: गृहस्थ जीवन की वास्तविक शिक्षा देते हैं भगवान महादेव और पार्वती, समर्पण भाव बनाता है पूजनीयः युवाचार्य अभिषेक
Pragya News 24
Fri, Mar 7, 2025
- श्रीबालाजी धाम आश्रम, दयालबाग में चल रही है सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा
- हिलोरे ले रही श्रीकृष्ण की भक्ति, युवा पीढ़ी जुड़ रही सनातन से
- युवाचार्य अभिषेक करा रहे भगवत प्राप्ति के लिए कथा का रसपान
आगरा। किसी भी परिवार की आदर्श गृहस्थी के लिए सर्वोत्तम शिक्षा प्रदान करते हैं महादेव और पार्वती जी। प्रेम, समर्पण, त्याग और धैर्य, ये चार स्तंभ गृहस्थी को मजबूती प्रदान करते हैं। गृहस्थ जीवन में रहकर संयमित आहार विहार के लिए अपने वचनों से प्रेरणा दी युवाचार्य अभिषेक ने।
दयालबाग स्थित श्रीबालाजी धाम आश्रम में सात दिवसीय दिव्य श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ चल रहा है। आयोजन के तृतीय दिवस कथा व्यास युवाचार्य अभिषेक ने कपिल मनु, ध्रुव एवं सती चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया।
मुख्य यजमान कुंती चौहान सहित दैनिक यजमान राजकुमार सक्सेना, अरुण गोस्वामी, रुचि अग्रवाल वंदना सिंह ने व्यास पूजन किया। अरविंद जी महाराज ने कथा श्रवण का महत्व बताते हुए कहा कि कथा श्रवण से मन, वचन और कर्म तीनों की शुद्धि होती है।
कथा व्यास अभिषेक ने श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान ज्ञान की महिमा के बारे में श्रद्धालु जनों को बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा में ही ऐसी शक्ति है, जो भटके हुए को रास्ता दिखाती है। जब बुद्धि भगवान में लग जाए अथवा भगवान बुध्दि का वरण कर लें, तो समझ लें कि मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति हो गई है। उन्होंने शुक्रवार के कथा प्रसंग में सुखदेव जी द्वारा राजा परीक्षित को विदुर जी और मैत्रेय जी के मिलन की कथा सुनायी गयी। जिसमें मैत्रेय मुनि के द्वारा कपिल भगवान और विभूति मैया के संवाद का सुंदर वर्णन किया गया। भगवान कपिल ने मैया विभूति को ज्ञान का उपदेश किया गया। इसके बाद चतुर्थ स्कंध में भगवान महादेव सती प्रसंग का वर्णन किया गया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान महादेव ऐसे देवता हैं जिनके पूरे परिवार की पूजा की जाती है। उनके पुत्र भी पूजे जाते हैं, उनकी पत्नी भी पूजी जाती हैं। भगवान महादेव का पूजन होता है ऐसे गृहस्थ भगवान महादेव हैं। महादेव की गृहस्थी में प्रेम है तो संयम भी है। समर्पण है तो त्याग भी है। यही चार स्तंभ परिवार को खुशहाल रखते हैं। बाल भक्त ध्रुव का चरित्र वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि जो मानसिकता बालपन से पड़ जाती है वो जीवनपर्यंत बनी रहती है। इसलिए बच्चों में संस्कारों के बीज रोपित करने अति आवश्यक हैं।

कथा के मध्य भजनों की अमृत वर्षा होती रही, जिसे सुन श्रद्धालु भाव विभाेर होकर नृत्य करते रहे। साथ ही शिव बारात भी निकाली गई, जिसमें भक्त जमकर झूमे। आरती और प्रसादी के साथ तृतीय दिवस कथा का समापन हुआ। मुकेश अग्रवाल नेचुरल, आदर्श नंदन गुप्त, पार्षद भरत शर्मा ने आरती की। प्रसादी सेवा पूनम अग्रवाल और पवन अग्रवाल की ओर से रही।
इस अवसर पर अनूप अग्रवाल, अवधेश पचौरी, एएन रायजादाा, राजकुमार, अशाेक सक्सेना, ललिता, नेहा, रेखा, सीमा, शशि, नम्रता, चित्रा, मृदुला,शालिनी आदि उपस्थित रहीं।
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