: बड़ी क्षति : नहीं रहे "असोपा तकनीक" के जनक ब्रज रत्न डॉ. एचएस असोपा
Fri, Nov 24, 2023
आगरा। दुनियां को "असोपा तकनीक" देने वाले ब्रज रत्न डॉ. एचएस असोपा का 91 वर्ष की आयु में बुधवार को निधन हो गया। डा. असोपा विश्व में सर्जरी के क्षेत्र में अपनी असोपा तकनीक के जनक के रूप में जाने जाते थे। डॉ. असोपा ने यह तकनीक जन्म से जननांगों में शिशु को होने वाली विकृति को सर्जरी के माध्यम से ठीक करने के लिए विकसित की, जो आज भी दुनियां भर में मेडिकल के छात्रों को सिखाई जाती है। डॉ असोपा का नाम इस तकनीक को विकसित करने के नोबल पुरस्कार के लिए भी नामित हुआ था।
डॉ. हरि शंकर असोपा ने एसएन मेडिकल कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और बाद में एमएलबी मेडिकल कॉलेज झाँसी में प्रोफेसर और सर्जरी विभाग के प्रमुख रहे। इसके बाद वह आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के अध्यक्ष रहे। उन्होंने शहर में असोपा हॉस्पिटल की स्थापना की, जहां निर्धन और मध्यम वर्ग के मरीजों का इलाज होता है।
जुलाई, 1932 में जन्मे डा असोपा का करियर शानदार रहा, उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से एमबीबीएस में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जिसमें उस समय आगरा, ग्वालियर और इंदौर मेडिकल कॉलेज शामिल थे। उन्होंने चांसलर मेडल सहित कई पदक प्राप्त किए और वर्ष 1964 में सर्जरी (आगरा), एफआरसीएस (इंग्लैंड), एफआरसीएस (एडिनबर्ग) में एमएस किया। वह एक प्रिय और सम्मानित शिक्षक रहे और उन्होंने प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षण के प्रति अपने जुनून को जारी रखा।
उन्होंने लड़कों में लिंग और मूत्रमार्ग के जन्मजात दोष हाइपोस्पेडिया के लिए एक चरण के ऑपरेशन का आविष्कार किया। प्रत्येक 250 - 300 लड़कों में से एक इस दोष के साथ पैदा होता है। अकेले भारत में लगभग चालीस हजार लड़के इस दोष के साथ पैदा होते हैं। यह शोध जून 1971 में जर्नल "इंटरनेशनल सर्जरी" में प्रकाशित हुआ था। असोपा ऑपरेशन के नाम से जानी जाने वाली यह तकनीक जल्द ही पूरी दुनिया में यूरोलॉजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, प्लास्टिक और जनरल सर्जन द्वारा की जाने लगी। असोपा प्रक्रिया को लेखों, अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं, अंतर्राष्ट्रीय संदर्भों और पाठ्यपुस्तकों में स्थान मिला।
वर्ष 1984 में उन्होंने हाइपोस्पेडिया के लिए एक और ऑपरेशन प्रकाशित किया, जिसका शीर्षक था "फोरस्किन ट्यूब का उपयोग करके हाइपोस्पेडिया की एक स्टेज मरम्मत" जो मूल असोपा ऑपरेशन का परिशोधन था। इसे "असोपा ऑपरेशन" कहा जाता है और बाद में पाठ्यपुस्तकों में इसे असोपा प्रक्रिया 1990 संस्करण के रूप में वर्णित किया गया।
डॉ. असोपा द्वारा 1990 के दशक के मध्य में स्ट्रिक्चर यूरेथ्रा के लिए आविष्कार किया गया एक ऑपरेशन, जो 2001 में एल्सेवियर साइंस इंक, फिलाडेल्फिया के जर्नल "यूरोलॉजी" में प्रकाशित हुआ था, दुनिया भर में यूरोलॉजिस्ट द्वारा सार्वभौमिक रूप से अपनाया जा रहा है। इसने यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर सर्जरी को करना आसान और सुरक्षित बना दिया। यह संदर्भ पुस्तकों और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में दिखाई देता है। इसे यूरोप और अमेरिका में रिकंस्ट्रक्टिव यूरोलॉजिस्ट के बीच "डोर्सल इनले यूरेथ्रोप्लास्टी" या "असोपा तकनीक" के रूप में लोकप्रिय बनाया गया है। दुनिया भर के कई विश्वविद्यालय इस तकनीक को एक प्रमुख तकनीक के रूप में मान्यता दे रहे हैं। वर्ष 2002 में "द अमेरिकन जर्नल ऑफ सर्जरी" में आविष्कार और प्रकाशित एक और ऑपरेशन ने अग्न्याशय के कैंसर के लिए अग्न्याशय की सर्जरी को सुरक्षित बना दिया।
डॉ. असोपा को कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में आमंत्रित किया जाता रहा। उन्हें साल 2018 में इनक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन द्वारा ब्रज के सर्वोच्च सम्मान ब्रज रत्न से अलंकृत किया यह सम्मान उन्हें उत्तराखण्ड के राज्यपाल रहते बेबीरानी मोर्य के हाथों प्राप्त हुआ था। उनके कई व्याख्यान और जटिल ऑपरेशन की फिल्में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और वेबसाइटों पर दिखाई जाती हैं। उन्होंने भारत और विदेशों में 50 से अधिक संस्थानों और प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशालाओं में इन ऑपरेशनों का प्रदर्शन किया। डॉ. असोपा को कई पुरस्कारों, सदस्यताओं और फ़ेलोशिप से भी सम्मानित किया गया, जिसमें वर्ष 1991 में कर्नल पंडालाई ओरेशन भी शामिल है, जो एसोसिएशन ऑफ़ सर्जन्स ऑफ़ इंडिया का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। उन्हें वर्ष 1996 में तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा "प्रख्यात मेडिकल मैन" के रूप में बीसी रॉय राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
डॉ. हरि शंकर असोपा के निधन की खबर मिलते ही लोगों के बीच शोक की लहर फैल गई। चिकित्सा जगत और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने अपनी-अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। जिनमें आईएमए के अध्यक्ष डॉ. मुकेश गोयल, महासचिव सचिव डॉ. पंकज नगाइच, डॉ. अशोक शर्मा, इनक्रेडिबल इंडिया फाउंडेशन के चेयरमैन पूरन डावर, महासचिव अजय शर्मा, संयोजक ब्रजेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार आदर्श नंदन गुप्ता आदि शामिल रहे।
: राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव का महाकुंभ 25 से, तीन सत्रों में होगा आयोजन
Fri, Nov 24, 2023
जीआइसी मैदान में 25 नवंबर से 3 दिसंबर तक अक्षरा साहित्य अकेदमी आयोजित कर रही राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन
साहित्य सेवियों के जमावड़े के मध्य किया जाएगा बाल साहित्यकार द्वारिकाप्रसाद माहेश्वरी जी की आत्मकथा का विमोचन
आयोजन में आएंगे उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक भी
आगरा। शब्द बोलते हैं, तभी हर पुस्तक कुछ न कुछ कहती है और जीवन को नवदिशा देती है। शब्दों को बुनकर पुस्तकों का रूप देने तक का सफर आसान नहीं होता, इसके पीछे गहन शोध, कल्पना और वास्तविकता का ताना बाना बुना होता है। इसी सीख को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से अक्षरा साहित्य अकादमी आगरा में पहली बार राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव का आयोजन करने जा रही है।
गुरुवार को एमजी रोड स्थित नागरी प्रचारिणी सभा में आयोजन के आमंत्रण पत्र का विमोचन किया गया। आमंत्रण पत्र विमोचन के मुख्य अतिथि सुशील गुप्ता, सुरेश चंद्र गर्ग और डॉ गिरधर शर्मा थे प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल के निदेशक व अप्साध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि वर्तमान समय में छात्रों का पुस्तकों के प्रति रूझान कम होता जा रहा है, जिसे बढ़ावा देने में पुस्तक मेला कारगर होगा।
कार्यक्रम संयोजक दीपक सरीन ने बताया कि पुस्तक मेला एवं साहित्य उत्सव 25 नवंबर से 3 दिसंबर तक पचकुइयां स्थित जीआइसी मैदान में आयोजित होगा। नौ दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन तीन सत्र बाल सत्र, साहित्यिक सत्र एवं सांस्कृतिक सत्र होंगे, जिनके अन्तर्गत 27 आयोजन किये जाएंगे। कार्यक्रम के उद्घाटन के लिए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने आने का आश्वासन दिया है। सुबह 10 बजे से रात्रि 9 बजे तक मेला का अवलोकन किया जा सकेगा।
अक्षरा साहित्य अकादमी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विनोद माहेश्वरी ने बताया कि पुस्तक मेला में प्रथम सत्र बाल साहित्य और साहित्यकारों को समर्पित होगा। जिसमें 1 दिसंबर को बच्चों के गांधी जी के नाम से प्रसिद्ध स्व. द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी जी की जयंती पर उनकी आत्मकथा का विमोचन एवं बाल कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
उपाध्यक्ष वत्सला प्रभाकर ने बताया कि इस राष्ट्रीय पुस्तक मेला एवम् राष्ट्रीय साहित्य उत्सव के माध्यम से सामाजिक सराकारों को रेखांकित करने एवं उन्नयन के लिए प्रयास किए जाएंगे।
कोषाध्यक्ष श्रुति सिन्हा ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य युवा पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ना है क्योंकि जो हम पढ़ते हैं वो देखने और सुनने से अधिक स्मृति में रहता है। क्या और कैसा साहित्य हम पढ़ रहे हैं ये हमारे व्यक्तित्व को दर्शाता है। इसलिए पुस्तक मेला में बाल साहित्य के साथ ही समाज को दिशा देने के लिए प्रसिद्ध हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत आदि भाषाओं की पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी।
सेंट एंड्रूज स्कूल के निदेशक डॉ गिरधर शर्मा ने कहा कि पुस्तक प्रेमियों के लिए स्वस्थ परंपरा का आगरा में आरंभ 2019 में हुआ था।
इस अवसर पर श्वेता अग्निहोत्री, शीला बहल, पैंसी थामस, प्रो चंद्रशेखर शर्मा, रामकुमार शुक्ला, रोहित कात्याल आदि उपस्थित रहे।
पुस्तक मेला का ये रहेगा मुख्य आकर्षण
25 नवंबर को उद्घाटन सत्र के बाद सायं सांस्कृतिक सत्र में संगीत कला केंद्र की प्रस्तुति रहेगी। प्रतिदिन सुबह के सत्र में अप्सा और नप्सा के स्कूल बच्चे प्रस्तुतियां देंगे।
26 नवंबर को स्वास्तिक हैंडराइटिंग रिसर्च सेंटर की ओर से हस्तलेखन एवं पोस्टर प्रतियोगिता होगी। सायं के सत्र में माधुर्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था की प्रस्तुति होगी।
27 नवंबर को आगरा महानगर लेखिका संघ का सत्र होगा और लता किशोर मैजिक गुनगुनाती जिंदगी की ओर से होगा।
28 नवंबर को सहज योग एवं सायकाल अनिल जैन द्वारा नुक्कड़ नाटक होगा। सितार की प्रस्तुति प्रो. लवली शर्मा एवं डीइआइ के छात्रों द्वारा संगीत की प्रस्तुति होगी।
29 नवंबर को महिला शांति सेना द्वारा घरेलू हिंसा कारण और निवारण पर चर्चा ओर सायं काल आथर्स गिल्ड इंडिया द्वारा सोशल मीडिया के दौर में पुस्तकों की उपयोगिता पर चिंतन मनन होगा एवं कवियत्रि सम्मेलन होगा।
30 नवंबर को साहित्य विमर्श एवं किरन लालवानी द्वारा फैशन रैंप शो होगा।
1 दिसंबर को द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी जी की स्मृति में बाल कवि सम्मेलन होगा। जिसमें उनकी आत्मकथा का विमोचन होगा।
2 दिसंबर के सभी सत्र व्यंग विद्या को समर्पित होंगे।
3 दिसंबर को पुलिस प्रशासन की चली कलम कार्यक्रम द्वितीय सत्र में होगा। आयोजन का समापन कवि सम्मेलन के साथ किया जाएगा।
: लाल जोड़े में कैसी शरमाई रे, मेरी तुलसी दुल्हन बन आई रे…
Thu, Nov 23, 2023
देवोत्थान एकादशी पर श्रीजगन्नाथ मंदिर में आयोजित किया तुलसी-सालिगराम विवाह महोत्सव
बैंड बाजों संग बारात लेकर तुलसी जी को ब्याहने पहुंचे सालिगराम
आगरा। बैंड बाजों के भक्तिमय संगीत संग श्रीहरि के स्वरूप सालिगराम जी रथ पर विराजमान होकर तुलसी जी को ब्याहने श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) पहुंचे। महाराजा अग्रसेन सेवा सदन से विधी विधान के साथ ढोल नगाड़ों व बैंड बाजों संग बारात निकली। झूमते गाते सैकड़ों बाराती (भक्त) सालिगराम जी की बारात में शामिल हुए, जगह-जगह पुष्प वर्षा कर बारातियों का स्वागत किया गया। सभी रीति रिवाज के साथ विवाह सम्पन्न हुआ।
श्रीजगन्नाथ मंदिर में आज सतरंगी फूलों से सालिगराम जी व तुलसी जी के विवाह के लिए मण्डप सजा था। बैंड बाजों और ढोल नगाड़ों संग इस्कॉन मंदिर पहुंची बारात का भव्य स्वागत किया गया। वर पक्ष (सालिगराम जी) के परिजन के रूप में रमेश यादव व प्रेमलता और तुलसी जी के परिजन के रूप में शैलेन्द्र अग्रवाल व स्वाति अग्रवाल मौजूद थे। कई भक्तों ने उपहार देकर तुलसी जी का कन्यादान लिया।
वृन्दावन से आए पंचतत्व प्रभु ने विवाह की सभी रस्मों को वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सम्पन्न कराया। श्रद्धालुओं ने विवाह की सभी रस्मों पर मंगल गीत गाए। लाल जोड़े में कैसी शरमाई रे, मेरी तुलसा दुल्हन बन आई रे… जैसे शगुन के गीतों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया। संध्या काल में तुलसी जी की विदाई की सभी रस्मों को सम्पन्न किया गया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से इस्कॉन मंदिर आगरा के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप दास, राहुल बंसल, अशु मित्तल, रमेश यादव, विकास बंसल, पंकज अग्रवाल, अशोक गोयल, कमल नयन, विमल नयन फतेहपुरिया, त्रिलोकचंद अग्रवाल, ओमप्रकाश अग्रवाल, विपिन अग्रवाल, राजीव मल्होत्रा, संजय कुकरेजा, राजीव गुप्ता आदि उपस्थित थे।