: पोएट्री लिखने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती, सही मार्गदर्शन मिले तो लिखना सीखा जा सकता है
Sun, May 12, 2024
आज शिरोस हैंगआउट कैफ में अमृता विध्या-एजुकेशन फॉर ईम्मोर्टलिटी और छांव फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित ‘‘इंग्लिश पोइट्रि अड्डा’’ का दूसरा सत्र सम्पन्न हुआ। पूर्व निर्धारित दिन, महीने के हर दूसरे शनिवार को आयोजित कार्यक्रम, का पहला सेशन 13 अप्रैल 2024 को ‘‘खंडेलवाल पोएटिक प्रोसैस’’ किताब के लॉंच से शुरू हुआ था। यह शुभारंभ डॉ एस पी सिंह, प्रिन्सिपल सैंट जॉन्स कॉलेज, जो प्रिन्सिपल बनने से पहले इंग्लिश के प्रोफेसर हैं। इंग्लिश पोएट्री अड्डा का संचालन राजीव खंडेलवाल के निर्देशन में किया जा रहा है।
सत्र की शुरुआत राजीव खंडेलवाल ने ‘इंट्रोड्यूसिंग पोएट्री फॉर बिगनर्स’ का पीपीटी प्रेजेंटेशन से किया। उन्होंने बताया के पोएट्री को ग्रीक में पोयाओ कहते हैं, इसका मतलब आई क्रिएट होता है। आप क्या क्रिएट करते हैं? आप पोइट्रि में पढ़ने वाले या सुनने वाले को शब्दों का समूह, जिसमें कल्पना (विचार), भावना (भाव) और कहानी प्रस्तुत करते हैं। उन्होनें कहा कि, बिगनर्स के मन में विचार आ सकता है, कि पोइट्रि लिखने से क्या होगा? समझते हुए उन्होंने कहा के अगर आप पोएट्री लिखने में प्रेरित होंगे तो आप की पर्सनालिटी में चार चीजों में सुधार आयेगा - 1. श्रवण करना 2. बोलना 3. पठन 4. लेखन। यह अच्छी पोएट्री लिखने के मूल जरूरत हैं।
इंग्लिश पोएट्री अड्डा में सहभागिता और प्रतिभागियों की भागीदारी उत्साहवर्धक थी । कुछ के पास कल्पना द्वारा लिखी कविता थीं , कुछ लिखना चाहते थे , उनको उत्सवर्धन और मार्गदर्शन की जरूरत थी । राजीव खंडेलवाल जो की इंजीनियर हैं, ने अपना उदाहरण देते हुए कहा के उन्होने कविता लिखना स्टेप बाइ स्टेप सीखा है। शुरुआत अल्फाबेट पोयम से करनी चाहिए - पहले A लें और A से शुरू कर कुछ लिखें , फिर B लें वर्णमाला के कुछ अल्फाबेट या अंत तक एक कविता का रूप ले लेगी। वो कथनात्मक या मुक्त छंद हो कर भी एक कविता का आकार ले लेगी।लिखी कविता में सुधार शब्दों के चयन और लिखने वाले की कल्पना से किया जा सकता है। नियमित अभ्यास से कविता लिखने में सुधार आयेगा।
कविता लिखने के अगले अभ्यास में अक्षरबद्ध कविता (Acrostic Poem) जैसे माँ (MOM) , पिता (DAD/Father), दोस्त का नाम आदि। उदाहरण के लिए MOM(माँ) के M से शुरू कर दूसरी लाईन O से शुरू करें फिर अंत में M से। यह कविता लिखना शुरू करने वाले के लिए अपने करीब और प्रिये के लिए व्यक्तिगत गिफ्ट होगा । राजीव खंडेलवाल को भरोसा है के इस तरहा के लेखन अनुभव, शुरुआती कविता लिखने वाले की कल्पना और विचारों को सुव्यवस्थित करेगा। इस के लिए उनके पास अभ्यास करने की पद्धति है, जो शब्दों के चयन करने और आगे लिखने में मदद करेगी ।
अनिल शर्मा - सेक्रेटरी अमृता विद्या - एजुकेशन फॉर इम्मोर्टालिटी का कहना है कि अभी तक दोनों सेशन बहुत उत्साहवर्धक रहे हैं। ऑफ लाइन सत्र के साथ ऑनलाइन सत्र आयोजित करने की मांग भी आयी है। हम संभावनाओं पर गौर कर रहे हैं और जल्दी ही शुरू करेंगे। हम ऑनलाइन सत्र के लिए फीस रखेंगे, जो छांव फाउंडेशन को देय होगी, हमारा मकसद एसिड अटैक पीडिताओं के विकास कार्य में सपोर्ट करना है ।
आशीष शुक्ला, डायरेक्टर छांव फाउंडेशन ने कहा कि कविता लिखना और पढ़ना सुकून के साथ विचार प्रक्रिया को व्यविस्थित करता है। हम देश के कई हिस्सों में एसिड अटैक पीडिताओं से मिल रहे हैं, उनको उनके घर से बाहर लाना चुनोतीपूर्ण है। पीडिताओं के बहुत से सपने थे, हम पूर्व रूप में लाने के लिए प्रयासरत हैं। पोएट्री सेशन, हमारी मैनेजमेंट टीम के लिए अनुभव से परे सोचने में मदद करेगा। हम चाहेंगे के इंग्लिश पोएट्री अड्डा का विस्तार देश और विदेश में हो।
प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सीख को साझा करते हुए बताया
सैंट पीटर्स कॉलेज के छात्र आहिल ने कहा के वो दूसरी बार आये हैं, उनको पढ़ने का शौक है, राजीव खंडेलवाल द्वारा स्टेप बाइ स्टेप एक्ससरसाइज करवा कर बहुत ही सरल तरीके से बता कर इंग्लिश पोइट्रि लिखने के लिए प्रेरित किया है। पहला सेशन में आने पर वो उत्साहित हुए और दूसरे को एट्ट्ण्ड करने के लिए बेसबरी से इंतजार कर रहे थे।
पोएट्री लिखने और सीखने की कोई उम्र नहीं होती, इस बात को साबित किया डॉ महेश शर्मा, डॉ वेद त्रिपाठी ने, पहली बार पोएट्री लिखने का प्रयास किया और माना के अगर कोई गाइड करे तो सीखा जा सकता है। युवा सहभागी अचिंत्य शर्मा, आशीष प्रसाद, प्रतीक राठौर, क्षैतिज सिंह और अंचित चैहान ने भी पहली बार कविता लिखने का प्रयास कर अपने आप को आनंदित महसूस किया। सब को प्रयासरत देख एसिड अटैक पीड़िताओं ने भी प्रयास किया।
आज के कार्यक्रम में असलम सलीमी, मधु भारद्वाज, सीमा खंडेलवाल, दीपक प्रहलाद अग्रवाल, रीता भट्टाचार्य, अनिल शुक्ला, नवाबुद्दीन, योगेश कौशल आदि उपस्थित रहे।
संचालन अनिल शर्मा ने किया और सारा अरेंजमेंट एसिड अटैक पीड़िताओं ने किया।
: संक्रमण से बचाव करते हुए क्षय रोग उन्मूलन में जुटी हैं नर्स
Sat, May 11, 2024
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मरीजों के स्वस्थ होने के सफर का बन रहे साथी
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फ्लोरेंस नाइटेंगल के पदचिन्हों पर चल कर रहे मरीजों की सेवा
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नर्स दिवस पर विशेष
आगरा। आमतौर पर लोग टीबी का नाम सुनते ही भयक्रांत हो जाते हैं। टीबी मरीजों के साथ भेदभाव करते हैं। स्टिग्मा डिस्क्रिमिनेशन का स्तर यह है कि पति अपनी पत्नी को छोड़ देता है लोग अपने प्रियजनों को छोड़ देते हैं, लेकिन इन विषम परिस्थितियों में एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी व चेस्ट डिपार्टमेंट के नर्स बिना किसी भयभ्रांति के संक्रमण से लड़ते हुए क्षय रोग उन्मूलन में योगदान दे रही हैं। यह नर्स दिन-रात मरीजों के बीच रहती हैं लेकिन उनके साथ कभी भी भेदभाव का रवैया नहीं अपनाती है। यह टीबी मरीजों की सेवा करती हैं टीबी मरीजों की स्वच्छता का विशेष ध्यान देती हैं। वार्ड की साफ सफाई से लेकर टीबी मरीज को स्नान करवाना, स्पंज बाथ देना पौष्टिक आहार का सेवन कराना, समय से नियमित दवाई का सेवन कराने आदि का विशेष ध्यान रखती हैं। 12 मई को फ्लोरेंस नाइटेंगल के जन्मदिन पर दुनियाभर में नर्स दिवस मनाया जाता है। फ्लोरेंस नाइटेंगल के पदचिन्हों पर चलकर मरीजों की सेवा कर रही हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट के स्टाफ नर्स 50 वर्षीय विनोद शर्मा बताते हैं कि उन्हें नर्सिंग के क्षेत्र में सेवा देते हुए 28 साल हो चुके हैं। वह अपने कैरियर में डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण वह डॉक्टर नहीं बन सके और स्टाफ नर्स बनना चुना। उन्होंने तमिलनाडु से नर्सिंग की पढ़ाई की। इसके बाद विभिन्न अस्पतालों में काम किया। वह विभिन्न स्थानों पर बतौर स्टाफ नर्स तैनात रहे। अब बीते दो साल से टीबी एंड चेस्ट वार्ड में कार्यरत हैं। उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रशांत गुप्ता द्वारा उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि उनके द्वारा मरीजों को उपचार देने क साथ उनका ढांढस भी बंधाया जाता है, हम मरीजों को बताते हैं कि आप सही ट्रीटमेंट लेने स्वस्थ हो सकते हैं। कई बार मरीज सीरियस होने पर अपनी हिम्मत छोड़ देते हैं, लेकिन हम उन्हें ट्रीटमेंट देने के साथ काउंसलिंग भी देते हैं, ज्यादातर मरीज अपनी बीमारी को हरा देते हैं।
उन्होंने बताया कि टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट में फीमेल टीबी वार्ड, मेल टीबी वार्ड, एमडीआर टीबी वार्ड, नॉन टीबी वार्ड हैं। नॉन टीबी वार्ड में ऐसे मरीजों को रखा जाता है, जिनकों टीबी नहीं होती है, वहीं एमडीआर टीबी वार्ड में एमडीआर टीबी मरीजों को रखा जाता है. वहीं फीमेल वार्ड में महिला मरीजों और मेल वार्ड में पुरुष मरीजों को एडमिट किया जाता है। विनोद बताते हैं टीबी ऐसा गंभीर रोग है, यदि इसका सही समय पर उपचार न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो जाता है। यह बच्चों से लेकर किसी भी उम्र वर्ग के लोगों को हो सकती है। गर्भवती महिलाओं को भी टीबी होने के मामले सामने आते हैं, उन्हें वार्ड में एडमिट किया जाता है। गर्भवती महिला मरीजों का और अधिक ध्यान रखना होता है। विनोद ने बताया कि कई बार मरीजों को खून की उल्टियां भी होती हैं, ऐसे में मरीजों की डॉक्टर द्वारा दिए गए परामर्श के अनुसार उपचार देने के साथ-साथ उनकी साफ-सफाई की जाती है। विनोद शर्मा ने कहा कि मुझे 28 साल मरीजों की सेवा करते हुए हो गए हैं। उन्हें मरीजों की सेवा करके काफी अच्छा लगता है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट डिपार्टमेंट में स्टाफ नर्स के पद पर तैनात 27 वर्षीय बबीता शर्मा ने बताया कि मैं बचपन से ही लोगों की सेवा करना चाहती थी, लोगों की मदद करना मुझे अच्छा लगता था। इसलिए मैंने नर्स बनने का प्रोफेशन चुना और मथुरा स्थित बीसीएस स्कूल ऑफ नर्सिंग से नर्सिंग की पढ़ाई की। इसके बाद एसएन मेडिकल कॉलेज में उनकी जॉब लग गई। उन्हें कोविड वॉरियर अवार्ड भी मिल चुका है। उन्होंने कहा कि यदि आप एक नर्स बनना चाहते हैं तो सबसे पहले आपके मन में सेवा करने का भाव होना चाहिए।
बबीता बताती हैं कि उन्हें मरीजों की सेवा करके एक अलग तरह की आत्मसंतुष्टि मिलती है। काम करते-करते मेरी शिफ्ट कब खत्म हो जाती है मुझे पता ही नहीं चलता। बबीता ने बताया कि स्टाफ नर्स होने के नाते वह मरीजों की केवल सेवा नहीं करती हैं, बल्कि मरीजों और तीमारदारों की काउंसलिंग भी करती है, जिससे कि मरीज उपचार कराए तो उनके मन में खुद को स्वस्थ करने के प्रति भावना जागृत हो और वह जल्दी स्वस्थ हों। इसके साथ ही वह तीमारदारों को भी मरीज का ध्यान रखने का प्रशिक्षण देती हैं। कई बार मरीज गंभीर स्थिति में वार्ड में एडमिट होते हैं। ऐसे में उनकी साफ-सफाई करना, उन्हें स्पॉन्ज बाथ देना जैसी चीजें सिखाते हैं। वह खुद मरीजों को स्पॉन्ज बाथ देती हैं।
संक्रमण से करना होता है बचाव
बबीता ने बताया कि नर्स होने के नाते उनका काम डॉक्टर द्वारा बताए गए सही ट्रीटमेंट को मरीज को देना और उनकी सेवा करना तो है ही, इसके साथ ही सबसे जरूरी है कि मरीजों की सेवा के साथ-साथ अपनी सुरक्षा करना। क्योंकि अस्पताल वह जगह है, जहां पर आपको विभिन्न प्रकार के संक्रमण से बचाव करना होत है। इसलिए हमें सबसे पहले सुरक्षा इंतजामों का ध्यान रखना होता है, जैसे- मास्क पहनना, ग्लब्स का उपयोग करना आदि। बबीता ने बताया कि टीबी एंड चेस्ट वार्ड में टीबी के मरीज भी आते हैं। पल्मोनरी टीबी का संक्रमण फैलता है, इसलिए वार्ड में मरीजों और अपनी सुरक्षा के मानकों का भी ध्यान रखना होता है।
बबीता ने बताया कि उनकी एक ढाई साल की बेटी है। वह ड्यूटी के बाद घर जाती हैं, ऐसे में उन्हें सुरक्षा का अधिक ध्यान रखना होता है। स्टाफ नर्स को अपने साथ-साथ अन्य अपने परिवार की सुरक्षा का ध्यान रखना होता है।
स्टेट टीबी टास्क फोर्स के चेयरमैन और एसएन मेडिकल कॉलेज में क्षय और वक्ष रोग विभाग के अध्यक्ष डा. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने के लिए सभी के प्रयासों की जरूरत है। क्षय और वक्ष रोग विभाग के नौ स्टाफ नर्स टीबी मरीजों को परिवार के सदस्यों की तरह सेवा कर रहे हैं, उनके मनोबल को बढ़ाते हैं, भावनात्मक सहयोग भी प्रदान करते हैं, काउंसलिंग के दौरान नर्स संक्रमण से बचाव के बारे में जानकारी देते हैं और यह भी बताते हैं एक बार तीन सप्ताह तक टीबी मरीज दवाई खा लेता है तो उसे संक्रमण का खतरा नहीं रहता है उन्होंने वर्ल्ड नर्स डे के अवसर पर सभी नर्स को बधाई दी है ।
: पुलिस को चकमा देकर ट्रैक्टर ट्रॉली सहित भागे खनन माफिया
Sat, May 11, 2024
Agra. मलपुरा थाना पुलिस इस समय सवालों के घेरे में है। खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने में लगी मलपुरा पुलिस को खनन माफिया बड़ी आसानी से चकमा दे गए और पुलिस के सामने से अवैध गिट्टी से भरे दो ट्रैक्टर-ट्राॅली लेकर चले गए।
पुलिस ने इस संबध में मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही शुरू कर दी है।
जगनेर मार्ग पर नगला हट्टी के समीप खनिज विभाग की टीम ने कागारौल की ओर से आते पांच ट्रैक्टर-ट्राॅली को रुकवा लिया। उनमें लाल गिट्टी भरी हुई थी। मामले की सूचना थाना मलपुरा पर दी। इस पर एक दरोगा समेत दो आरक्षी पहुंच गए। पुलिस गाड़ी से उतरी, इतने में दो ट्रैक्टर-ट्राॅली को चालक दौड़ा ले गए। सभी गाड़ियां ओवरलोड थीं। खनिज विभाग की टीम ने शोर मचाया लेकिन पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पाईं। अन्य तीन ट्रैक्टर-ट्राॅली को पुलिस थाने ले आई। उन्हें सीज कर दिया गया है।
मामले में खनिज मोहर्रिर कुंदन कुमार की तहरीर पर अभियोग दर्ज कर लिया है लेकिन यह पुलिस की कार्यशैली पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिरकार पुलिस के सामने से खनन माफिया कैसे अवैध खनन से भरी ट्रैक्टर ट्राली लेकर फरार हो गए।