वर के दरबार में आने वाला हर भक्त दिव्यता और आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव करे और यह रजत द्वार उसी भावना को प्रतिबिंबित करता है।

शिव के पंच चिन्हों से अलंकृत द्वार के दोनों पल्लों पर अत्यंत सुंदर नक्काशी की गई है, जिनमें फूल-पत्तियों के मध्य भगवान शिव के पंच चिन्ह - ओम, दो सर्प, सिंह मुख, त्रिशूल और डमरू अत्यंत कलात्मक रूप से उकेरे गए हैं। द्वार में कीलें भी चांदी की ही लगी हैं। यह द्वार अब श्रद्धालुओं के लिए एक नई आध्यात्मिक अनुभूति का प्रतीक बन चुका है।

भक्तों के सहयोग से हुआ निर्माण
रजत द्वार के निर्माण में, समाज के हर वर्ग के श्रद्धालुओं का सहयोग रहा। किसी ने 100 ग्राम तो किसी ने 1 किलो या उससे अधिक चाँदी समर्पित की।

मंदिर में चाँदी से हो रहे अन्य कार्य
हरिहर पुरी ने यह भी बताया कि रजत द्वार के उपरांत, अब मंदिर में बाबा के दरबार से जुड़े कपाट द्वार के बाद, बाबा की वेदी, 11 अखंड ज्योत, अर्धनारीश्वर भगवान का कमल पुष्प तथा बाबा का आवरण स्वरूप भी चाँदी से श्रृंगारित किया जाएगा।

सुरक्षा और स्मृति का प्रबंध
रजत द्वार के आगे स्टील शटर भी लगाया गया है जो रिमोट और स्विच दोनों से संचालित होता है। साथ ही द्वार के एक ओर रजत पट्टिका भी स्थापित की गई है, जिस पर -
निर्माण तिथि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा, संवत 2082 (10 जुलाई 2025)
श्री मन्मनः कामेश्वर विजयतेतराम
श्री मनकामेश्वर रजत द्वार श्री गुरु चरणों में समर्पित, तिलकायत श्री महंत श्री योगेश पुरी जी, मठ प्रशासक श्री हरिहर पुरी जी
उकेरा गया है।

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